Wednesday, June 26, 2024
साक्षरता आंदोलन के नारे
16
खेती करो चाहे मजदूरी
पढ़ाई लिखाई सबसे जरूरी
17
पढ़ो लिखो खुद को पहचानो
जाग उठो मजदूर किसानो
18
पढ़ने में कोई शर्म नहीं
पढ़ने की कोई उम्र नहीं
19
बच्चा बुढ़ा और जवान
पढ़ा लिखा हो हर इंसान
20
भूख गरीबी नहीं मिटेगी
जब तक जनता नहीं पढेगी
21
खुशहाली खात्तर लड़ां लड़ाई
अनपढ़ सारे करां पढ़ाई
22
गांम-गांम मैं समिति आई
पढ़ ल्यो चाची पढ़ ल्यो ताई
23
ज्ञान विज्ञान में आना होगा
बिना पढ़े पछताना होगा
24
नर नारी की ये आवाज
पढ़ा लिखा हो आज समाज
25
व्यापार नौकरी लिया करो दुकान
सबसे पहले अक्षर ज्ञान
26
आओ मिलकर पढ़े पढ़ाएं
अपने ज्ञान को और बढ़ाएं
27
आधी बाजी जीत चुके
अब बाकी बाजी जीतेंगे
25
मिटे गरीबी और अज्ञान
पढ़ा लिखा हो हर इंसान
29
जरा सी पढ़ाई
ढेर सी भलाई
30
जगह देश की क्या पहचान
पढ़ा लिखा मजदूर किसान
Tuesday, June 25, 2024
203 से 226
226
राज दरबारी क्या कहते सुनते हैं यारो
पेट की खात्तर बेचारे झूठ गाते हैं
सच कहना गर बगावत तो हम बागी हैं
दिल दुखता जब नाकारे लूट मचाते हैं
अमीर गरीब की बढ़ा खाई समता लाएंगे
झूठ के एक दिन ये शिकारे डूब जाते हैं
********
225
छक्का
हिंदुस्तान जलन लागरया बूझा लियो मिल करकै रै
आंख मींच कै क्यूँ बैठे थाम बजर का दिल करकै रै
आजादी रूपी फूल मुर्झाग्या जो आया था खिल करकै रै
देश का किसान फांसी तोड़या किसनै मुश्किल करकै रै
साम्प्रदायिकता चढ़ती आवै नफरत के या बिल करकै रै
अडानी और अम्बानी नै धरया देश आज छिल करकै रै
***********
224
पेट मैं छाला
गुड़ का राला
खर्च कुढ़ाला
दुख देज्या
आंख मैं जाला
भीत मैं आला
दिल मैं काला
दुख देज्या
पोह का पाला
खेत रिहाला
कपटी रूखाला
दुख देज्या
*********
223
मेरा कसूर
हमने दोनो ने मिलकर सोचा
जिन्दगी का सफ़र तय करेंगे
बहुत सुन्दर सपने संजोये थे
प्रेम का पता नहीं ये हरयाणा
क्यों पुश्तैनी दुश्मन बन गया
यह सब मालूम था हमको पर
प्यार की राहों पर बढ़ते गए
मेरे परिवार वाले खुश नहीं थे
क्यों मुझे पता नहीं चला है
न तो मैंने एक गोत्र में की है
न ही एक गाँव में शादी मेरी
न ही दूसरी जात में की मैंने
तो भी सब के मुंह आज तक
फुले हुए हैं हम दोनों से देखो
प्यार किया समझा फिर शादी
ससुराल वाले भी खुश नहीं हैं
शायद मन पसंद गुलाम नहीं
मिल सकी जो रोजाना उनके
पैर छूती पैर की जूती बनकर
सुघड़ सी बहु का ख़िताब लेती
दहेज़ ढेर सारा लाकर देती ना
प्यार का खुमार काम हुआ अब
जनाब की मांगें एकतरफा बढ़ी
मैं सोचती हूँ नितांत अकेली अब
क्या हमारा समाज दो प्रेमियों के
रहने के लायक बन पाया यहाँ
चाहे कुछ हो हम लोड उठाएंगे
मगर घुटने नहीं टिकाएंगे यारो
वो सुबह कभी तो आयेगी की
इंतजार में ये संघर्ष जारी रखेंगे
झेलेंगे इस बर्बर समाज के सभी
नुकीले जहरीले तीर छाती पर ही
जिद हमारी शायद यही है कसूर
*********
222
हमारी बर्बादी
हमें बर्बाद करके उनको पता नहीं क्या मिल गया
ईमानदारी का दामन थामा हमारा निवाला छिन गया
आदमी से आदमी की मोहब्बत कहाँ काफूर हो गयी
मेहनत हमने की मगर पता नहीं कहाँ ये खो गयी
दर्द हद से गुजर गया है सीना हमारा तो छिल गया
मोहब्बत के गीत गाएँ कैसे चिंता हमें बीमारी की
यकीं कौन करेगा इस पर मोहब्ब्त गरीब भिखारी की
देख के उनके ढंग निराले मुंह हमारा है सिल गया
मरने वाले हथियार लिए बैठे साधा निशाना हम पर
मार न पाना मजबूरी उनकी टिका जमाना हम पर
हमारे वजूद का तस्सवुर कीचड में गुलाब खिल गया
तूफ़ान जो उठा समुन्द्र में अब नहीं टाला जायेगा
पड़ाव अब ये हमारा मंजिल पर ही डाला जायेगा
भगवन का आसरा किया पर भरोसा सारा हिल गया
आर पार की जंग शुरू करना होगा स्वीकार हमें
फूंक फूंक के चलना है रहना होगा होशियार हमें
देख देख जुल्म उनके कलेजा हमारा छिल गया
मानवता का औढ़ा मुखोटा लिया धर्म का सहारा है
जात पात का जहर फैलाया निचौड़ा खून हमारा है
रणबीर आज रो उठा हो छलनी उसका दिल गया
**********
221
आंधी चल रही ये नहीं थमीं यारो
रात की गर्द मेरे चेहरे पे जमीं यारो
कुछ ठूंठ खड़े हैं कहीं कहीं मेरे जैसे
कुछ उखड़े पड़े हैं कहीं तुम्हारे जैसे
हम सब बचें हैं इसके थपेड़े खाकर
तुम बैठ गये अपने महलों में जाकर
यह आंधी आज किसे साल रही देखो
झोंपड़ी इधर उधर उछाल रही देखो
धर्म की आँधी चलने ही वाली यारो
क्या गुल खिलेंगे उजड़ेगा माली यारो
********
220
Please React
इस बेवफा सिस्टम से वफ़ा मांग रहे हैं |
हमें क्या मालूम है हम खता मांग रहे हैं |
ये क़िस्मत का खेल रचाया है इसी ने तो---
इसी से हम क़िस्मत क़ि दुआ मांग रहे हैं|
पूरा सच छिपा ये आधा सच बताते हमको --
जहर घोला उसीसे साफ हवा मांग रहे है|
रोजाना जो खेलता हमारे जज्बात के साथ--
सुख क़ि राही का उससे पाता मांग रहे हैं |--
सुरग क़ि कामना में छिपी हुयी रणबीर--
अपने खुद क़ि ही हम चिता मांग रहे हैं |
*********
219
SUN JARA AUR KAH JARA
किसी पर भी तूं एतबार न कर|
भावुकता में बर्बाद घरबार न कर|
बात हैं बात का भरोसा क्या है
--
जाँ किसी पर निस्सार न कर|
अमीर क़ि नजरें जाँ लेलेंगी--
इनसे कभी कोई करार न कर|
बेवफा से वफ़ा नहीं होती है
--
जाने दे दिल को बेक़रार न कर
|
अमीर गरीब क़ि दुनिया है यह
--
झूठे वायदे हैं स्वीकार न कर
|
रणबीर एक दिन टूट जायेगा--
ख्वाब है ख्वाब से प्यार न कर |
*********
218
पूजा
पूजा अपने आप में खोयी
लेकिन बिल्कुल सुलझी हुई
शक्शियत !
जो भी उससे मिलता
उसकी सादगी और
आत्मितीयत्ता से प्रभावित
हुए बिना न रहता |
हर किसी की मदद के
लिए हर समय तैयार
विचारों से परिपक्व
दिल से इमानदार और सच्ची
जिन्दगी भर समाज और
दुनिया को बदलने में लगी
एक अनोखी लड़की
पूजा !!
*********
217
आज का दौर *** एक कविता के माध्यम से **
दुनिया की क्या हालत हो गई बाजार चारों ओर छाया।।
भैंस बंधी है घर घर में पर दूध ढोलों के अंदर पाया।।
1
दूध बेच भैंसों का लोग गांव के करते हैं आज गुजारे
लुप्त हो गए घरों से आज घी के जो हुआ करते बारे
थोड़ा साँस आया करता आज घूटन मानते हैं सारे
महिलाओं के अनीमिया ने फिर से जोर के डंक मारे
बाजरे की खिचड़ी गौजी का आज जोड़ा तोड़ बगाया।।
2
पहले भाई चारा था छोरे बहू लेने आया करते
जिब रोटी जिम्मन बैठते खांड बूरा खाया करते
पड़ौसी दूध के बखौरे बटेऊ वास्ते ल्याया करते
दूजे का बटेऊ पड़ौसी आंखों पे बिठाया करते
बैठे रहते फूंक बुढ़िया सी अब अपना ही बटेऊ ना भाया।।
3
आबो हवा मैं जहर घुला कीटनाशक छागये हैं
युवा के नर्वस सिस्टम पे दोष गुस्से का लागये हैं
पेट को पकड़े घूम रहे डॉक्टर भी हाथ ठागये हैं
हमारी कष्ट कमाई को ये अमीर क्यों खागये हैं
टैस्ट क्यों नहीं होते मैडीकल मैं नहीं किसी ने कष्ट उठाया।।
4
किलो दूध मिले पचास का उसमें आधा पानी पावे
महंगाई के क्या कहने कोई क्या खाएं क्या नहीं खावे
कुपोषण बालकों में आज दिन दिन क्यों बढ़ता जावे
बाजार व्यवस्था दोषी है पर दोष क्यों कोई नहीं
लावे
राम की इच्छा कैहकर रणबीर हमारा क्यों मोर नचाया।।
**********
216
हमारा हरियाणा दो तरह से आज दुनिया में छाया है।।
आर्थिक उन्नति बहुत की पर लिंग अनुपात ने खाया है।।
1
छांट के मारते लड़की पेट में समाज के नर नारी
समाज अपने कसूर की मां के लगावे जिम्मेदारी जनता हुई है हत्यारी पुत्र लालसा ने ही राज जमाया है ।।
2
औरत औरत की दुश्मन है जुमला बहुत चलता आदमी आदमी का दुश्मन समाज को न खलता समाज ढांचा इसपे पलता यह हरियाणा बदनाम कराया है।।
3
वंश की पुरानी परंपरा पुत्र को चिराग बताते हैं लड़का जरूरी होना चाहिए लड़की को मराते हैं
जुल्म रोजाना बढ़ते जाते हैं सुनकर के कांपती काया है।।
4
अफरा तफरी फैली महिला कहीं महफूज नहीं
जो पेट से बच गई है उनकी समाज में बूझ नहीं आती हमको क्यों सूझ नहीं रणबीर सिंह बहुत घबराया है।।
**************/
215
दो हजार तेरा का आधा बरस बीत गया
सुधार कहाँ मंहगायी का दानव जीत गया
भारत की अर्थ व्यवस्था चली गयी खाई मैं
विकास दर बीते दस साल की नीची इकाई मैं
औद्योगिक विकास दर की क्या बात बताऊं
पिछ्ले बीस साल में सबसे नीचे गई दिखाऊँ
बजट घाटा हमारी आज की चुनौती बड़ी है
मोदी के बसकी नहीं आई सी यू में पड़ी है
राजनीति दिशाभ्रम इसका कारण हैं बताते
पूंजीवादी विकास दोषी ये बात क्यों छिपाते
*********
214
ढाई लाख किसान देश के पाछले दिनों मैं फांसी खागे
एफ डी आई तैं छोटे दुकानदारों के बुरे दिन आगे
आर्थिक सुधारों के ना पै कार्पोरेट सैकटर छाया
अंबानी अदाणी टाटा बिड़ला देश के चौखा चूना लाया
सरकार कारपोरेट की बांदी ये गरीब घने दुख पागे
नब्बे के दशक तैं देश मैं लागू ये सुधार हुए देखो
ये भूख बीमारी बधगी घने बेरोजगार हुए देखो
आवारा पूंजी उधम मचाया ये काले धन आले छागे |
विश्व बैंक ड्ब्ल्यू टी ओ आई एम एफ नकेल थामरे
तीसरी दुनिया के देशों के ये कसूती लगाम घालरे
ये म्हारी घी घी बांध रहे विकसित देश फयदा ठागे|
मन मोहन जी मोह लिए बिल्कुल नहीं समझ रहे
इन आर्थिक सुधारों मैं क्यों और भी घने उलझ रहे
ये आर्थिक सुधार तो सबकै चपत घनी कसूती लागे|
*********
213
अभी बहुत कुच्छ बाकी है इस तुम्हारी
खुश्क दुनिया में
हमारी मेहनत
हमारी सच्चाई
हमारी इंसानियत
हमारी कुर्बानी
हमारी मोहब्बत
हमारी शर्मो लिहाज
हमारी भूख मरी
--------------
--------------
लंबी फहरिश्त है
इस दुनिया को
तबाह नहीं होने देंगे
रणबीर
********
212
साइनिंग इंडिया सफरिंग इंडिया अंतर आज बढ़ता जाता है।।
कैसे पाटें इस अंतर को नहीं कोई हमको आज समझाता है।।
1
ये शाइनिंग इंडिया बहोत ज्यादा आगे जा लिया बताऊँ
गुड़गामा नया और पुराना देखलो नहीं मैं झूठ भकाऊं
नए और पुराने का अंतर क्यों ना जनता को उलझाता है।।
2
पुराने ढांचों से जन बहुत दुखी हो लिए हिंदुस्तान के
कई पुरानी सोच ये ओछी जूती काटें पैर मजदूर किसान के
नए ढांचे नहीं मिटा पा रहे ये भ्रष्टाचार घूमे दनदनाता है।।
3
इन हाल में नई इबारत जनता लिखनी चाहती जरूर
जात पात से ऊपर उठ चाहवे भ्रष्टाचार मिटाती जरूर
लड़ाई लम्बी संघर्ष मांगती समों जन को समझ आता है।।
4
सिस्टम एक रात में बदले एसा इतिहास ना टोहया पाए
सिर धड़ की कुर्बानी मांगे जब खून खरोंच इसको आए
जनता का दिल अंतर कम करने को पूरी तरह चाहता है।।
5
बहोत सी उपलब्धियां अब पूरे साल ये गिनाई
जाएंगी
पर नाकामियां इतनी ज्यादा हैं बिल्कुल न छिप पाएंगी
आने वाले समय में मुझे जो दिखे आम जन ना देख पाता है।।
6
फासिज्म नए ब्रांड का आज हमारे सिर पै आ खड़ा भाई
तरल पूंजी ने डिजाइन पूंजी से भर दिया है ये घड़ा भाई
रणबीर पड़े जूझणा कट्ठे होकर के ये सही छंद बनाता है।।
********
211
साइनिंग इंडिया सफरिंग इंडिया
ये महज शब्दों का खेल नहीं है
ये हैं दो दुनिया इसी जमीन पर
एक तरफ एयर कंडीशन्ड कोठी
उधर बरसात में टपकती झोंपड़ी
करोड़ों के को वह भी नहीं नसीब
एक तरफ एयर कंडीशन्ड कारें हैं
उधर कई कोश नँगे पांव चलना है
एयर कंडीशन्ड पांच सितारा होटल
उधर दो रुपये की चाय का ढाबा है
एयर कंडीशन्ड अपोलो फोर्टिस हैं
उधर बिना दवाई के सीएचसी हैं
एयर कंडीशन्ड मॉल सब मिलता
उधर खुदरा छोटी छोटी दुकानें हैं
एयर कंडीशन्ड स्कूल आलिसान
उधर बिना पंखे के कमरे के स्कूल
एक तरफ ऐयासी की दुनिया छाई
दूसरी तरफ मेहनत से फुरसत नहीं
दोरंगी दुनिया नजर नहीं आती हमें
इस अंधेपन को क्या कहूँ?शब्द नहीं
आपके पास हैं तो इंतजार इनबॉक्स में
रणबीर
15.03.08
********
210
बढ़ रहे मीलों के फासले हमारा प्यार नहीं कम होगा
लोंग डिस्टेंस रिलेशनशिप को निभाने का दम होगा
जरूरी पक्ष है इसका आपसे में बातचीत करते रहना
इसका मतलब यह नहीं चौबीस घंटे ही खपते रहना
समय-समय पर बात करना ही ये सही कदम होगा
बात करते समय भविष्य या रिश्तों की बात नहीं जरूरी
सकारात्मक मुद्दों पर बात कम करती है हमारी गरूरी
विवाद की बातचीत का फिर नहीं हमारा मन होगा
उनकी सुने अपनी सुनाऐं अनदेखी ठीक नहीं होती
अनदेखी खटास लाती है आपस का विश्वास खोती
इसलिए जीवनसाथी की बात पर जरूर चलन होगा
रिश्ते पासके या दूरके नींव आपस का भरोसा बताया
मिलने का प्रयास रहे जब भी मिलने का मौका पाया
प्यार और सम्मान रिश्ते में खूबसूरत ये चमन होगा
**********
209
राखी का त्यौहार मन में उल्टा सवाल उठाता यारो
ना बराबरी का मसला लगता कहीं ये छिपाता यारो
करवा चौथ रख कर महिला लम्बी उम्र मांगती है
रक्षा करवाने को आपकी कलाई पर राखी बांधती है
कितना इमोशनल ब्लैक मेल सवाल उठाते डरता हूँ
मन में उठे सवाल पूछने की न मैं हिम्मत रखता हूँ
महिला का शोषण है इस जगह से सोच कर देखो
पुरुष प्रधान व्यवस्था को यारो खोल कर तो देखो
*********
208
यही रफ़्तार रही ज़माने की ताऊ
तो इंसानों की जगह होंगे ये हाऊ
खुदगर्जी चुगलखोरी खुसामद की
मौज होगी हर चीज यहाँ बिकाऊ
अमेरिका और कोर्पोरेट छाया देखो
भारत बनाया इन्होंने बैल हिलाऊ
********
207
गरीब परिंदा उड़ान में है
तीर अमीर की कमान में है
है डराने को मारने को नहीं
मरा तो अमीर नुकसान में है
जिन्दा रख कर लहू चूसना
अमीरों के दीन ईमान में है
खौफ ही खौफ है जागते सोते
लूट हर खेत खलिहान में है
मरने न देंगे न जीने देंगे
साजिश पूंजी महान में है
********
206
आम जनता के लिए बेरोजगारी है
घरों से बेदखली है बड़े पैमाने पर
समाज कल्याण के प्रावधानों में
कटौतियां बखूबी से जारी यारो
सरकारी खजाने की कीमत पर
बैंकों और वितीय कम्पनियों को
फिर बड़ा मुनाफा बटोरने का ये
मौका मिल रहा है भारत देश में
मेहनतकश की कीमत पर ही तो
मग़र कब तक एक दिन हिस्साब
तो माँगा जायेगा पाई पाई का
*******
205
बड़ी मुश्किल से ये आंसू छिपाए हमने
हँसना चाहा झूठे ठहाके लगाये हमने
तुमको मालूम ये शायद हो के ना हो
तुम्हारे जाने के बाद आंसू बहाए हमने
प्यार किया हमने नहीं छुपाया कभी
दिल के तराने थे तुमको सुनाये हमने
तेरे साथ इन्कलाब के जो नारे लगाये
यारो अब तलक नहीं हैं भुलाये हमने
राह में साथ छोड़ गये अफ़सोस तो है
पल याद हैं वो जो संग बिताये हमने
जानते हैं आप हमें नहीं भूल सकेंगे
एक अनुभव बस बिंदु दिखाए हमने
हादसा नहीं एक सच्चाई है ये प्यार
