Wednesday, June 12, 2024

140 से 149

149 बैंकों पर पैसा लाक निजी चिकित्सक हड़ताल पर जन साधारण एक्सप्रेस में लूट छह को फांसी दो को उम्र कैद मुंबई दहलाने की साजिश नाकाम पांच आतंकी गिरफ्तार निजी डायनिंग रूम में मोहन को भोज देंगे बुश पानीपत में कांग्रेस की जवाब रैली कचरी की चटनी खाएंगे हमारे मेहमान ********* 148 आपात स्थिति से भी बदतर हालत बने फासीवाद से हर रोज मुलाकात बने और कोई चारा बचा नहीं लगता यारो संभलो इससे पहले कि दिन रात बने देखो फासीवाद से लड़ना आसान कहां पहले समझो इसको फिर कोई बात बने बोले विरोध में तो ई डी तत्काल ही आए घर पर फिर से संकट के ये हालत बने ******* 147 गधे की तरह काम करवाया हाथ में चालीस रूपया थमाया पूरा दिन और इतने कम पैसे मजदूर ने मालिक से फरमाया ठीक किया तुमने न्याय मांगा है मैनेजर ने तुरत मैनेजर बुलवाया पैसे वापिस लो इसी वक्त और ' इसे घास डालो' का फरमान सुनाया ******* 146 किसी के कान में कही गई बात हजारों मील दूर तक सुनाई पड़ती है धीरे धीरे बोल कोई सुन न ले गलत मत बोल कोई सुन न ले लेकिन फिर भी हर कोई सुन लेता है और वही राज की बात घूमती घूमती फिर आपके कानों में आ पड़ती है आप हैरान होते हैं कि यह कैसे हुआ इसे कहते हैं गपशप या चुगली जो आपसे गॉशिप करता है,वह आपके बारे में भी गॉशिप करेगा। ******* 145 जनून क्या कहूं तुम से कि ये क्या है जनून जान का रोग है यह बड़ी बला है जनून जनून ही जनून है दिलो दिमाग में सारे आलम में ही भर रहा है जनून जनून मेरा प्यार मेरा इश्क है यारो यानि अपना ही मुबतला है जनून गरीब की मेहनत मशकत में यारो लगता खुद से भी ज्यादा है जनून कौन मकसद को जनून बिन पहुंचा आरजू है जनून और मुद्दा है जनून तुमने आज तक नहीं समझा मतलब मगर एक तरह से जिया है जनून ******** 144 रात ग्यारा बजे चालकै दिल्ली एयरपोर्ट आये ।। दिल्ली तैं कुवैत के जहाज के टिकट कटाये ।। हवाई जहाज का सफर कई घण्टे का होग्या भाई ब्रेकफास्ट किया फेर लंच फेर फ़िल्म एक चलाई कुवैत पहोंच लंदन की मिलगी या जहाज हवाई लंदन की हवाई यात्रा घर आली नै खूब सराही लंदन पहोंचे सांझ ताहिं फेर सांस थोड़े ले पाये ।। दिल्ली तैं कुवैत के जहाज के टिकट कटाये ।। 2 विवेक भाई एयरपोर्ट पै देखै था वो बाट म्हारी सारा सामान लाद लिया फेर चली म्हारी सवारी सत्तर मील की दूरी साउथ एन्ड रहवै बेटी प्यारी दोहती अनन्या दोहता आदि सबकै खुशी छारी कुलदीप शीतल नै आंख्यां पै सारे बिठाये ।। दिल्ली तैं कुवैत के जहाज के टिकट कटाये ।। 3 रात का खाना खाकै या नींद गजब की आई सपने मैं घूमै रोहतक दे इंद्रप्रस्थ का पार्क दिखाई सबतें सम्पर्क टूट गया सिम कार्ड ना मिल पाई जी मैं जी आग्या मेरै जिब चलगी वाई फाई नमस्ते लंदन से के फूल सब धोरै पहोंचाये ।। दिल्ली तैं कुवैत के जहाज के टिकट कटाये ।। 