Thursday, June 20, 2024

189 से 202

202 कैसे जांचें कैसे जांचें कि कौन अच्छा है क्या सिस्टम खस्ता है ॥ सबकी अपनी अपनी ढपली विकास का वही रस्ता है ॥ जनता के बल पर ऊँचाई पाने वाले हरेक बादल को मौसम रूख बदले तो फिर पानी पानी होना पड़ता है ॥ जनता का विश्वास बार बार टूटता है यहाँ पर फिर से कमाल की बात है कि यह बार बार से देखो उठता है ॥ आंधी आती है बड़े बड़े पेड़ उखड़ जाते हैं यहाँ पे यारो कई बार पत्ता भी हिलता है तो दिल कांपने लगता है ॥ मेरे अंदर एक मुखालिफ था जो मुझसे भी लड़ता था अब या तो वह चुप ही रहता है या हाँ में हाँ करता है ॥ जनता ने इतिहास रचे हैं वो ये जानते हैं बखूबी ये इसीलिए हमको वो बरगलाने का प्रपंच रचता है ॥ ************/ 201 आज के राज में महिलाओं के खिलाफ अपराध बढती जा रही राष्ट्रीय अपराध रिपोर्ट ब्यूरो(एनसीआरबी) ये हमको बता रही दो हजार चोदा में यह अपराध दर 52.5 प्रति लाख दिखा रही । 2021 तक बढ़ कर 64.5 प्रति लाख पर यह दर जा रही । 2021 तक, दैनिक बलात्कार की संख्या भी बताई देखो यह संख्या प्रतिदिन 90 बलात्कार से ऊपर है दिखाई देखो 2017 में अपराध के 315215 से अधिक संख्य जताई देखो 2022 में यह बढ़कर 365300 से अधिक पहुंचाई देखो ************ 200 ये कमरसियेलाइजेशन देखो तेज रफ़्तार से आया पुराने की सड़ांध ने आज नई सड़ांध से हाथ मिलाया पुराने कबीलाई रिश्ते नाते आज भी हम पे हावी देखो नैतिकता को पढने बिठाया मद मस्त पीढ़ी भावी देखो ऑनर किल्लिंग की चारों तरफ पड़ रही काली छाया || फ्री लौंस यौनिक सम्बन्ध आज इस समाज में छाये रहे लीलो चमन के प्यार को ये अँधा प्यार बतलाये रहे आज यहाँ तो काल वहां बस घुमंतू जीवन अपनाया || पैसा पैसा और साथ में बदनाम मुन्नी यहाँ मशहूर हुयी दो दो पैसे को मोहताज भुखमरी यहाँ का दस्तूर हुयी शीला को बीच बाजार में है अधनंगी करके नचवाया || दोनों सड़ांध के मेल से अधखबड़ा इन्सान बना दिया सिविक समाज सभ्य समाज सपना कहके भका दिया रणबीर देख के सड़ांध मानव बहुत ज्यादा घबराया || ********* 199 कुछ नए बन रहे कुछ पुराने बने हर कदम पर यहाँ कैदखाने बने किस तरफ से चली गोलियां क्या पता किन्तु हर बार हम ही निशाने बने था क्या हमने सोचा ये क्या हो गया हमें क्यों इस चमन से गिला हो गया दिया जिसकी खातिर था हमने लहू वही मौसमें गुल क्यों खफा हो गया ******* 198 मारें जाओ धोक पत्थरों की गरीबी दूर नहीं होवे नाबराबरी और बढ़ेगी किसान जोर जोर से रोवे शिक्षा और स्वास्थ्य का भार अपनी जेब से ढोवे सरहद ऊपर जवान फौजी ज्यान यो अपनी खोवै ******** 197 पता है सामने वाला बहुत अत्याचारी है पूरी दुनिया में लूट की ये कमाई भारी है अभी संकट के दिन और बढ़ेंगे दुनिया में फिर भी संघर्ष की ये जंग जारी हमारी है *********** 196 हमारे शरीरों पर कपड़े कम से कमतर होते जा रहे हैं फिर चाहे कोई बिना कपड़े नंगा घूम रहा है तो हमारी बला से एटम बम है हमारे पास मिसाइल है दूर मार की