Wednesday, June 12, 2024

160 se 168

168 जिन्दगी का सफ़र स्कूल से आगे बढ़कर फिर कालेज में जाना होगा इसके सपने बहोत बार देखे थे मैंने कोनसे कालेज में दाखिला हो यह भी कई बार सोचा था मैंने एक साल पहले सोचना शुरू किया पहले दिन का पहनावा क्या होगा हेयर स्टायल पर भी नजर डाली थी क्या सायकिल पर ही कालेज जाना होगा या फिर स्कूटर का जुगाड़ करेंगे घर की हालत जुगाड़ की भी नहीं है इसी उधेड़ बुन में गुजर जाता है पूरा का पूरा दिन मेरा जुगाड़ पर आखिर एक दिन पाँच सात लोग आये आव भगत हुई मेरे से भी पूछा कोनसी क्लास पास की है बेटी दूसरा सवाल था कितने नंबर आये नंबर बताये मैंने धीमे से ही सही नजरें मुझे घूरती सी महसूस हुई जैसे बकरे को घूरती हैं मारने से पहले हर कसाई की नजरें और फिर हलाल कर दिया जाता है बेचारा बकरा मुझे क्या पता था कि मेरा भी हलाल होने का वक्त आ गया है हाँ एक महीने बाद ही मेरी शादी कर दी गयी एक बेरोजगार के साथ दो बेरोजगारों कि दुनिया के सपने मैं नहीं देख पाई क्योंकि अँधेरे के सिवाय कुछ दिखाई नहीं दी रहा था भूखे घर कि आ गयी हम क्या करेँ ? ये दिन देखने के लिए क्या छोरे को जन्म दिया था ? प्यार मोहबत बेहतर जिन्दगी ये सब अतीत कि बातें थी घर भी तंग सा दो ही कमरे साथ में भैंस व बछिया का भी सहवास रहता था चौबीस घंटे समझ सकता है कोई भी कि दो कमरों में छः सात सदस्यों के परिवार का कैसे गुजारा होता है ! फुर्सत ही नहीं होती एक दूसरे के लिए चोरों कि तरह मुलाकातें होती हैं हमारी बस जीवन घिसट रहा है हमारा एक दिन सोचा इस नरक से कैसे छुटकारा मिले ? मगर उसे ताश खेलने से फुर्सत कहाँ घर खेत हाड़ तोड़ मेहनत और तान्ने यही तो है जिन्दगी हमारी हमारे जैसे करोड़ों युवक युवतियां हैं कभी कभी जीवन लीला को ख़त्म कर लेने का मन बनता है फिर ख्याल आता है इससे क्या होगा दो चार दिन का रोना धोना फिर खत्म यह सिलसिला यूंही चलता रहेगा आगे इस अँधेरे को कैसे ख़त्म किया जाये ? कैसे रौशनी कि किरण हम तक भी पहुँच सके यही तो यक्ष प्रश्न है बहुत बार सोचा कई बार सोचा है मगर रास्ता नजर नहीं आता है हमें बस इसी कशमोकश में जीवन किसी तरह गुजर रहा है हमारा जीवन सरक रहा है हमारा ! पूजा पाठ बालाजी कि सेवा सब कर के देख लिया मगर सब मन की शांति की बात करते हैं कोई भी रोटी और रोजगार की बात नहीं करता आप ही बताओ क्या करेँ हम ? ********* 167 पिछले चार-पांच साल से मौसम का मिजाज बदलता जा रहा है इसका सबसे अधिक असर किसानों पर पड़ रहा है सूखे के लंबे दौर लगातार बाढ़ कम होती यह अनियमित वर्षा भयानक ओलावृष्टि होना टिड्डीयों का अचानक अमला किसानों की कमर तोड़ दी है हालांकि सामुदायिक प्रयास रास्ता दिखा सकते हैं मगर उनकी रक्षा के लिए सरकारी समर्थन और संरक्षण बहुत जरूरी है। इससे किसान बचेगा तो उद्योग बचेगा उद्योग बचेगा तो भारत महान बचेगा जय हिंद 2008 ******** 166 दोस्त पास रहकर भी दूर रहना कोई सीखे तुमसे बिना कहे बहुत कुछ कहना कोई सीखे तुमसे लालच व भोग का बाजार जकड़े हुए हैं हमें बाजारी दुनिया से कहना कोई सीखे तुमसे हर ईंट के नीचे आज बैठा बिच्छु दिखाई देता है बिच्छूओं के दंश न सहना कोई सीखे तुमसे माया जाल फैला है यहां झूठ और मक्कारी का इस जाल की आग में न दहना कोई सीखे तुमसे सोने पर यह रांग का पानी चढ़ा कर बेचते देखो कैसे पहचाने असली गहना कोई सीखे तुमसे वैश्वीकरण के तूफान में सब कुछ वह चला है इस तेज तूफान में न बहना कोई सीखे तुमसे ********** 165 रांची के रास्ते में काफी बातें हुई अलग-अलग ढंग से सांग पर भी बातचीत हुई गांव में काम करने की रणनीति क्या हो और कार्य नीति क्या हो? इस पर भी काफी बातचीत हुई पानीपत एक बार फिर चर्चा में आया Literacy के बाद जो मांस कांटेक्ट बने उन्हें कैसे कंसोलिडेट करें हम