अफ़सोस है क्यों ये रास्ते भुलाये तुमने
*************
204
किसानों मजदूर का संघर्ष तेज करने का समय आया।।
दूसरे कमेरे तबके साथ ले चाहिए देश में बिगुल बजाया ।।
इस पार्टी उस पार्टी का नहीं ये मामला कहते हैं कॉरपोरेट सांप्रदायिकता की मार हम सहते हैं सिस्टम का मालिक कॉरपोरेट यह लुटेरा असल बताया ।।
शिक्षा बेची स्वास्थ्य बेचा सब कुछ बेच रहे आज निजीकरण की लहर फैलाई झूठ को सच कहे आज
आमजन के जीवन पर संकट आज गहरा है छाया ।।
अमेरिका से दोस्ती देश की मीडिया पूरा उछाल रहा
असल मातहेती अमेरिका की छुपाने का कर कमाल रहा
बातों बातों में देश को आज आसमान पर देखो पहुंचाया।।
बहु विविधता देश हमारे की पूरी दुनिया करे बड़ाई
एक देश एक पहचान इस पर छेड़ी रणबीर क्यों लड़ाई
बहु विविधता हार नहीं मानेगी संघर्ष का बिगुल बजाया।।
*********
203
हरेक चीज आज देखो आनलाइन मिल जाती है बाजार की छोटी दुकानो को जम्हाई दिलाती है कूरियर की सेवा मध्यमवर्ग को आज भाती है
गरीब जनता ही अब छोटी दुकानो पे आती है सिले सिलाए कपड़ों की दुकान आज ये छाती है
खेती में ट्रैक्टर की कमाई किसान को खाती है बिहारी मजदूरों की लाइन चौराहों पर पाती है पार्कों में महिलाओं की टोली बैठी गीत गाती है घंटों टीवी देखने की चाहत बच्चों को भरमाती है
बदल रहा शहर और गांव कंपकंपी सी आती है
Thursday, June 20, 2024
189 से 202
202
कैसे जांचें
कैसे जांचें कि कौन अच्छा है क्या सिस्टम खस्ता है ॥
सबकी अपनी अपनी ढपली विकास का वही रस्ता है ॥
जनता के बल पर ऊँचाई पाने वाले हरेक बादल को
मौसम रूख बदले तो फिर पानी पानी होना पड़ता है ॥
जनता का विश्वास बार बार टूटता है यहाँ पर फिर से
कमाल की बात है कि यह बार बार से देखो उठता है ॥
आंधी आती है बड़े बड़े पेड़ उखड़ जाते हैं यहाँ पे यारो
कई बार पत्ता भी हिलता है तो दिल कांपने लगता है ॥
मेरे अंदर एक मुखालिफ था जो मुझसे भी लड़ता था
अब या तो वह चुप ही रहता है या हाँ में हाँ करता है ॥
जनता ने इतिहास रचे हैं वो ये जानते हैं बखूबी ये
इसीलिए हमको वो बरगलाने का प्रपंच रचता है ॥
************/
201
आज के राज में महिलाओं के खिलाफ अपराध बढती जा रही
राष्ट्रीय अपराध रिपोर्ट ब्यूरो(एनसीआरबी) ये हमको बता रही
दो हजार चोदा में यह अपराध दर 52.5 प्रति लाख दिखा रही ।
2021 तक बढ़ कर 64.5 प्रति लाख पर यह दर जा रही ।
2021 तक, दैनिक बलात्कार की संख्या भी बताई देखो
यह संख्या प्रतिदिन 90 बलात्कार से ऊपर है दिखाई देखो
2017 में अपराध के 315215 से अधिक संख्य जताई देखो
2022 में यह बढ़कर 365300 से अधिक पहुंचाई देखो
************
200
ये कमरसियेलाइजेशन देखो तेज रफ़्तार से आया
पुराने की सड़ांध ने आज नई सड़ांध से हाथ मिलाया
पुराने कबीलाई रिश्ते नाते आज भी हम पे हावी देखो
नैतिकता को पढने बिठाया मद मस्त पीढ़ी भावी देखो
ऑनर किल्लिंग की चारों तरफ पड़ रही काली छाया ||
फ्री लौंस यौनिक सम्बन्ध आज इस समाज में छाये रहे
लीलो चमन के प्यार को ये अँधा प्यार बतलाये रहे
आज यहाँ तो काल वहां बस घुमंतू जीवन अपनाया ||
पैसा पैसा और साथ में बदनाम मुन्नी यहाँ मशहूर हुयी
दो दो पैसे को मोहताज भुखमरी यहाँ का दस्तूर हुयी
शीला को बीच बाजार में है अधनंगी करके नचवाया ||
दोनों सड़ांध के मेल से अधखबड़ा इन्सान बना दिया
सिविक समाज सभ्य समाज सपना कहके भका दिया
रणबीर देख के सड़ांध मानव बहुत ज्यादा घबराया ||
*********
199
कुछ नए बन रहे कुछ पुराने बने
हर कदम पर यहाँ कैदखाने बने
किस तरफ से चली गोलियां क्या पता
किन्तु हर बार हम ही निशाने बने
था क्या हमने सोचा ये क्या हो गया
हमें क्यों इस चमन से गिला हो गया
दिया जिसकी खातिर था हमने लहू
वही मौसमें गुल क्यों खफा हो गया
*******
198
मारें जाओ धोक पत्थरों की गरीबी दूर नहीं होवे
नाबराबरी और बढ़ेगी किसान जोर जोर से रोवे
शिक्षा और स्वास्थ्य का भार अपनी जेब से ढोवे
सरहद ऊपर जवान फौजी ज्यान यो अपनी खोवै
********
197
पता है सामने वाला बहुत अत्याचारी है
पूरी दुनिया में लूट की ये कमाई भारी है
अभी संकट के दिन और बढ़ेंगे दुनिया में
फिर भी संघर्ष की ये जंग जारी हमारी है
***********
196
हमारे शरीरों पर कपड़े
कम से कमतर होते जा रहे हैं
फिर चाहे कोई बिना कपड़े
नंगा घूम रहा है तो हमारी बला से
एटम बम है हमारे पास
मिसाइल है दूर मार की
अच्छी खासी फौज है हमारे पास
फिर चाहे सामाजिक असुरक्षा बढ़ती है तो
हमारी बला से
पांच सितारा अस्पताल हैं
सुहाने भारत देश में
मैडिकल टूरिज्म फल फूल रहा है
फिर चाहे लोग बिना इलाज के मरते हैं
तो मरें
प्लेग फैलता है तो फैले
एडस दनदनाता है तो दनदनाए
वेश्यावृत्ति बढ़ती है तो बड़े
हमारी बला से
आर्थिक स्तर पर गोवा के बाद है
हरियाणा
' सेक बिछाई जा रही है तेजी से
फिर चाहे लिंगानुपात में सबसे
नीचे है तो क्या
हमारी बला से
कुछ हथियार और हों
कुछ पैसा और हो
गौ रक्षा हमारा धर्म है
फिर शायद दलितों के घर जलाएं
जाते हैं तो क्या
मनुष्य मरते हैं तो मरते रहे
हमारी बला से हम
2020 तक दुनिया की
महाशक्ति बन सकते हैं
विकास की कीमत तो अदा
करनी ही पड़ेगी
ऑडियोलोजी का जमाना गया
क्वालिटी जीवन का जमाना आया है
हमने तरक्की की है किस कीमत पर
हमारी बला से
कुछ साल पहले की रचना
**********
195
आज बाजार व्यवस्था की
चारों तरफ गूंज बताते हैं
हीरो विलेन और विलेन ये
हीरो कैसे यह बन जाते हैं
एंटी हीरो एंग्री हीरो का
जमाना खत्म हुआ जताते हैं
अब तो हीरो विलेन बन गया
ऐसा फिल्मी सीरियल दिखाते हैं
कल तक जो राम थे यहां
रावण बनकर इतराते हैं
भीतर से रावण बन गए
मुखौटा राम का लगाते हैं
हम भी रावण की कर पूजा
दिवाली हर साल मनाते हैं।
********
194
अब सीख लिया तुमसे मैंने नया तराना सीख लिया
औरों के कन्धों पर रख के बन्दूक चलाना सीख लिया
सच को झूठ झूठ को सच तुरंत बनाना सीख लिया
अपनी ही तस्वीर से मैंने तो ऑंखें चुराना सीख लिया
अब सीख लिया तुमसे मैंने नया तराना सीख लिया ||
पैसे के दम पे दुनिया में अब इठलाना सीख लिया
धर्म के नाम पर जनता को खूब लड़ना सीख लिया
अब सीख लिया तुमसे मैंने नया तराना सीख लिया ||
भूल कर गाम अपना झूठे सपने सजाना सीख लिया
जीणा है तो भूलो अपने को नया फ़साना सीख लिया
अब सीख लिया तुमसे मैंने नया तराना सीख लिया ||
सब कुछ दांव पर लगाकर पैसा कमाना सीख लिया
जैसा मौसम हो मैंने वैसा बजा बजाना सीख लिया
अब सीख लिया तुमसे मैंने नया तराना सीख लिया ||
*********
193
शराब नहीं पीते तो क्यों इस संसार में आए तुम।।
तुमने छेड़छाड़ भी न की तो क्यों न पछताए तुम ।।
मारो खाओ हाथ ना आओ जीवन का दर्शन यही
इस दस्तूर को दोस्त मेरे क्यों ना निभा पाए तुम।।
चोरी जारी नहीं करना सीखा तो क्या खाक जवानी
जेल की सजा नहीं काटी ना शाहिद भी कहलाए तुम।।
दो-तीन लड़कियां नहीं भकाई रहे कोरे के कोरे क्यों
समय से पीछे क्यों रहे ना अखबारों में ही छाए तुम।।
एचआईवी एडस से क्यों वंचित रहे घूम रहे तुम
संवेदनशील मानव को फिरते गले लगाए तुम।।
*********
192
AGLA PICHHLA
अगला पिछला और वर्तमान
ना इस जन्म में झूठ बोला
ना कभी दुकान पे कम तोला
फिर भी भगवान नाराज हुए
हार्ट अटैक मुश्किल इलाज हुए
मैंने सोचा मुझे क्यों कष्ट मिला
मिला बताया पिछले का सिला
वर्तमान का कब होगा हिस्साब
अगले में मिलेगा इसका जवाब
पिछला ना कभी समझ आया
ना अगले बारे ही जान पाया
आज की बाबत नहीं बताते वो
अगले पिछले में फँसाते हैं वो
दम मारो दम मिट जाएँ गम
देवी देवता हमारे इनके हैं हम
सवाल उठाने वाले कौन हो तम ?
********
191
मेरा कस्सूर
मेरा कसूर
हमने दोनो ने मिलकर सोचा
जिन्दगी का सफ़र तय करेंगे
बहुत सुन्दर सपने संजोये थे
प्रेम का पता नहीं ये हरयाणा
क्यों पुश्तैनी दुश्मन बन गया
यह सब मालूम था हमको पर
प्यार की राहों पर बढ़ते गए
मेरे परिवार वाले खुश नहीं थे
क्यों मुझे पता नहीं चला है
न तो मैंने एक गोत्र में की है
न ही एक गाँव में शादी मेरी
न ही दूसरी जात में की मैंने
तो भी सब के मुंह आज तक
फुले हुए हैं हम दोनों से देखो
प्यार किया समझा फिर शादी
ससुराल वाले भी खुश नहीं हैं
शायद मन पसंद गुलाम नहीं
मिल सकी जो रोजाना उनके
पैर छूती पैर की जूती बनकर
सुघड़ सी बहु का ख़िताब लेती
दहेज़ ढेर सारा लाकर देती ना
प्यार का खुमार काम हुआ अब
जनाब की मांगें एकतरफा बढ़ी
मैं सोचती हूँ नितांत अकेली अब
क्या हमारा समाज दो प्रेमियों के
रहने के लायक बन पाया यहाँ \
चाहे कुछ हो हम लोड उठाएंगे
मगर घुटने नहीं टिकाएंगे यारो
वो सुबह कभी तो आयेगी की
इंतजार में ये संघर्ष जारी रखेंगे
झेलेंगे इस बर्बर समाज के सभी
नुकीले जहरीले तीर छाती पर ही
जिद हमारी शायद यही है कसूर
*********
190
जिंदगी से महज मशीन बनी देखी जा सकती है औरत
घर के अंदर और बाहर भी दबती देखी जा सकती है औरत
विज्ञान ने बहुत कुछ दिया खुले हाथ है जमाने को भारत में हर रोज ही मरती देखी जा सकती है औरत
गाड़ी के दो पहिए कहते औरत और मर्द दुनिया के दोनों को ही ढोती रहती देखी जा सकती है औरत दोनों ही सजाते हैं महल मगर जब ढह जाता है
तब निशाना सिर्फ ये बनती देखी जा सकती है औरत
कोई बदलाव नहीं मुमकिन एक पहिया की गाड़ी से
चीख चीख कर क्यों कहती देखी जा सकती है औरत
जमाना भी बहरा हो गया कभी सुनता ही नहीं है सुनाते सुनाते ही बस थकती देखी जा सकती है औरत
जब भी समाज बदला है वह औरत की बदौलत ही पता नहीं क्यों पीछे रहती देखी जा सकती है औरत
मर्द का करिश्मा देखो औरत है औरत की दुश्मन सास बहू में ये बंटती देखी जा सकती है औरत
भाग्य कभी तो बदलेगा इसी उम्मीद पर जीती है ता उमर भगवान को पूकती देखी जा सकती है औरत
********
189
कैसे जांचें
कैसे जांचें कि कौन अच्छा है क्या सिस्टम खस्ता है ॥
सबकी अपनी अपनी ढपली विकास का वही रस्ता है ॥
जनता के बल पर ऊँचाई पाने वाले हरेक बादल को
मौसम रूख बदले तो फिर पानी पानी होना पड़ता है ॥
जनता का विश्वास बार बार टूटता है यहाँ पर फिर से
कमाल की बात है कि यह बार बार से देखो उठता है ॥
आंधी आती है बड़े बड़े पेड़ उखड़ जाते हैं यहाँ पे यारो
कई बार पत्ता भी हिलता है तो दिल कांपने लगता है ॥
मेरे अंदर एक मुखालिफ था जो मुझसे भी लड़ता था
अब या तो वह चुप ही रहता है या हाँ में हाँ करता है ॥
जनता ने इतिहास रचे हैं वो ये जानते हैं बखूबी ये
इसीलिए हमको वो बरगलाने का प्रपंच रचता है ॥
Friday, June 14, 2024
176 से 188
189
कैसे जांचें
कैसे जांचें कि कौन अच्छा है क्या सिस्टम खस्ता है ॥
सबकी अपनी अपनी ढपली विकास का वही रस्ता है ॥
जनता के बल पर ऊँचाई पाने वाले हरेक बादल को
मौसम रूख बदले तो फिर पानी पानी होना पड़ता है ॥
जनता का विश्वास बार बार टूटता है यहाँ पर फिर से
कमाल की बात है कि यह बार बार से देखो उठता है ॥
आंधी आती है बड़े बड़े पेड़ उखड़ जाते हैं यहाँ पे यारो
कई बार पत्ता भी हिलता है तो दिल कांपने लगता है ॥
मेरे अंदर एक मुखालिफ था जो मुझसे भी लड़ता था
अब या तो वह चुप ही रहता है या हाँ में हाँ करता है ॥
जनता ने इतिहास रचे हैं वो ये जानते हैं बखूबी ये
इसीलिए हमको वो बरगलाने का प्रपंच रचता है ॥
*********
188
एक घटना को दिमाग ने झकझोर दिया
गाँव के ही दो लूंगाडों ने मुझे अँधेरे में जब घेर लिया,
अपनी हवस मिटाकर मेरे जीवन में तो अंधेर किया।
किसको बताऊँ दुःख अपना कौन सुनेगा मेरी बात,
दबंग घरों के दीपक वे तो भला मेरी क्या औकात ।
गाँव के किसी पंचायती ने नहीं सुनी मेरी अरदास,
गुर्गे हैं दोनों ये लूँगाडे गाँव के पंचायतियों के ख़ास।
कहते घूमें मिट्टी डालो गाँव की इज़्ज़त उछल रही,
एक हाथ कहाँ ताली बजे लड़की भी फिसल रही।
वहशी छा गए चारों तरफ बचे आज इंसान कहाँ,
भोग की वस्तु मानी औरत अलग है पहचान कहाँ।
********
187
चोर जार नशेबाज जुआरी
चोर जार नशेबाज जुआरी बढ़ते जावैं समाज मैं ॥
इनकी लिखूं कहानी सुणो अपणे ही अंदाज मैं ॥
पहले बात करू चोर की हाथ सफाई दिखावैं ये
घने चोर तो ताला तोड़ लें दुष्ट कमाँ कै नहीं खावैं ये
घिटी मैं गूंठा देकै मारदें घर साफ़ कर ले ज्यावै ये
राह चलती महिला की चेन दो मिनट मैं झपटावें ये
चोर बी के करैं और कोए नौकरी ना इस राज मैं ॥
जार आदमी दुष्ट घना पर नारी पै नीत धरै सै रै
कुकर्म करता हाँडै वो उसका पेट नहीं भरै सै रै
पकड़या जा जब जूत लगैं जूतां तैं बस डरै सै रै
नालियां मैं मुंह मारता एक दिन बेमौत मरै सै रै
पहर धोले लत्ते यो घूमै दुनिया हवाई जहाज मैं ॥
नशे बाज का के कहना रोज नशा करना उसनै
तर तर तर जुबान चलै किसे तैं ना डरना उसनै
सुल्फा गान्झा भांग धतूरा पी डूब मरना उसनै
अगल बगल मैं झाँकै फेर पाप घड़ा भरना उसनै
नशा उतर ज्या तो कहै सुधरना चाहूँ कर इलाज मैं ॥
चोर जार नशेबाज जुआरी सब तैं मानस बताये
औढ़न पहरण नहान खान तैं ये बालक तरसाये
घाघरे टूम तक ना बक्शी चोरी कर नशे चढ़ाये
गाम मैं आतंक फैलाया सरीफ मानस घबराये
रणबीर समझाया चाहवै समाज सुधर की खाज मैं
*********
186
कार्बन से पैदा हुए और मर कर कार्बन बन जाना है ।
अंतहीन है यह कहानी जिसका कोई छोर नहीं है।
********
185
एक लड़की ने साहस किया और आवाज उठाई
बदतमीज गुरु जी ने अपनी बदनीयत दिखाई
कुछ लडकीयों ने साहस किया और भीड़ गयी
गुरु जी की सरेआम की सबने मिल कर पिटाई
केस दर्ज होने जा रहा था उस गुरु के खिलाफ
लड़की के बाप ने बीच में आकर के खेल रचाई
पैसे लेकर केस बिगड़ दिया गुरु छुट गया साफ़
यह कहानी नही हकीकत है आप तक पहुंचाई
कहाँ जा रहे हैं हम समझ नहीं पा रहा दोस्तों
एक घटना नहीं है ऐसी घटनाओं की बाढ़ आयी
**********
184
बुड्ढाबुड्ढीकी कहानी
एक बुड्ढाआया
साथ में एक बुढिया लाया
होटल में जाकर वेटर को बुलाया
दोनों ने अपना अपना आर्डर मंगवाया
पहले बुड्ढ़े ने खाया
बुढिया ने बिल चुकाया
फिर बुढिया ने खाया
बुड्ढ़े ने बिल चुकाया
ये देख वेटर का सिर चकरायावो उनके पास आया और बोला
जब तुम दोनों में इतना प्यार है
तो खाना एक साथ क्यूँ नहीं खाया?
इस पर बुड्ढ़े ने फरमाया
"जानी तेरा सवाल तो नेक है
पर हमारे पास दांतों का सेट सिर्फ एक है !!!!
