Wednesday, June 12, 2024

169 से 175

175 सच के रास्ते पर चलना सीख लो त्याग क़ि आग में जलना सीख लो आगे बढ़ते रहो इस अंधी तूफान में और अंगारों पर उतरना सीख लो भगवान क़ि दया ने यहाँ पहुँचाया गिर गए खुद ही संभालना सीख लो रणबीर अनुभव चाहिए प्रकाश का आज अँधेरे से गुजरना सीख लो ******* 174 पहले वाले गाँव नहीं बीरा पहले वाले बीर नहीं रसायनिक हथियार आये पहले क़ि शमशीर नहीं वक्त के साथ बदलती इस दुनिया का दस्तूर यही कबीर रैदास सूफी संतों ने घुमा फिर ये बात कही रोहतक जो छप्पन में था बची वाह तस्वीर नहीं खाना पीना बादल गया अब ज्वर बाजरे बचे कहाँ हरयाणा नंबर वन हुआ डिस्को डांस में फ़सा जहाँ बथुआ राबड़ी खिचड़ी गौजी बची खाने में खीर नहीं कडुआ सच है बदलाव का इसे समझना जरूरी देखो देखनी होगी दिशा इसकी इसको परखना जरूरी देखो बदलाव कई तरह के होते कुछ को माने जमीर नहीं जनता हक़ में बदलाव के ये नारे बहोत उछाले हैं जनता बहकावे में आई मुंह से ये दूर हुए निवाले हैं पैनी नजर ये जनता क़ि बणी प्रहरी रणबीर नहीं ******* 173 हर एक कदम पर हादसा होना सोचो तो यारो हमारे सिस्टम में क्यों है रोना सोचो तो यारो जो कुछ कमाया हमने छीन लिया चालाकी से किसी ने नहीं समझाया ये सब खेल बेबाकी से कहते तुम्हारी क़िस्मत में खोना सोचो तो यारो क़िस्मत का खेल मान कर हमने इसको ढ़ोया अपने हाथों से खुद हमने बीज कीकर का बोया क़िस्मत क़ि मार को क्यों ढ़ोना सोचो तो यारो दिलो दिमाग पर मेरे तो यही सब तो छाया है आज जो कुछ भी हूँ मैं मेरे नसीब ने बनाया है औरों के खेलने का ये खिलौना सोचो तो यारो बात समझ में आ गयी क़िस्मत का खेल नहीं बिना इन्सां के चल सकती यह देखो रेल नहीं ********* 172 महम चौबीसी बदल रही देखो नहीं पुराणी चौबीसी वही देखो महम परंपरागत खेती में मशहूर आज परंपरा छोड़ने को मजबूर गेहूं जवार बाजरा उगाते रहे धान गरीब अमीर सब यहाँ के किसान फल व सब्जी की खेती आई देखो अपार संभावनाएं गयी बताई देखो परंपरागत खेती ख़तम होती जा रही परासंगिकता अपनी है खोती जा रही भूजल स्तर कहीं पर तो है बढ़ रहा कहीं पर भूजल स्तर ये घट रहा बेर के बाग़ महम में दिखाई ना देएँगे किन्नू की खेती ये किस्सान भाई लेंगे तीतरी गाँव टमाटर बहोत उगाता है अमरुद के बाग़ विभाग लगवाता है परंपरागत खेती क्यों छोड़ता किसा न रूढ़िवादी सब कहाँ गए फरमान -- ********* 171 कई बार सोचता हूँ तो बस सोचता ही रह जाता हूँ मैं सड़क पर रहने वाले बचों की बेमिशाल हिम्मत संकट का दौर फिर भी हंसी के पल चुरा लेना इन बचों से ही सीखे कोई उनका साहस उनकी जीवटता देखकर अचरज होता है मुझे कई बार सोचता हूँ तो बस सोचता ही रह जाता हूँ मैं ******* 170 तुममें शिकश्त और जिल्लत का अहसास बाकी पता हमें तुममें अभी नफरत का अहसास बाकी कितना ही दिखावा करो अपनी सादगी का तुम खूब तुममें देखा है हिमाकत का अहसास बाकी मुहब्बत से कहते हैं दौलत का कोई वास्ता नहीं तुम्हारे दिल में अपनी दौलत का अहसास बाकी कितना ही अपमान करो तुम बार बार ये हमारा रहेगा हममें फिर भी कयामत का अहसास बाकी हमारी शराफत को करदो बिल्कुल तार तार तुम रणबीर को रहेगा ही शराफत का अहसास बाकी ********* 169 हमारी बर्बादी हमें बर्बाद करके उनको पता नहीं क्या मिल गया ईमानदारी का दामन थामा हमारा निवाला छिन गया आदमी से आदमी की मोहब्बत कहाँ काफूर हो गयी मेहनत हमने की मगर पता नहीं कहाँ ये खो गयी दर्द हद से गुजर गया है सीना हमारा तो छिल गया मोहब्बत के गीत गाएँ कैसे चिंता हमें बीमारी की यकीं कौन करेगा इस पर मोहब्ब्त गरीब भिखारी की देख के उनके ढंग निराले मुंह हमारा है सिल गया मरने वाले हथियार लिए बैठे साधा निशाना हम पर मार न पाना मजबूरी उनकी टिका जमाना हम पर हमारे वजूद का तस्सवुर कीचड में गुलाब खिल गया तूफ़ान जो उठा समुन्द्र में अब नहीं टाला जायेगा पड़ाव अब ये हमारा मंजिल पर ही डाला जायेगा भगवन का आसरा किया पर भरोसा सारा हिल गया आर पार की जंग शुरू करना होगा स्वीकार हमें फूंक फूंक के चलना है रहना होगा होशियार हमें देख देख जुल्म उनके कलेजा हमारा छिल गया मानवता का औढ़ा मुखोटा लिया धर्म का सहारा है जात पात का जहर फैलाया निचौड़ा खून हमारा है रणबीर आज रो उठा हो छलनी उसका दिल गया *******

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