Wednesday, June 12, 2024

120 से 129

129 रसातल बस कुछ मत पूछो रसातल में जा रहा है समाज पहले वाली कोई बात ही नहीं लड़के तो बिगड़ैल पहले से ही थे अब इन लड़कियां को आज डराया धमकाया बहकाया जा रहा है नकल करने को मजबूर आजकल एकल परिवार और एकल हो गया मां कहीं बाप कहीं खुद कहीं तो पत्नी कहीं इसे क्या कहें घर परिवार या महज एक व्यक्ति खाने में मिलावट, पानी साफ नहीं , हवा का प्रदूषण कोई भी माफ नहीं ग्लोबल फूड क्राइसिस वाटर क्राइसिस ग्लोबल वार्मिंग का बढ़ता यह खटका सिस्टम लगता है पूरा का पूरा भटका भर गया भर गया पाप का मटका यह तो सभी चाहते हैं कि समाज में सुधार की बहुत जरूरत है आज कई भगत सिंह पैदा हों फिर से मगर हों पड़ोसियों के यहां हमारे बच्चों को तो ट्यूशन से फुर्सत ही कहां है? 2/5/08 ********* 128 गुर्दे का गुर्दा किडनी लगवाने वाले विदेशी मूल के किडनी देने वाले सभी देसी फूल थे बीच में एजेंट हैं साथ में डॉक्टर उसूल के जिसके गुर्दे फेल हो गए मरने को है दूसरा जीवन देना हम सबका फर्ज है गरीबी के चलते किडनियां फेल न हों उनको भी बचाना मानवता के खाते दर्ज है जिसे गुर्दा चाहिए था उसे गुर्दा दिलवाया भूख के कारण दोनों गुर्दे मरने को थे उनमें से एक गुर्दा तो बचा ही दिया दानी गुर्दे से एक और मानव बच पाया काफी लोगों को रोजगार मुहैया करवाया एजेंटों का जाल बिछा कर चुपचाप पुण्य किया गुर्दा लेने और देने का कानून सख्त इतना इससे बचने का प्रयास करना पड़ता कितना जरा सोचो तो सही दिमाग पर जोर देकर विदेशी को अपने ही देश में अपने लिए महज एक गुर्दा भी क्यों नहीं मिला भारत देश महान का गुर्दा उसे क्यों भाया पैसे का खेल है यहां पर मेरे यारों इसी कारण बदेशी देशी गुर्दा खरीद पाया इसके लिए नेता अफसर पुलिस के बिक गए बस कीमत की बात थी यारो। ******* 127 क्या है यह विकास या विनाश फिर भी हमें तो यही है आस जिनका सम्मान छीन लिया गया जिनकी अस्मिता तार तार कर दी गई वह एक दिन इकट्ठे होकर पूरा हिसाब मांगेंगे और हिसाब करके हिसाब सरएक नई दुनिया बनाएंगे ******* 126 कीमत बढ़ेगी महिलाओं की संख्या कम होगी तो महिलाओं की कीमत बढ़ जाएगी यही मानते और सुनते आए थे मगर यह क्या है? मुर्रा भैंस की कीमत एक लाख बिहारी बहु मिले पांच हजार में हर रोज भारत में क्या होता है मालूम है आपको ? रोजाना चौबीस की चढ़ती है बलि दहेज की छियासी की लुटे है हर रोज आबरु चार सौ अस्सी से हो छेड़छाड़ पैंतालीस फीसद के पति करें पिटाई पचास प्रतिशत गर्भवती महिलाएं जिनपर हिंसा करके मर्द बनते हम हिंसा की शिकार सत्तर प्रतिशत आत्महत्या का प्रयास करती हैं मेरा देश महान है विश्व गुरु बनाने का आह्वान है। ******** 125 विश्व बैंक विश्व बैंक हितैसी बनकर आया रक्षक भक्षक कैसे बन जाता है इसने हमें समझाया गरीबी और बेकारी खत्म होने की आस बंधी 15 साल के भीतर जवान बेटे की लाश उठी बदेशी कंपनी आ गई हमने पूरे दरवाजे खोल दिए विदेशियों के साथ मिल गए देसी भी घी के दीए जल रहे उनके हमारे घर घुप अंधेरा है गुरबत की जंजीर जकड़ रही है हमें वहां सब कुछ शाइनिंग है ******** 124 ब्रह्मांड बेअंत ब्रह्मांड ऊपर कब धरती और ग्रह आए इसके बारे में दो विचार कदे कदीमी चलते आए एक विचार यों कहता पदार्थ से बनी जगत हमारी ज्ञान विज्ञान ने खोज की कैसे उपजी धरती प्यारी