Wednesday, June 12, 2024
9 से 1
9
था क्या हमने सोचा ये क्या हो गया
हमें क्यों इस चमन से गिला हो गया
दिया जिसकी खातिर था हमने लहू
वही मौसमें गुल क्यों खफा हो गया
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8
गुनाह उनका सजा हमें
उनके गुनाहों की हमको किसलिए सजा मिले
ऐसा इंसाफ क्यों हो किसलिए ऐसी क़ज़ा मिले
नाहक ही हम बेकसूरों की क्यों जान चली जाये
कैसे हम जैसों को जीने की यहाँ फिजा मिले
तुम्हारे सताने से हम रोये बहुत कई बार ही
मग़र अब ना रोयेंगे ताकि तुम्हें ना मजा मिले
तुम लूट कर हमें रहो सुख चैन से आबाद
बताओ तो कसूर क्यों उल्टा हमें खिजा मिले
हमारी मेहनत पर रणबीर वे ऐश करते हैं
न्याय देखो हमें सुखी रोटी उनको पिज्जा मिले
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7
जीने की मुश्किल अब मेरी राह बहुत है
जीता हूँ जीने की अब मुझे चाह बहुत है
गम बहुत से हैं हमारे और तुम्हारे देखो
उनपे मेरी टिकी अब निगाह बहुत है
तुम कहो या न कहो पर मुझे मालूम है
तुमको मेरी जीने की परवाह बहुत है
कत्ल होके भी हम अमीरों के गुनाहगार
झूठ नहीं शहर में हमारे गवाह बहुत है
मुझे अपने दोस्तों पर है पूरा एतबार
अहम् रणबीर उनकी सलाह बहुत है
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6
मेरा रास्ता समझो तो सही यही समझाता रहा
मकसद जीने का क्या हो इसपे बतियाता रहा
एक ही जीवन है यहाँ इतना तो मान लो दोस्त
दोस्त चुप चाप दूसरा रास्ता बस बनाता रहा
जाने वाले फिर नहीं आते मुडके अगले जीवन
इस हकीकत से दोस्त हमेशा ही कतराता रहा
दोस्ती आगे नहीं बढ़ पाई मुझ पर कामरेड का
देर सबेर लुके छिपे ठप्पा दोस्त वो लगाता रहा
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5
हुए किसी और के फिर भी अपने से लगते हो
बहुत प्यारे हसीन टूटे हुए सपने से लगते हो
कभी कभी यादों का एक हजूम सा आता है
अपनी बाँहों में मुझे तुम कसने से लगते हो
कभी अकेले में बैठ कर रोने को दिल करता है
मेरी हालत पे लगता है तुम हंसने से लगते हो
वो प्यार ही क्या जो करे पछतावा प्यार करके
प्यार किया हमने तुम मना करने से लगते हो
अब वो बात नहीं हमने रास्ता बदल लिया है
मग़र तुम जब मिलते हो तो डरने से लगते हो
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4
मेरा रास्ता समझो तो सही यही समझाता रहा
मकसद जीने का क्या हो इसपे बतियाता रहा
एक ही जीवन है यहाँ इतना तो मान लो दोस्त
दोस्त चुप चाप दूसरा रास्ता बस बनाता रहा
जाने वाले फिर नहीं आते मुडके अगले जीवन
इस हकीकत से दोस्त हमेशा ही कतराता रहा
दोस्ती आगे नहीं बढ़ पाई मुझ पर कामरेड का
देर सबेर लुके छिपे ठप्पा दोस्त वो लगाता रहा
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3
गुनाह उनका सजा हमें
उनके गुनाहों की हमको किसलिए सजा मिले
ऐसा इंसाफ क्यों हो किसलिए ऐसी क़ज़ा मिले
नाहक ही हम बेकसूरों की क्यों जान चली जाये
कैसे हम जैसों को जीने की यहाँ फिजा मिले
तुम्हारे सताने से हम रोये बहुत कई बार ही
मग़र अब ना रोयेंगे ताकि तुम्हें ना मजा मिले
तुम लूट कर हमें रहो सुख चैन से आबाद
बताओ तो कसूर क्यों उल्टा हमें खिजा मिले
हमारी मेहनत पर रणबीर वे ऐश करते हैं
न्याय देखो हमें सुखी रोटी उनको पिज्जा मिले
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2
होंश में आना होगा
अब नए संगठन को हमें अपनाना होगा ।।
जो भाई नहीं आएं उनको बुलाना होगा ।।
संगठन बनायें जो रजके रोटी खाना चाहते
अपने बच्चों को हम शिक्षा दिलाना चाहते
सब बराबर हों ऐसा समाज बनाना चाहते
अब हमें क्रांति के गीतों को गाना होगा ।।
जो भाई नहीं आएं उनको बुलाना होगा।।
वो क्यों अमीर हो गए इस पर विचार करें
हम क्यों गरीब ही रहे इस पर ध्यान धरें
अलग अलग बंटे हम एक दूजे से ही डरें
जात पात भूलके एक मंच पर आना होगा।।
जो भाई नहीं आये उनको बुलाना होगा ।।
हरियाणा बुरी तरह जलवाया देख लिया
जातों को आपस में भिड़वाया देख लिया
फूट डालो राज करो आजमाया देख लिया
मेहनतकश को मानवता को बचाना होगा।।
जो भाई नहीं आये उनको बुलाना होगा ।।
महंगाई बढ़ती जा रही देखो आज यहाँ
बेरोजगारी हमें खा रही देखो आज यहाँ
प्याज भाव नहिं पा रही देखो आज यहाँ
इन मुद्दों को मिलकर के उठाना होगा ।।
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1
साथ तुम्हारा इन्कलाब नारा इस कदर भा गया
मकसद वीरान जिन्दगी का जैसे फिर से पा गया
मोम के घरों में बैठे लोग हमारे घर जलाने आये
जला दिए हमारे मग़र अपने भी ना बचा पाये
तबाह कर दिया जहान को मुनाफा हमें खा गया
रास्ता ही गल्त पकड़ा हमें भी उसी पर चलाया है
स्वर्ग नर्क के पचड़े में तुम्हीं ने हमको फंसाया है
भगवान और बाबाओं का खेल समझ में आ गया
आशा बाबू एक प्रवचन के कई लाख कमाते हैं
निर्मल बाबू नकली लोग पैसे दे कर के बुलाते हैं
भगवान की आड़ में मुनाफा दुनिया पर छा गया
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