अच्छी खासी फौज है हमारे पास फिर चाहे सामाजिक असुरक्षा बढ़ती है तो हमारी बला से पांच सितारा अस्पताल हैं सुहाने भारत देश में मैडिकल टूरिज्म फल फूल रहा है फिर चाहे लोग बिना इलाज के मरते हैं तो मरें प्लेग फैलता है तो फैले एडस दनदनाता है तो दनदनाए वेश्यावृत्ति बढ़ती है तो बड़े हमारी बला से आर्थिक स्तर पर गोवा के बाद है हरियाणा ' सेक बिछाई जा रही है तेजी से फिर चाहे लिंगानुपात में सबसे नीचे है तो क्या हमारी बला से कुछ हथियार और हों कुछ पैसा और हो गौ रक्षा हमारा धर्म है फिर शायद दलितों के घर जलाएं जाते हैं तो क्या मनुष्य मरते हैं तो मरते रहे हमारी बला से हम 2020 तक दुनिया की महाशक्ति बन सकते हैं विकास की कीमत तो अदा करनी ही पड़ेगी ऑडियोलोजी का जमाना गया क्वालिटी जीवन का जमाना आया है हमने तरक्की की है किस कीमत पर हमारी बला से कुछ साल पहले की रचना ********** 195 आज बाजार व्यवस्था की चारों तरफ गूंज बताते हैं हीरो विलेन और विलेन ये हीरो कैसे यह बन जाते हैं एंटी हीरो एंग्री हीरो का जमाना खत्म हुआ जताते हैं अब तो हीरो विलेन बन गया ऐसा फिल्मी सीरियल दिखाते हैं कल तक जो राम थे यहां रावण बनकर इतराते हैं भीतर से रावण बन गए मुखौटा राम का लगाते हैं हम भी रावण की कर पूजा दिवाली हर साल मनाते हैं। ******** 194 अब सीख लिया तुमसे मैंने नया तराना सीख लिया औरों के कन्धों पर रख के बन्दूक चलाना सीख लिया सच को झूठ झूठ को सच तुरंत बनाना सीख लिया अपनी ही तस्वीर से मैंने तो ऑंखें चुराना सीख लिया अब सीख लिया तुमसे मैंने नया तराना सीख लिया || पैसे के दम पे दुनिया में अब इठलाना सीख लिया धर्म के नाम पर जनता को खूब लड़ना सीख लिया अब सीख लिया तुमसे मैंने नया तराना सीख लिया || भूल कर गाम अपना झूठे सपने सजाना सीख लिया जीणा है तो भूलो अपने को नया फ़साना सीख लिया अब सीख लिया तुमसे मैंने नया तराना सीख लिया || सब कुछ दांव पर लगाकर पैसा कमाना सीख लिया जैसा मौसम हो मैंने वैसा बजा बजाना सीख लिया अब सीख लिया तुमसे मैंने नया तराना सीख लिया || ********* 193 शराब नहीं पीते तो क्यों इस संसार में आए तुम।। तुमने छेड़छाड़ भी न की तो क्यों न पछताए तुम ।। मारो खाओ हाथ ना आओ जीवन का दर्शन यही इस दस्तूर को दोस्त मेरे क्यों ना निभा पाए तुम।। चोरी जारी नहीं करना सीखा तो क्या खाक जवानी जेल की सजा नहीं काटी ना शाहिद भी कहलाए तुम।। दो-तीन लड़कियां नहीं भकाई रहे कोरे के कोरे क्यों समय से पीछे क्यों रहे ना अखबारों में ही छाए तुम।। एचआईवी एडस से क्यों वंचित रहे घूम रहे तुम संवेदनशील मानव को फिरते गले लगाए तुम।। ********* 192 AGLA PICHHLA अगला पिछला और वर्तमान ना इस जन्म में झूठ बोला ना कभी दुकान पे कम तोला फिर भी भगवान नाराज हुए हार्ट अटैक मुश्किल इलाज हुए मैंने सोचा मुझे क्यों कष्ट मिला मिला बताया पिछले का सिला वर्तमान का कब होगा हिस्साब अगले में मिलेगा इसका जवाब पिछला ना कभी समझ आया ना अगले बारे