डार्विन की खोज भारी विकास सिद्धांत समझाए कैसे हुआ विकास हमारा मानव संसार जान रहा तर्क और विवेक के साथ कुदरत को पहचान रहा सच्चाई खोज विज्ञान रहा एक सैल के जीव बताए इस धरती पे संतुलन ये कहते कुदरती बैठता आया जीवन निर्जीव कैसे पनपे गया पूरा हिसाब लगाया हर बात पे सवाल उठाया सबके जवाब ढूंढना चाहे अपने पर विज्ञान आज सवाल दर सवाल उठाए समाज में क्या और क्यों हुआ जवाब ढूंढना चाहे रणबीर साथ कलम चलाए सोच करछंद बनाये ******** 123 पृथ्वी अपना संकट ये आज सबको सुनाती है चारों तरफ से हमला अस्तित्व बचाना चाहती है हरियाणा की धरती से गिद्ध खत्म हुए जा रहे मोर भी जगह-जगह पर आज मरे हुए हैं पा रहे कैंसर बढ़ते जा रहे आज हमें समझ ना आती है । जमीन हमारे खेतों की बांज होती जा रही आज फसल सब कुछ करके भी नहीं बढ़ पा रही आज बीमारी क्यों छा रही आज जमीन भी बिक जाती है। बाजारू विकास के तले टिकाऊ विकास खो गया कैसा दोहन कुदरत का देखो चारों तरफ हो गया बीज बिघन के बो गया धरती की हद छाती है। सामाजिक सूचक हमारे बहुत हो गए खराब आर्थिक सूचक से काम नहीं चलेगा जनाब लिख रहे हैं ऐसी किताब जो सब भेद बताती है ******* 122 विश्व बैंक विश्व बैंक हमारा रक्षक हमने रक्षक माना इसको। निकला यह पूरा ही भक्षक अनुभव से जाना इसको। गरीबी और बेकारी सबके खत्म होने की आस उठी मगर पन्दरा साल के भीतर जवान बेटे की लाश उठी विश्वबैंक के कान हों तो गरीब की व्यथा सुनाना इसको। शिक्षा जगत में गुणवत्ता का इसने ही प्रचार किया जैसी शिक्षा थी अपनी उस पर जमकर प्रहार किया महंगी शिक्षा गुणवत्ता नहीं इतना तो बताना इसको। स्वस्थ जगत का रंग बदला बड़े अस्पताल ले आए मेरे जैसे गरीब गुरबा तो इनके अंदर नहीं घुस पाए अपोलो फोर्टिस की कल्चर ये जरा समझाना इसको। बहुराष्ट्रीय कंपनियों का यह रक्षक असल में पाया मुखौटा हमारी मदद का रंग रंगीला इसने लगाया रणबीर का पैन खोसने का ना मिला बहाना इसको। ******* 121 दोहरापन दोहरापन जीवन का हमको अंदर से खा रहा । एक दिखे दयालू दूसरा राक्षस बनता जा रहा । चेहरों का खेल चारों तरफ दुनिया में फैल रहा , मुखोटे हैं कई तरह के कोई पहचान नहीं पा रहा। सफेद मुखौटा काला चेहरा काम इनके काले हैं बिना मुखोटे का तेरा चेहरा न किसी को भा रहा। कौन सा मुखौटा गुजरात में करतब दिखा रहा ये जनता को बहला धर्म पर कुर्सी को हथिया रहा । धार्मिक कट्टरता का चेहरा प्यारा लगता क्यों है मानव से मानव की हत्या रोजाना ही करवा रहा। कौन धर्म कहता हमको घृणा का मुखौटा पहनो खुद किस झोपड़ी में आग खुदा जाकर लगा रहा। राम भी कहता प्यार करो दोहरेपन को छोड़ दो अब रणबीर भी बात वही दूजे ढंग से है समझा रहा।।। ******* 120 दोस्त पास रहकर भी दूर रहना कोई सीखे तुमसे बिना कहे बहुत कुछ कहना कोई सीखे तुमसे लालच व भोग का बाजार जकड़े हुए हैं हमें बाजारी दुनिया से कहना कोई सीखे तुमसे हर ईंट के नीचे आज बैठा बिच्छु दिखाई देता है बिच्छूओं के दंश न सहना कोई सीखे तुमसे माया जाल फैला है यहां झूठ और मक्कारी का इस जाल की आग में न दहना कोई सीखे तुमसे सोने पर यह रांग का पानी चढ़ा कर बेचते देखो कैसे पहचाने असली गहना कोई सीखे तुमसे वैश्वीकरण के तूफान में सब कुछ वह चला है इस तेज तूफान में न बहना कोई सीखे तुमसे

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