********
183
पुराना दौर
तेरी कलम तो चली यही बहुत है मेरे लिए
तकरार अभी तो टली यही बहुत है मेरे लिए
तेरे अंदर का गुस्सा बरकरार है अभी भी
मेरी एक ना चली यही बहुत है मेरे लिए
मुझे मालूम है तेरा इंसां मर नहीं सकता
बात है कितनी भली यही बहुत है मेरे लिए
दो पल का साथ नहीं ये मालूम हम तुमको
सुबह हुई सांझ ढली यही बहुत है मेरे लिए
मेरी चाहत मेरी इबादत है यही चाहत तुमको
फिर भी तुमको खली यही बहुत है मेरे लिए
कमी लाख सही आखिर इंसां हैं खुदा तो नहीं
मुरझाये ना खिलती कली यही बहुत है मेरे लिए
हमें मुआफ़ करो या न करो अखितयार तुम्हारे है
तुम्हारी आँखों में नमी यही बहुत है मेरे लिए
कुछ तो है जो बांधे है हमको आज तलक भी
आबाद रहे तेरी गली यही बहुत है मेरे लिए
पत्थर दिल माँ से बना ये है मालूम मुझको
पिंघली मोम की डली यही बहुत है मेरे लिए
29-08-1992
*******
182
सहारे मत बना ए दिल सहारे रूठ जाते हैं
ना किस्मत पेभरोसा कर सितारे टूट जाते हैं
साहिल पर आके ना समझो कि पार आ गए
जरा सी लहर आयी तो किनारे छूट जाते हैं
राज दरबारों में न जाना वहां पे क्या रखा है
पेट की खातिर ही तो वे उनके झूठ गाते हैं
सच कहना अगर बगावत तो हम भी बागी
ज्यादा हवा भरने पर ये गुब्बारे फ़ूट जाते हैं
भगत सिंह के देश का फिर से देखा सपना
आखिरकार लूट के ये शिकारे डूब जाते हैं
अमीर गरीब की खाई बढ़ा विकास करेंगे वो
एक न एक दिन झूठे जनता के बूट खाते हैं।
********
181
बेचैनी जनता की बढ़ती जा रही
समझौता संघर्ष करती आ रही
डायलैक्टिस इसी को कहते हैं
आज बेचैनी दुनिया पर छा रही
डेमोक्रेसी ने आगे कदम बढाया है
जनता ने कुछ अधिकार पाया है
कितना ही भ्रष्टाचार बढ़ गया हो
इसके खिलाफ विरोध जताया है
उठती बैठती जीवण बिता रही है
कई बार घन घोर अँधेरा हटाया है
लूट के हथियार बदल लिए जाते हैं
जनता ने एकता हथियार बनाया है
********
180
डेमोक्रेसी ने आगे कदम बढाया है
जनता ने कुछ अधिकार पाया है
कितना ही भ्रष्टाचार बढ़ गया हो
इसके खिलाफ विरोध जताया है
उठती बैठती जेवण बिता रही है
कई बार घन घोर अँधेरा हटाया है
लूट के हथियार बादल लिए जाते
जनता ने एकता हथियार बनाया है
*********
179
मंदी के दौर में भी एक नया दौर लायेंगे
आतंक का अंधेरा ये मिलकर के मिटायेंगे
नंगेपन के नाम पर नंगापन छाता जा रहा है इंसानियत बाजार में हरेक खोता जा रहा है
परचम इंसानियत का हम फिर फैरायेंगे
भीमकाय बाजार फिर संरक्षण मांग रहा है
छिपा अपनी कमजोरी यह झूठ छांग रहा है
जनता करे कंट्रोल बाजार ऐसा संसार रचायेंगे
हाशिए पर फेंके गए जो उनका जमाना आएगा अपना हक पाने खातिर नागरिक समाज बनाएगा बड़े कदम नए साल में बस आगे बढ़ते जाएंगे नौजवानों का प्यार यहां फांसी चढ़ाया जाता है जात-पात गोतनात क्यों अपने रंग दिखाता है
नए साल की आशा से निराशा से लड़ पायेंगे
********
178
आर्थिक मंदी के दौर ने सताया हमको
जेब ढीली करदी इसने रुलाया हमको
बहुत सी जगह इसने करतब दिखाए
आ ई टी के कई योधा इसने मार गिराए
सरकारी कंट्रोल बता न था जिनको
उसी से भीख मंगनी पड़ रही उनको
पड़ सकता दिल पेय बुरा असर बताया
चिकत्सकों ने हाल मे ऐसा भी फ़रमाया
दिल के दौरे से आज कैसे बचा जाएगा
पूंजीवादी मंदी का दौर कहाँ पहोंचायेगा
********
177
1986 के दौर की रचना
अब मैंने रटना छोड़ दिया है
मैं कुछ कुछ सोचने लगा हूं
भगवान के भक्तों का असली चेहरा
थोड़ा पहचान में आने लगा है
मेरे दिमाग में
भगवान के वजूद पर भी एक
सवालिया निशान लग गया है;
वह होता तो सरसों के पीले फूल
उगाने की
एक सच्चे प्यार की कीमत
उन्मादी गोली या त्रिशूल का निशाना
न होती।
कुछ और सोचना और देखना शुरु किया
यूं लगा भगवान है इंसान का बनाया हुआ
तभी तो वह अपने मालिकों की जेल में
कैद है
आज तक वह जनता के दुख-दर्द
बढ़ाने तो बाहर निकला है
कभी कम करने नहीं
शायद यही कर सकता है 'वह'
आगे कुछ नजर दौड़ आता हूं तो
पाता हूं कि आज भी
कुछ बहादुर लोग सरसों के पीले फूल
उगाने की जी तोड़ कोशिशें कर रहे हैं
अपने खून से खेत को सींच रहे हैं
मुझे इंसान की इंसानियत पर
फिर भरोसा होने लगा है
और यह विश्वास बनता जा रहा है
सरसों के फूल भगवान नहीं लगा पाएगा
यह बहादुर इंसान ही फिर लगाएगा
और यकीं है वह दिन अवश्य आएगा
जब
सरसों के पीले फूल फिर से उगेंगे
शशि पुन्नू के बीच की दीवारें
176
आर्थिक मंदी के दौर ने सताया हमको
जेब ढीली करदी इसने रुलाया हमको
बहुत सी जगह इसने करतब दिखाए
आ ई टी के कई योधा इसने मार गिराए
सरकारी कंट्रोल बता न था जिनको
उसी से भीख मंगनी पड़ रही उनको
पड़ सकता दिल पेय बुरा असर बताया
चिकत्सकों ने हाल मे ऐसा भी फ़रमाया
दिल के दौरे से आज कैसे बचा जाएगा
पूंजीवादी मंदी का दौर कहाँ पहोंचायेगा
ढह जाएंगी
चारों तरफ सरसों के फूल लहलाने लगेंगे
Wednesday, June 12, 2024
169 से 175
175
सच के रास्ते पर चलना सीख लो
त्याग क़ि आग में जलना सीख लो
आगे बढ़ते रहो इस अंधी तूफान में
और अंगारों पर उतरना सीख लो
भगवान क़ि दया ने यहाँ पहुँचाया
गिर गए खुद ही संभालना सीख लो
रणबीर अनुभव चाहिए प्रकाश का
आज अँधेरे से गुजरना सीख लो
*******
174
पहले वाले गाँव नहीं बीरा पहले वाले बीर नहीं
रसायनिक हथियार आये पहले क़ि शमशीर नहीं
वक्त के साथ बदलती इस दुनिया का दस्तूर यही
कबीर रैदास सूफी संतों ने घुमा फिर ये बात कही
रोहतक जो छप्पन में था बची वाह तस्वीर नहीं
खाना पीना बादल गया अब ज्वर बाजरे बचे कहाँ
हरयाणा नंबर वन हुआ डिस्को डांस में फ़सा जहाँ
बथुआ राबड़ी खिचड़ी गौजी बची खाने में खीर नहीं
कडुआ सच है बदलाव का इसे समझना जरूरी देखो
देखनी होगी दिशा इसकी इसको परखना जरूरी देखो
बदलाव कई तरह के होते कुछ को माने जमीर नहीं
जनता हक़ में बदलाव के ये नारे बहोत उछाले हैं
जनता बहकावे में आई मुंह से ये दूर हुए निवाले हैं
पैनी नजर ये जनता क़ि बणी प्रहरी रणबीर नहीं
*******
173
हर एक कदम पर हादसा होना सोचो तो यारो
हमारे सिस्टम में क्यों है रोना सोचो तो यारो
जो कुछ कमाया हमने छीन लिया चालाकी से
किसी ने नहीं समझाया ये सब खेल बेबाकी से
कहते तुम्हारी क़िस्मत में खोना सोचो तो यारो
क़िस्मत का खेल मान कर हमने इसको ढ़ोया
अपने हाथों से खुद हमने बीज कीकर का बोया
क़िस्मत क़ि मार को क्यों ढ़ोना सोचो तो यारो
दिलो दिमाग पर मेरे तो यही सब तो छाया है
आज जो कुछ भी हूँ मैं मेरे नसीब ने बनाया है
औरों के खेलने का ये खिलौना सोचो तो यारो
बात समझ में आ गयी क़िस्मत का खेल नहीं
बिना इन्सां के चल सकती यह देखो रेल नहीं
*********
172
महम चौबीसी बदल रही देखो
नहीं पुराणी चौबीसी वही देखो
महम परंपरागत खेती में मशहूर
आज परंपरा छोड़ने को मजबूर
गेहूं जवार बाजरा उगाते रहे धान
गरीब अमीर सब यहाँ के किसान
फल व सब्जी की खेती आई देखो
अपार संभावनाएं गयी बताई देखो
परंपरागत खेती ख़तम होती जा रही
परासंगिकता अपनी है खोती जा रही
भूजल स्तर कहीं पर तो है बढ़ रहा
कहीं पर भूजल स्तर ये घट रहा
बेर के बाग़ महम में दिखाई ना देएँगे
किन्नू की खेती ये किस्सान भाई लेंगे
तीतरी गाँव टमाटर बहोत उगाता है
अमरुद के बाग़ विभाग लगवाता है
परंपरागत खेती क्यों छोड़ता किसा न
रूढ़िवादी सब कहाँ गए फरमान --
*********
171
कई बार सोचता हूँ तो बस
सोचता ही रह जाता हूँ मैं
सड़क पर रहने वाले बचों की
बेमिशाल हिम्मत संकट का दौर
फिर भी हंसी के पल चुरा लेना
इन बचों से ही सीखे कोई
उनका साहस उनकी जीवटता
देखकर अचरज होता है मुझे
कई बार सोचता हूँ तो बस
सोचता ही रह जाता हूँ मैं
*******
170
तुममें शिकश्त और जिल्लत का अहसास बाकी
पता हमें तुममें अभी नफरत का अहसास बाकी
कितना ही दिखावा करो अपनी सादगी का तुम
खूब तुममें देखा है हिमाकत का अहसास बाकी
मुहब्बत से कहते हैं दौलत का कोई वास्ता नहीं
तुम्हारे दिल में अपनी दौलत का अहसास बाकी
कितना ही अपमान करो तुम बार बार ये हमारा
रहेगा हममें फिर भी कयामत का अहसास बाकी
हमारी शराफत को करदो बिल्कुल तार तार तुम
रणबीर को रहेगा ही शराफत का अहसास बाकी
*********
169
हमारी बर्बादी
हमें बर्बाद करके उनको पता नहीं क्या मिल गया
ईमानदारी का दामन थामा हमारा निवाला छिन गया
आदमी से आदमी की मोहब्बत कहाँ काफूर हो गयी
मेहनत हमने की मगर पता नहीं कहाँ ये खो गयी
दर्द हद से गुजर गया है सीना हमारा तो छिल गया
मोहब्बत के गीत गाएँ कैसे चिंता हमें बीमारी की
यकीं कौन करेगा इस पर मोहब्ब्त गरीब भिखारी की
देख के उनके ढंग निराले मुंह हमारा है सिल गया
मरने वाले हथियार लिए बैठे साधा निशाना हम पर
मार न पाना मजबूरी उनकी टिका जमाना हम पर
हमारे वजूद का तस्सवुर कीचड में गुलाब खिल गया
तूफ़ान जो उठा समुन्द्र में अब नहीं टाला जायेगा
पड़ाव अब ये हमारा मंजिल पर ही डाला जायेगा
भगवन का आसरा किया पर भरोसा सारा हिल गया
आर पार की जंग शुरू करना होगा स्वीकार हमें
फूंक फूंक के चलना है रहना होगा होशियार हमें
देख देख जुल्म उनके कलेजा हमारा छिल गया
मानवता का औढ़ा मुखोटा लिया धर्म का सहारा है
जात पात का जहर फैलाया निचौड़ा खून हमारा है
रणबीर आज रो उठा हो छलनी उसका दिल गया
*******
9 से 1
9
था क्या हमने सोचा ये क्या हो गया
हमें क्यों इस चमन से गिला हो गया
दिया जिसकी खातिर था हमने लहू
वही मौसमें गुल क्यों खफा हो गया
*********
8
गुनाह उनका सजा हमें
उनके गुनाहों की हमको किसलिए सजा मिले
ऐसा इंसाफ क्यों हो किसलिए ऐसी क़ज़ा मिले
नाहक ही हम बेकसूरों की क्यों जान चली जाये
कैसे हम जैसों को जीने की यहाँ फिजा मिले
तुम्हारे सताने से हम रोये बहुत कई बार ही
मग़र अब ना रोयेंगे ताकि तुम्हें ना मजा मिले
तुम लूट कर हमें रहो सुख चैन से आबाद
बताओ तो कसूर क्यों उल्टा हमें खिजा मिले
हमारी मेहनत पर रणबीर वे ऐश करते हैं
न्याय देखो हमें सुखी रोटी उनको पिज्जा मिले
*********
7
जीने की मुश्किल अब मेरी राह बहुत है
जीता हूँ जीने की अब मुझे चाह बहुत है
गम बहुत से हैं हमारे और तुम्हारे देखो
उनपे मेरी टिकी अब निगाह बहुत है
तुम कहो या न कहो पर मुझे मालूम है
तुमको मेरी जीने की परवाह बहुत है
कत्ल होके भी हम अमीरों के गुनाहगार
झूठ नहीं शहर में हमारे गवाह बहुत है
मुझे अपने दोस्तों पर है पूरा एतबार
अहम् रणबीर उनकी सलाह बहुत है
*******
6
मेरा रास्ता समझो तो सही यही समझाता रहा
मकसद जीने का क्या हो इसपे बतियाता रहा
एक ही जीवन है यहाँ इतना तो मान लो दोस्त
दोस्त चुप चाप दूसरा रास्ता बस बनाता रहा
जाने वाले फिर नहीं आते मुडके अगले जीवन
इस हकीकत से दोस्त हमेशा ही कतराता रहा
दोस्ती आगे नहीं बढ़ पाई मुझ पर कामरेड का
देर सबेर लुके छिपे ठप्पा दोस्त वो लगाता रहा
*******
5
हुए किसी और के फिर भी अपने से लगते हो
बहुत प्यारे हसीन टूटे हुए सपने से लगते हो
कभी कभी यादों का एक हजूम सा आता है
अपनी बाँहों में मुझे तुम कसने से लगते हो
कभी अकेले में बैठ कर रोने को दिल करता है
मेरी हालत पे लगता है तुम हंसने से लगते हो
वो प्यार ही क्या जो करे पछतावा प्यार करके
प्यार किया हमने तुम मना करने से लगते हो
अब वो बात नहीं हमने रास्ता बदल लिया है
मग़र तुम जब मिलते हो तो डरने से लगते हो
******
4
मेरा रास्ता समझो तो सही यही समझाता रहा
मकसद जीने का क्या हो इसपे बतियाता रहा
एक ही जीवन है यहाँ इतना तो मान लो दोस्त
दोस्त चुप चाप दूसरा रास्ता बस बनाता रहा
जाने वाले फिर नहीं आते मुडके अगले जीवन
इस हकीकत से दोस्त हमेशा ही कतराता रहा
दोस्ती आगे नहीं बढ़ पाई मुझ पर कामरेड का
देर सबेर लुके छिपे ठप्पा दोस्त वो लगाता रहा
********
3
गुनाह उनका सजा हमें
उनके गुनाहों की हमको किसलिए सजा मिले
ऐसा इंसाफ क्यों हो किसलिए ऐसी क़ज़ा मिले
नाहक ही हम बेकसूरों की क्यों जान चली जाये
कैसे हम जैसों को जीने की यहाँ फिजा मिले
तुम्हारे सताने से हम रोये बहुत कई बार ही
मग़र अब ना रोयेंगे ताकि तुम्हें ना मजा मिले
तुम लूट कर हमें रहो सुख चैन से आबाद
बताओ तो कसूर क्यों उल्टा हमें खिजा मिले
हमारी मेहनत पर रणबीर वे ऐश करते हैं
न्याय देखो हमें सुखी रोटी उनको पिज्जा मिले
********
2
होंश में आना होगा
अब नए संगठन को हमें अपनाना होगा ।।
जो भाई नहीं आएं उनको बुलाना होगा ।।
संगठन बनायें जो रजके रोटी खाना चाहते
अपने बच्चों को हम शिक्षा दिलाना चाहते
सब बराबर हों ऐसा समाज बनाना चाहते
अब हमें क्रांति के गीतों को गाना होगा ।।
जो भाई नहीं आएं उनको बुलाना होगा।।
वो क्यों अमीर हो गए इस पर विचार करें
हम क्यों गरीब ही रहे इस पर ध्यान धरें
अलग अलग बंटे हम एक दूजे से ही डरें
जात पात भूलके एक मंच पर आना होगा।।
जो भाई नहीं आये उनको बुलाना होगा ।।
हरियाणा बुरी तरह जलवाया देख लिया
जातों को आपस में भिड़वाया देख लिया
फूट डालो राज करो आजमाया देख लिया
मेहनतकश को मानवता को बचाना होगा।।
जो भाई नहीं आये उनको बुलाना होगा ।।
महंगाई बढ़ती जा रही देखो आज यहाँ
बेरोजगारी हमें खा रही देखो आज यहाँ
प्याज भाव नहिं पा रही देखो आज यहाँ
इन मुद्दों को मिलकर के उठाना होगा ।।
********
1
साथ तुम्हारा इन्कलाब नारा इस कदर भा गया
मकसद वीरान जिन्दगी का जैसे फिर से पा गया
मोम के घरों में बैठे लोग हमारे घर जलाने आये
जला दिए हमारे मग़र अपने भी ना बचा पाये
तबाह कर दिया जहान को मुनाफा हमें खा गया
रास्ता ही गल्त पकड़ा हमें भी उसी पर चलाया है
स्वर्ग नर्क के पचड़े में तुम्हीं ने हमको फंसाया है
भगवान और बाबाओं का खेल समझ में आ गया
आशा बाबू एक प्रवचन के कई लाख कमाते हैं
निर्मल बाबू नकली लोग पैसे दे कर के बुलाते हैं
भगवान की आड़ में मुनाफा दुनिया पर छा गया
19 से 10
19
*पानी आकाश से गिरे तो........बारिश,*
*आकाश की ओर उठे तो........भाप,*
*अगर जम कर गिरे तो...........ओले,*
*अगर गिर कर जमे तो...........बर्फ,*
*फूल पर हो तो....................ओस,*
*फूल से निकले तो................इत्र,*
*जमा हो जाए तो..................झील,*
*बहने लगे तो......................नदी,*
*सीमाओं में रहे तो................जीवन,*
*सीमाएं तोड़ दे तो................प्रलय,*
*आँख से निकले तो..............आँसू,*
*शरीर से निकले तो..............पसीना,*
*और*
*प्रभु के चरणों को छू कर निकले* *तो.........................चरणामृत*
*( आज विश्व जल दिवस पर समर्पित )*
*Save Water💧Save Life।* *💧💧पानी को जरूर बचाये💧💧*
******
दिन आ गए अच्छे
पा के खाखी निकर कच्छे
बंदियां उत्ते गऊंआ बच्छे
गां दा मूत पिलाऊंदे ने
मुर्ख खूब बनाऊंदे ने
सानु बढदे फिरन पतंदर
दसदे हनुमान है बंदर
वोटां वेले राम दा मंदर
मुडके राम भुलाऊंदे ने
मुर्ख खूब बनाऊंदे ने
जाट आरक्षण ल्याके
रक्खे सारे लोक लडाके
भाईचारे नु तुडवाके
आपस विच लडाऊंदे ने
मुर्ख खूब बनाऊंदे ने
युग विज्ञान दा आया
ऐहना तर्क नु आ दबाया
आके गीता विच्च उलझाया
गीता सार पढाऊदे ने
मुर्ख खूब बनाऊंदे ने
डॉ०फूल सिह
*******
18
पैसा छाया चारों तरफ आज के संसार में
रिश्ते नाते टूट रहे है आज के परिवार में
भाई का भाई दुश्मन जहाँ में बना हुआ है
आरक्षण खाप का मसला आज तना हुआ है
मानवता पीछे रह गई धर्म के प्रचार में ।
भाई चारा मेलजोल चीज विरली हो गई
सादगी सच्चाई जाणे कहाँ सब खो गई
सब कुछ बिक रहा आज इस बाजार में ।
सिस्टम हमारा ये बिलकुल खोखला हो रहा
अविश्वास के बीज हर जगह पर वो बो रहा
बहोत से भ्रष्ट नेता छाये राज दरबार में ।
विषमता के हर तरफ ये अम्बार लगे हैं
खाईयां बढ़ रही हैं ये रिश्ता बेकार लगे हैं
कितना अकेला हुआ मानव घर परिवार में।
किसान कर्ज में डूबा फांसी खाने को मजबूर
निठल्ला ऐश करे देखो सिस्टम का दस्तूर
अच्छे दिन आएंगे बीता समय इंतजार में ।
*********
17------------------------------------------
दुनिया को बदलने का बहाना तुम्हारा
अब समझ में आ गया हमको यारो
अपने वजूद के लिए ये जुमला अपनाया
------------------------------------------
********
--16-----------------------------------------
दुःख होता है ये देख कर हमको यारो
हमें जिन्होंने मार्क्सवाद सिखाया था
वही उदारीकरण में उदार हो गये देखो
-----------------------------------------
********
15
--------------------------------------
इंसानियत और मानवता का
सही और असली रूप ढूँढते
ढूँढते समाजवाद के दरवाजे
पर आ पहुंचे और बचा पाये
कुछ हिस्सा अपनी मानवता का
------------------------------------
********
14
यही रफ़्तार रही ज़माने की ताऊ
तो इंसानों की जगह होंगे ये हाऊ
खुदगर्जी चुगलखोरी खुसामद की
मौज होगी हर चीज यहाँ बिकाऊ
अमेरिका और कोर्पोरेट छाया देखो
भारत बनाया इन्होंने बैल हिलाऊ
********
13
दो हजार बीस तक
गाँव कस्बों को ना देखिये
बड़े बड़े शहरों की फ़ैली गंदी
बस्तियों की तरफ ना देखिये
पाश इलाकों में बनी ऊंची
इमारतों को ही अब देखिये
*********
12
गरीब परिंदा उड़ान में है
तीर अमीर की कमान में है
है डराने को मारने को नहीं
मरा तो अमीर नुकसान में है
जिन्दा रख कर लहू चूसना
अमीरों के दीन ईमान में है
खौफ ही खौफ है जागते सोते
लूट हर खेत खलिहान में है
मरने न देंगे न जीने देंगे
sajish poonjee mahan में है
********
11
अपमान सहें जाओ रै पर बोलियो मतना।।
नाश करण लागरे थारा मूंह खोलियो मतना ।।
अपने अपने में मग्न हो चुप चाप झेल रहे
गलत होंते देखें जाओ पर सोचियो मतना।।
******
10
कुछ नए बन रहे कुछ पुराने बने
हर कदम पर यहाँ कैदखाने बने
किस तरफ से चली गोलियां क्या पता
किन्तु हर बार हम ही निशाने बने
********
29 से 20
29
तपती लू साईकिल का सफ़र
फेस बुक की बन गयी खबर
न बर्फ का पानी न ही फ्रीज़
बिजली का पंखा बिजली का
बार बार कट बनी बात जबर
सारे दिन की दिहाड़ी सौ रुपे
चले जा रहे है हम अंधी डगर
क़िस्मत में यही लिखा बताया
सुन कर बस कर लिया सबर
*******
28
मत कहो की तुम्हे हमसे प्यार हो गया
गर था तो इतनी जल्दी कहाँ खो गया
प्यार तो सोनी महीवाल का बताते यारो
कचा मटका भी उनके प्यार पे रो गया
********
27
के करूँ
क्या ठीक है क्या गलत है कौन समझाए
क्या करें क्या ना करें ये कौन बतलाये
सही काम करके जीना चाहता हूँ मैं
कहीं भी सही काम नहीं पाता हूँ मैं
बस सर पकड़ कर बैठ जाता हूँ मैं
सोचता हूँ कोई आकर के मुझे उठाये---------
काले काम काले धंधे बुला रहे हैं
इनमे कई लोग खूब कमा रहे हैं
मुझे भी यही रास्ता दिखा रहे हैं
डर लगता है मुझको कोई ढाढस बंधवाये ------
मेरे जैसे बहुत काले अंधेरो में खो गए
गलत रहो के आदि बहुत साथी हो गए
परिवार भी बस दो चार बार रो गए
बिना काले के हमारा पेट कैसे भर पाए -----
******
26
आज की जरूरत हम नहीं जानते
अपनी शकल को भी नहीं पहचानते
मशीन बन गया है आज का इंसान
इस सचाई को हम क्यों नहीं मानते
रणबीर
*******
25
जो धर्म हमें घृणा से पूरा भरदें
मनुष्य से मनुष्य को अलग करदें
आपस में हमको जो लडवाते हों
धर्म के ठेकेदारों को बचाते हों
जो देशो को ही बाँट कर धरदें
ऐसे धर्मों के बारे क्या कहूँ मैं ?