ही जान पाया आज की बाबत नहीं बताते वो अगले पिछले में फँसाते हैं वो दम मारो दम मिट जाएँ गम देवी देवता हमारे इनके हैं हम सवाल उठाने वाले कौन हो तम ? ******** 191 मेरा कस्सूर मेरा कसूर हमने दोनो ने मिलकर सोचा जिन्दगी का सफ़र तय करेंगे बहुत सुन्दर सपने संजोये थे प्रेम का पता नहीं ये हरयाणा क्यों पुश्तैनी दुश्मन बन गया यह सब मालूम था हमको पर प्यार की राहों पर बढ़ते गए मेरे परिवार वाले खुश नहीं थे क्यों मुझे पता नहीं चला है न तो मैंने एक गोत्र में की है न ही एक गाँव में शादी मेरी न ही दूसरी जात में की मैंने तो भी सब के मुंह आज तक फुले हुए हैं हम दोनों से देखो प्यार किया समझा फिर शादी ससुराल वाले भी खुश नहीं हैं शायद मन पसंद गुलाम नहीं मिल सकी जो रोजाना उनके पैर छूती पैर की जूती बनकर सुघड़ सी बहु का ख़िताब लेती दहेज़ ढेर सारा लाकर देती ना प्यार का खुमार काम हुआ अब जनाब की मांगें एकतरफा बढ़ी मैं सोचती हूँ नितांत अकेली अब क्या हमारा समाज दो प्रेमियों के रहने के लायक बन पाया यहाँ \ चाहे कुछ हो हम लोड उठाएंगे मगर घुटने नहीं टिकाएंगे यारो वो सुबह कभी तो आयेगी की इंतजार में ये संघर्ष जारी रखेंगे झेलेंगे इस बर्बर समाज के सभी नुकीले जहरीले तीर छाती पर ही जिद हमारी शायद यही है कसूर ********* 190 जिंदगी से महज मशीन बनी देखी जा सकती है औरत घर के अंदर और बाहर भी दबती देखी जा सकती है औरत विज्ञान ने बहुत कुछ दिया खुले हाथ है जमाने को भारत में हर रोज ही मरती देखी जा सकती है औरत गाड़ी के दो पहिए कहते औरत और मर्द दुनिया के दोनों को ही ढोती रहती देखी जा सकती है औरत दोनों ही सजाते हैं महल मगर जब ढह जाता है तब निशाना सिर्फ ये बनती देखी जा सकती है औरत कोई बदलाव नहीं मुमकिन एक पहिया की गाड़ी से चीख चीख कर क्यों कहती देखी जा सकती है औरत जमाना भी बहरा हो गया कभी सुनता ही नहीं है सुनाते सुनाते ही बस थकती देखी जा सकती है औरत जब भी समाज बदला है वह औरत की बदौलत ही पता नहीं क्यों पीछे रहती देखी जा सकती है औरत मर्द का करिश्मा देखो औरत है औरत की दुश्मन सास बहू में ये बंटती देखी जा सकती है औरत भाग्य कभी तो बदलेगा इसी उम्मीद पर जीती है ता उमर भगवान को पूकती देखी जा सकती है औरत ******** 189 कैसे जांचें कैसे जांचें कि कौन अच्छा है क्या सिस्टम खस्ता है ॥ सबकी अपनी अपनी ढपली विकास का वही रस्ता है ॥ जनता के बल पर ऊँचाई पाने वाले हरेक बादल को मौसम रूख बदले तो फिर पानी पानी होना पड़ता है ॥ जनता का विश्वास बार बार टूटता है यहाँ पर फिर से कमाल की बात है कि यह बार बार से देखो उठता है ॥ आंधी आती है बड़े बड़े पेड़ उखड़ जाते हैं यहाँ पे यारो कई बार पत्ता भी हिलता है तो दिल कांपने लगता है ॥ मेरे अंदर एक मुखालिफ था जो मुझसे भी लड़ता था अब या तो वह चुप ही रहता है या हाँ में हाँ करता है ॥ जनता ने इतिहास रचे हैं वो ये जानते हैं बखूबी ये इसीलिए हमको वो बरगलाने का प्रपंच रचता है ॥

No comments: