Wednesday, June 12, 2024
49 से 30
49
होकर मायूस नहीं यूं श्याम की तरह ढलते ही रहिए
जिंदगी एक भोर है सूरज की तरह निकलते रहिए
ठहरोगे एक पांव पर पांव तो थक जाओगे यारो
धीरे-धीरे ही सही मगर लक्ष्य की ओर चलते रहिए
*********
48
इस दिल में और उस दिल में सिर्फ फर्क इतना है
ये शीशा था जो टूट गया वो पत्थर था जो साबुत है
**********
47
मेरा कसूर
हमने दोनो ने मिलकर सोचा
जिन्दगी का सफ़र तय करेंगे
बहुत सुन्दर सपने संजोये थे
प्रेम का पता नहीं ये हरयाणा
क्यों पुश्तैनी दुश्मन बन गया
यह सब मालूम था हमको पर
प्यार की राहों पर बढ़ते गए
मेरे परिवार वाले खुश नहीं थेa
क्यों मुझे पता नहीं चला है
न तो मैंने एक गोत्र में की है
न ही एक गाँव में शादी मेरी
न ही दूसरी जात में की मैंने
तो भी सब के मुंह आज तक
फुले हुए हैं हम दोनों से देखो
प्यार किया समझा फिर शादी
ससुराल वाले भी खुश नहीं हैं
शायद मन पसंद गुलाम नहीं
मिल सकी जो रोजाना उनके
पैर छूती पैर की जूती बनकर
सुघड़ सी बहु का ख़िताब लेती
दहेज़ ढेर सारा लाकर देती ना
प्यार का खुमार काम हुआ अब
जनाब की मांगें एकतरफा बढ़ी
मैं सोचती हूँ नितांत अकेली अब
क्या हमारा समाज दो प्रेमियों के
रहने के लायक बन पाया यहाँ
चाहे कुछ हो हम लोड उठाएंगे
मगर घुटने नहीं टिकाएंगे यारो
वो सुबह कभी तो आयेगी की
इंतजार में ये संघर्ष जारी रखेंगे
झेलेंगे इस बर्बर समाज के सभी
नुकीले जहरीले तीर छाती पर ही
जिद हमारी शायद यही है कसूर
**********
47
हम आह भी भरते हैं तो हो जाते हैं बदनाम, वो कत्ल भी करें तो चर्चा नहीं होता!
*********
46
कैसे जांचें
कैसे जांचें कि कौन अच्छा है क्या सिस्टम खस्ता है ॥
सबकी अपनी अपनी ढपली विकास का वही रस्ता है ॥
जनता के बल पर ऊँचाई पाने वाले हरेक बादल को
मौसम रूख बदले तो फिर पानी पानी होना पड़ता है ॥
जनता का विश्वास बार बार टूटता है यहाँ पर फिर से
कमाल की बात है कि यह बार बार से देखो उठता है ॥
आंधी आती है बड़े बड़े पेड़ उखड़ जाते हैं यहाँ पे यारो
कई बार पत्ता भी हिलता है तो दिल कांपने लगता है ॥
मेरे अंदर एक मुखालिफ था जो मुझसे भी लड़ता था
अब या तो वह चुप ही रहता है या हाँ में हाँ करता है ॥
जनता ने इतिहास रचे हैं वो ये जानते हैं बखूबी ये
इसीलिए हमको वो बरगलाने का प्रपंच रचता है ॥
**********
45
आज का दौर हमको कहाँ लेजा रहा यारो ॥
बताओ तो सही नहीं समझ पा रहा यारो ॥
प्यार मोहब्बत नहीं बची मार काट छाई
मानवता के रिस्तों पे बाजार छा रहा यारो ॥
*********
44
शोर गुल बहुत है नहीं आवाज सुनाई देती
बनावटी ही बनावटी हर चीज दिखाई देती
कैसे रहते आज लोग अंधेरों के दरम्यान यारो
वहां की नहीं दिखाई हमको वह सच्चाई देती
हमारे बदनों में खुद उतार करके खंजर यारो
पूछते हैं लोग हमें कि राहत कैसे दवाई देती
जिद्द है ये तुम्हारी तो यही है जिद्द भी अपनी
