Tuesday, June 25, 2024
203 से 226
226
राज दरबारी क्या कहते सुनते हैं यारो
पेट की खात्तर बेचारे झूठ गाते हैं
सच कहना गर बगावत तो हम बागी हैं
दिल दुखता जब नाकारे लूट मचाते हैं
अमीर गरीब की बढ़ा खाई समता लाएंगे
झूठ के एक दिन ये शिकारे डूब जाते हैं
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225
छक्का
हिंदुस्तान जलन लागरया बूझा लियो मिल करकै रै
आंख मींच कै क्यूँ बैठे थाम बजर का दिल करकै रै
आजादी रूपी फूल मुर्झाग्या जो आया था खिल करकै रै
देश का किसान फांसी तोड़या किसनै मुश्किल करकै रै
साम्प्रदायिकता चढ़ती आवै नफरत के या बिल करकै रै
अडानी और अम्बानी नै धरया देश आज छिल करकै रै
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224
पेट मैं छाला
गुड़ का राला
खर्च कुढ़ाला
दुख देज्या
आंख मैं जाला
भीत मैं आला
दिल मैं काला
दुख देज्या
पोह का पाला
खेत रिहाला
कपटी रूखाला
दुख देज्या
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223
मेरा कसूर
हमने दोनो ने मिलकर सोचा
जिन्दगी का सफ़र तय करेंगे
बहुत सुन्दर सपने संजोये थे
प्रेम का पता नहीं ये हरयाणा
क्यों पुश्तैनी दुश्मन बन गया
यह सब मालूम था हमको पर
प्यार की राहों पर बढ़ते गए
मेरे परिवार वाले खुश नहीं थे
क्यों मुझे पता नहीं चला है
न तो मैंने एक गोत्र में की है
न ही एक गाँव में शादी मेरी
न ही दूसरी जात में की मैंने
तो भी सब के मुंह आज तक
फुले हुए हैं हम दोनों से देखो
प्यार किया समझा फिर शादी
ससुराल वाले भी खुश नहीं हैं
शायद मन पसंद गुलाम नहीं
मिल सकी जो रोजाना उनके
पैर छूती पैर की जूती बनकर
सुघड़ सी बहु का ख़िताब लेती
दहेज़ ढेर सारा लाकर देती ना
प्यार का खुमार काम हुआ अब
जनाब की मांगें एकतरफा बढ़ी
मैं सोचती हूँ नितांत अकेली अब
क्या हमारा समाज दो प्रेमियों के
रहने के लायक बन पाया यहाँ
चाहे कुछ हो हम लोड उठाएंगे
मगर घुटने नहीं टिकाएंगे यारो
वो सुबह कभी तो आयेगी की
इंतजार में ये संघर्ष जारी रखेंगे
झेलेंगे इस बर्बर समाज के सभी
नुकीले जहरीले तीर छाती पर ही
जिद हमारी शायद यही है कसूर
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222
हमारी बर्बादी
हमें बर्बाद करके उनको पता नहीं क्या मिल गया
ईमानदारी का दामन थामा हमारा निवाला छिन गया
आदमी से आदमी की मोहब्बत कहाँ काफूर हो गयी
मेहनत हमने की मगर पता नहीं कहाँ ये खो गयी
दर्द हद से गुजर गया है सीना हमारा तो छिल गया
मोहब्बत के गीत गाएँ कैसे चिंता हमें बीमारी की
यकीं कौन करेगा इस पर मोहब्ब्त गरीब भिखारी की
देख के उनके ढंग निराले मुंह हमारा है सिल गया
मरने वाले हथियार लिए बैठे साधा निशाना हम पर
मार न पाना मजबूरी उनकी टिका जमाना हम पर
हमारे वजूद का तस्सवुर कीचड में गुलाब खिल गया
तूफ़ान जो उठा समुन्द्र में अब नहीं टाला जायेगा
पड़ाव अब ये हमारा मंजिल पर ही डाला जायेगा
भगवन का आसरा किया पर भरोसा सारा हिल गया
आर पार की जंग शुरू करना होगा स्वीकार हमें