******
24
वायदे करके इनको पूरी तरह हमने निभाया है
करके वायदे तोड़ दिए ये तुमने करके दिखाया है
चलो कोई मजबूरी होगी वायदे नहीं निभा पाये
प्यार तो तुम्हें हमसे था ही छिप नहीं पाया है
********
23
बड़ा भोला बड़ा सादा बड़ा सच्चा है।
तेरे शहर से तो मेरा गाँव अच्छा है॥
वहां मैं मेरे बाप के नाम से जाना जाता हूँ।
और यहाँ मकान नंबर से पहचाना जाता हूँ॥
वहां फटे कपड़ो में भी तन को ढापा जाता है।
यहाँ खुले बदन पे टैटू छापा जाता है॥
यहाँ कोठी है बंगले है और कार है।
वहां परिवार है और संस्कार है॥
यहाँ चीखो की आवाजे दीवारों से टकराती है।
वहां दुसरो की सिसकिया भी सुनी जाती है॥
यहाँ शोर शराबे में मैं कही खो जाता हूँ।
वहां टूटी खटिया पर भी आराम से सो जाता हूँ॥मत समझो कम हमें की हम गाँव से आये है।
तेरे शहर के बाज़ार मेरे गाँव ने ही सजाये है॥
वह इज्जत में सर सूरज की तरह ढलते है।
चल आज हम उसी गाँव में चलते है.................. उसी गाँव में चलते है..... Akshay Ohlan
********
22
अब हालत बदलने होंगे ग़म का बोझ उठाने वाले |
वरना देते ही जायेंगे दुःख दिन रात ज़माने वाले |
मजलूमों को बाँट रहे हैं परम्पराओं के बहाने करके
इस साजिस ही में शामिल हैं वे नफरत फ़ैलाने वाले |
दुनिया पर कब्ज़ा है जिन का वो उस के हक़दार नहीं हैं
उनसे अब कब्ज़ा छीनेंगे सब का बोझ उठाने वाले |
पत्थर दिल लोगों से अपने जख्मों को ढांपे ही रखो
खुद को हल्का कर लेते हैं सबको जख्म दिखाने वाले |
कोई किसी का साथ निभाए इतनी फुर्सत ही किसको है
अफसानों में मिल सकते हैं अब तो साथ निभाने वाले
********
21
दर्द सबके एक हैं
मगर हौंसले सबके अलग अलग है
कोई हताश हो के बिखर गया
तो कोई संघर्ष करके निखर गया !
*******
20
सोच सोच कर
सोच सोच कर घबरा जाता हूँ मैं
अपने आप को अकेला पाता हूँ मैं
एक नयी दुनिया का सपना मेरा है
यहाँ क्या मेरा है और क्या तेरा है
इंसानियत पैदा की है समाज ने
हैवानियत पैदा की है दगा बाज ने
हैवानियत ख़त्म हो है यही सपना
इंसानियत बढे यही लक्ष्य अपना
मनकी शान्ति की खोज में धर्मात्मा
खोजते खोजते खोज लिया परमात्मा
अपनी शान्ति पाई हमारी लूट पर
हमारी शांति भगवन की छूट पर
भगवान भी इंसान की खोज कहते
हम तो भुगतें वो करते मौज रहते
जिस दिन ये चालबाजी भगवान की
समझ आयेगी तो मुक्ति इन्सान की
सोचता हूँ जितना उतना ही भगवान
नजर आता है मुझको तो बस शैतान
मेरे लिए तो मेहन त इमानदारी
उनको लूट की दी उसने थानेदारी
सबसे पहले होगी बगावत मेरी
सामने लायेगी उसकी हेरा फेरी
जग नहीं है सोता उसकी हाँ के बिना
घोटाला कैसे होता उसकी हाँ के बिना
मंदिरों में हजारों टन सोना जमा है
यहाँ भूख से मौतों का लगा मजमा है
लोगो ने चढ़ावा चढ़ाया है मंदिरों में
चढ़ावे तेन मौज उड़ाया है मंदिरों में
महिला को दासी बनाया है मंदिरों में
गरीबों को गया भरमाया है मंदिरों में
मन की शांति नहीं मिली है मंदिरों में
इंसानियत आज हिली है मन्दिरों में
बुद्ध ने नया रास्ता खोजा मन शांति का
भगवान को नाकारा दर तोडा भ्रान्ति का
मार्क्स ने धर्म को अफीम बताया था
गरीब किया आदि हमें समझाया था
पूंजी का खेल सारा है पूंजीवाद में
इसका जवाब तो है समाजवाद में
सोचता समाजवाद कैसा हो आज का
क्या रिश्ता होगा चिड़िया और बाज का
कई सवाल हैं जिनके ढूँढने जवाब
महात्मा ने नहीं हमें ढूँढने जनाब
रंग भरने हैं समाजवादी समाज में
सब की हिस्सेदारी के सही अंदाज में
"रणबीर "
49 से 30
49
होकर मायूस नहीं यूं श्याम की तरह ढलते ही रहिए
जिंदगी एक भोर है सूरज की तरह निकलते रहिए
ठहरोगे एक पांव पर पांव तो थक जाओगे यारो
धीरे-धीरे ही सही मगर लक्ष्य की ओर चलते रहिए
*********
48
इस दिल में और उस दिल में सिर्फ फर्क इतना है
ये शीशा था जो टूट गया वो पत्थर था जो साबुत है
**********
47
मेरा कसूर
हमने दोनो ने मिलकर सोचा
जिन्दगी का सफ़र तय करेंगे
बहुत सुन्दर सपने संजोये थे
प्रेम का पता नहीं ये हरयाणा
क्यों पुश्तैनी दुश्मन बन गया
यह सब मालूम था हमको पर
प्यार की राहों पर बढ़ते गए
मेरे परिवार वाले खुश नहीं थेa
क्यों मुझे पता नहीं चला है
न तो मैंने एक गोत्र में की है
न ही एक गाँव में शादी मेरी
न ही दूसरी जात में की मैंने
तो भी सब के मुंह आज तक
फुले हुए हैं हम दोनों से देखो
प्यार किया समझा फिर शादी
ससुराल वाले भी खुश नहीं हैं
शायद मन पसंद गुलाम नहीं
मिल सकी जो रोजाना उनके
पैर छूती पैर की जूती बनकर
सुघड़ सी बहु का ख़िताब लेती
दहेज़ ढेर सारा लाकर देती ना
प्यार का खुमार काम हुआ अब
जनाब की मांगें एकतरफा बढ़ी
मैं सोचती हूँ नितांत अकेली अब
क्या हमारा समाज दो प्रेमियों के
रहने के लायक बन पाया यहाँ
चाहे कुछ हो हम लोड उठाएंगे
मगर घुटने नहीं टिकाएंगे यारो
वो सुबह कभी तो आयेगी की
इंतजार में ये संघर्ष जारी रखेंगे
झेलेंगे इस बर्बर समाज के सभी
नुकीले जहरीले तीर छाती पर ही
जिद हमारी शायद यही है कसूर
**********
47
हम आह भी भरते हैं तो हो जाते हैं बदनाम, वो कत्ल भी करें तो चर्चा नहीं होता!
*********
46
कैसे जांचें
कैसे जांचें कि कौन अच्छा है क्या सिस्टम खस्ता है ॥
सबकी अपनी अपनी ढपली विकास का वही रस्ता है ॥
जनता के बल पर ऊँचाई पाने वाले हरेक बादल को
मौसम रूख बदले तो फिर पानी पानी होना पड़ता है ॥
जनता का विश्वास बार बार टूटता है यहाँ पर फिर से
कमाल की बात है कि यह बार बार से देखो उठता है ॥
आंधी आती है बड़े बड़े पेड़ उखड़ जाते हैं यहाँ पे यारो
कई बार पत्ता भी हिलता है तो दिल कांपने लगता है ॥
मेरे अंदर एक मुखालिफ था जो मुझसे भी लड़ता था
अब या तो वह चुप ही रहता है या हाँ में हाँ करता है ॥
जनता ने इतिहास रचे हैं वो ये जानते हैं बखूबी ये
इसीलिए हमको वो बरगलाने का प्रपंच रचता है ॥
**********
45
आज का दौर हमको कहाँ लेजा रहा यारो ॥
बताओ तो सही नहीं समझ पा रहा यारो ॥
प्यार मोहब्बत नहीं बची मार काट छाई
मानवता के रिस्तों पे बाजार छा रहा यारो ॥
*********
44
शोर गुल बहुत है नहीं आवाज सुनाई देती
बनावटी ही बनावटी हर चीज दिखाई देती
कैसे रहते आज लोग अंधेरों के दरम्यान यारो
वहां की नहीं दिखाई हमको वह सच्चाई देती
हमारे बदनों में खुद उतार करके खंजर यारो
पूछते हैं लोग हमें कि राहत कैसे दवाई देती
जिद्द है ये तुम्हारी तो यही है जिद्द भी अपनी
हार ना मानेंगे यारो जीत की घण्टी सुनाई देती
*********
43
मुबारक आपका भेजना उनको सलाम यारो
हमको लगता उनका हर कदम हराम यारो
उनके दरबारों में मानवता का क्या खोजना
वहां पर तो फेकू नेता बस्ते हैं तमाम यारो
कल इनके जिम्मे था गांधी का कत्ल यहाँ
आज इनके हाथों में देश की है लगाम यारो
अन्धविश्वासी और रूढ़ियों के भगत हैं जो
आज लेकर आ रहे विकास का पैगाम यारो
*********
42
कहना बहुत आसान है मुश्किल चलना सच्चाई पर
लहर के उल्ट तैर कर ही पहुंचा जाता अच्छाई पर
बुराई की ताकत को यारो देख कर डर जाते हम
इसके दबाव में बहुत सी गलती भी कर जाते हम
आका बैठ के हँसते रोजाना फिर हमारी रुसवाई पर
मेहनत हमारी की अनदेखी रोजाना हो रही दोस्तो
चेहरे की लाली हम सबकी रोजाना खो रही दोस्तो
कहते वो हमको बेचारा जो जीते हमारी कमाई पर
बीज है खाद और खेत भी इससे फसल नहीं उगती
फसल उगती है तब यारो जब मेहनत हमारी लगती
महल बने देखो सभी तुम्हारे हम सब की तबाही पर
********
41
समाज हमको हमारा ही आईना दिखाता है
प्रतिगामी प्रगति कामी का अंतर जताता है
पतन शीलता बढ़ती जा रही चारों तरफ यारों
प्रगति कामी हर कदम पर रास्ता बताता है
पता नहीं कहां छोड़ आए हैं हम अपनी पहचानें
आज हर चेहरा अजनबी सा नजर आता है
सभी मजबूर हुए अपने अपने अंदर यारो
मोबाइल एक कमरे में अलग अलग बैठाता है
मशीन बनते जा रहे इंसान समाज में यारो
इंसानियत का बंद होता जा रहा क्यों खाता है
*********
40
सच
आज क्या हो रहा बिलकुल समझ नहीं पा रहा
एक कुछ कहता दूसरा कुछ कहता हुआ आ रहा
सच का साथ देने को यहाँ पे सब कहते हैं यारो
सच क्या है इस पे हरेक अपनी ढपली बजा रहा
कहानी को माइथोलॉजी को इतिहास बताने वालो
इतिहास और वैज्ञानिक नजर से सच ढूँढा जा रहा
********
39
आंधी चल रही ये नहीं थमीं यारो
रात की गर्द मेरे चेहरे पे जमीं यारो
कुछ ठूंठ खड़े हैं कहीं कहीं मेरे जैसे
कुछ उखड़े पड़े हैं कहीं तुम्हारे जैसे
हम सब बचें हैं इसके थपेड़े खाकर
तुम बैठ गये अपने महलों में जाकर
यह आंधी आज किसे साल रही देखो
झोंपड़ी इधर उधर उछाल रही देखो
धर्म की आँधी चलने ही वाली यारो
क्या गुल खिलेंगे उजड़ेगा माली यारो
*********
38
पुराना दौर
तेरी कलम तो चली यही बहुत है मेरे लिए
तकरार अभी तो टली यही बहुत है मेरे लिए
तेरे अंदर का गुस्सा बरकरार है अभी भी
मेरी एक ना चली यही बहुत है मेरे लिए
मुझे मालूम है तेरा इंसां मर नहीं सकता
बात है कितनी भली यही बहुत है मेरे लिए
दो पल का साथ नहीं ये मालूम हम तुमको
सुबह हुई सांझ ढली यही बहुत है मेरे लिए
मेरी चाहत मेरी इबादत है यही चाहत तुमको
फिर भी तुमको खली यही बहुत है मेरे लिए
कमी लाख सही आखिर इंसां हैं खुदा तो नहीं
मुरझाये ना खिलती कली यही बहुत है मेरे लिए
हमें मुआफ़ करो या न करो अखितयार तुम्हारे है
तुम्हारी आँखों में नमी यही बहुत है मेरे लिए
कुछ तो है जो बांधे है हमको आज तलक भी
आबाद रहे तेरी गली यही बहुत है मेरे लिए
पत्थर दिल माँ से बना ये है मालूम मुझको
पिंघली मोम की डली यही बहुत है मेरे लिए
29-08-1992
*********
37
आज का जमाना
तेज रफ़्तार ज़माने की समझां इसकी चाल हे||
नासमझी मैं उतरे बेबे म्हारी सबकी खाल हे||
1
गफलत पडे छोड़नी करा हकां की रुखाल हे
अपना गम स्कूल अपना करें इसकी संभाल हे
म्हारे स्कूल कोलेजां पै टपकै बदेशिया की राल हे
जनता एका करकै बनैगी या मजबूत सी ढाल हे
जात पात और धरम पै करां लड़न की टाल हे||
नासमझी मैं उतरै बेबे म्हारी सबकी खाल हे||
2
वैजानिक नजर के सहारे रचै नयी मिसाल हे
मानवता सिखर पर पहोंचे सजा पावें चंडाल हे
कार्य कारण की होवे फेर सही सही पड़ताल हे
क्या क्यों और कैसे बरगे उठें दिलों मैं सवाल हे
धार्मिक कटरता की हार होजयागी फिलहाल हे||
नासमझी मैं उतरे बेबे म्हारी सबकी खाल हे||
3
संघर्ष करना बहोत जरूरी ठा हाथों में मशाल हे
मानवता की करें सेवा नहीं रहे कोई मलाल हे
एक दूजे का प्राणी राखै हमेश्या पूरा ख्याल हे
आए अकेले अकेले जाना बाकि सब जंजाल हे
प्रकर्ति गेल्यें करें दोस्ती पर्यावरण हो बहाल हे |।
नासमझी मैं उतरे बेबे म्हारी सबकी खाल हे||
4
पानी की कमी नही रह्वै नहीं होंगे सुने ताल हे
भूखा कोए नहीं सोवैगा नहीं पडेंगे अकाल हे
समतावादी विचार सबके नहीं मचै बबाल हे
इन सब बातां की हमनै करनी हो पड़ताल हे
रणबीर की कलम आज बयां करै ये हाल हे।।
नासमझी मैं उतरे बेबे म्हारी सबकी खाल हे||
********
36
निर्मला
मैं एक साधारण से परिवार में पली लड़की
अपने जीवन को सार्थक बनाने चली लड़की
अनगिनत सहन की है जीवन की ये कठिनाई
गांव के मेरी कोम वालों ने इज्जत लूटनी चाही
खेतों में काम करते दलित वो थे दौड़े-दौड़े आए
तभी मेरे में ऊपर से जुल्म के बादल छंट पाए
कालेज जाने लगी तो इन्होंने मेरा पीछा नहीं छोड़ा
दूसरे गांव के लड़कों से सूत्र इन्होंने था जोड़ा
घर पर बात बताई तो कहते बंद करो पढ़ाई
कॉलेज में वूमेन सेल बात वहां भी न बन पाई
आशा और निराशा के बीच एम ए पास किया
अच्छे नंबर आए मेरे थोड़ा सुख का साथ लिया
नेट भी पास कर लिया पर नौकरी नहीं मिलती
मां कहती मेरे चेहरे पर क्यों हंसी नहीं खिलती
कैसे खिले हंसी मुझे पंचायतियो बताओ तो सही
क्या करूंआगे का राह पंचायतियो दिखाओ तो सही
प्राइवेट स्तर पर मैंने बी एड भी कर लिया है
मेरे रिश्ते ढूंढते ढूंढते घर वालों का जी भर लिया है
ना कहीं नौकरी मिल रही ना शादी हो रही मेरी
क्या नहीं दिखती तुम्हें बर्बादी ये जो हो रही मेरी
कई जगह बात चली दहेज को लेकर टूट गई
मर जाने को दिल करता आस सभी छूट गई
क्या करूं कहां जाऊं मेरी कुछ समझ नहीं आ रहा
बूढ़े मात-पिता हैं उनका दुख ना देखा जा रहा
सुनील भाई भी एम ए पास पांव से पांव भिड़ा रहा
एकेली नहीं हूँ गांव में और भी लड़कियां भुगत रही
इकट्ठी हो मिल बैठ कर सोचें हो नहीं ऐसी जुगत रही
आज नहीं तो कल सोचना तो हम सबको पड़ेगा
बनायें युवा महिलाओं का संगठन जो बुराई से लड़ेगा
**********
35
हमने खोल के दिल से बातें करनी चाही
गंदे विचार और गंदगी दिमाग से ताही
बहुत सोच समझ कर अपनाई ये राही
मेहनत और ईमानदारी की की है बाही
********
34
पता नहीं
पता नहीं आज का जमाना किधर को जा रहा है
सुबह कहीं शाम कहीं अगली सुबह कहीं पा रहा है
नई तकनीक ने कब्जा जमाया पूरे इस इंसान पर
आदमी आदमी को दिन दिहाड़े नोच नोच खा रहा है
दूसरों के कंधों पर पैर रखकर आसमान छू रहे हैं
गंदी फिल्मों का फैशन आज नई पीढ़ी पर छा रहा है
दारू समाज के हर हिस्से में सत्यानाशी बनती जा रही
अच्छा खासा हिस्सा आज दारु पी गाने गा रहा है
लालच फरेब धोखाधड़ी का दौर चारों तरफ छाया
नकली दो नम्बर का इंसान हम सबको भा रहा है
बाजार व्यवस्था का मौसम है मुट्ठी भर हैं मस्त इसमें
बड़ा हिस्सा दुनिया का आज नीचे को ही आ रहा है
भाई भाई के सिर का बैरी कत्लोगारत बढ़ रही है
पुलिस अफसर कोई बाएं दाएं से खूब पैसे बना रहा है
पूरे के पूरे सिस्टम को दीमक खाती जा रही देखो
आज भ्रष्टाचार चारों तरफ डंक अपना फैला रहा है
एक तरफ
मॉल खड़े हुए दूजी तरफ टूटी हुई सड़कें देती दिखाई
तरक्की का यह मॉडल देखो दूरियां बहुत बढ़ा रहा है
अपने बोझ तले एक दिन मुश्किल होगा सांस लेना
तलछट की जनता जागेगी रणबीर उसे जगा रहा है
*************
33
जनता को दबाना दिन बी दिन मुश्किल होता जायेगा
मिलट्री पुलिश सारा ढांचा उसके सामने डगमगायेगा
तुमने ही ये हालत पैदा किये जनता को बाँटने के लिए
यही हालत उसे एकता देंगे ये सिंघासन लड़खड़ायेगा
*********
32
ना इस जन्म में झूठ बोला
ना कभी दुकान पे कम तोला
फिर भी भगवान नाराज हुआ
हार्ट अटैक मुश्किल इलाज हुआ
मैंने पूछा मुझे क्यों कष्ट मिला
बताया पिछले का सिलसिला
इसका कब होगा मेरा हिस्साब
अगले में मिलेगा तुम्हें जवाब
पिछला ना कभी जान पाया
नहीं अगला समझ में आया
आज की बाबत नहीं बताते
अगले पिछले में हमें फँसाते
दम मारो दम मिट जाएँ गम
देवी देवता हमारे इनके हैं हम
********
31
जवाब दीजिए
1 मैं खेलूं कहाँ?