हार ना मानेंगे यारो जीत की घण्टी सुनाई देती
*********
43
मुबारक आपका भेजना उनको सलाम यारो
हमको लगता उनका हर कदम हराम यारो
उनके दरबारों में मानवता का क्या खोजना
वहां पर तो फेकू नेता बस्ते हैं तमाम यारो
कल इनके जिम्मे था गांधी का कत्ल यहाँ
आज इनके हाथों में देश की है लगाम यारो
अन्धविश्वासी और रूढ़ियों के भगत हैं जो
आज लेकर आ रहे विकास का पैगाम यारो
*********
42
कहना बहुत आसान है मुश्किल चलना सच्चाई पर
लहर के उल्ट तैर कर ही पहुंचा जाता अच्छाई पर
बुराई की ताकत को यारो देख कर डर जाते हम
इसके दबाव में बहुत सी गलती भी कर जाते हम
आका बैठ के हँसते रोजाना फिर हमारी रुसवाई पर
मेहनत हमारी की अनदेखी रोजाना हो रही दोस्तो
चेहरे की लाली हम सबकी रोजाना खो रही दोस्तो
कहते वो हमको बेचारा जो जीते हमारी कमाई पर
बीज है खाद और खेत भी इससे फसल नहीं उगती
फसल उगती है तब यारो जब मेहनत हमारी लगती
महल बने देखो सभी तुम्हारे हम सब की तबाही पर
********
41
समाज हमको हमारा ही आईना दिखाता है
प्रतिगामी प्रगति कामी का अंतर जताता है
पतन शीलता बढ़ती जा रही चारों तरफ यारों
प्रगति कामी हर कदम पर रास्ता बताता है
पता नहीं कहां छोड़ आए हैं हम अपनी पहचानें
आज हर चेहरा अजनबी सा नजर आता है
सभी मजबूर हुए अपने अपने अंदर यारो
मोबाइल एक कमरे में अलग अलग बैठाता है
मशीन बनते जा रहे इंसान समाज में यारो
इंसानियत का बंद होता जा रहा क्यों खाता है
*********
40
सच
आज क्या हो रहा बिलकुल समझ नहीं पा रहा
एक कुछ कहता दूसरा कुछ कहता हुआ आ रहा
सच का साथ देने को यहाँ पे सब कहते हैं यारो
सच क्या है इस पे हरेक अपनी ढपली बजा रहा
कहानी को माइथोलॉजी को इतिहास बताने वालो
इतिहास और वैज्ञानिक नजर से सच ढूँढा जा रहा
********
39
आंधी चल रही ये नहीं थमीं यारो
रात की गर्द मेरे चेहरे पे जमीं यारो
कुछ ठूंठ खड़े हैं कहीं कहीं मेरे जैसे
कुछ उखड़े पड़े हैं कहीं तुम्हारे जैसे
हम सब बचें हैं इसके थपेड़े खाकर
तुम बैठ गये अपने महलों में जाकर
यह आंधी आज किसे साल रही देखो
झोंपड़ी इधर उधर उछाल रही देखो
धर्म की आँधी चलने ही वाली यारो
क्या गुल खिलेंगे उजड़ेगा माली यारो
*********
38
पुराना दौर
तेरी कलम तो चली यही बहुत है मेरे लिए
तकरार अभी तो टली यही बहुत है मेरे लिए
तेरे अंदर का गुस्सा बरकरार है अभी भी
मेरी एक ना चली यही बहुत है मेरे लिए
मुझे मालूम है तेरा इंसां मर नहीं सकता
बात है कितनी भली यही बहुत है मेरे लिए
दो पल का साथ नहीं ये मालूम हम तुमको
सुबह हुई सांझ ढली यही बहुत है मेरे लिए
मेरी चाहत मेरी इबादत है यही चाहत तुमको
फिर भी तुमको खली यही बहुत है मेरे लिए
कमी लाख सही आखिर इंसां हैं खुदा तो नहीं
मुरझाये ना खिलती कली यही बहुत है मेरे लिए
हमें मुआफ़ करो या न करो अखितयार तुम्हारे है