फूंक फूंक के चलना है रहना होगा होशियार हमें
देख देख जुल्म उनके कलेजा हमारा छिल गया
मानवता का औढ़ा मुखोटा लिया धर्म का सहारा है
जात पात का जहर फैलाया निचौड़ा खून हमारा है
रणबीर आज रो उठा हो छलनी उसका दिल गया
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221
आंधी चल रही ये नहीं थमीं यारो
रात की गर्द मेरे चेहरे पे जमीं यारो
कुछ ठूंठ खड़े हैं कहीं कहीं मेरे जैसे
कुछ उखड़े पड़े हैं कहीं तुम्हारे जैसे
हम सब बचें हैं इसके थपेड़े खाकर
तुम बैठ गये अपने महलों में जाकर
यह आंधी आज किसे साल रही देखो
झोंपड़ी इधर उधर उछाल रही देखो
धर्म की आँधी चलने ही वाली यारो
क्या गुल खिलेंगे उजड़ेगा माली यारो
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220
Please React
इस बेवफा सिस्टम से वफ़ा मांग रहे हैं |
हमें क्या मालूम है हम खता मांग रहे हैं |
ये क़िस्मत का खेल रचाया है इसी ने तो---
इसी से हम क़िस्मत क़ि दुआ मांग रहे हैं|
पूरा सच छिपा ये आधा सच बताते हमको --
जहर घोला उसीसे साफ हवा मांग रहे है|
रोजाना जो खेलता हमारे जज्बात के साथ--
सुख क़ि राही का उससे पाता मांग रहे हैं |--
सुरग क़ि कामना में छिपी हुयी रणबीर--
अपने खुद क़ि ही हम चिता मांग रहे हैं |
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219
SUN JARA AUR KAH JARA
किसी पर भी तूं एतबार न कर|
भावुकता में बर्बाद घरबार न कर|
बात हैं बात का भरोसा क्या है
--
जाँ किसी पर निस्सार न कर|
अमीर क़ि नजरें जाँ लेलेंगी--
इनसे कभी कोई करार न कर|
बेवफा से वफ़ा नहीं होती है
--
जाने दे दिल को बेक़रार न कर
|
अमीर गरीब क़ि दुनिया है यह
--
झूठे वायदे हैं स्वीकार न कर
|
रणबीर एक दिन टूट जायेगा--
ख्वाब है ख्वाब से प्यार न कर |
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218
पूजा
पूजा अपने आप में खोयी
लेकिन बिल्कुल सुलझी हुई
शक्शियत !
जो भी उससे मिलता
उसकी सादगी और
आत्मितीयत्ता से प्रभावित
हुए बिना न रहता |
हर किसी की मदद के
लिए हर समय तैयार
विचारों से परिपक्व
दिल से इमानदार और सच्ची
जिन्दगी भर समाज और
दुनिया को बदलने में लगी
एक अनोखी लड़की
पूजा !!
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217
आज का दौर *** एक कविता के माध्यम से **
दुनिया की क्या हालत हो गई बाजार चारों ओर छाया।।
भैंस बंधी है घर घर में पर दूध ढोलों के अंदर पाया।।
1
दूध बेच भैंसों का लोग गांव के करते हैं आज गुजारे
लुप्त हो गए घरों से आज घी के जो हुआ करते बारे
थोड़ा साँस आया करता आज घूटन मानते हैं सारे
महिलाओं के अनीमिया ने फिर से जोर के डंक मारे
बाजरे की खिचड़ी गौजी का आज जोड़ा तोड़ बगाया।।
2
पहले भाई चारा था छोरे बहू लेने आया करते
जिब रोटी जिम्मन बैठते खांड बूरा खाया करते
पड़ौसी दूध के बखौरे बटेऊ वास्ते ल्याया करते
दूजे का बटेऊ पड़ौसी आंखों पे बिठाया करते
बैठे रहते फूंक बुढ़िया सी अब अपना ही बटेऊ ना भाया।।
3
आबो हवा मैं जहर घुला कीटनाशक छागये हैं