2 मैं कूदूँ कहाँ?
3 मैं गाऊं कहाँ ?
4 मैं किसके साथ बात करूं ?
5 बोलता /बोलती हूँ तो मां को बुरा लगता है ।
6 खेलता /खेलती हूँ तो पिताजी खीजते हैं।
7 कूदता /कूदती हूँ तो बैठ जाने को कहते हैं।
8 गाता/गाती हूँ तो चुप रहने को कहते हैं।
9 अब आप ही कहिये कि मैं कहाँ जाऊं? क्या करूं?
*********
30
भुखमरी, बेरोजगारी और भ्रष्टाचार
बढ़ते ही जा रहे बिलकुल बेसुम्मार
जात गोत इलाके और धर्म पे बांटा
ऐस करते देश के देखो साहूकार
59 से 50
59
भारत देश है मेरा
जहां डाल डाल पर गरीब जनता का बसेरा
वो भारत देश है मेरा वो भारत देश है मेरा
जहां झूठ और धर्म का पग पग पे अँधेरा
वो भारत देश है मेरा वो भारत देश है मेरा
जहां की धरती पे लुटेरे जपें प्रभु की माला
तीजा बच्चा भूखा मारें जहां चौथी बाला
जहाँ नफरत ने डाला चारों तरफ है डेरा
वो भारत देश है मेरा वो भारत देश है मेरा
जहाँ खड़े ऊंचे ऊंचे ये मंदिर और शिवाले
रोटी खातिर भटकें हैं या बच्चे भोले भाले
जहां जले है गुजरात गऊ नाम पे मरे कमेरा
वो भारत देश है मेरा वो भारत देश है मेरा
बीच लुटेरों की नगरी गरीब दुःख झेल रहे
मन्दिर मस्जिद पे जहाँ खूनी खेल खेल रहे
जहां नफरत की बंशी बजाये है मुरारी मेरा
वो भारत देश है मेरा वो भारत देश है मेरा
********
58
बेजुबान पत्थर पे लदे हैं करोड़ों के गहने मंदिरों में
उसी दहलीज पे एक रूपये को तरसते नन्हे हाथों को देखा है
*******
57
मानव बोम्ब
वह छात्रा डेरा परमुख की हत्या के लिए
मानव बम्ब क्यों बनी ?
मुस्लिम थी इसलिए
अमृतधारी थी इसलिए
किसी के बहकावे में आ गयी
ये नौजवान युवक युवतियां यहाँ तक
क्यों चले आते हैं ?
क्या सोचा है कभी ?
कहाँ फुर्सत है हमें दो पल की
की सोचें जरा जब क्या होगा
जब हमारी अपनी बेटी
डेरा परमुख की हत्या कर देगी
*********
56
ज़माने में क्यों आये क्या सोचा है कभी
हम क्या हैं कर पाए क्या सोचा है कभी
पैदा हुए मगर खुद में ही महदूद रहे हम
पड़े हैं ये पेट फुलाये क्या सोचा है कभी---
बहोत बुरा जमाना आ गया बैठे कोस रहे
कौन इस को है घुमाये क्या सोचा है कभी---
भाड़ में जाये यह समाज हमारी बला से
क्यों काले बादल छाये क्या सोचा है कभी---
इन्सां और समाज का बहुत पुराना रिश्ता
इसको कौन बचाए क्या सोचा है कभी---
सोचने से ही परहेज तो दोष किसे देंगे
कोहलू के बैल बनाये क्या सोचा है कभी---
खाने के भंडार भरे हैं मगर लाखों भूखे मरते
ये किसने खेल रचाए क्या सोचा है कभी---
हर दरवाजे पर बीमार दवा का मोहताज
वो कैसे सेहत बचाए क्या सोचा है कभी---
अमीरों क़ि गफलत ने इस ज़मीन पर
ये कैसे नाच नचाये क्या सोचा है कभी---
***********
55
**धरती हमारी हुई है बाँझ**
धरती हमारी हुई है बाँझ
किसान तपस्वी हुआ कंगाल
बणी सणी ख़त्म हो गयी
तथाकथित नेता रहे दंगाल
गाँव गाँव में दारू बिकती
घर घर में औरत पिटती
बैठे ये लोग ताश खेलते
महिला पर मजाक ठेलते
ना किसी से कोई काम है
कहता किस्में जयादा दम है
बदमाशों ने लंगोट घुमाया
राजनेता से हाथ मिलाया
भ्रष्ट पुलिस अफसर मिला है
भ्रष्ट ब्यूरोक्रेट साथ खड़ा है
चारों क़ि दोस्ती अब तय हैं
एक दूजे क़ि बोलेन जय हैं
लगा रहे हैं जोर पर जोर
चारों तरफ देखो बढ़ा शोर
बेरोजगारी का उठा भूचाल
किसान होते जा रहे बदहाल
ऊपर से नेताजी भी पुकारे
उस पठे को मज्जा चखारे
आगे बढ़के गलघोट लगादे
कहाँ पे पड़ेगी चोट बतादे
आज उसे कल उसे पटकदे
सामने बोले जो उसे झटकदे
याद छटी का दूध दिलाना
मत इसे हमारा नाम बताना
बता रहे दाँव पर दाँव देखो
नेताओं में है कांव कांव देखो
कुरीतियों पर चुप रहे कमान
आनर किलिंग समाज में श्यान
मारना और फिर मरना होगा
नाम गाँव का तो करना होगा
जनता तक रही है सांसें थाम
बताओ यूं चलेगा ये कैसे काम
हम बिना शादी के घूम रहे हैं
वे गोतों के नशे में झूम रहे हैं
वाह निकले हैं नहले पर दहले
कौन बोलेगा वहां सबसे पहले
खूब हुई देखो वहां धक्का पेल
पंचायत ने वहां दिखाया था खेल
अहम् सबका माइक पे टकराया
फैसला खास वहां हो नहीं पाया
पाँच घंटे तक मार पर मार हुई
झड़प आपस में बारम्बार हुई
ना दहेज़ पर बोला कोई वहां
दारू पर बंद रही सबकी जुबाँ
महिला भ्रूण हत्या को भूल गए
बस गोत्र शादी में सब झूल गए
- 24, april , 2010
**********
54
DUSRI DUNIYA SAMBHAV HAI
फ़ूड के लिए जमीं हो या
फ्यूअल के लिए जमीं हो
सवाल अटपटा सा है यारो
समझ में नही आ रहा है
अपना पेट भरे इस जमीं से
या फिर भूखे मरे सवाल यही है
अपनी करों की टंकी भरने को
अपने पेट पर लात मारना
कहाँ तक सही है इसमें बताओ
समझने या दिशा भर्मित होने की
कोनसी बात है ?
विकास के नाम पर विनास हो
यह एक अहम् सवाल हो गया है
विकास के नाम पर विनास में
हमारा दिल भी कही खो गया है
तभी तो हम भी अपनी आल्टो के
पट्रोल की चिंता ज्यादा करते है
मगर गरीब के पेट की चिंता तो क्या
इसका तो जिकरा भी नहीं सुनते
टिकाऊ विकास हो समाज का
इस पर चर्चा चिंता कुछ तो हो
टिकाऊ विकास का मतलब क्या
यही ना की वातावरण फ्रेंडली
हो यह विकास !
जेंडर फ्रेंडली की भी है आस
असमानता का भी हो विनास
रेपलीकेबल भी हो विकास
सोच ले हमे विकास चाहिए
या फिर विनास ही चाहिए
दूसरी दुनिया संभव है यारो
एक बार उस तरफ अपनी
नजर तो उठाइए !
उस दुनिया में निठल्ला पण
नहीं चलेगा दोस्तों
टीना सिंड्रोम के बारे रोजाना
चर्चा करते हो
कहते हो देयर इस नो अल्टरनेटिव
मगर क्या कभी सुना है
देएर इस पुपलज अल्टरनेटिव
लेटिन अमेरिका ने हमको इस दौर में
दूसरी दुनिया का ट्रेलर दिखाया है
लोगो की पहलकदमी
नए समाजवाद का सपना
हकीकत बन पाया है !
********
53
17 अप्रैल 2014
दो हजार बीस तक
गाँव कस्बों को ना देखिये
बड़े बड़े शहरों की फ़ैली गंदी
बस्तियों की तरफ ना देखिये
पाश इलाकों में बनी ऊंची
इमारतों को ही अब देखिये
उनमें रहने वाले लोगों को
देखिये तरक्की ही तरक्की
नजर आयेगी चारों तरफ
हमारा कार्पोरेट सैक्टर देखो
हमारा इन्डस टरी सैक्टर देखो
हमारा बिजनैस सैक्टर देखो
हमारा फ़ौरन एक्सचेंज देखो
कितने आधुनिक हो गये हम
दुनिया की तीजी महाशक्ति की
क्षमता हमारे अन्दर छिपी हुई
बड़ी ताकत के पास अटम बोम्ब
होना चाहिए वह है हमारे पास
चार छः लाख फ़ौज भी है देखो
थोड़ा पैसा और हो और थोड़े से
हथियार और हों तो बड़ी ताकत
अमेरिका की तरह हम फिर बन
ही जायेंगे दो हजार बीस तक तो
तब तक गरीबी बढ़ती है तो वह
बढ़ने से कौन रोक सकता है इसे
अशिक्षा और बेरोजगारी ये तो
देखो बढेंगी यह एक सचाई है
भूख और बीमारी भी दोनों ही
सुनो समझो बढेंगी ही लाजमी
विकास की कीमत तो चुकानी
पड़ती है ना हम सबको मिलके
अपनी अपनी क़िस्मत के मुताबिक
लेकिन इस तर्क में जनता कहाँ है ?
कीमत तो जनता ही देगी और फल
उनकी क़िस्मत में ही लिखे रहते
जो जनतंत्र का ढांचा खून पस्सीना
बहाकर के हमने खड़ा किया था वह
अब और नहीं बच पायेगा यारो
बड़ी ताकत की बलि चढ़ जायेगा
बड़ी ताकत बनने की बजाय हमें
असली जनतांत्रिक बनने का जतन
राज नीतिक और निजी जीवन में
हमें खुशहाल बना सकेगा यारो !!!!
*********
52
**नोट बंदी और आम जनता **
युद्ध के समय नहीं देखी ऐसी
आपातकाल में नहीं देखी ऐसी
अबकी नोट बंदी ज्यादा खतरनाक
मगर बगावत का माहौल नहीं था
लोग दिन रात लाइनों में खड़े खड़े
दम तोड़ रहे थे
किसानों की खेती चौपट हो गई
और मजदूर खाली हाथ घूम रहे
दुकानदार भी झेल रहे मार इसकी
हुए थे शिकार मंदी के किरयाने वाले
कर्मचारी भी झेल रहे थे इसकी मार
शादियां पोस्टपोन हो रही थी या फिर
करकरा के बस फेरे पूरे किये गए थे
विपक्ष पक्ष को कोस रहा था देखो
तुगलक का अवतार बताया किसी ने
संसद नहीं चल पा रही थी इसके चलते
नितीश कुमार और अखिलेश की भाषा
अपने ही ढंग की लगती थी
उनको लगता था यह सब देश हित में
किया गया काम है सरकार का
ऐसा जनता लाइन में खड़ी सोच रही
थी शायद!
काला धन खत्म करने का
कारगर रास्ता बताया था
आतंक वाद खत्म करने का सही
कदम उठाया था
भ्रष्टाचार खत्म करने का रास्ता
यही दिखाया था
कहा वास्तव में अमीरों पर पहली बार
नकेल कसी जायेगी पहली बार यहाँ
इस नोट बंदी ने काले को सफेद
करने की कला हमको सिखलायी थी
जन धन योजनाओं में पिचहत्तर हजार
करोड़ कोई पूछे कहाँ से आया यह धन?
चार माह की छूट थी काले को सफेद की
पैंसठ हजार करोड़ ही आये थे कहते
जन धन खतों में रोजाना अरबों
आ रहे थे
कोई पूछे क्या मजदूरों के पास
काला धन था?
दो हजार का नोट लाये ही क्यों ?
काले धन की रेल तेजी से दौड़ने लगी
मेरे देश भारत महान में
आखिर यह खेल क्यों और किसलिए
खेला गया था?
सोचना ही होगा बहन और भाईयो!
वो जो कहा वह बिलकुल भी न हुआ
तो हररोज कुछ न कुछ नया जुगाड़
भिड़ाती नजर आयी थी सरकार
हाथ पैर फूल गए थे
जनता लाइनों में खड़ी खड़ी देख रही
थी
किस दिन ये भूचाल बन जायेगा सरकार
भीतर ही भीतर बहुत घबराई हुई थी
बात पक्की है ये यारो दूसरे उन देशों से
भी शिक्षा नहीं ली थी कि जिस देश ने
नोट बंदी की वह बर्बाद ही हुआ कहते
इतिहास इसका गवाह बताया
सोचने की बात तो फिर भारत कैसे बचेगा?
मगर सोचना हमने बन्द कर दिया है
काला धन इस नगदी में तो एक प्रतिशत
ही बताया है बाकी का हिसाब क्या है?
बाकी तो सोने में, जमीन में, उद्योग में, डॉलर में स्विस बैंक में , भगौड़ों के पास, में बताया
इनमें से किसी पर हाथ डालकर तो
दिखाओ जो चिंता काले की सच में
मारो छापे उनके अड्डों पर
नहीं जो इस सब की पोल खोल
रहे हैं छापे उनपर डलवाये जा रहे हैं
आर्थिक संकट घटा नहीं बल्कि बढ़
रहा है
आने वाले दिन , आने वाला दौर और
मुश्किल नजर आ रहा है
जनता को गुमराह करने के तरीके भी
तेज कर दिए हैं
असली मुद्दे आर्थिक संकट के, बेरोजगारी के, महंगाई के, महंगी शिक्षा के, महंगे इलाज के , महिला उत्पीड़न के दलित उत्पीड़न के कावड़ यात्राओं में भुलाए जा रहे हैं ।
असमानताओं का संकट पूरी दुनिया में
बढ़ रहा है?
सोचो मेरे देश भारत महान के बारे
देर होती जा रही है ।
रणबीर
********
51
गुर्दे का गुर्दा
किडनी लगवाने वाले विदेशी मूल के
किडनी देने वाले सभी देसी फूल थे
बीच में एजेंट हैं साथ में डॉक्टर उसूल के
जिसके गुर्दे फेल हो गए मरने को है
दूसरा जीवन देना हम सबका फर्ज है
गरीबी के चलते किडनियां फेल न हों
उनको भी बचाना मानवता के खाते दर्ज है
जिसे गुर्दा चाहिए था उसे गुर्दा दिलवाया
भूख के कारण दोनों गुर्दे मरने को थे
उनमें से एक गुर्दा तो बचा ही दिया
दानी गुर्दे से एक और मानव बच पाया
काफी लोगों को रोजगार मुहैया करवाया
एजेंटों का जाल बिछा कर चुपचाप पुण्य किया
गुर्दा लेने और देने का कानून सख्त इतना
इससे बचने का प्रयास करना पड़ता कितना
जरा सोचो तो सही दिमाग पर जोर देकर
विदेशी को अपने ही देश में अपने लिए
महज एक गुर्दा भी क्यों नहीं मिला
भारत देश महान का गुर्दा उसे क्यों भाया
पैसे का खेल है यहां पर मेरे यारों
इसी कारण बदेशी देशी गुर्दा खरीद पाया
इसके लिए नेता अफसर पुलिस के
बिक गए बस कीमत की बात थी यारो।
**********
50
चलते चलते जिन्दगी में मिला एक राहगीर मुझको।।
मिल बैठे कुछ बात हुई मन भाई तासीर मुझको।।
कुछ तो था पर क्या था उसमें अब तक सोच रही
दिमाग लगा कर देखा साफ नहीं तसवीर मुझको।।
उसका हंसना ही था शायद जिसने मुझको बांध लिया
याद आती उसके चेहरे की एक एक लकीर मुझको।।
भले कुछ रोज मिले हम अपने दिलों में झांक सके थे
दरिया दिल इन्सान मिला लगा बहुत गम्भीर मुझको।।
कुछ दूर साथ चले थे जुल्म सितम साथ झेले हमने
सम्ीाल के चलना यारो बता गया ये रणबीर मुझको।।
69 से 60
69
जल रहा यहाँ सब उम्मीद करें भी तो कैसे करें
नहीं पहली सी फिजां यकीं करें भी तो कैसे करें
अनुशासन क़ि सीख हमें खुद सभी कानून तोड़ो
ऐसा इंसाफ वहां तस्लीम करें भी तो कैसे करें
खानाबदोश बनाओ हमको हमीं से गिला करो
प्यार क़ि जगह कहाँ दुश्मनी करें भी तो कैसे करें
*********
68
दूसरे देशों के प्रजातंत्रों की तरह
यदि भारत देश में भी यह छूट
दे दी जाये की तुमाहरे बच्चों की
देखभाल का खर्च सरकार करेगी
तो अस्सी प्रतिशत शादियाँ यहाँ
ये टूटकर बिखर जाएँगी अपने आप
मानवीय सम्बन्ध बचे ही कहाँ हैं
बच्चे बस एक मजबूरी बन कर
खड़े हुए हैं एक पुल की तरह
वर्ना कोई सम्बन्ध नहीं बचा है --
*********
67
कितने संवेदनहीन हो गये हैं ---
चोट लगकर तड़पता रहे सड़क पर
हम पास से गुजर जाते हैं
हम हत्यारे ही गये हैं ---
अपनी ही संतान को , लड़की को पेट में ही
मारने की आदत हो गयी है हमें
हम सब से बड़े टैक्स चोर हो गये हैं ---
चार करोड़ का समान बेचकर
पचास लाख की राशि की सेल का
इनकम टैक्स भरते हैं हम
हम कामचोर हो गये हैं ---
सरकारी नौकरी को पैसन समझते हैं
और साइड बिजनैस में तन माँ धन से जुटे हैं
भ्रष्टाचार की सभी सीमायें लाँघ दी हैं
जयादा देर तक ऐसा नहीं चल पायेगा
*********
66
आदमी की चाहत क्या है
क्या चाहता है वह ?
जान देकर भी नहीं मानता
जिस बात के लिए कभी
एक समय में उसी बात को
हंस कर खुसी खुसी मान
जाता है वह क्यूं ?
*********
65
मुझे पढाया बताया मेहनत और ईमानदारी
ऊंचे मानवीय गुण हैंये हम कहलाते संस्कारी
ठीक उल्टा देख रहा हूँ आजके अपने समाज में
बेईमानी और घोटाले छाये बड़े नए अंदाज में
छः एकड़ जमीं बिकी रूपये तीन करौड़ मिले
दो भाई दो बहन बांट पर रिश्ते बुरी तरह हिले
भाईयों ने दी दोनों बहनों की पाँच लाख की सुपारी
भून डाली गोलियों से भूल गये सब दुनियादारी
बड़े को छोटे ने अपने रास्ते से चाहा हटवाना फिर
सोते हुए का काट कर फैंक दिया नाहर में सिर
तीन करौड़ का मालिक बना खिलाके पैसे बच गया
ईमानदारी का और मेहनत का नया इतिहास रच गया
अपराधीकरण और भ्रष्टाचार आज समाज में छाये
इमानदार चुप बैठे इनके सामने अपना सिर झुकाए
********
64
अन्दर और बाहर को समझना जरूरी है
न समझने की भी कईयों की मजबूरी है
अन्दर का मतलब हमारा अपना शरीर
बाहर का मतलब वातावरण की शमशीर
बाहर अन्दर को प्रभावित करता बताते
अन्दर बाहर को प्रभावित करता जताते
अन्दर बाहर का आपसी क्या तालमेल
इसे समझने में हो ही जाता है घालमेल
अंदर बहुत छिपाता हमारी हकीकत को
फिर भी आ जाता बाहर कई मुशीबत को
*********
63
*दो बेरोजगार (पति -पत्नी)
बहुत आसान है मेरी जिंदगी की
सटीक समीक्षा करना।
बहुत आसान है मेरी जिंदगी की
सही तरफदारी करना।
बहुत आसान है मेरी जिंदगी के
प्रति मन से करुणा दिखाना ।
बहुत आसान है मेरी जिंदगी के प्रति
असल में आंसू बहाना ।
मगर बहुत मुश्किल है
मेरी जिंदगी जीना।
स्कूल से आगे बढ़कर
फिर कॉलेज में जाना होगा
इसके सपने बहुत बार देखे थे मैंने ।
कौन से कॉलेज में दाखिला हो
कई बार सोचा था मैंने यह भी।
एक साल पहले सोचना शुरू किया कि
पहले दिन का पहनावा
क्या होगा मेरा कालेज में ?