तुम्हारी आँखों में नमी यही बहुत है मेरे लिए
कुछ तो है जो बांधे है हमको आज तलक भी
आबाद रहे तेरी गली यही बहुत है मेरे लिए
पत्थर दिल माँ से बना ये है मालूम मुझको
पिंघली मोम की डली यही बहुत है मेरे लिए
29-08-1992
*********
37
आज का जमाना
तेज रफ़्तार ज़माने की समझां इसकी चाल हे||
नासमझी मैं उतरे बेबे म्हारी सबकी खाल हे||
1
गफलत पडे छोड़नी करा हकां की रुखाल हे
अपना गम स्कूल अपना करें इसकी संभाल हे
म्हारे स्कूल कोलेजां पै टपकै बदेशिया की राल हे
जनता एका करकै बनैगी या मजबूत सी ढाल हे
जात पात और धरम पै करां लड़न की टाल हे||
नासमझी मैं उतरै बेबे म्हारी सबकी खाल हे||
2
वैजानिक नजर के सहारे रचै नयी मिसाल हे
मानवता सिखर पर पहोंचे सजा पावें चंडाल हे
कार्य कारण की होवे फेर सही सही पड़ताल हे
क्या क्यों और कैसे बरगे उठें दिलों मैं सवाल हे
धार्मिक कटरता की हार होजयागी फिलहाल हे||
नासमझी मैं उतरे बेबे म्हारी सबकी खाल हे||
3
संघर्ष करना बहोत जरूरी ठा हाथों में मशाल हे
मानवता की करें सेवा नहीं रहे कोई मलाल हे
एक दूजे का प्राणी राखै हमेश्या पूरा ख्याल हे
आए अकेले अकेले जाना बाकि सब जंजाल हे
प्रकर्ति गेल्यें करें दोस्ती पर्यावरण हो बहाल हे |।
नासमझी मैं उतरे बेबे म्हारी सबकी खाल हे||
4
पानी की कमी नही रह्वै नहीं होंगे सुने ताल हे
भूखा कोए नहीं सोवैगा नहीं पडेंगे अकाल हे
समतावादी विचार सबके नहीं मचै बबाल हे
इन सब बातां की हमनै करनी हो पड़ताल हे
रणबीर की कलम आज बयां करै ये हाल हे।।
नासमझी मैं उतरे बेबे म्हारी सबकी खाल हे||
********
36
निर्मला
मैं एक साधारण से परिवार में पली लड़की
अपने जीवन को सार्थक बनाने चली लड़की
अनगिनत सहन की है जीवन की ये कठिनाई
गांव के मेरी कोम वालों ने इज्जत लूटनी चाही
खेतों में काम करते दलित वो थे दौड़े-दौड़े आए
तभी मेरे में ऊपर से जुल्म के बादल छंट पाए
कालेज जाने लगी तो इन्होंने मेरा पीछा नहीं छोड़ा
दूसरे गांव के लड़कों से सूत्र इन्होंने था जोड़ा
घर पर बात बताई तो कहते बंद करो पढ़ाई
कॉलेज में वूमेन सेल बात वहां भी न बन पाई
आशा और निराशा के बीच एम ए पास किया
अच्छे नंबर आए मेरे थोड़ा सुख का साथ लिया
नेट भी पास कर लिया पर नौकरी नहीं मिलती
मां कहती मेरे चेहरे पर क्यों हंसी नहीं खिलती
कैसे खिले हंसी मुझे पंचायतियो बताओ तो सही
क्या करूंआगे का राह पंचायतियो दिखाओ तो सही
प्राइवेट स्तर पर मैंने बी एड भी कर लिया है
मेरे रिश्ते ढूंढते ढूंढते घर वालों का जी भर लिया है
ना कहीं नौकरी मिल रही ना शादी हो रही मेरी
क्या नहीं दिखती तुम्हें बर्बादी ये जो हो रही मेरी
कई जगह बात चली दहेज को लेकर टूट गई
मर जाने को दिल करता आस सभी छूट गई
क्या करूं कहां जाऊं मेरी कुछ समझ नहीं आ रहा
बूढ़े मात-पिता हैं उनका दुख ना देखा जा रहा
सुनील भाई भी एम ए पास पांव से पांव भिड़ा रहा
