Wednesday, June 12, 2024

99 से 80

99 बाजार में सब चीजों की बोली लगादी गुरु शिष्य का रिश्ता कैसे बचता यारो पैसे ने चारों तरफ दहशत सी फैलादी फिर भी लड़ेंगे जीजाँ से हम सब यारो कुछ लाइनों में बात पूरी हमने बतादी ******** 98 जिन्होनें न दी माँ बाप को भर पेट रोटी जीते जी कभी आज उनके मर जाने के बाद उन्हें भंडारे लगाते देखा है ******** 97 RAHGEER चलते चलते जिन्दगी में मिला एक राहगीर मुझको|| मि ल बैठे कुछ बात हुई मन भाई तासीर मुझको|| कुछ तो था पर क्या था उसमें अब तक सोच रही दिमाग लगाकर देखा साफ नहीं तसवीर मुझको|| उसका हंसना ही था जिसने मुझको बांध लिया याद आती उसके पेहरे की एक एक लकीर मुझको|| कुछ पल मिल बैठे हम अपने दिलों में झांक सके थे दरिया दिल इन्सान मिला बांध गया जंजीर मुझको|| कह नहीं सके एक दूजे को दिल की बात कभी हम सुहानी यादों की दे गया खजाने की जागीर मुझको|| होन्डा के आन्दोलन में शहीद हो गया वो साथी मैं समझूं या अनजान बनूं संदेश दिया गम्भीर मुझको|| साथ चले साथ हंसे थे साथ ही सितम झेले हमने सम्भल के चलना यारो बता गया रणबीर मुझको|| ******** 96 कुछ नए बन रहे कुछ पुराने बने हर कदम पर यहाँ कैदखाने बने किस तरफ से चली गोलियां क्या पता किन्तु हर बार हम ही निशाने बने था क्या हमने सोचा ये क्या हो गया हमें क्यों इस चमन से गिला हो गया दिया जिसकी खातिर था हमने लहू वही मौसमें गुल क्यों खफा हो गया ******* 95 हमने खोल के दिल से बातें करनी चाही बहुत सोच समझ कर अपनाई ये राही मेहनत और ईमानदारी की की है बाही गंदे विचार और गंदगी दिमाग से ताही ******* 94 बचपन की दोस्ती बहुत अलग होती देखो || जवानी की दोस्ती अलग बीज बोती देखो || हर उम्र की दोस्ती की मांग अलग होती है अधेड़ उम्र की दोस्ती तान कर है सोती देखो || अकेलापन अखरता बिना दोस्ती बुढ़ापे मैं बुढ़ापे की दोस्ती पुराणी यादें संजोती देखो || टिकाऊ दोस्ती या भरोसे की दोस्ती कहो विचार और स्वभाव की समता पिरोती देखो || वक्त बदलते हैं रिवाज बदलने का दस्तूर भी सच्ची दोस्ती अपना भार उम्र भर ढोती देखो || चाहे ये दुनिया इधर से उधर हो जाये यारो पक्की दोस्ती अपना सबब नहीं खोती देखो || ******* 93 आज रास्ते बदल लिए मौका परस्ती दिखलाई पन्द्रह साल तक तुमने कदम से कदम मिलाई चुनौती ज्यादा गंभीर आज जब सामने है आयी भूल गए वो इंकलाबी नारे नकली कुर्सी है भाई ******** 92 बड़ी मुश्किल से ये आंसू छिपाए हमने हँसना चाहा झूठे ठहाके लगाये हमने तुमको मालूम ये शायद हो के ना हो तुम्हारे जाने के बाद आंसू बहाए हमने प्यार किया हमने नहीं छुपाया कभी दिल के तराने थे तुमको सुनाये हमने तेरे साथ इन्कलाब के जो नारे लगाये यारो अब तलक नहीं हैं भुलाये हमने राह का साथ छोड़ गये अफ़सोस तो है पल याद हैं वो जो संग बिताये हमने जानते हैं आप हमें नहीं भूल सकेंगे एक अनुभव बस बिंदु दिखाए हमने हादसा नहीं एक सच्चाई है ये प्यार ग्लानी नहीं रास्ते नए बनाये हमने ******* 91 हरयाणा नम्बर 