युवा के नर्वस सिस्टम पे दोष गुस्से का लागये हैं
पेट को पकड़े घूम रहे डॉक्टर भी हाथ ठागये हैं
हमारी कष्ट कमाई को ये अमीर क्यों खागये हैं
टैस्ट क्यों नहीं होते मैडीकल मैं नहीं किसी ने कष्ट उठाया।।
4
किलो दूध मिले पचास का उसमें आधा पानी पावे
महंगाई के क्या कहने कोई क्या खाएं क्या नहीं खावे
कुपोषण बालकों में आज दिन दिन क्यों बढ़ता जावे
बाजार व्यवस्था दोषी है पर दोष क्यों कोई नहीं
लावे
राम की इच्छा कैहकर रणबीर हमारा क्यों मोर नचाया।।
**********
216
हमारा हरियाणा दो तरह से आज दुनिया में छाया है।।
आर्थिक उन्नति बहुत की पर लिंग अनुपात ने खाया है।।
1
छांट के मारते लड़की पेट में समाज के नर नारी
समाज अपने कसूर की मां के लगावे जिम्मेदारी जनता हुई है हत्यारी पुत्र लालसा ने ही राज जमाया है ।।
2
औरत औरत की दुश्मन है जुमला बहुत चलता आदमी आदमी का दुश्मन समाज को न खलता समाज ढांचा इसपे पलता यह हरियाणा बदनाम कराया है।।
3
वंश की पुरानी परंपरा पुत्र को चिराग बताते हैं लड़का जरूरी होना चाहिए लड़की को मराते हैं
जुल्म रोजाना बढ़ते जाते हैं सुनकर के कांपती काया है।।
4
अफरा तफरी फैली महिला कहीं महफूज नहीं
जो पेट से बच गई है उनकी समाज में बूझ नहीं आती हमको क्यों सूझ नहीं रणबीर सिंह बहुत घबराया है।।
**************/
215
दो हजार तेरा का आधा बरस बीत गया
सुधार कहाँ मंहगायी का दानव जीत गया
भारत की अर्थ व्यवस्था चली गयी खाई मैं
विकास दर बीते दस साल की नीची इकाई मैं
औद्योगिक विकास दर की क्या बात बताऊं
पिछ्ले बीस साल में सबसे नीचे गई दिखाऊँ
बजट घाटा हमारी आज की चुनौती बड़ी है
मोदी के बसकी नहीं आई सी यू में पड़ी है
राजनीति दिशाभ्रम इसका कारण हैं बताते
पूंजीवादी विकास दोषी ये बात क्यों छिपाते
*********
214
ढाई लाख किसान देश के पाछले दिनों मैं फांसी खागे
एफ डी आई तैं छोटे दुकानदारों के बुरे दिन आगे
आर्थिक सुधारों के ना पै कार्पोरेट सैकटर छाया
अंबानी अदाणी टाटा बिड़ला देश के चौखा चूना लाया
सरकार कारपोरेट की बांदी ये गरीब घने दुख पागे
नब्बे के दशक तैं देश मैं लागू ये सुधार हुए देखो
ये भूख बीमारी बधगी घने बेरोजगार हुए देखो
आवारा पूंजी उधम मचाया ये काले धन आले छागे |
विश्व बैंक ड्ब्ल्यू टी ओ आई एम एफ नकेल थामरे
तीसरी दुनिया के देशों के ये कसूती लगाम घालरे
ये म्हारी घी घी बांध रहे विकसित देश फयदा ठागे|
मन मोहन जी मोह लिए बिल्कुल नहीं समझ रहे
इन आर्थिक सुधारों मैं क्यों और भी घने उलझ रहे
ये आर्थिक सुधार तो सबकै चपत घनी कसूती लागे|
*********
213
अभी बहुत कुच्छ बाकी है इस तुम्हारी
खुश्क दुनिया में
हमारी मेहनत
हमारी सच्चाई
हमारी इंसानियत
हमारी कुर्बानी
हमारी मोहब्बत
हमारी शर्मो लिहाज
हमारी भूख मरी
--------------
--------------
लंबी फहरिश्त है
इस दुनिया को
तबाह नहीं होने देंगे
रणबीर
********
212
साइनिंग इंडिया सफरिंग इंडिया अंतर आज बढ़ता जाता है।।
कैसे पाटें इस अंतर को नहीं कोई हमको आज समझाता है।।
1