एकेली नहीं हूँ गांव में और भी लड़कियां भुगत रही
इकट्ठी हो मिल बैठ कर सोचें हो नहीं ऐसी जुगत रही
आज नहीं तो कल सोचना तो हम सबको पड़ेगा
बनायें युवा महिलाओं का संगठन जो बुराई से लड़ेगा
**********
35
हमने खोल के दिल से बातें करनी चाही
गंदे विचार और गंदगी दिमाग से ताही
बहुत सोच समझ कर अपनाई ये राही
मेहनत और ईमानदारी की की है बाही
********
34
पता नहीं
पता नहीं आज का जमाना किधर को जा रहा है
सुबह कहीं शाम कहीं अगली सुबह कहीं पा रहा है
नई तकनीक ने कब्जा जमाया पूरे इस इंसान पर
आदमी आदमी को दिन दिहाड़े नोच नोच खा रहा है
दूसरों के कंधों पर पैर रखकर आसमान छू रहे हैं
गंदी फिल्मों का फैशन आज नई पीढ़ी पर छा रहा है
दारू समाज के हर हिस्से में सत्यानाशी बनती जा रही
अच्छा खासा हिस्सा आज दारु पी गाने गा रहा है
लालच फरेब धोखाधड़ी का दौर चारों तरफ छाया
नकली दो नम्बर का इंसान हम सबको भा रहा है
बाजार व्यवस्था का मौसम है मुट्ठी भर हैं मस्त इसमें
बड़ा हिस्सा दुनिया का आज नीचे को ही आ रहा है
भाई भाई के सिर का बैरी कत्लोगारत बढ़ रही है
पुलिस अफसर कोई बाएं दाएं से खूब पैसे बना रहा है
पूरे के पूरे सिस्टम को दीमक खाती जा रही देखो
आज भ्रष्टाचार चारों तरफ डंक अपना फैला रहा है
एक तरफ
मॉल खड़े हुए दूजी तरफ टूटी हुई सड़कें देती दिखाई
तरक्की का यह मॉडल देखो दूरियां बहुत बढ़ा रहा है
अपने बोझ तले एक दिन मुश्किल होगा सांस लेना
तलछट की जनता जागेगी रणबीर उसे जगा रहा है
*************
33
जनता को दबाना दिन बी दिन मुश्किल होता जायेगा
मिलट्री पुलिश सारा ढांचा उसके सामने डगमगायेगा
तुमने ही ये हालत पैदा किये जनता को बाँटने के लिए
यही हालत उसे एकता देंगे ये सिंघासन लड़खड़ायेगा
*********
32
ना इस जन्म में झूठ बोला
ना कभी दुकान पे कम तोला
फिर भी भगवान नाराज हुआ
हार्ट अटैक मुश्किल इलाज हुआ
मैंने पूछा मुझे क्यों कष्ट मिला
बताया पिछले का सिलसिला
इसका कब होगा मेरा हिस्साब
अगले में मिलेगा तुम्हें जवाब
पिछला ना कभी जान पाया
नहीं अगला समझ में आया
आज की बाबत नहीं बताते
अगले पिछले में हमें फँसाते
दम मारो दम मिट जाएँ गम
देवी देवता हमारे इनके हैं हम
********
31
जवाब दीजिए
1 मैं खेलूं कहाँ?
2 मैं कूदूँ कहाँ?
3 मैं गाऊं कहाँ ?
4 मैं किसके साथ बात करूं ?
5 बोलता /बोलती हूँ तो मां को बुरा लगता है ।
6 खेलता /खेलती हूँ तो पिताजी खीजते हैं।
7 कूदता /कूदती हूँ तो बैठ जाने को कहते हैं।
8 गाता/गाती हूँ तो चुप रहने को कहते हैं।
9 अब आप ही कहिये कि मैं कहाँ जाऊं? क्या करूं?
*********
30
भुखमरी, बेरोजगारी और भ्रष्टाचार
बढ़ते ही जा रहे बिलकुल बेसुम्मार
जात गोत इलाके और धर्म पे बांटा
ऐस करते देश के देखो साहूकार
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
No comments:
Post a Comment