Wednesday, June 12, 2024

79 से 70

79 पदार्थ परम सत्य है इससे बना संसार बताया है इसका विकसित रूप आदमी जिसने समाज बनाया है मानव के अंदर सब कुछ आत्मा इसका हिस्सा है बाहरी ताकत स्वर्ग नर्क ये सब झूठा किस्सा है पदार्थ के गुणों ने दुनिया को आगे बढ़ाया है पदार्थ के अंदर निरन्तर एक गति देती दिखाई यही गतिशीलता नए गुणों को जन्म देती बताई पदार्थ का विकास होता प्रकृति नियम रचाया है ******** 78 हरियाणा विकास मॉडल बना है ये विकास में हरियाणा नम्बर वन हो रहा कैसे बस कुछ ना पूछो भाई पिछलों को सबको धो रहा सब ही निडर घूम रहे हैं यहाँ ये भ्रष्टाचार यहाँ से खो रहा शिक्षा ने उचाईयां छू ली हैं बहुत उम्दा और कीमती है जिसका भार गरीब ढो रहा सेहत मान और पहलवान दुनिया में किया है गुनगान भले अनीमिया और ज्यादा गर्भवती औरत को डुबो रहा हरियाणा नम्बर वन हो रहा फसल के दाम सबसे ज्यादा मिलते हैं निठ्ठले किसान को जमीन बेचो फायदा उठाओ ये मंत्र दिया है हर इंसान को फिर भी क्यों किसान रो रहा यह कोई नहीं जानता है कि पिछले पांच साल के अन्दर हमने विश्व बैंक से कितना लोन लिया है बताये तो कोई बीएड कालेज धड़ाधड़ खुले फीसें मनमर्जी की ली गयी शिक्षक और छात्र भी बैठ के कक्षा में रोज मजे से सो रहा ******** 77 बड़ी मुश्किल से ये आंसू छिपाए हमने हँसना चाहा झूठे ठहाके लगाये हमने तुमको मालूम ये शायद हो के ना हो तुम्हारे जाने के बाद आंसू बहाए हमने प्यार किया हमने नहीं छुपाया कभी दिल के तराने थे तुमको सुनाये हमने तेरे साथ इन्कलाब के जो नारे लगाये यारो अब तलक नहीं हैं भुलाये हमने राह का साथ छोड़ गये अफ़सोस तो है पल याद हैं वो जो संग बिताये हमने जानते हैं आप हमें नहीं भूल सकेंगे एक अनुभव बस बिंदु दिखाए हमने हादसा नहीं एक सच्चाई है ये प्यार ग्लानी नहीं रास्ते नए बनाये हमने ******** 76 मैडम सीतारमन ने संसद में यह था फरमाया देखो लोगों की आए दोगुनी कर दी इसका बिगुल बजाया देखो जिंदगी बहुत बेहतर बना दी दुनिया में नाम कमाया देखो दस ट्रिलियन की तीसरी अर्थव्यवस्था इसे बताया देखो पिछले दस साल की तरक्की की घंटी कमाल की बजी देखो मुख्यधारा चाटुकार मीडिया ने भी छोड़ी नहीं कोई कमी देखो बार बार झूठ की बहार जनता के एक हिस्से को जमी देखो केंद्रीय रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर इन बातों को नहीं मान रहे रघुराम राजन इन सभी दावों को बता झूठा बड़ा बखान रहे आईएमएफ जैसी संस्थाएं भी बहुत से सवाल तान रहे तरक्की में भी आत्म हत्याओं के आंकड़े कर परेशान रहे ********** 75 नई दुनिया - प्यार की दुनिया नई दुनिया का सपना हम दोनों ही देख रहे हैं।। सोचा अपने अपने ढंग से कहते हुए झेंप रहे हैं।। 1 झेंप मिटी साथ चले सोचा जीवन सफल हो गया अलग अलग जातें हमारी जिनका मतलब खो गया ब्यां नहीं कर सकते सब हम पर उंगली टेक रहे हैं।। 2 प्रेम विवाह को समाज में देखा क्या दर्जा मिलता खूंखार हो जाता है समाज देख कर ही दिल हिलता बिना बात की बात में निकाल मीन मेख रहे हैं।। 3 तुम्हारी जिद प्यार का विरोध तो जिद हमारी भी है प्यार को परवान चढ़ायेंगे इसमें इज्जत तुम्हारी भी है जात के तवे पर देखो ठेकेदार रोटी सेंक रहे हैं।। 4 जातें अलग अलग हमारी मगर मानवता है भरपूर जाति की सीमा मालूम है इसके बन्धन नहीं मंजूर एक अपना सा घर बनाएं यही इरादे नेक रहे हैं।। ******** 74 तुममें शिकश्त और जिल्लत का अहसास बाकी पता हमें तुममें अभी नफरत का अहसास बाकी कितना ही दिखावा करो अपनी सादगी का तुम खूब तुममें देखा है हिमाकत का अहसास बाकी मुहब्बत से कहते हैं दौलत का कोई वास्ता नहीं तुम्हारे दिल में अपनी दौलत का अहसास बाकी कितना ही अपमान करो तुम बार बार ये हमारा रहेगा हममें फिर भी कयामत का अहसास बाकी हमारी शराफत को करदो बिल्कुल तार तार तुम रणबीर को रहेगा ही शराफत का अहसास बाकी ******** 73 कहते तुम्हारी क़िस्मत में खोना सोचो तो यारो क़िस्मत का खेल मान कर हमने इसको ढ़ोया अपने हाथों से खुद हमने बीज कीकर का बोया क़िस्मत क़ि मार को क्यों ढ़ोना सोचो तो यारो दिलो दिमाग पर मेरे तो यही सब तो छाया है आज जो कुछ भी हूँ मैं मेरे नसीब ने बनाया है औरों के खेलने का ये खिलौना सोचो तो यारो बात समझ में आ गयी क़िस्मत का खेल नहीं बिना इन्सां के चल सकती यह देखो रेल नहीं ********* 72 हर एक कदम पर हादसा होना सोचो तो यारो हमारे सिस्टम में क्यों है रोना सोचो तो यारो जो कुछ कमाया हमने छीन लिया चालाकी से किसी ने नहीं समझाया ये सब खेल बेबाकी से ********** 71 गाँव जो टिका था अन्याय पर एक दिन उसे ढहना ही था ना बराबरी के गाँव भक्तों को एक दिन यह सहना ही था बिगड़ गया गाँव का माहोल महिला सुरक्षित नहीं वहां नशाखोरी बढती जा रही ढूध दही का था सेवन जहाँ ********** 70 हमारी आह भी गुनाह कतल भी मुआफ उनके कैसे जल जाती शमां बयाँ करें भी तो कैसे करें किसने किसे तडफाया है सही हिसाब करेगा कौन ये तुम्हारी बात यहाँ मंजूर करें भी तो कैसे करें सच कहना अगर बगावत है तो हम दोषी हैं रणबीर झूठा इम्तिहाँ पास करें भी तो कैसे करें

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