ये शाइनिंग इंडिया बहोत ज्यादा आगे जा लिया बताऊँ
गुड़गामा नया और पुराना देखलो नहीं मैं झूठ भकाऊं
नए और पुराने का अंतर क्यों ना जनता को उलझाता है।।
2
पुराने ढांचों से जन बहुत दुखी हो लिए हिंदुस्तान के
कई पुरानी सोच ये ओछी जूती काटें पैर मजदूर किसान के
नए ढांचे नहीं मिटा पा रहे ये भ्रष्टाचार घूमे दनदनाता है।।
3
इन हाल में नई इबारत जनता लिखनी चाहती जरूर
जात पात से ऊपर उठ चाहवे भ्रष्टाचार मिटाती जरूर
लड़ाई लम्बी संघर्ष मांगती समों जन को समझ आता है।।
4
सिस्टम एक रात में बदले एसा इतिहास ना टोहया पाए
सिर धड़ की कुर्बानी मांगे जब खून खरोंच इसको आए
जनता का दिल अंतर कम करने को पूरी तरह चाहता है।।
5
बहोत सी उपलब्धियां अब पूरे साल ये गिनाई
जाएंगी
पर नाकामियां इतनी ज्यादा हैं बिल्कुल न छिप पाएंगी
आने वाले समय में मुझे जो दिखे आम जन ना देख पाता है।।
6
फासिज्म नए ब्रांड का आज हमारे सिर पै आ खड़ा भाई
तरल पूंजी ने डिजाइन पूंजी से भर दिया है ये घड़ा भाई
रणबीर पड़े जूझणा कट्ठे होकर के ये सही छंद बनाता है।।
********
211
साइनिंग इंडिया सफरिंग इंडिया
ये महज शब्दों का खेल नहीं है
ये हैं दो दुनिया इसी जमीन पर
एक तरफ एयर कंडीशन्ड कोठी
उधर बरसात में टपकती झोंपड़ी
करोड़ों के को वह भी नहीं नसीब
एक तरफ एयर कंडीशन्ड कारें हैं
उधर कई कोश नँगे पांव चलना है
एयर कंडीशन्ड पांच सितारा होटल
उधर दो रुपये की चाय का ढाबा है
एयर कंडीशन्ड अपोलो फोर्टिस हैं
उधर बिना दवाई के सीएचसी हैं
एयर कंडीशन्ड मॉल सब मिलता
उधर खुदरा छोटी छोटी दुकानें हैं
एयर कंडीशन्ड स्कूल आलिसान
उधर बिना पंखे के कमरे के स्कूल
एक तरफ ऐयासी की दुनिया छाई
दूसरी तरफ मेहनत से फुरसत नहीं
दोरंगी दुनिया नजर नहीं आती हमें
इस अंधेपन को क्या कहूँ?शब्द नहीं
आपके पास हैं तो इंतजार इनबॉक्स में
रणबीर
15.03.08
********
210
बढ़ रहे मीलों के फासले हमारा प्यार नहीं कम होगा
लोंग डिस्टेंस रिलेशनशिप को निभाने का दम होगा
जरूरी पक्ष है इसका आपसे में बातचीत करते रहना
इसका मतलब यह नहीं चौबीस घंटे ही खपते रहना
समय-समय पर बात करना ही ये सही कदम होगा
बात करते समय भविष्य या रिश्तों की बात नहीं जरूरी
सकारात्मक मुद्दों पर बात कम करती है हमारी गरूरी
विवाद की बातचीत का फिर नहीं हमारा मन होगा
उनकी सुने अपनी सुनाऐं अनदेखी ठीक नहीं होती
अनदेखी खटास लाती है आपस का विश्वास खोती
इसलिए जीवनसाथी की बात पर जरूर चलन होगा
रिश्ते पासके या दूरके नींव आपस का भरोसा बताया
मिलने का प्रयास रहे जब भी मिलने का मौका पाया
प्यार और सम्मान रिश्ते में खूबसूरत ये चमन होगा
**********
209
राखी का त्यौहार मन में उल्टा सवाल उठाता यारो
ना बराबरी का मसला लगता कहीं ये छिपाता यारो
करवा चौथ रख कर महिला लम्बी उम्र मांगती है
रक्षा करवाने को आपकी कलाई पर राखी बांधती है
कितना इमोशनल ब्लैक मेल सवाल उठाते डरता हूँ
मन में उठे सवाल पूछने की न मैं हिम्मत रखता हूँ
महिला का शोषण है इस जगह से सोच कर देखो