नहीं तय कर पाए अब आगे कैसे बढ़ें ? ********* 164 दूसरी दुनिया संभव है सड़कों पर मजदूर आए थे दूर-दूर से पूरे भारत देश के साथ ही बुद्धिजीवी आए थे कोई इंजीनियर कोई डॉक्टर कोई कोई समाजशास्त्री 'सब रंगों का समावेश, भारत देश हमारा देश' 'बिना महिला सहयोग के हमारा विकास अधूरा है' ' साक्षरता हम वंचितों का एक पैना सा हथियार है' इन सब नारों की गूंज सुनाई दी रांची शहर में एक नई दुनिया की बात कई तरह से की गई वहां जहां अमीर गरीब की जात गोत और नात की ना बराबरी लिंगानुपात की जहां उच्च और नीच की जहां ज्ञान के बंटवारे की जहां बीमारी के इलाज की असमानताएं खत्म हो जाए मानव मानव को न चूसे जिस दुनिया में वह दुनिया संभव है हम सब की एकता के दम इसे लड़कर हासिल किया जा सकता है । लगता बड़ा आसान है मगर उतना ही मुश्किल काम है यह- कैसे अमीर ने जाल फैलाया परंपरा का इज्जत का प्राचीन संस्कृति का इस या उस मजहब का और बांट कर रख दिया हमको और आपको इस चाल को जिस दिन हम समझ गए तो फिर दूसरी दुनिया का सपना हमारा जल्दी बहुत ही जल्दी पूरा होगा जरूर होगा। रांची 20.12.08 ********* 163 अमरीका के बारे में क्या जानते हो ? साफ़ सफाई है ऊंची इमारतें बिजली मजाल की गुल हो जाये काम करवाने का पैसा नहीं देना पड़ता है बहुत उन्नतिशील है पशूओं को गेहूं खिलाता है फिर पशुओं को खुद खाता है छोटी मछलियों को पालता है फिर बड़ी मछलियों को खिलाता है इससे भी जब काम नहीं चलता तो आतंक फैलाता है या फिर फैलवाता है युद्ध करता है युद्ध करवाता है हथियार दोनों को बेचता है अमरीका जैसे अब पाकिस्तान और हिंदुस्तान दोनों को बेच रहा है आतंक के बहाने रोटी नहीं अपने परोंठे सेक रहा है अब पाकिस्तान हिंदुस्तान लड़ें या न लड़ें उसने तो अपने हथियारों का सौदा कर ही लिया इन चालों को समझना है मुश्किल दिमाग हो तो समझें चाल हम इसे तो गिरवी रख दिया हमने अपने भगवान या खुदा के पास वही सोचते हैं हमारे लिए सोचना है तो अपने तौर पर सोचना ही होगा एक दिन उस दिन अमरीका के बारे बहुत कुछ जान चुके होंगे हम । 2008 ******** 162 अलग-अलग रंगों का ये हिंदुस्तान हमारा है हिंदू मुस्लिम सिख इसाई अनोखा भाईचारा है मजहबी लोग लड़ाते हमको भाईचारे को ललकारा है पिसता गरीब बेचारा है आतंक घृणा नहीं चाहिए बच्चा बच्चा पुकारा है लिंगभेद पर शरमाओ तो मानव बना हत्यारा है आदिवासी सब उजाड़ दिए कैसा विकास तुम्हारा है युवक-युवती भटका दिए हैं मुश्किल हुआ गुजारा है महिला का जीना मुश्किल बाजार में इसे उतारा है बच्चों की कुछ ना पूछो पूरा जीवन उधारा है कुपोषण ने मारा है एक तरफ शाइनिंग है दूसरी तरफ अंधियारा है दो दुनिया एक ही जगह कैसा अजब नजारा है। 20.12.2008 ********** 161 हमारे देश की सेहत की चर्चा पूरी दुनिया में हो रही है दूसरे देशों के लोग यहां पर इलाज करवाने आ रहे हैं अपोलो सपोले पांच सितारा अस्पतालों का बोलबाला है मेडिकल टूरिज्म का कमाल है जनता इलाज के लिए रो रही है विश्व बैंक का हरेक देशवासी पर तीस हजार सात सौ छिहत्तर का खर्च बताया जा रहा है आज प्रति व्यक्ति स्वास्थ्य पर खर्च भारत में बहुत कम किया जा रहा फिर भी सेहत वान होने का हर रोज हम भरते रहते दम कांगो जहां 10 साल से कोई सरकार नहीं बताई वहां से भी कम खर्च हमारा देश सरकार ढ़ो रहा है दूसरे विकसित देशों में भी सेहत पर 80% खर्च सरकार करती कहते हैं भारत देश में बस 20% खर्च करे है सरकार हमारी अमीर तो पैसा फैंक करवाएं जहां चाहे वहां से उपचार गरीब क्या करे कहां जाए जब हो जाए वह बीमार? 21.12.2008 ********* 160 याद कर जुलम तेरा आहें भरता है गरीब हर सांस के साथ संघर्ष करता है गरीब मौत एक ऐसी चीज है जिसे आना ही है काम की खिंचाई में रोज मारता है गरीब

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