हेयर स्टाइल पर भी नजर डाली थी।
सोचा क्या साइकिल पर ही मुझे
कॉलेज जाना होगा हर रोज?
या फिर घरवाले सेकंड हैंड
स्कूटर का जुगाड़ कर देंगे।
घर की हालत जुगाड़बाजी
करने की भी कहां थी।
यह बात नहीं मेरे भेजे के
अंदर घुस रही थी।
इसी उधेड़बुन में पूरा का पूरा दिन
जुगाड़ बाजी के चक्कर में गुजर जाता।
आखिर एक दिन 5 लोग आए थे
हमारे घर में।
उनकी बहुत आवभगत हुई थी।
उन लोगों ने मेरे से भी पूछा- -
'बेटी कौन सी क्लास पास की है?'
दूसरा सवाल था उनका -'कितने नंबर आए'
मैंने धीमी से अपने नंबर बता दिए थे।
उनकी नजरें मुझे घूरती
सी महसूस हुई
जैसे बकरे को उसके
मारने से पहले कसाई
उसे अपनी नजरों में से
निकाल कर देखता है,
उसी तरह का माहौल सा लगा मुझे ।
और इसके बाद कसाई
बकरे को हलाल कर ही देता है।
मुझे क्या पता था कि मेरा भी
हलाल होने का वक्त आ गया है।
और एक महीने के बाद ही
मेरी शादी कर दी गई ।
एक और बेरोजगार के साथ ।
2 बेरोजगारों की दुनिया के सपने क्या
आप सोच सकते हो कि कैसे होंगे?
हमने भी सोचने की कोशिश की थी
खूब आगे का रास्ता देखने की।
पर मैं नहीं देख पाई क्योंकि
अंधेरे के सिवाय कुछ दिखाई
नहीं दे रहा था ।
उनकी 2 एकड़ से भी कम जमीन थी।
'भूखे घर की आ गई।'
'हम क्या करें?'
'यह दिन देखने के लिए क्या
छोरे को जन्म दिया था?'
दाएं बाएं से परिवार वालों से
यह सब सुनने को मिलता था।
तब पता लगा कि सपने
और हकीकत में कितना
फर्क होता है।
प्यार मोहब्बत बेहतर जिंदगी
सब अतीत की बातें थीं।
घर भी तंग से बस दो ही कमरे थे ।
साथ में भैंस व बछिया का भी
सहवास 24 घंटे का।
समझ सकता है कोई भी
के दो कमरों में छह सात
सदस्यों के परिवार का
कैसे गुजारा होता है?
कहां फुर्सत होती है एक दूसरे के लिए ।
चोरों की तरह मुलाकात होती हैं
अपने ही घर में।
बस जीवन तो घिसट रहा है हमारा।
एक दिन सोचा इस नरक से
कैसे छुटकारा मिले?
मगर उसे ताश खेलने से फुर्सत कहां।
घर खेत हाड़ तोड़ मेहनत और तान्ने ।
यही तो जिंदगी है हमारे जैसे
करोड़ों युवक और युवतियों की
भारत में।
कभी-कभी जीवन लीला को
खत्म करने का मन करता है ।
फिर ख्याल आता है कि इससे क्या होगा?
किससे होगा?
यही तो सवाल है सबसे बड़ा
कि सही रास्ता क्या है?
रणबीर
********
62
ना इस जन्म में झूठ बोला
ना कभी दुकान पे कम तोला
फिर भी भगवान नाराज हुआ
हार्ट अटैक मुश्किल इलाज हुआ
मैंने पूछा मुझे क्यों कष्ट मिला
बताया पिछले का सिलसिला
इसका कब होगा मेरा हिस्साब
अगले में मिलेगा तुम्हें जवाब
पिछला ना कभी जान पाया
नहीं अगला समझ में आया
आज की बाबत नहीं बताते
अगले पिछले में हमें फँसाते
दम मारो दम मिट जाएँ गम
देवी देवता हमारे इनके हैं हम
**********
61
सहारे मत बना ए दिल सहारे रूठ जाते हैं
ना किस्मत पेभरोसा कर सितारे टूट जाते हैं
साहिल पर आके ना समझो कि पार आ गए
जरा सी लहर आयी तो किनारे छूट जाते हैं
राज दरबारों में न जाना वहां पे क्या रखा है
पेट की खातिर ही तो वे उनके झूठ गाते हैं
सच कहना अगर बगावत तो हम भी बागी
ज्यादा हवा भरने पर ये गुब्बारे फ़ूट जाते हैं
भगत सिंह के देश का फिर से देखा सपना
आखिरकार लूट के ये शिकारे डूब जाते हैं
अमीर गरीब की खाई बढ़ा विकास करेंगे वो
एक न एक दिन झूठे जनता के बूट खाते हैं।
********
60
बेमौसम की बरसात हुई है कैसा कहर ढाया है
गेहूं हुआ खराब खेत में मण्डी ने गुल खिलाया है
मौसम हुआ ठंडा कहते मगर ठंडा हुआ किसान भी
ख़राब पकी पकाई खेती ढह गए सब अरमान भी
मन्दी की मार ने मारा आज बरसात ने हिलाया है
किसान कब तक सहे इसको मान किस्मत का खेल
किस्मत नहीं ये सरमायेदारी ने बनाई उसकी रेल
ग्लोबल वार्मिंग के बढ़ते ये मौसम में बदलाव आया है
क्लाइमेट चेंज के दोषी ज्यादा अमीर देश बताये हैं
फार्म हाउस गैसों के अम्बार उन्ही ने लगाए हैं
बेमौसम बादल हुए तो किसान पे संकट छाया है
किस्मत की बात नहीं सिस्टम का खेल समझ आया
सिस्टम असली दोषी छिपाये झूठ का प्रपंच फ़ैलाया
किसान समझ रहा खेल सड़कों पे आके बताया है
79 से 70
79
पदार्थ परम सत्य है इससे बना संसार बताया है
इसका विकसित रूप आदमी जिसने समाज बनाया है
मानव के अंदर सब कुछ आत्मा इसका हिस्सा है
बाहरी ताकत स्वर्ग नर्क ये सब झूठा किस्सा है
पदार्थ के गुणों ने दुनिया को आगे बढ़ाया है
पदार्थ के अंदर निरन्तर एक गति देती दिखाई
यही गतिशीलता नए गुणों को जन्म देती बताई
पदार्थ का विकास होता प्रकृति नियम रचाया है
********
78
हरियाणा विकास
मॉडल बना है ये विकास में
हरियाणा नम्बर वन हो रहा
कैसे बस कुछ ना पूछो भाई
पिछलों को सबको धो रहा
सब ही निडर घूम रहे हैं यहाँ
ये भ्रष्टाचार यहाँ से खो रहा
शिक्षा ने उचाईयां छू ली हैं
बहुत उम्दा और कीमती है
जिसका भार गरीब ढो रहा
सेहत मान और पहलवान
दुनिया में किया है गुनगान
भले अनीमिया और ज्यादा
गर्भवती औरत को डुबो रहा
हरियाणा नम्बर वन हो रहा
फसल के दाम सबसे ज्यादा
मिलते हैं निठ्ठले किसान को
जमीन बेचो फायदा उठाओ
ये मंत्र दिया है हर इंसान को
फिर भी क्यों किसान रो रहा
यह कोई नहीं जानता है कि
पिछले पांच साल के अन्दर
हमने विश्व बैंक से कितना
लोन लिया है बताये तो कोई
बीएड कालेज धड़ाधड़ खुले
फीसें मनमर्जी की ली गयी
शिक्षक और छात्र भी बैठ के
कक्षा में रोज मजे से सो रहा
********
77
बड़ी मुश्किल से ये आंसू छिपाए हमने
हँसना चाहा झूठे ठहाके लगाये हमने
तुमको मालूम ये शायद हो के ना हो
तुम्हारे जाने के बाद आंसू बहाए हमने
प्यार किया हमने नहीं छुपाया कभी
दिल के तराने थे तुमको सुनाये हमने
तेरे साथ इन्कलाब के जो नारे लगाये
यारो अब तलक नहीं हैं भुलाये हमने
राह का साथ छोड़ गये अफ़सोस तो है
पल याद हैं वो जो संग बिताये हमने
जानते हैं आप हमें नहीं भूल सकेंगे
एक अनुभव बस बिंदु दिखाए हमने
हादसा नहीं एक सच्चाई है ये प्यार
ग्लानी नहीं रास्ते नए बनाये हमने
********
76
मैडम सीतारमन ने संसद में यह था फरमाया देखो
लोगों की आए दोगुनी कर दी इसका बिगुल बजाया देखो
जिंदगी बहुत बेहतर बना दी दुनिया में नाम कमाया देखो
दस ट्रिलियन की तीसरी अर्थव्यवस्था इसे बताया देखो
पिछले दस साल की तरक्की की घंटी कमाल की बजी देखो
मुख्यधारा चाटुकार मीडिया ने भी छोड़ी नहीं कोई कमी देखो
बार बार झूठ की बहार जनता के एक हिस्से को जमी देखो
केंद्रीय रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर इन बातों को नहीं मान रहे
रघुराम राजन इन सभी दावों को बता झूठा बड़ा बखान रहे
आईएमएफ जैसी संस्थाएं भी बहुत से सवाल तान रहे
तरक्की में भी आत्म हत्याओं के आंकड़े कर परेशान रहे
**********
75
नई दुनिया - प्यार की दुनिया
नई दुनिया का सपना हम दोनों ही देख रहे हैं।।
सोचा अपने अपने ढंग से कहते हुए झेंप रहे हैं।।
1
झेंप मिटी साथ चले सोचा जीवन सफल हो गया
अलग अलग जातें हमारी जिनका मतलब खो गया
ब्यां नहीं कर सकते सब हम पर उंगली टेक रहे हैं।।
2
प्रेम विवाह को समाज में देखा क्या दर्जा मिलता
खूंखार हो जाता है समाज देख कर ही दिल हिलता
बिना बात की बात में निकाल मीन मेख रहे हैं।।
3
तुम्हारी जिद प्यार का विरोध तो जिद हमारी भी है
प्यार को परवान चढ़ायेंगे इसमें इज्जत तुम्हारी भी है
जात के तवे पर देखो ठेकेदार रोटी सेंक रहे हैं।।
4
जातें अलग अलग हमारी मगर मानवता है भरपूर
जाति की सीमा मालूम है इसके बन्धन नहीं मंजूर
एक अपना सा घर बनाएं यही इरादे नेक रहे हैं।।
********
74
तुममें शिकश्त और जिल्लत का अहसास बाकी
पता हमें तुममें अभी नफरत का अहसास बाकी
कितना ही दिखावा करो अपनी सादगी का तुम
खूब तुममें देखा है हिमाकत का अहसास बाकी
मुहब्बत से कहते हैं दौलत का कोई वास्ता नहीं
तुम्हारे दिल में अपनी दौलत का अहसास बाकी
कितना ही अपमान करो तुम बार बार ये हमारा
रहेगा हममें फिर भी कयामत का अहसास बाकी
हमारी शराफत को करदो बिल्कुल तार तार तुम
रणबीर को रहेगा ही शराफत का अहसास बाकी
********
73
कहते तुम्हारी क़िस्मत में खोना सोचो तो यारो
क़िस्मत का खेल मान कर हमने इसको ढ़ोया
अपने हाथों से खुद हमने बीज कीकर का बोया
क़िस्मत क़ि मार को क्यों ढ़ोना सोचो तो यारो
दिलो दिमाग पर मेरे तो यही सब तो छाया है
आज जो कुछ भी हूँ मैं मेरे नसीब ने बनाया है
औरों के खेलने का ये खिलौना सोचो तो यारो
बात समझ में आ गयी क़िस्मत का खेल नहीं
बिना इन्सां के चल सकती यह देखो रेल नहीं
*********
72
हर एक कदम पर हादसा होना सोचो तो यारो
हमारे सिस्टम में क्यों है रोना सोचो तो यारो
जो कुछ कमाया हमने छीन लिया चालाकी से
किसी ने नहीं समझाया ये सब खेल बेबाकी से
**********
71
गाँव जो टिका था अन्याय पर
एक दिन उसे ढहना ही था
ना बराबरी के गाँव भक्तों को
एक दिन यह सहना ही था
बिगड़ गया गाँव का माहोल
महिला सुरक्षित नहीं वहां
नशाखोरी बढती जा रही
ढूध दही का था सेवन जहाँ
**********
70
हमारी आह भी गुनाह कतल भी मुआफ उनके
कैसे जल जाती शमां बयाँ करें भी तो कैसे करें
किसने किसे तडफाया है सही हिसाब करेगा कौन
ये तुम्हारी बात यहाँ मंजूर करें भी तो कैसे करें
सच कहना अगर बगावत है तो हम दोषी हैं
रणबीर झूठा इम्तिहाँ पास करें भी तो कैसे करें
99 से 80
99
बाजार में सब चीजों की बोली लगादी
गुरु शिष्य का रिश्ता कैसे बचता यारो
पैसे ने चारों तरफ दहशत सी फैलादी
फिर भी लड़ेंगे जीजाँ से हम सब यारो
कुछ लाइनों में बात पूरी हमने बतादी
********
98
जिन्होनें न दी माँ बाप को भर पेट रोटी जीते जी कभी
आज उनके मर जाने के बाद उन्हें भंडारे लगाते देखा है
********
97
RAHGEER
चलते चलते जिन्दगी में मिला एक राहगीर मुझको||
मि ल बैठे कुछ बात हुई मन भाई तासीर मुझको||
कुछ तो था पर क्या था उसमें अब तक सोच रही
दिमाग लगाकर देखा साफ नहीं तसवीर मुझको||
उसका हंसना ही था जिसने मुझको बांध लिया
याद आती उसके पेहरे की एक एक लकीर मुझको||
कुछ पल मिल बैठे हम अपने दिलों में झांक सके थे
दरिया दिल इन्सान मिला बांध गया जंजीर मुझको||
कह नहीं सके एक दूजे को दिल की बात कभी हम
सुहानी यादों की दे गया खजाने की जागीर मुझको||
होन्डा के आन्दोलन में शहीद हो गया वो साथी
मैं समझूं या अनजान बनूं संदेश दिया गम्भीर मुझको||
साथ चले साथ हंसे थे साथ ही सितम झेले हमने
सम्भल के चलना यारो बता गया रणबीर मुझको||
********
96
कुछ नए बन रहे कुछ पुराने बने
हर कदम पर यहाँ कैदखाने बने
किस तरफ से चली गोलियां क्या पता
किन्तु हर बार हम ही निशाने बने
था क्या हमने सोचा ये क्या हो गया
हमें क्यों इस चमन से गिला हो गया
दिया जिसकी खातिर था हमने लहू
वही मौसमें गुल क्यों खफा हो गया
*******
95
हमने खोल के दिल से बातें करनी चाही
बहुत सोच समझ कर अपनाई ये राही
मेहनत और ईमानदारी की की है बाही
गंदे विचार और गंदगी दिमाग से ताही
*******
94
बचपन की दोस्ती बहुत अलग होती देखो ||
जवानी की दोस्ती अलग बीज बोती देखो ||
हर उम्र की दोस्ती की मांग अलग होती है
अधेड़ उम्र की दोस्ती तान कर है सोती देखो ||
अकेलापन अखरता बिना दोस्ती बुढ़ापे मैं
बुढ़ापे की दोस्ती पुराणी यादें संजोती देखो ||
टिकाऊ दोस्ती या भरोसे की दोस्ती कहो
विचार और स्वभाव की समता पिरोती देखो ||
वक्त बदलते हैं रिवाज बदलने का दस्तूर भी
सच्ची दोस्ती अपना भार उम्र भर ढोती देखो ||
चाहे ये दुनिया इधर से उधर हो जाये यारो
पक्की दोस्ती अपना सबब नहीं खोती देखो ||
*******
93
आज रास्ते बदल लिए मौका परस्ती दिखलाई
पन्द्रह साल तक तुमने कदम से कदम मिलाई
चुनौती ज्यादा गंभीर आज जब सामने है आयी
भूल गए वो इंकलाबी नारे नकली कुर्सी है भाई
********
92
बड़ी मुश्किल से ये आंसू छिपाए हमने
हँसना चाहा झूठे ठहाके लगाये हमने
तुमको मालूम ये शायद हो के ना हो
तुम्हारे जाने के बाद आंसू बहाए हमने
प्यार किया हमने नहीं छुपाया कभी
दिल के तराने थे तुमको सुनाये हमने
तेरे साथ इन्कलाब के जो नारे लगाये
यारो अब तलक नहीं हैं भुलाये हमने
राह का साथ छोड़ गये अफ़सोस तो है
पल याद हैं वो जो संग बिताये हमने
जानते हैं आप हमें नहीं भूल सकेंगे
एक अनुभव बस बिंदु दिखाए हमने
हादसा नहीं एक सच्चाई है ये प्यार
ग्लानी नहीं रास्ते नए बनाये हमने
*******
91
हरयाणा नम्बर 1 क्लेम किया जा रहा है
1 बेरोजगारी कम करने में
2 गुणकारी शिक्षा सबको देने में
3 महंगाई पर काबू पाने में
4 गुणवत्ता पूर्ण इलाज सबको देने में
5 महिला उत्पीड़न कम करने में
6 कृषि संकट हल करने में
7 सामाजिक न्याय हासिल करने में
आपकी राय रखना जरूर या भेजना
9812139001
क्या यह सब सही है???