पुरुष प्रधान व्यवस्था को यारो खोल कर तो देखो
*********
208
यही रफ़्तार रही ज़माने की ताऊ
तो इंसानों की जगह होंगे ये हाऊ
खुदगर्जी चुगलखोरी खुसामद की
मौज होगी हर चीज यहाँ बिकाऊ
अमेरिका और कोर्पोरेट छाया देखो
भारत बनाया इन्होंने बैल हिलाऊ
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207
गरीब परिंदा उड़ान में है
तीर अमीर की कमान में है
है डराने को मारने को नहीं
मरा तो अमीर नुकसान में है
जिन्दा रख कर लहू चूसना
अमीरों के दीन ईमान में है
खौफ ही खौफ है जागते सोते
लूट हर खेत खलिहान में है
मरने न देंगे न जीने देंगे
साजिश पूंजी महान में है
********
206
आम जनता के लिए बेरोजगारी है
घरों से बेदखली है बड़े पैमाने पर
समाज कल्याण के प्रावधानों में
कटौतियां बखूबी से जारी यारो
सरकारी खजाने की कीमत पर
बैंकों और वितीय कम्पनियों को
फिर बड़ा मुनाफा बटोरने का ये
मौका मिल रहा है भारत देश में
मेहनतकश की कीमत पर ही तो
मग़र कब तक एक दिन हिस्साब
तो माँगा जायेगा पाई पाई का
*******
205
बड़ी मुश्किल से ये आंसू छिपाए हमने
हँसना चाहा झूठे ठहाके लगाये हमने
तुमको मालूम ये शायद हो के ना हो
तुम्हारे जाने के बाद आंसू बहाए हमने
प्यार किया हमने नहीं छुपाया कभी
दिल के तराने थे तुमको सुनाये हमने
तेरे साथ इन्कलाब के जो नारे लगाये
यारो अब तलक नहीं हैं भुलाये हमने
राह में साथ छोड़ गये अफ़सोस तो है
पल याद हैं वो जो संग बिताये हमने
जानते हैं आप हमें नहीं भूल सकेंगे
एक अनुभव बस बिंदु दिखाए हमने
हादसा नहीं एक सच्चाई है ये प्यार
अफ़सोस है क्यों ये रास्ते भुलाये तुमने
*************
204
किसानों मजदूर का संघर्ष तेज करने का समय आया।।
दूसरे कमेरे तबके साथ ले चाहिए देश में बिगुल बजाया ।।
इस पार्टी उस पार्टी का नहीं ये मामला कहते हैं कॉरपोरेट सांप्रदायिकता की मार हम सहते हैं सिस्टम का मालिक कॉरपोरेट यह लुटेरा असल बताया ।।
शिक्षा बेची स्वास्थ्य बेचा सब कुछ बेच रहे आज निजीकरण की लहर फैलाई झूठ को सच कहे आज
आमजन के जीवन पर संकट आज गहरा है छाया ।।
अमेरिका से दोस्ती देश की मीडिया पूरा उछाल रहा
असल मातहेती अमेरिका की छुपाने का कर कमाल रहा
बातों बातों में देश को आज आसमान पर देखो पहुंचाया।।
बहु विविधता देश हमारे की पूरी दुनिया करे बड़ाई
एक देश एक पहचान इस पर छेड़ी रणबीर क्यों लड़ाई
बहु विविधता हार नहीं मानेगी संघर्ष का बिगुल बजाया।।
*********
203
हरेक चीज आज देखो आनलाइन मिल जाती है बाजार की छोटी दुकानो को जम्हाई दिलाती है कूरियर की सेवा मध्यमवर्ग को आज भाती है
गरीब जनता ही अब छोटी दुकानो पे आती है सिले सिलाए कपड़ों की दुकान आज ये छाती है
खेती में ट्रैक्टर की कमाई किसान को खाती है बिहारी मजदूरों की लाइन चौराहों पर पाती है पार्कों में महिलाओं की टोली बैठी गीत गाती है घंटों टीवी देखने की चाहत बच्चों को भरमाती है
बदल रहा शहर और गांव कंपकंपी सी आती है
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