Wednesday, June 12, 2024

119 से 110

119 अपना घर नै हरयाणा चारों कूट बदनाम किया || सी एम सिटी के भीतर घणा घटिया काम किया || शराफत का लबादा ओढ़ कै कितना ग़दर मचाया बच्चों की मजबूरी का फायदा अपना घर नै उठाया शर्म मैं नाड़ तले नै होगी कई का जीणा हराम किया || बड़े बड़े अफसरों तक मैडम का आना जाना बताया कुछ शामिल किये खेल मैं कुच्छ को हमराज बनाया परत उघडती जावैं सें रिकार्ड तलब तमाम किया || सफ़ेद पोश बण कै काला धंधा कई करते बताये ये ले दे कै रफा दफा करावें जमा नहीं काबू मैं आये ये मूल भूत बदल चाहिए अदल बदल देख तमाम लिया|| हरेक नागरिक आगे आवै बिना इसके ना बात बनै गुण दोष पै तोल करकै छाज महँ कै सबका नाज छनै साहमी ल्याना होगा सारा जो भी आज गुमनाम किया || दोषी जितने सब नै मिलै सजा रखना होगा ध्यान दखे भ्रष्ट अफसर पुलिस अर नेता साथ देवे भगवान दखे रणबीर नै छंद बनाया सबको आज यो पैगाम दिया || ******** 118 आग सीने की तुम कब तक दबाये रखोगे सीने में दर्द लब पे मुस्कान सजाये रखोगे कराहें उठ रही हर घर में आज देखो यारो जात गोत मजहब की बेड़ियां लगाये रखोगे आसान नहीं मानवता तक यूं पहुंच पाना हैवानियत को कब तक तुम उठाये रखोगे जाग जायेगा इंसान तो हक तो मांगेगा ही शातिर हो तुम सोये हुए को सुलाये रखोगे जुल्म की रात भी कट जायेगी एक दिन जो ए कामगारों आस अपनी जगाये रखोगे ******* 117 तर्ज --- सौ साल पहले मुझे तुमसे प्यार था टेक ---ठहर जाओ भय्या भागना बेकार है || देता दिखाई ये अँधेरा बेसुम्मार है || हम भागे जाते हैं पर रास्ता तो नहीं पाता है जिधर भी देखते हैं अँधेरा नजर आता है खाता है भय अपनों की मार है || यहाँ धोखेबाजी है हमें आज बहला करके हमारी कमाई बैठे हैं अपने घर में भरके डरके नहीं रहना करना पलटवार है || अँधेरी गली है रौशनी नहीं आती है लालच और पैसे की भूख नहीं मिट पाती है खाती है धोखा जिन्दगी कई बार है || रणबीर रोशनी की चाह दिल में बस्ती है अँधेरे में भी भी कहीं किरण हंसती है बसती नई दुनिया परले पार है || ******** 116 जब नयी सुबह के सूरज को सदा दी जायेगी ।। सफ़ेद पोश हैवानों को फिर सजा दी जायेगी ।। आज के दौर में प्रेमियों की ऑंनर किलिंग होती नयी सुबह में इन्हें शहीदों की जगा दी जायेगी।। हमारी मेहनत लूटते हैं दगा देकर हमको यारो वो सुबह आएगी जब न कोई दगा दी जायेगी।। हमारे बच्चे मजदूरी करते रहते क्यों बिन पढ़ाई यकीं मानों ये सारी बातअब समझा दी जायेगी।। जात पात धर्म की लक्ष्मण रेखाएं सब टूटेंगी मानवता को सब जगह पर पन्हा दी जायेगी ।। ******* 115 दस जमा एक लाइनी बात आप लेफ्ट का फर्क समझ आवै इतनै घनी वार होज्यागी ओहले कहे तैं नहीं काम चलै इतनै घनी मार होज्यागी ईमानदारी के लबादे मैं लूट की या गाड्डी सवार होज्यागी सिस्टम बदले बिना क्यूकर भ्रष्टाचार की हार होज्यागी लेफ्ट बिना मजदूर किसान की कैसे नैय्या पार होज्यागी दस कै खिलाफ जिस दिन नब्बै की सेना तयार होज्यागी उस दिन पूरी दुनिया मैं भारत की हटकै पुकार होज्यागी नहीं तो लूट कार्पोरेट की इस ढालाँ या स्वीकार होज्यागी अम्बानी की जागां दूजे लुटेरयाँ की खड़ी या लार होज्यागी ईमानदार उदारवाद की फेर तेज घनी रफ़्तार होज्यागी जनता नहीं जागी तो लोगो मानवता शर्मशार होज्यागी ******* 114 आज पी जी आइ ऍम एस में सद्भावना दिवस मनाया गया हाजरी काबिले गौर थी | सद्भावना दिवस आज कालेज में गया मनाया थी सद्भावना या विद्वेष भावना समझ ना पाया एक तरफ हम सा धर्मों का गुणगान करते हैं दूजी तरफ पाकिस्तान काफ़िर उनको बताया सद्भावना का मतलब दुनिया में हो शांति देखो देशों के बार्डरों को ना जाये कताल्गाह बनाया कोई सैनिक जब मरता है इस पार या उस पार कोख खाली एक माँ की होती समझ में आया पाकिस्तान को सबक सिखाने को सब तैयार अपने ही दलित भाईयों को नहीं गले लगाया मंदिर मैं आज तक दलित बहन भाईयों को वही देश भगत क्यों आज तलक जगह नहीं दे पाया अंध राष्ट्रवाद झलका कई कविताओं में वहां पर तालियों की गडगडाहट ने मुझे पूरा ही दहलाया सोच रहा ठा वहीँ उठ कर कोसूं अंध देश भक्ति मग़र कमजोरी मेरी वहां उठके ना विरोध जताया ये कैसी देश भक्ति है जो सरहद पर मर कटती है यहाँ अनाज गोदामों में सडा ना गरीब को दिलवाया इंसान की परिभाषा जिस दिन समझ जायेंगे हम फिर ये अंधराष्ट्रवाद अंतर राष्ट्र वाद में बदले जताया सारी दुनिया का आदमी इंसान जब हो जायेगा तो बार्डरों का सिलसिला ढह जायेगा मुझे यही सुझाया ******* 113 इस पार या उस पार मां की कोख खाली होती है जब भी कोेई जंग इस जहां में होती है । ********** 112 परिवार में मुझको जितने भी पाठ पढ़ाये सारे ही उनके मुझको लूटने के काम आये कर्म कर फल की चिंता मत कर गीता सार मेरी लूट के गए हैं सही औजार बनाये ********** 111 इस नदी की धार में ठंडी हवा आती तो हैं, नाव जर्जर ही सही, लहरों से टकराती तो हैं. ********* 110 मेरे घर आकर तो देखो एक बार एक दूजे के पता लगे क्या परिवार ना आप हमें जाने ना हम आपको किया हम सब के बारे गलत प्रचार अफवाहें बे सिर पैर की बातें उनकी हमें लड़वा देती हैं देखो भाई हरबार सभी कौम सुख से रहती आई यहाँ मगर उनको पसंद नहीं ऐसा घरबार हिन्दू मुस्लिम सिख और ईसाई यहां सभी भाई भाई का करते है व्यवहार दुख सुख सभी मिलके झेलते खेलते किया संघर्ष सबने मिल कर बारंबार

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