*********
90
ऊट पटांग
पुलिस तुम्हारी फ़ौज तुम्हारी
मीडया तुम्हारा कोर्ट बीचारी
जनता द्वारा जनता के लिए
चुनी हुई ये सरकार हमारी
जनतंत्र का झुनझुना पकडाया
कार्पोरेट की करे है ताबेदारी
मसला इस या उस नेता का नहीं
जनतंत्र की पोल खुल गयी सारी
कैसे मजबूत हो जनतंत्र भारत का
कैसे जनता की बढे हिस्सेदारी
सवाल आया है तो जवाब भी
ढूंढेगी मिलके ये जनता सारी
********
89
वह धंसती है
वह खसती है
वह फंसती है
वह चरती है
उसपे मस्ती है
वह भिड़ती है
सोचो कौन है
वह भैंस हमारी
अरे हम भी तो
जिन्दा इन्सान हैं
********
88
एक गरीब महिला की नजर से
हमारा इम्तिहान लिया हर बार पास हुए
सब कुछ तुम्हारे पास फिर भी उदास हुए
पता है तुम्हारा तुम एक अमर बेल हो
रब राखा क़िस्मत का रचा रहे खेल हो
आज कल तुम्हारा अहम् और ये अहंकार
दिखाता है तुम्हारे अन्दर का पूरा अंधकार
सच है कि अंधी गली में तुम बढ़ते जा रहे
अपनी मौत के खुद ही श्लोक पढ़ते जा रहे
इल्जाम मुझको सफाई नहीं करनी आती
मेरे घर आंगन को मैं साफ ना रख पाती
एक राज बस तुमको ही बस बताती हूँ मैं
बताओ तुम्हारे फर्श कैसे चमकाती हूँ मैं
तुम्हारे दरवाजे पे गए तुमने दुत्कार दिया
हमारे दरवाजे पे आये हमने सत्कार किया
इंसानियत और हैवानियत का फर्क यही तो
दुत्कारा तोभी आँखों पे बिठा के प्यार किया
कुदरत से प्यार जिसका तुम भी एक हिस्सा हो
विश्व ग्राम का चर्चित तुम एक अहम् किस्सा हो
बदलाव नियम है कुदरत का इतना तो जान लो
दिशा गलत या ठीक है इतना अब पहचान लो
तन मन जन हो सुखी जीवन का लक्ष्य मेरा
विवेक के प्रकाश से भागे अंध विश्वास घनेरा
सेहत के लिए चाहिए साफ पानी भोजन हवा
फिर बिल्कुल नहीं चाहिए हमको कोई दवा
********
87
पति पत्नी का झगडा ओबामा ने करवा दिया
पत्नी बोली क्यों इस भारत को मरवा दिया
सोच कर बोला करो महाशक्ति बना दिए हम
ओबामाजी ने भारत का सिर ऊंचा उठवा दिया
पत्नी माथा पकड़ के रोऔगे पता लगेगा तुम्हें
ऊंचा क्या उठाया भारत सिर उल्टा झुकवा दिया
एक भी हमारे हित का कौनसा समझौता हुआ
आँखों में धूल झोंक दी लगा कोठा भरवा दिया
पति बोला पहली बार भारत को सम्मान दिया
प्रतिबंध जितने हमने लगाये सबको हटवा दिया
*********
86
कहना बहुत आसान है मुश्किल चलना सच्चाई पर
लहर के उल्ट तैर कर ही पहुंचा जाता अच्छाई पर
बुराई की ताकत को यारो देख कर डर जाते हम
इसके दबाव में बहुत सी गलती भी कर जाते हम
आका बैठ के हँसते रोजाना फिर हमारी रुसवाई पर
मेहनत हमारी की अनदेखी रोजाना हो रही यारो
चेहरे की लाली हम सबकी रोजाना खो रही यारो
कहते वो हमको बेचारा जो जीते हमारी कमाई पर
बीज है खाद और खेत भी इससे फसल नहीं उगती
फसल उगती है तब यारो जब मेहनत हमारी लगती
महल बने ये सभी तुम्हारे हम सब की तबाही पर
**********
85
मिल गया राहगीर मुझको एक दिन चलते चलते
बात बताई बहुत पते की पर थोडा सा डरते डरते
कहा अपने पर कर भरोसा दुआ करना बंद करदे
कुछ नहीं कर पायेगा तूं उसकी दुआ करते करते
ये विश्वास तेरे से छीना इस दुआकी करामात से
कमाल दुआ करता रहता तूं बेमौत मरते मरते
दिन देखा नही रात देखी आंख मींचकर लगा रहा
जिंदगी पूरी लगादी तूने उनका पानी भरते भरते
उठ विश्वास लौटा देख दुनिया अपनी आँखों से
पता है वक्त लगेगा इस दुआ से उभरते उभरते
*********
84
संकट और नवजागरण
आज देश हमारा चौतरफा संकट से घिर गया
उदारीकरण के कारण सिर उनका फिर गया
वैश्वीकरण के नाम पर कितना कहर ढाया है
आर्थिक संकट बेरोजगारी ने उधम मचाया है
छंटनी महंगाई लूट खसोट आज बढती जा रही
भ्रूण हत्या और दहेज़ की आँधी चढ़ती आ रही
कठिनाईयों का बोझ ये महिलाओं पर आया है
युवा लड़कियों की दुनिया पे काला बादल छाया है
गहरे तनाव में लड़कियां ये जीवन बिता रही हैं
फिर भी हिम्मत करके करतब खूब दिखा रही हैं
सारे रिश्ते कलंकित हुए आज के इस संसार में
सगे सम्बन्धी परिचित फंसे घिनोने बलात्कार में
शिक्षक का रिश्ता भी तो हरयाणा में दागदार हुआ
अभिभावकों का दिलो दिमाग आज तार तार हुआ
सामाजिक मूल्यों में आज गिरावट आई है भारी
चारों तरफ अपसंस्कृति की छाई देखो महामारी
फेश बुक पर चैटिंग से नहीं समाज बचने वाला
उदारीकरण और ज्यादा भोंडे खेल रचने वाला
वंचित तबके और महिला युवा लड़के लड़कियां
मिलके खोलेंगे जरूर समाज की बंद खिड़कियाँ
इंसानी रिश्ते बनेंगे रंग भेद जात भूल जायेंगे
नवजागरण का सन्देश घर घर तक पहुंचाएंगे
********
83
बे मोसम की बरसात
बे मोसम की बरसात कैसा कहर ढाया है
ख़राब गेहू खेत मैं मंडी नै गुल खीलाया है
मोसम तो ठंडा मगर ठंडा हुआ कीसान भी
ये पकी पकाई खेती ढहे बहोत अरमान भी
मंदी की मार ने मारा बरसात ने हीलाया है
कीसान सह लेगा इसे मान कीस्मत का खेल
पता नही चलेगा कीसने बनायीं उसकी रेल
ग्लोबल वार्मीग से मोसम में बदल आया है
क्लाईमेट चेंज हो गया दोसी अमीर बताये हैं
फार्म हॉउस गैसों के अम्बार वही लगाये हैं
बेमोसम ओलों का कीसान पे संकट छाया है
कीस्मत की बात नहीं ये सीस्टम का खेल है
असली दोसी छीपा रहे सीस्टम की धकापेल है
सच झूठ जान लियो खोल सब बतलाया है
*********
82
हमें याद करने की कोशिश कीजिये यारो
वक्त तो अपने आप मिल ही जायेगा देखो
तमन्ना मिलने की ये दिल से सोचिये यारो
बहाना कोई न कोई मिल ही जायेगा देखो
********
81
वजूद तुम्हारा मुमकिन नहीं बिना वजूद हमारे
सिस्टम की नजाकत है खिले हैं आँगन तुम्हारे
हमारी मेहनत पर खड़े होकर हुंकार रहे आज
भक्षक बनके रक्षक खड़े अपने घर बार निखारे
*********
80
मैंने मानवता का आचरण अपनाने की कोशिशें की
मानवता से दूर हटाने की बहकाने की कोशिशें की
जिद है तुम्हारी हटाने की तो जिद हमारी कि डटे हैं
काले धन की चाल काली बरगलाने की कोशिश की
100 से 109
109
सोच सोच कर
सोच सोच कर घबरा जाता हूँ मैं
सोच सोच कर
सोच सोच कर घबरा जाता हूँ मैं
अपने आप को अकेला पाता हूँ मैं
एक नयी दुनिया का सपना मेरा है
यहाँ क्या मेरा है और क्या तेरा है
इंसानियत पैदा की है समाज ने
हैवानियत पैदा की है दगा बाज ने
हैवानियत ख़त्म हो है यही सपना
इंसानियत बढे यही लक्ष्य अपना
मनकी शान्ति की खोज में धर्मात्मा
खोजते खोजते खोज लिया परमात्मा
अपनी शान्ति पाई हमारी लूट पर
हमारी शांति भगवन की छूट पर
भगवान भी इंसान की खोज कहते
हम तो भुगतें वो करते मौज रहते
जिस दिन ये चालबाजी भगवान की
समझ आयेगी तो मुक्ति इन्सान की
सोचता हूँ जितना उतना ही भगवान
नजर आता है मुझको तो बस शैतान
मेरे लिए तो मेहन त इमानदारी
उनको लूट की दी उसने थानेदारी
सबसे पहले होगी बगावत मेरी
सामने लायेगी उसकी हेरा फेरी
जग नहीं है सोता उसकी हाँ के बिना
घोटाला कैसे होता उसकी हाँ के बिना
मंदिरों में हजारों टन सोना जमा है
यहाँ भूख से मौतों का लगा मजमा है
लोगो ने चढ़ावा चढ़ाया है मंदिरों में
चढ़ावे तेन मौज उड़ाया है मंदिरों में
महिला को दासी बनाया है मंदिरों में
गरीबों को गया भरमाया है मंदिरों में
मन की शांति नहीं मिली है मंदिरों में
इंसानियत आज हिली है मन्दिरों में
बुद्ध ने नया रास्ता खोजा मन शांति का
भगवान को नाकारा दर तोडा भ्रान्ति का
मार्क्स ने धर्म को अफीम बताया था
गरीब किया आदि हमें समझाया था
पूंजी का खेल सारा है पूंजीवाद में
इसका जवाब तो है समाजवाद में
सोचता समाजवाद कैसा हो आज का
क्या रिश्ता होगा चिड़िया और बाज का
कई सवाल हैं जिनके ढूँढने जवाब
महात्मा ने नहीं हमें ढूँढने जनाब
रंग भरने हैं समाजवादी समाज में
सब की हिस्सेदारी के सही अंदाज में
"रणबीर "
**********
108
dost ki yaad mein
मैं पढ़ा अपने गांव थाने के स्कूल में
तख्ती पर लिखते खेलते वहीं धूल में
दसवीं पास की मैने अच्छे नम्बर पाये
आगे कहां क्या करें पढ़ाई पर हुई चर्चा
सभी के दिल में था कितना होगा खर्चा
हिन्दू कालेज सोनीपत बाहरवीं पास की
मिलेगा मेडीकल में प्रवेष मैंने आस की
दाखिला मिल गया घर में थी खुषी छाई
रोहतक पहुंचा कुछ माहौल बदला भाई
तरह तरह के सवाल रैगिंग हुई मेरी थी
सीनियर का डर बैठा देखी मेरा तेरी थी
चीर फाड़ की षरीर की ज्ञान बढ़ाया था
फिजियोलॉजी रटी तब पास हो पाया था
पैथो और फारमा दोनों मुझे भा गये थे
इम्तिहान में ये नम्बर अच्छे आ गये थे
एसपी एम फोरैंसिक बांए हाथ का खेल
इनकी पढ़ाई पाई छुक छुक करती रेल
फाइनल मुष्किल होगा यही तो बताया
मरीज देखने में पूरा समय मैने लगाया
पास हुआ ठीक नम्बर चिनता थी छाई
नौकरी या करुं मैं आगे की और पढ़ाई
आखिर आगे पढ़ने का मन मैंने बनाया
सर्जरी में फिर जैसे तैसे दाखिला पाया
रुरल और अरबन का एक नजारा था
दलित और स्वर्ण का देखा बंटवारा था
फेल पास का संकट खुला सामने पाया
सेवन्टी ऐट में यह सबके सामने आया
जाट और नोन जाट का घमासान हुआ
लड़ाई उपर की नीचे का नुकसान हुआ
इसी बीच अनुपमा मेरे जीवन में आई
धीरे धीरे दोस्ती रिस्ते का रुप ले पाई
सवाल यही था अब आगे किधर जाउं
सरकारी नौकरी या नर्सिंग होम बनाउं
खरखोदा में किराए पर काम षुरु किया
तन मन धन सब कुछ मैने झोंक दिया
प्रैक्टिस अच्छी चली पैसा खूब कमाया
कुछ साल में अपना नर्सिंग होम बनाया
नन्ही बच्ची षादी के दो साल बाद आई
फिर तीन साल बाद थी थाली गई बजाई
दो साल बाद छोटा बेटा दुनिया में आया
सब तो ठीक ठ्याक था कस्बा मुझे भाया
तभी अनुपमा चली गई हमको छोड़ करके
बीमार हुई चल बसी मुह वह मोड़ करके
बस जिन्दगी में खालीपन छाता चला गया
बच्चों पर ध्यान पूरा लगाता चला गया
कई बार मेहर सिंह समिति वाले आये
अपने विचार मुझसे सांझा थे कर पाये
तभी दारु ने जिन्दगी में दखल बढ़ाया
ज्यादा न पिया करो बच्चों ने समझाया
धीमे से मिकदार बढ़ी फिर आदत बनी
लगा ऐसा मानो षराब मेरी ताकत बनी
ताकत नहीं कमजोरी बाद में समझ पाया
फिर इस दारु ने था अपना रंग खिलाया
नर्सिंग होम फिर दारुमय हो गया मेरा
कर्मचारी भी पीते मरीज खो गया मेरा
बहुत जगह इलाज किया न छुटी भाई
जो षोहरत कमाई सारी तो लुटी भाई
दुख और अफसोस कि कहां आ पहुंचा
कभी सोचा न ये मुकाम वहां जा पहुंचा
अस्पताल में दाखिल मैं जीना चाहता हूं
वहां पर भी मंगवा कर पीना चाहता हूं
कैसी विडम्बना मेरी दिल दिमाग पछताते
आदत बलवान हुई पीछा नहीं छुड़ा पाते
बेटी बेटे बहुत दुखी नहीं है पार बसाती
देखी है बेटी बैठी सीट पे आंसूं बहाती
छोटा बेटा सातवीं तक मेरा पढ़ पाया है
क्या होगा इसका आगे मन भर आया है
एक बड़ा दुष्मन दारु हरियाणे में हो रही
कितने हैं परिवार जहां बोझा पत्नी
षायद अब ज्यादा दिन नहीं मैं चल पाउंगा
आदत जीती सतवीर हारा ये लिख जाउंगा
रणबीर सिंह दहिया......
********
107
अन्दर और बाहर
मैंने अपने अन्दर को ठीक करने का जतन किया
बाहर ने हर बार ही तो मेरे अन्दर का पतन किया
कहते हैं यदि हरेक इंसान अन्दर सुधार करले
पूरा भारत चमक उठेगा नई फिर हूंकार भरले
अन्दर के सुधार के बावजूद मेरा संकट जारी है
बाहर से कैसे निपटूं यारो जिसका दबाव भारी है
*******
106
छोटे शहर बदल रहे
रात के ढाई बज चुके हैं यारो पर
मेरा शहर अब भी जाग रहा है
मेरे युवा भारत की आँखों में नींद
नहीं है
कुछ नौजवान डी जे की धुन पर
थिरक रहे हैं और मस्ती में मस्त हैं
यह सीन किसी मैट्रो शहर का हो
मगर ऐसा नहीं है यह सीन तो अब
लखनऊ बनारस लुधियाना और
रायपुर इंदौर भोपाल गुडगाँव
जैसे शहरों में भी रात का शबाब
अपने पूरे यौवन पर होता है
नौजवान यहाँ के सो कर नहीं बिताते
रातें बिताते है जाग जाग कर यहाँ
कहते जिन्दगी बहुत हसीं हो जाती
माईन्ड रिफरेशमेंट हम सब की हो पाती
इन शहरों का भूगोल तो अब भी
वैसा ही है मेरे ख्याल में
मगर बदल गए युवाओं के मिजाज
दिल्ली मुंबई कोलकता जैसे शहरों
या फिर में यू के या यू एस ए में
कुछ साल के बाद
वापसी हुई है नौजवानों की तो
अपने साथ उन शहरों के लाये हैं
लाइफ़ स्टाइल और मस्ती के नुस्खे
सौगात में
जबर दस्त ललक है इस तरह से
जीने की उनके दिल में आज
इस बदले मिजाज को बाजार ने
बहुत अच्छी तरह पहचान लिया है
इसीलिये छोटे शहरों में भी इसके
शो रूम ,इटिंग पॉइंट्स उभर रहे हैं
और एक मॉल कल्चर विकसित
हो रही है
हमारे में से कुछ बुजुर्ग
युवाओं की इस आजाद ख्याली को
सभ्यता और संस्कृति की राह में
बड़ी रूकावट मान रहे हैं
वे इसको युवाओं की महत्वाकांक्षा और
भोग विलास का नाम दे रहे हैं
पर सामाजिक चिन्तक इस बदलाव का
स्वागत करते नजर आये
********
105
मेरा ना होना तुम बर्दास्त नहीं कर सकते
मेरी ताकत का अहसास है तुम्हें
इसीलिये बाँट दिया मुझे धर्म, जात ,
इलाके, भाषा के नाम पर
मुझे अपनी कमजोरी का जिस दिन
अहसास हो जायेगा उस दिन ये जमाना
बदल जायेगा \\
*******
104
नए और पुराने का हमेशा संघर्ष हुया बताया रै||
पुराने की नींव पर नया महल बनता आया रै ||
पुराने नै ढाह कै नै यो बता नया क्यूकर बनैगा
पुराने की कमी छाँट कै ईमारत नई फेर चिनैगा
रीत घनी पुरानी सै कई बै पुराना घबराया रै ||
जरूरी नहीं नया बी घणा बढ़िया हो सारे का सारा
मनसां बीच खाई बढ़ावै वो नया ना साथी म्हारा
जो सबका भला करै वोहे नया सही ठहराया रै ||
तर्क और विवेक ये परखन के औजार बताये
नियम कुदरत के जाने बिना नए नै दुःख ठाए
कुदरत की गेल्याँ तालमेल तै कमाल दिखाया रै ||
मेरे बीरा क्यों लड़ते हो इस नए और पुराने पै
सोच समझ बढ़ो आगै रणबीर सिंह के गाने पै
संघर्ष तै बनता नया दीखे पुराने की बी छाया रै ||
********
103
आज का दौर
अपने स्वभाव के हिस्साब से ही
साम्राज्यवादी आक्रामकता बढ़ी
उसने ठीक उन्ही भीमकाय से
वितीय खिलाडियों को जो इस
मंदी के संकट को पैदा करने के
सही सही जिम्मेदार हैं इनको
बड़ी रकमों के बेल आउट पैकेज
देने के माध्यम से संकट पे काबू
पाने की कशिश की है |
इसमें कोई शक नहीं है दोस्तों
इन कम्पनीयों को तो फिर से
जीवन हासिल करवा के मुनाफा
बटोरने का फिर मौका दे दिया
देशों की राज्य सरकारों पर कर्जों
का भारी बोझ लाद दिया गया है
कमाल की बात अबतो करदी यारो
नैगम कम्पनीयों के दीवालों को अब
संप्रभु शासनों के ही दीवालों में
तब्दील कर दिया गया है
जिसका असर योरोपीय संघ के
अनेक देशों पर पड़ा और
अमेरिका भी नहीं बच पाया
बचेंगे हम जैसे भी नहीं |
********
102
बात पते की
सुबह होती है फिर श्याम होती है
सुबह रोती है फिर श्याम रोती है
अपनी इज्जत आबर एक महिला
सुबह खोती है फिर श्याम खोती है
दलित जीवन में अमीरीदुख के बीज
सुबह बोती है फिर श्याम बोती है
दबंग और पैसे की दुनिया रंगीन
सुबह होती है फिर श्याम होती है
लगते हैं जो धब्बे काली रातों में
सुबह धोती है फिर श्याम धोती है
सफरिंग दुनिय शाइनिंग दुनिया को
सुबह ढ़ोती है फिर श्याम ढ़ोती है
********
101
असल में जो नंगे हो गये वो अपना नंगा पन छिपाने को
सबको नंगा कहते हैं ताकि हम झिझकें उंगली उठाने को
*********
100
मेहनत कर हमने ताज महल बनाया क्यों नहीं दिखाई देता
ताज महल के साथ सब कोई नाम शाहजहाँ का ही क्यूँ लेता
119 से 110
119
अपना घर नै हरयाणा चारों कूट बदनाम किया ||
सी एम सिटी के भीतर घणा घटिया काम किया ||
शराफत का लबादा ओढ़ कै कितना ग़दर मचाया
बच्चों की मजबूरी का फायदा अपना घर नै उठाया
शर्म मैं नाड़ तले नै होगी कई का जीणा हराम किया ||
बड़े बड़े अफसरों तक मैडम का आना जाना बताया
कुछ शामिल किये खेल मैं कुच्छ को हमराज बनाया
परत उघडती जावैं सें रिकार्ड तलब तमाम किया ||
सफ़ेद पोश बण कै काला धंधा कई करते बताये ये
ले दे कै रफा दफा करावें जमा नहीं काबू मैं आये ये
मूल भूत बदल चाहिए अदल बदल देख तमाम लिया||
हरेक नागरिक आगे आवै बिना इसके ना बात बनै
गुण दोष पै तोल करकै छाज महँ कै सबका नाज छनै
साहमी ल्याना होगा सारा जो भी आज गुमनाम किया ||
दोषी जितने सब नै मिलै सजा रखना होगा ध्यान दखे
भ्रष्ट अफसर पुलिस अर नेता साथ देवे भगवान दखे
रणबीर नै छंद बनाया सबको आज यो पैगाम दिया ||
********
118
आग सीने की तुम कब तक दबाये रखोगे
सीने में दर्द लब पे मुस्कान सजाये रखोगे
कराहें उठ रही हर घर में आज देखो यारो
जात गोत मजहब की बेड़ियां लगाये रखोगे
आसान नहीं मानवता तक यूं पहुंच पाना
हैवानियत को कब तक तुम उठाये रखोगे
जाग जायेगा इंसान तो हक तो मांगेगा ही
शातिर हो तुम सोये हुए को सुलाये रखोगे
जुल्म की रात भी कट जायेगी एक दिन
जो ए कामगारों आस अपनी जगाये रखोगे
*******
117
तर्ज --- सौ साल पहले मुझे तुमसे प्यार था
टेक ---ठहर जाओ भय्या भागना बेकार है ||
देता दिखाई ये अँधेरा बेसुम्मार है ||
हम भागे जाते हैं पर रास्ता तो नहीं पाता है
जिधर भी देखते हैं अँधेरा नजर आता है
खाता है भय अपनों की मार है ||
यहाँ धोखेबाजी है हमें आज बहला करके
हमारी कमाई बैठे हैं अपने घर में भरके
डरके नहीं रहना करना पलटवार है ||
अँधेरी गली है रौशनी नहीं आती है
लालच और पैसे की भूख नहीं मिट पाती है
खाती है धोखा जिन्दगी कई बार है ||
रणबीर रोशनी की चाह दिल में बस्ती है
अँधेरे में भी भी कहीं किरण हंसती है
बसती नई दुनिया परले पार है ||
********
116
जब नयी सुबह के सूरज को सदा दी जायेगी ।।
सफ़ेद पोश हैवानों को फिर सजा दी जायेगी ।।
आज के दौर में प्रेमियों की ऑंनर किलिंग होती
नयी सुबह में इन्हें शहीदों की जगा दी जायेगी।।
हमारी मेहनत लूटते हैं दगा देकर हमको यारो
वो सुबह आएगी जब न कोई दगा दी जायेगी।।
हमारे बच्चे मजदूरी करते रहते क्यों बिन पढ़ाई
यकीं मानों ये सारी बातअब समझा दी जायेगी।।
जात पात धर्म की लक्ष्मण रेखाएं सब टूटेंगी
मानवता को सब जगह पर पन्हा दी जायेगी ।।
*******
115
दस जमा एक लाइनी बात
आप लेफ्ट का फर्क समझ आवै इतनै घनी वार होज्यागी
ओहले कहे तैं नहीं काम चलै इतनै घनी मार होज्यागी
ईमानदारी के लबादे मैं लूट की या गाड्डी सवार होज्यागी
सिस्टम बदले बिना क्यूकर भ्रष्टाचार की हार होज्यागी
लेफ्ट बिना मजदूर किसान की कैसे नैय्या पार होज्यागी
दस कै खिलाफ जिस दिन नब्बै की सेना तयार होज्यागी
उस दिन पूरी दुनिया मैं भारत की हटकै पुकार होज्यागी
नहीं तो लूट कार्पोरेट की इस ढालाँ या स्वीकार होज्यागी
अम्बानी की जागां दूजे लुटेरयाँ की खड़ी या लार होज्यागी
ईमानदार उदारवाद की फेर तेज घनी रफ़्तार होज्यागी
जनता नहीं जागी तो लोगो मानवता शर्मशार होज्यागी
*******
114
आज पी जी आइ ऍम एस में सद्भावना दिवस मनाया गया हाजरी काबिले गौर थी |
सद्भावना दिवस आज कालेज में गया मनाया
थी सद्भावना या विद्वेष भावना समझ ना पाया
एक तरफ हम सा धर्मों का गुणगान करते हैं
दूजी तरफ पाकिस्तान काफ़िर उनको बताया
सद्भावना का मतलब दुनिया में हो शांति देखो
देशों के बार्डरों को ना जाये कताल्गाह बनाया
कोई सैनिक जब मरता है इस पार या उस पार
कोख खाली एक माँ की होती समझ में आया
पाकिस्तान को सबक सिखाने को सब तैयार
अपने ही दलित भाईयों को नहीं गले लगाया
मंदिर मैं आज तक दलित बहन भाईयों को वही
देश भगत क्यों आज तलक जगह नहीं दे पाया
अंध राष्ट्रवाद झलका कई कविताओं में वहां पर
तालियों की गडगडाहट ने मुझे पूरा ही दहलाया
सोच रहा ठा वहीँ उठ कर कोसूं अंध देश भक्ति
मग़र कमजोरी मेरी वहां उठके ना विरोध जताया
ये कैसी देश भक्ति है जो सरहद पर मर कटती है
यहाँ अनाज गोदामों में सडा ना गरीब को दिलवाया
इंसान की परिभाषा जिस दिन समझ जायेंगे हम
फिर ये अंधराष्ट्रवाद अंतर राष्ट्र वाद में बदले जताया
सारी दुनिया का आदमी इंसान जब हो जायेगा तो
बार्डरों का सिलसिला ढह जायेगा मुझे यही सुझाया
*******
113
इस पार या उस पार मां की कोख खाली होती है
जब भी कोेई जंग इस जहां में होती है ।
**********
112
परिवार में मुझको जितने भी पाठ पढ़ाये
सारे ही उनके मुझको लूटने के काम आये
कर्म कर फल की चिंता मत कर गीता सार
मेरी लूट के गए हैं सही औजार बनाये
**********
111
इस नदी की धार में ठंडी हवा आती तो हैं,
नाव जर्जर ही सही, लहरों से टकराती तो हैं.
