Wednesday, June 5, 2024
कविताएं
मैडम सीतारमन ने संसद में यह था फरमाया देखो
लोगों की आए दोगुनी कर दी इसका बिगुल बजाया देखो
जिंदगी बहुत बेहतर बना दी दुनिया में नाम कमाया देखो
दस ट्रिलियन की तीसरी अर्थव्यवस्था इसे बताया देखो
पिछले दस साल की तरक्की की घंटी कमाल की बजी देखो
मुख्यधारा चाटुकार मीडिया ने भी छोड़ी नहीं कोई कमी देखो
बार बार झूठ की बहार जनता के एक हिस्से को जमी देखो
केंद्रीय रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर इन बातों को नहीं मान रहे
रघुराम राजन इन सभी दावों को बता झूठा बड़ा बखान रहे
आईएमएफ जैसी संस्थाएं भी बहुत से सवाल तान रहे
तरक्की में भी आत्म हत्याओं के आंकड़े कर परेशान रहे
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नई दुनिया - प्यार की दुनिया
नई दुनिया का सपना हम दोनों ही देख रहे हैं।।
सोचा अपने अपने ढंग से कहते हुए झेंप रहे हैं।।
1
झेंप मिटी साथ चले सोचा जीवन सफल हो गया
अलग अलग जातें हमारी जिनका मतलब खो गया
ब्यां नहीं कर सकते सब हम पर उंगली टेक रहे हैं।।
2
प्रेम विवाह को समाज में देखा क्या दर्जा मिलता
खूंखार हो जाता है समाज देख कर ही दिल हिलता
बिना बात की बात में निकाल मीन मेख रहे हैं।।
3
तुम्हारी जिद प्यार का विरोध तो जिद हमारी भी है
प्यार को परवान चढ़ायेंगे इसमें इज्जत तुम्हारी भी है
जात के तवे पर देखो ठेकेदार रोटी सेंक रहे हैं।।
4
जातें अलग अलग हमारी मगर मानवता है भरपूर
जाति की सीमा मालूम है इसके बन्धन नहीं मंजूर
एक अपना सा घर बनाएं यही इरादे नेक रहे हैं।।
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तुममें शिकश्त और जिल्लत का अहसास बाकी
पता हमें तुममें अभी नफरत का अहसास बाकी
कितना ही दिखावा करो अपनी सादगी का तुम
खूब तुममें देखा है हिमाकत का अहसास बाकी
मुहब्बत से कहते हैं दौलत का कोई वास्ता नहीं
तुम्हारे दिल में अपनी दौलत का अहसास बाकी
कितना ही अपमान करो तुम बार बार ये हमारा
रहेगा हममें फिर भी कयामत का अहसास बाकी
हमारी शराफत को करदो बिल्कुल तार तार तुम
रणबीर को रहेगा ही शराफत का अहसास बाकी
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कहते तुम्हारी क़िस्मत में खोना सोचो तो यारो
क़िस्मत का खेल मान कर हमने इसको ढ़ोया
अपने हाथों से खुद हमने बीज कीकर का बोया
क़िस्मत क़ि मार को क्यों ढ़ोना सोचो तो यारो
दिलो दिमाग पर मेरे तो यही सब तो छाया है
आज जो कुछ भी हूँ मैं मेरे नसीब ने बनाया है
औरों के खेलने का ये खिलौना सोचो तो यारो
बात समझ में आ गयी क़िस्मत का खेल नहीं
बिना इन्सां के चल सकती यह देखो रेल नहीं
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हर एक कदम पर हादसा होना सोचो तो यारो
हमारे सिस्टम में क्यों है रोना सोचो तो यारो
जो कुछ कमाया हमने छीन लिया चालाकी से
किसी ने नहीं समझाया ये सब खेल बेबाकी से
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