1 क्लेम किया जा रहा है 1 बेरोजगारी कम करने में 2 गुणकारी शिक्षा सबको देने में 3 महंगाई पर काबू पाने में 4 गुणवत्ता पूर्ण इलाज सबको देने में 5 महिला उत्पीड़न कम करने में 6 कृषि संकट हल करने में 7 सामाजिक न्याय हासिल करने में आपकी राय रखना जरूर या भेजना 9812139001 क्या यह सब सही है??? ********* 90 ऊट पटांग पुलिस तुम्हारी फ़ौज तुम्हारी मीडया तुम्हारा कोर्ट बीचारी जनता द्वारा जनता के लिए चुनी हुई ये सरकार हमारी जनतंत्र का झुनझुना पकडाया कार्पोरेट की करे है ताबेदारी मसला इस या उस नेता का नहीं जनतंत्र की पोल खुल गयी सारी कैसे मजबूत हो जनतंत्र भारत का कैसे जनता की बढे हिस्सेदारी सवाल आया है तो जवाब भी ढूंढेगी मिलके ये जनता सारी ******** 89 वह धंसती है वह खसती है वह फंसती है वह चरती है उसपे मस्ती है वह भिड़ती है सोचो कौन है वह भैंस हमारी अरे हम भी तो जिन्दा इन्सान हैं ******** 88 एक गरीब महिला की नजर से हमारा इम्तिहान लिया हर बार पास हुए सब कुछ तुम्हारे पास फिर भी उदास हुए पता है तुम्हारा तुम एक अमर बेल हो रब राखा क़िस्मत का रचा रहे खेल हो आज कल तुम्हारा अहम् और ये अहंकार दिखाता है तुम्हारे अन्दर का पूरा अंधकार सच है कि अंधी गली में तुम बढ़ते जा रहे अपनी मौत के खुद ही श्लोक पढ़ते जा रहे इल्जाम मुझको सफाई नहीं करनी आती मेरे घर आंगन को मैं साफ ना रख पाती एक राज बस तुमको ही बस बताती हूँ मैं बताओ तुम्हारे फर्श कैसे चमकाती हूँ मैं तुम्हारे दरवाजे पे गए तुमने दुत्कार दिया हमारे दरवाजे पे आये हमने सत्कार किया इंसानियत और हैवानियत का फर्क यही तो दुत्कारा तोभी आँखों पे बिठा के प्यार किया कुदरत से प्यार जिसका तुम भी एक हिस्सा हो विश्व ग्राम का चर्चित तुम एक अहम् किस्सा हो बदलाव नियम है कुदरत का इतना तो जान लो दिशा गलत या ठीक है इतना अब पहचान लो तन मन जन हो सुखी जीवन का लक्ष्य मेरा विवेक के प्रकाश से भागे अंध विश्वास घनेरा सेहत के लिए चाहिए साफ पानी भोजन हवा फिर बिल्कुल नहीं चाहिए हमको कोई दवा ******** 87 पति पत्नी का झगडा ओबामा ने करवा दिया पत्नी बोली क्यों इस भारत को मरवा दिया सोच कर बोला करो महाशक्ति बना दिए हम ओबामाजी ने भारत का सिर ऊंचा उठवा दिया पत्नी माथा पकड़ के रोऔगे पता लगेगा तुम्हें ऊंचा क्या उठाया भारत सिर उल्टा झुकवा दिया एक भी हमारे हित का कौनसा समझौता हुआ आँखों में धूल झोंक दी लगा कोठा भरवा दिया पति बोला पहली बार भारत को सम्मान दिया प्रतिबंध जितने हमने लगाये सबको हटवा दिया ********* 86 कहना बहुत आसान है मुश्किल चलना सच्चाई पर लहर के उल्ट तैर कर ही पहुंचा जाता अच्छाई पर बुराई की ताकत को यारो देख कर डर जाते हम इसके दबाव में बहुत सी गलती भी कर जाते हम आका बैठ के हँसते रोजाना फिर हमारी रुसवाई पर मेहनत हमारी की अनदेखी रोजाना हो रही यारो चेहरे की लाली हम सबकी रोजाना खो रही यारो कहते वो हमको बेचारा जो जीते हमारी कमाई पर बीज है खाद और खेत भी इससे फसल नहीं उगती फसल उगती