4 स्वीमिंग पूल अर पार्क अगले दिन घूम कै आये लंदन आई जाकै दूजे दिन पूरा लंदन देख पाये विंडसर कैस्टल तीजे दिन उड़ै मजे खूब उड़ाए चौथे दिन बीच पै घूमे बालक झूले खूब झुलाये रणबीर दस तारीख नैं बेल्जियम के प्लान बनाये ।। दिल्ली तैं कुवैत के जहाज के टिकट कटाये ।। ****** 143 यादें बचपन में मोहल्ले के मैदानों में दोस्तों के साथ पम्परागत खेल, गिल्ली-डंडा, छुपा-छिपी, खो-खो, कबड्डी, कंचे जैसे खेल खेले हैं। कम या बल्ब की पीली रोशनी में होम वर्क किया है और नावेल पढ़े हैं। ******** 142 मैंने देखा है अपने माँ बाप को लड़ते हुए रोजाना इस या उस बात पर झगड़ते हुए माँ कहती पापा को क्यों पड़ौसिन को तकते माँ को पीटते हाथ कभी नहीं उनके थकते बच्चे बड़े हो रहे इसका उनको ख्याल नहीं क्या असर पड़ रहा इसका उनको मलाल नहीं बचपन था हमें ज्यादा चीजों का पता न था तरुनाई की उमर आई बच्चों का खाता न था पिता पड़ौसिन का छुप कर मिलना समझा अवैध संम्बंधों पर माँ का हिलना समझा सुरता कईबार मुझे बुलाकर प्यार में सहलाता बहुत खुश होती मैं दानवी रूप समझ न आता एक दिन वह रूप उसका सामने आ ही गया देख के उसकी हरकतें सिर चकरा ही गया ये आँखें बीस चालीस साठ साल की बताऊँ उमर कोई सीमा नहीं बीती उसका हाल सुनाऊँ आदर्श संस्कारों की उम्मीद कैसे विद्वान् करते हैं देखो कैसे बच्चियों के शराब पीके पर कतरते हैं ******* 141 नई दुनिया - प्यार की दुनिया नई दुनिया का सपना हम दोनों ही देख रहे हैं सोचा अपने अपने ढंग से कहते हुए झेंप रहे हैं झेंप मिटी साथ चले सोचा जीवन सफल हो गया अलग अलग जातें हमारी जिनका मतलब खो गया ब्यां नहीं कर सकते सब हम पर उंगली टेक रहे हैं।। प्रेम विवाह को समाज में देखा क्या दर्जा मिलता खूंखार हो जाता है समाज देख कर ही दिल हिलता बिना बात की बात में निकाल मीन मेख रहे हैं।। तुम्हारी जिद प्यार का विरोध तो जिद हमारी भी है प्यार को परवान चढ़ायेंगे इसमें इज्जत तुम्हारी भी है जात के तवे पर देखो ठेकेदार रोटी सेंक रहे हैं।। जातें अलग अलग हमारी मगर मानवता है भरपूर जाति की सीमा मालूम है इसके बन्धन नहीं मंजूर एक अपना सा घर बनाएं यही इरादे नेक रहे हैं।। ******** 140 कोई गाता बंगाली में देखो कोई गा रहा गीत तमिल में कोई पंजाबी में गिद्दा पा रहा कोई राजस्थानी में बतियाए देखो अपने अनुभव हर कोई सुना रहा नाटक रेलगाड़ी और सद्गति ये ना समझे उसे भी बहुत भा रहा रोक नहीं पाया यह देख नजारा मेरी आंखों में आंसू आ रहा कैसे बयां करूं दास्तान इनकी शब्दों में बयां नहीं कर पा रहा सुना झारखंड का हाल जब से क्यों है आदिवासी इस हालत में ख्याल तब से मुझे यही खा रहा दलित महिला बच्चे भोजन संकट पानी सवातावरण संकट भी बातचीत में चारों तरफ छा रहा एक नई दुनिया का सपना हमें आईपीएसएन दिखला रहा नई दुनिया का नक्शा कहीं और नहीं यहीं है वह नई दुनिया जो अंगड़ाई ले रही है और जरूर जवां होगी शायद हमको यकीन नहीं आ रहा नई दुनिया संभव है यहीं नारा इस बात का बस यकीं दिला रहा।। 2008

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