Wednesday, June 12, 2024
29 से 20
29
तपती लू साईकिल का सफ़र
फेस बुक की बन गयी खबर
न बर्फ का पानी न ही फ्रीज़
बिजली का पंखा बिजली का
बार बार कट बनी बात जबर
सारे दिन की दिहाड़ी सौ रुपे
चले जा रहे है हम अंधी डगर
क़िस्मत में यही लिखा बताया
सुन कर बस कर लिया सबर
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28
मत कहो की तुम्हे हमसे प्यार हो गया
गर था तो इतनी जल्दी कहाँ खो गया
प्यार तो सोनी महीवाल का बताते यारो
कचा मटका भी उनके प्यार पे रो गया
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27
के करूँ
क्या ठीक है क्या गलत है कौन समझाए
क्या करें क्या ना करें ये कौन बतलाये
सही काम करके जीना चाहता हूँ मैं
कहीं भी सही काम नहीं पाता हूँ मैं
बस सर पकड़ कर बैठ जाता हूँ मैं
सोचता हूँ कोई आकर के मुझे उठाये---------
काले काम काले धंधे बुला रहे हैं
इनमे कई लोग खूब कमा रहे हैं
मुझे भी यही रास्ता दिखा रहे हैं
डर लगता है मुझको कोई ढाढस बंधवाये ------
मेरे जैसे बहुत काले अंधेरो में खो गए
गलत रहो के आदि बहुत साथी हो गए
परिवार भी बस दो चार बार रो गए
बिना काले के हमारा पेट कैसे भर पाए -----
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26
आज की जरूरत हम नहीं जानते
अपनी शकल को भी नहीं पहचानते
मशीन बन गया है आज का इंसान
इस सचाई को हम क्यों नहीं मानते
रणबीर
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25
जो धर्म हमें घृणा से पूरा भरदें
मनुष्य से मनुष्य को अलग करदें
आपस में हमको जो लडवाते हों
धर्म के ठेकेदारों को बचाते हों
जो देशो को ही बाँट कर धरदें
ऐसे धर्मों के बारे क्या कहूँ मैं ?
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24
वायदे करके इनको पूरी तरह हमने निभाया है
करके वायदे तोड़ दिए ये तुमने करके दिखाया है
चलो कोई मजबूरी होगी वायदे नहीं निभा पाये
प्यार तो तुम्हें हमसे था ही छिप नहीं पाया है
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23
बड़ा भोला बड़ा सादा बड़ा सच्चा है।
तेरे शहर से तो मेरा गाँव अच्छा है॥
वहां मैं मेरे बाप के नाम से जाना जाता हूँ।
और यहाँ मकान नंबर से पहचाना जाता हूँ॥
वहां फटे कपड़ो में भी तन को ढापा जाता है।
यहाँ खुले बदन पे टैटू छापा जाता है॥
यहाँ कोठी है बंगले है और कार है।
वहां परिवार है और संस्कार है॥
यहाँ चीखो की आवाजे दीवारों से टकराती है।
वहां दुसरो की सिसकिया भी सुनी जाती है॥
यहाँ शोर शराबे में मैं कही खो जाता हूँ।
वहां टूटी खटिया पर भी आराम से सो जाता हूँ॥मत समझो कम हमें की हम गाँव से आये है।
तेरे शहर के बाज़ार मेरे गाँव ने ही सजाये है॥
वह इज्जत में सर सूरज की तरह ढलते है।
चल आज हम उसी गाँव में चलते है.................. उसी गाँव में चलते है..... Akshay Ohlan
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22
अब हालत बदलने होंगे ग़म का बोझ उठाने वाले |
वरना देते ही जायेंगे दुःख दिन रात ज़माने वाले |
मजलूमों को बाँट रहे हैं परम्पराओं के बहाने करके
इस साजिस ही में शामिल हैं वे नफरत फ़ैलाने वाले |
दुनिया पर कब्ज़ा है जिन का वो उस के हक़दार नहीं हैं
उनसे अब कब्ज़ा छीनेंगे सब का बोझ उठाने वाले |
पत्थर दिल लोगों से अपने जख्मों को ढांपे ही रखो
खुद को हल्का कर लेते हैं सबको जख्म दिखाने वाले |
कोई किसी का साथ निभाए इतनी फुर्सत ही किसको है
अफसानों में मिल सकते हैं अब तो साथ निभाने वाले
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21
दर्द सबके एक हैं
मगर हौंसले सबके अलग अलग है
कोई हताश हो के बिखर गया
तो कोई संघर्ष करके निखर गया !
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20
सोच सोच कर
सोच सोच कर घबरा जाता हूँ मैं
अपने आप को अकेला पाता हूँ मैं
एक नयी दुनिया का सपना मेरा है
यहाँ क्या मेरा है और क्या तेरा है
इंसानियत पैदा की है समाज ने
हैवानियत पैदा की है दगा बाज ने
हैवानियत ख़त्म हो है यही सपना
इंसानियत बढे यही लक्ष्य अपना
मनकी शान्ति की खोज में धर्मात्मा
खोजते खोजते खोज लिया परमात्मा
अपनी शान्ति पाई हमारी लूट पर
हमारी शांति भगवन की छूट पर
भगवान भी इंसान की खोज कहते
हम तो भुगतें वो करते मौज रहते
जिस दिन ये चालबाजी भगवान की
समझ आयेगी तो मुक्ति इन्सान की
सोचता हूँ जितना उतना ही भगवान
नजर आता है मुझको तो बस शैतान
मेरे लिए तो मेहन त इमानदारी
उनको लूट की दी उसने थानेदारी
सबसे पहले होगी बगावत मेरी
सामने लायेगी उसकी हेरा फेरी
जग नहीं है सोता उसकी हाँ के बिना
घोटाला कैसे होता उसकी हाँ के बिना
मंदिरों में हजारों टन सोना जमा है
यहाँ भूख से मौतों का लगा मजमा है
लोगो ने चढ़ावा चढ़ाया है मंदिरों में
चढ़ावे तेन मौज उड़ाया है मंदिरों में
महिला को दासी बनाया है मंदिरों में
गरीबों को गया भरमाया है मंदिरों में
मन की शांति नहीं मिली है मंदिरों में
इंसानियत आज हिली है मन्दिरों में
बुद्ध ने नया रास्ता खोजा मन शांति का
भगवान को नाकारा दर तोडा भ्रान्ति का
मार्क्स ने धर्म को अफीम बताया था
गरीब किया आदि हमें समझाया था
पूंजी का खेल सारा है पूंजीवाद में
इसका जवाब तो है समाजवाद में
सोचता समाजवाद कैसा हो आज का
क्या रिश्ता होगा चिड़िया और बाज का
कई सवाल हैं जिनके ढूँढने जवाब
महात्मा ने नहीं हमें ढूँढने जनाब
रंग भरने हैं समाजवादी समाज में
सब की हिस्सेदारी के सही अंदाज में
"रणबीर "
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