है तब यारो जब मेहनत हमारी लगती महल बने ये सभी तुम्हारे हम सब की तबाही पर ********** 85 मिल गया राहगीर मुझको एक दिन चलते चलते बात बताई बहुत पते की पर थोडा सा डरते डरते कहा अपने पर कर भरोसा दुआ करना बंद करदे कुछ नहीं कर पायेगा तूं उसकी दुआ करते करते ये विश्वास तेरे से छीना इस दुआकी करामात से कमाल दुआ करता रहता तूं बेमौत मरते मरते दिन देखा नही रात देखी आंख मींचकर लगा रहा जिंदगी पूरी लगादी तूने उनका पानी भरते भरते उठ विश्वास लौटा देख दुनिया अपनी आँखों से पता है वक्त लगेगा इस दुआ से उभरते उभरते ********* 84 संकट और नवजागरण आज देश हमारा चौतरफा संकट से घिर गया उदारीकरण के कारण सिर उनका फिर गया वैश्वीकरण के नाम पर कितना कहर ढाया है आर्थिक संकट बेरोजगारी ने उधम मचाया है छंटनी महंगाई लूट खसोट आज बढती जा रही भ्रूण हत्या और दहेज़ की आँधी चढ़ती आ रही कठिनाईयों का बोझ ये महिलाओं पर आया है युवा लड़कियों की दुनिया पे काला बादल छाया है गहरे तनाव में लड़कियां ये जीवन बिता रही हैं फिर भी हिम्मत करके करतब खूब दिखा रही हैं सारे रिश्ते कलंकित हुए आज के इस संसार में सगे सम्बन्धी परिचित फंसे घिनोने बलात्कार में शिक्षक का रिश्ता भी तो हरयाणा में दागदार हुआ अभिभावकों का दिलो दिमाग आज तार तार हुआ सामाजिक मूल्यों में आज गिरावट आई है भारी चारों तरफ अपसंस्कृति की छाई देखो महामारी फेश बुक पर चैटिंग से नहीं समाज बचने वाला उदारीकरण और ज्यादा भोंडे खेल रचने वाला वंचित तबके और महिला युवा लड़के लड़कियां मिलके खोलेंगे जरूर समाज की बंद खिड़कियाँ इंसानी रिश्ते बनेंगे रंग भेद जात भूल जायेंगे नवजागरण का सन्देश घर घर तक पहुंचाएंगे ******** 83 बे मोसम की बरसात बे मोसम की बरसात कैसा कहर ढाया है ख़राब गेहू खेत मैं मंडी नै गुल खीलाया है मोसम तो ठंडा मगर ठंडा हुआ कीसान भी ये पकी पकाई खेती ढहे बहोत अरमान भी मंदी की मार ने मारा बरसात ने हीलाया है कीसान सह लेगा इसे मान कीस्मत का खेल पता नही चलेगा कीसने बनायीं उसकी रेल ग्लोबल वार्मीग से मोसम में बदल आया है क्लाईमेट चेंज हो गया दोसी अमीर बताये हैं फार्म हॉउस गैसों के अम्बार वही लगाये हैं बेमोसम ओलों का कीसान पे संकट छाया है कीस्मत की बात नहीं ये सीस्टम का खेल है असली दोसी छीपा रहे सीस्टम की धकापेल है सच झूठ जान लियो खोल सब बतलाया है ********* 82 हमें याद करने की कोशिश कीजिये यारो वक्त तो अपने आप मिल ही जायेगा देखो तमन्ना मिलने की ये दिल से सोचिये यारो बहाना कोई न कोई मिल ही जायेगा देखो ******** 81 वजूद तुम्हारा मुमकिन नहीं बिना वजूद हमारे सिस्टम की नजाकत है खिले हैं आँगन तुम्हारे हमारी मेहनत पर खड़े होकर हुंकार रहे आज भक्षक बनके रक्षक खड़े अपने घर बार निखारे ********* 80 मैंने मानवता का आचरण अपनाने की कोशिशें की मानवता से दूर हटाने की बहकाने की कोशिशें की जिद है तुम्हारी हटाने की तो जिद हमारी कि डटे हैं काले धन की चाल काली बरगलाने की कोशिश की

No comments: