Wednesday, June 12, 2024
19 से 10
19
*पानी आकाश से गिरे तो........बारिश,*
*आकाश की ओर उठे तो........भाप,*
*अगर जम कर गिरे तो...........ओले,*
*अगर गिर कर जमे तो...........बर्फ,*
*फूल पर हो तो....................ओस,*
*फूल से निकले तो................इत्र,*
*जमा हो जाए तो..................झील,*
*बहने लगे तो......................नदी,*
*सीमाओं में रहे तो................जीवन,*
*सीमाएं तोड़ दे तो................प्रलय,*
*आँख से निकले तो..............आँसू,*
*शरीर से निकले तो..............पसीना,*
*और*
*प्रभु के चरणों को छू कर निकले* *तो.........................चरणामृत*
*( आज विश्व जल दिवस पर समर्पित )*
*Save Water💧Save Life।* *💧💧पानी को जरूर बचाये💧💧*
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दिन आ गए अच्छे
पा के खाखी निकर कच्छे
बंदियां उत्ते गऊंआ बच्छे
गां दा मूत पिलाऊंदे ने
मुर्ख खूब बनाऊंदे ने
सानु बढदे फिरन पतंदर
दसदे हनुमान है बंदर
वोटां वेले राम दा मंदर
मुडके राम भुलाऊंदे ने
मुर्ख खूब बनाऊंदे ने
जाट आरक्षण ल्याके
रक्खे सारे लोक लडाके
भाईचारे नु तुडवाके
आपस विच लडाऊंदे ने
मुर्ख खूब बनाऊंदे ने
युग विज्ञान दा आया
ऐहना तर्क नु आ दबाया
आके गीता विच्च उलझाया
गीता सार पढाऊदे ने
मुर्ख खूब बनाऊंदे ने
डॉ०फूल सिह
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18
पैसा छाया चारों तरफ आज के संसार में
रिश्ते नाते टूट रहे है आज के परिवार में
भाई का भाई दुश्मन जहाँ में बना हुआ है
आरक्षण खाप का मसला आज तना हुआ है
मानवता पीछे रह गई धर्म के प्रचार में ।
भाई चारा मेलजोल चीज विरली हो गई
सादगी सच्चाई जाणे कहाँ सब खो गई
सब कुछ बिक रहा आज इस बाजार में ।
सिस्टम हमारा ये बिलकुल खोखला हो रहा
अविश्वास के बीज हर जगह पर वो बो रहा
बहोत से भ्रष्ट नेता छाये राज दरबार में ।
विषमता के हर तरफ ये अम्बार लगे हैं
खाईयां बढ़ रही हैं ये रिश्ता बेकार लगे हैं
कितना अकेला हुआ मानव घर परिवार में।
किसान कर्ज में डूबा फांसी खाने को मजबूर
निठल्ला ऐश करे देखो सिस्टम का दस्तूर
अच्छे दिन आएंगे बीता समय इंतजार में ।
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17------------------------------------------
दुनिया को बदलने का बहाना तुम्हारा
अब समझ में आ गया हमको यारो
अपने वजूद के लिए ये जुमला अपनाया
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--16-----------------------------------------
दुःख होता है ये देख कर हमको यारो
हमें जिन्होंने मार्क्सवाद सिखाया था
वही उदारीकरण में उदार हो गये देखो
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15
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इंसानियत और मानवता का
सही और असली रूप ढूँढते
ढूँढते समाजवाद के दरवाजे
पर आ पहुंचे और बचा पाये
कुछ हिस्सा अपनी मानवता का
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14
यही रफ़्तार रही ज़माने की ताऊ
तो इंसानों की जगह होंगे ये हाऊ
खुदगर्जी चुगलखोरी खुसामद की
मौज होगी हर चीज यहाँ बिकाऊ
अमेरिका और कोर्पोरेट छाया देखो
भारत बनाया इन्होंने बैल हिलाऊ
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13
दो हजार बीस तक
गाँव कस्बों को ना देखिये
बड़े बड़े शहरों की फ़ैली गंदी
बस्तियों की तरफ ना देखिये
पाश इलाकों में बनी ऊंची
इमारतों को ही अब देखिये
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12
गरीब परिंदा उड़ान में है
तीर अमीर की कमान में है
है डराने को मारने को नहीं
मरा तो अमीर नुकसान में है
जिन्दा रख कर लहू चूसना
अमीरों के दीन ईमान में है
खौफ ही खौफ है जागते सोते
लूट हर खेत खलिहान में है
मरने न देंगे न जीने देंगे
sajish poonjee mahan में है
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11
अपमान सहें जाओ रै पर बोलियो मतना।।
नाश करण लागरे थारा मूंह खोलियो मतना ।।
अपने अपने में मग्न हो चुप चाप झेल रहे
गलत होंते देखें जाओ पर सोचियो मतना।।
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10
कुछ नए बन रहे कुछ पुराने बने
हर कदम पर यहाँ कैदखाने बने
किस तरफ से चली गोलियां क्या पता
किन्तु हर बार हम ही निशाने बने
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