*********
110
मेरे घर आकर तो देखो एक बार
एक दूजे के पता लगे क्या परिवार
ना आप हमें जाने ना हम आपको
किया हम सब के बारे गलत प्रचार
अफवाहें बे सिर पैर की बातें उनकी
हमें लड़वा देती हैं देखो भाई हरबार
सभी कौम सुख से रहती आई यहाँ
मगर उनको पसंद नहीं ऐसा घरबार
हिन्दू मुस्लिम सिख और ईसाई यहां
सभी भाई भाई का करते है व्यवहार
दुख सुख सभी मिलके झेलते खेलते
किया संघर्ष सबने मिल कर बारंबार
120 से 129
129
रसातल
बस कुछ मत पूछो
रसातल में जा रहा है समाज
पहले वाली कोई बात ही नहीं
लड़के तो बिगड़ैल पहले से ही थे
अब इन लड़कियां को आज डराया
धमकाया बहकाया जा रहा है
नकल करने को मजबूर
आजकल एकल परिवार और एकल हो गया
मां कहीं बाप कहीं खुद कहीं तो पत्नी कहीं
इसे क्या कहें घर परिवार या महज एक व्यक्ति
खाने में मिलावट, पानी साफ नहीं ,
हवा का प्रदूषण कोई भी माफ नहीं
ग्लोबल फूड क्राइसिस वाटर क्राइसिस
ग्लोबल वार्मिंग का बढ़ता यह खटका
सिस्टम लगता है पूरा का पूरा भटका
भर गया भर गया पाप का मटका
यह तो सभी चाहते हैं कि समाज में
सुधार की बहुत जरूरत है आज
कई भगत सिंह पैदा हों फिर से
मगर हों पड़ोसियों के यहां
हमारे बच्चों को तो ट्यूशन से
फुर्सत ही कहां है?
2/5/08
*********
128
गुर्दे का गुर्दा
किडनी लगवाने वाले विदेशी मूल के
किडनी देने वाले सभी देसी फूल थे
बीच में एजेंट हैं साथ में डॉक्टर उसूल के
जिसके गुर्दे फेल हो गए मरने को है
दूसरा जीवन देना हम सबका फर्ज है
गरीबी के चलते किडनियां फेल न हों
उनको भी बचाना मानवता के खाते दर्ज है
जिसे गुर्दा चाहिए था उसे गुर्दा दिलवाया
भूख के कारण दोनों गुर्दे मरने को थे
उनमें से एक गुर्दा तो बचा ही दिया
दानी गुर्दे से एक और मानव बच पाया
काफी लोगों को रोजगार मुहैया करवाया
एजेंटों का जाल बिछा कर चुपचाप पुण्य किया
गुर्दा लेने और देने का कानून सख्त इतना
इससे बचने का प्रयास करना पड़ता कितना
जरा सोचो तो सही दिमाग पर जोर देकर
विदेशी को अपने ही देश में अपने लिए
महज एक गुर्दा भी क्यों नहीं मिला
भारत देश महान का गुर्दा उसे क्यों भाया
पैसे का खेल है यहां पर मेरे यारों
इसी कारण बदेशी देशी गुर्दा खरीद पाया
इसके लिए नेता अफसर पुलिस के
बिक गए बस कीमत की बात थी यारो।
*******
127
क्या है यह विकास या विनाश
फिर भी हमें तो यही है आस
जिनका सम्मान छीन लिया गया
जिनकी अस्मिता तार तार कर दी गई
वह एक दिन इकट्ठे होकर पूरा
हिसाब मांगेंगे और हिसाब करके
हिसाब सरएक नई दुनिया बनाएंगे
*******
126
कीमत बढ़ेगी
महिलाओं की संख्या कम होगी तो
महिलाओं की कीमत बढ़ जाएगी
यही मानते और सुनते आए थे
मगर यह क्या है?
मुर्रा भैंस की कीमत एक लाख
बिहारी बहु मिले पांच हजार में
हर रोज भारत में क्या होता है
मालूम है आपको ? रोजाना
चौबीस की चढ़ती है बलि दहेज की
छियासी की लुटे है हर रोज आबरु
चार सौ अस्सी से हो छेड़छाड़
पैंतालीस फीसद के पति करें पिटाई
पचास प्रतिशत गर्भवती महिलाएं
जिनपर हिंसा करके मर्द बनते हम
हिंसा की शिकार सत्तर प्रतिशत
आत्महत्या का प्रयास करती हैं
मेरा देश महान है
विश्व गुरु बनाने का आह्वान है।
********
125
विश्व बैंक
विश्व बैंक हितैसी बनकर आया
रक्षक भक्षक कैसे बन जाता है
इसने हमें समझाया
गरीबी और बेकारी खत्म होने की आस बंधी
15 साल के भीतर जवान बेटे की लाश उठी
बदेशी कंपनी आ गई
हमने पूरे दरवाजे खोल दिए
विदेशियों के साथ मिल गए
देसी भी
घी के दीए जल रहे उनके
हमारे घर घुप अंधेरा है
गुरबत की जंजीर जकड़ रही है हमें
वहां सब कुछ शाइनिंग है
********
124
ब्रह्मांड
बेअंत ब्रह्मांड ऊपर कब धरती और ग्रह आए
इसके बारे में दो विचार कदे कदीमी चलते आए एक विचार यों कहता पदार्थ से बनी जगत हमारी ज्ञान विज्ञान ने खोज की कैसे उपजी धरती प्यारी डार्विन की खोज भारी विकास सिद्धांत समझाए कैसे हुआ विकास हमारा मानव संसार जान रहा
तर्क और विवेक के साथ कुदरत को पहचान रहा सच्चाई खोज विज्ञान रहा एक सैल के जीव बताए इस धरती पे संतुलन ये कहते कुदरती बैठता आया जीवन निर्जीव कैसे पनपे गया पूरा हिसाब लगाया हर बात पे सवाल उठाया सबके जवाब ढूंढना चाहे अपने पर विज्ञान आज सवाल दर सवाल उठाए समाज में क्या और क्यों हुआ जवाब ढूंढना चाहे रणबीर साथ कलम चलाए सोच करछंद बनाये
********
123
पृथ्वी अपना संकट ये आज सबको सुनाती है
चारों तरफ से हमला अस्तित्व बचाना चाहती है
हरियाणा की धरती से गिद्ध खत्म हुए जा रहे
मोर भी जगह-जगह पर आज मरे हुए हैं पा रहे
कैंसर बढ़ते जा रहे आज हमें समझ ना आती है ।
जमीन हमारे खेतों की बांज होती जा रही आज
फसल सब कुछ करके भी नहीं बढ़ पा रही आज
बीमारी क्यों छा रही आज जमीन भी बिक जाती है। बाजारू विकास के तले टिकाऊ विकास खो गया
कैसा दोहन कुदरत का देखो चारों तरफ हो गया
बीज बिघन के बो गया धरती की हद छाती है।
सामाजिक सूचक हमारे बहुत हो गए खराब
आर्थिक सूचक से काम नहीं चलेगा जनाब
लिख रहे हैं ऐसी किताब जो सब भेद बताती है
*******
122
विश्व बैंक
विश्व बैंक हमारा रक्षक हमने रक्षक माना इसको।
निकला यह पूरा ही भक्षक अनुभव से जाना इसको।
गरीबी और बेकारी सबके खत्म होने की आस उठी
मगर पन्दरा साल के भीतर जवान बेटे की लाश उठी
विश्वबैंक के कान हों तो गरीब की व्यथा सुनाना इसको।
शिक्षा जगत में गुणवत्ता का इसने ही प्रचार किया
जैसी शिक्षा थी अपनी उस पर जमकर प्रहार किया
महंगी शिक्षा गुणवत्ता नहीं इतना तो बताना इसको।
स्वस्थ जगत का रंग बदला बड़े अस्पताल ले आए
मेरे जैसे गरीब गुरबा तो इनके अंदर नहीं घुस पाए
अपोलो फोर्टिस की कल्चर ये जरा समझाना इसको।
बहुराष्ट्रीय कंपनियों का यह रक्षक असल में पाया
मुखौटा हमारी मदद का रंग रंगीला इसने लगाया
रणबीर का पैन खोसने का ना मिला बहाना इसको।
*******
121
दोहरापन
दोहरापन जीवन का हमको अंदर से खा रहा ।
एक दिखे दयालू दूसरा राक्षस बनता जा रहा ।
चेहरों का खेल चारों तरफ दुनिया में फैल रहा ,
मुखोटे हैं कई तरह के कोई पहचान नहीं पा रहा।
सफेद मुखौटा काला चेहरा काम इनके काले हैं
बिना मुखोटे का तेरा चेहरा न किसी को भा रहा।
कौन सा मुखौटा गुजरात में करतब दिखा रहा ये
जनता को बहला धर्म पर कुर्सी को हथिया रहा ।
धार्मिक कट्टरता का चेहरा प्यारा लगता क्यों है
मानव से मानव की हत्या रोजाना ही करवा रहा।
कौन धर्म कहता हमको घृणा का मुखौटा पहनो
खुद किस झोपड़ी में आग खुदा जाकर लगा रहा।
राम भी कहता प्यार करो दोहरेपन को छोड़ दो अब
रणबीर भी बात वही दूजे ढंग से है समझा रहा।।।
*******
120
दोस्त
पास रहकर भी दूर रहना कोई सीखे तुमसे
बिना कहे बहुत कुछ कहना कोई सीखे तुमसे
लालच व भोग का बाजार जकड़े हुए हैं हमें
बाजारी दुनिया से कहना कोई सीखे तुमसे
हर ईंट के नीचे आज बैठा बिच्छु दिखाई देता है
बिच्छूओं के दंश न सहना कोई सीखे तुमसे
माया जाल फैला है यहां झूठ और मक्कारी का
इस जाल की आग में न दहना कोई सीखे तुमसे
सोने पर यह रांग का पानी चढ़ा कर बेचते देखो
कैसे पहचाने असली गहना कोई सीखे तुमसे
वैश्वीकरण के तूफान में सब कुछ वह चला है
इस तेज तूफान में न बहना कोई सीखे तुमसे
130 से 139
139
आसान है
बहुत आसान है हमारी जिंदगी की
सटीक समीक्षा करना
बहुत आसान है हमारी जिंदगी की
सुंदर सी तस्वीर बनाना
बहुत आसान है हमारी जिंदगी की
तरफदारी करते रहना
बहुत आसान है हमारी जिंदगी की
नुमाइश दिखाते रहना
मगर बहुत मुश्किल है इस जिंदगी को
हकीकत में जी सकना
********
138
नैना देवी
नैना देवी में हादसा हुआ
डेढ़ सौ लोगों की मौत हो गई
तीन सौ घायल हो गए
कहते हैं पुलिस ने भांजी लाठियां
मची भगदड़ तो फिर
कोहराम मचा
हर तरफ चीख पुकार थी
मंदिर में खौफ पसर आया
रास्ता बहुत ही संकरा सा था
लोग भाग भी नहीं पाए और कुचले गए
आठ दस करोड़ का चढ़ावा आता है
सवाल उठ रहे हैं वह कहां जाता है
सुविधाएं तो चाहिएं भक्तों को
मगर कौन मांग करे और किससे?
********
137
किसान ने अपनी मेहनत से
जो गेहूं अपने खेत में
उगाया
उसका भाव भी उसे
उसकी मेहनत के मुताबिक
ना मिल पाया
मंडी में आढती ने भी
अपना पूरा करतब
दिखलाया
मंडी में जब वही गिहूं
खुले में रखा गया और
बरसात में भीग गया
यह देख किसान का जी
बहुत दुख पाया
पूरे 6 महीने की मेहनत
जब यूं खुले में बर्बाद हो
तो गम तो होगा ही
यह बात अलग है कि
हम उस मेहनत की
कीमत से वाकिफ ही
नहीं हैं?
*******
136
क्वालिटी
क्वालिटी का जमाना है
कीमत का क्या मायना है
फल विक्रेता की भी
खूब चांदी हो रही है
ग्राहक ज्यादा मूल भाव भी
नहीं करते मगर
देसी आम और तरबूज
साथ में है खरबूजा
इनका संगी ना बदेशी दूजा
लीची भी है देसी अपनी
सबसे बढ़िया देसी फलों का
अपने ही बाजार में यूं पिटना
सोचो तो सही
क्या यह सही बात है?
*******
135
पता नहीं
पता नहीं आज का जमाना किधर को जा रहा है
सुबह कहीं शाम कहीं अगली सुबह कहीं पा रहा है
नई तकनीक ने कब्जा जमाया पूरे इस इंसान पर
आदमी आदमी को दिन दिहाड़े नोच नोच खा रहा है
दूसरों के कंधों पर पैर रखकर आसमान छू रहे हैं
गंदी फिल्मों का फैशन आज नई पीढ़ी पर छा रहा है
दारू समाज के हर हिस्से में सत्यानाशी बनती जा रही
अच्छा खासा हिस्सा आज दारु पी गाने गा रहा है
लालच फरेब धोखाधड़ी का दौर चारों तरफ छाया
नकली दो नम्बर का इंसान हम सबको भा रहा है
बाजार व्यवस्था का मौसम है मुट्ठी भर हैं मस्त इसमें
बड़ा हिस्सा दुनिया का आज नीचे को ही आ रहा है
भाई भाई के सिर का बैरी कत्लोगारत बढ़ रही है
पुलिस अफसर कोई बाएं दाएं से खूब पैसे बना रहा है
पूरे के पूरे सिस्टम को दीमक खाती जा रही देखो
आज भ्रष्टाचार चारों तरफ डंक अपना फैला रहा है
एक तरफ
मॉल खड़े हुए दूजी तरफ टूटी हुई सड़कें देती दिखाई
तरक्की का यह मॉडल देखो दूरियां बहुत बढ़ा रहा है
अपने बोझ तले एक दिन मुश्किल होगा सांस लेना
तलछट की जनता जागेगी रणबीर उसे जगा रहा है
********
134
विदेशी फल
विदेशी फलों का स्वाद
चखें अपने देसी शहर में ही
दिल्ली मुंबई और कलकत्ता
भागकर जाने की जरूरत नहीं
हमारे शहर का बाजार भी
विदेशी फलों से सजा हुआ है
शहर की रेहड़ियों पर तरतीब से
टिके हुए हैं विदेशी फल
चाहे देसी से विदेशी की कीमत
ज्यादा क्यों न हो
कीमत की किसे चिंता है
फल विदेशी हमारे घर में है
यह बात दीगर है कि हमारे
पिताजी देसी की लड़ाई
लड़ते-लड़ते दम तोड़ गए
थाईलैंड का अमरूद
मिलता है ₹200 किलो
कैलिफोर्निया का हरा सेब
क्या कहने हैं सब के
चाइनीज सेब भी आ टपक
थोड़ा सस्ता है कैलिफोर्निया से ऑस्ट्रेलिया का बब्बू गोसा
अमीर को क्या परवाह महंगे की
मध्यम वर्ग भी देखा देखी
भरने लगा अपने फ्रिजों को
विदेशी फलों से
स्वाद तो बेहतर है
देसी में वह स्वाद कहां
जो विदेशी में है।
*********
133
सुरक्षित कौन
रोहतक में करोड़ों रुपए का
व्यापार रोजाना होता
5 महीने में शहर में
व्यापारियों की
दो हत्याएं हो चुकी है
चार व्यापारियों को
लूटा जा चुका है
एक पर जान लेवा हमला
किया गया दिन दहाड़े
यदि व्यापारी ही है सुरक्षित हैं
तो सीएम सिटी में
फिर कौन सुरक्षित है ?
कई साल पहले की रचना
**********
132
दोगलापन दुनिया का
बेजुबान पत्थर पर लदे हैं करोड़ों के गहने मन्दिरों में
उसी दहलीज पे एक रूपये को नन्हें हाथों को तरसते देखा है
सजे थे छप्पन भोग और साथ में मेवे मूरत के सामने यारो
बाहर एक फकीर को भूख से तड़प कर मरते देखा है यारो
*******
131
साइनिंग इंडिया सफरिंग इंडिया
ये महज शब्दों का खेल नहीं है
ये हैं दो दुनिया इसी जमीन पर
एक तरफ एयर कंडीशन्ड कोठी
उधर बरसात में टपकती झोंपड़ी
करोड़ों के को वह भी नहीं नसीब
एक तरफ एयर कंडीशन्ड कारें हैं
उधर कई कोश नँगे पांव चलना है
एयर कंडीशन्ड पांच सितारा होटल
उधर दो रुपये की चाय का ढाबा है
एयर कंडीशन्ड अपोलो फोर्टिस हैं
उधर बिना दवाई के सीएचसी हैं
एयर कंडीशन्ड मॉल सब मिलता
उधर खुदरा छोटी छोटी दुकानें हैं
एयर कंडीशन्ड स्कूल आलिसान
उधर बिना पंखे के कमरे के स्कूल
एक तरफ ऐयासी की दुनिया छाई
दूसरी तरफ मेहनत से फुरसत नहीं
दोरंगी दुनिया नजर नहीं आती हमें
इस अंधेपन को क्या कहूँ?शब्द नहीं
आपके पास हैं तो इंतजार इनबॉक्स में
रणबीर
15.03.08
*******
130
पृथ्वी अपना संकट ये आज सबको सुनाती है
चारों तरफ से हमला अस्तित्व बचाना चाहती है
हरियाणा की धरती से गिद्ध खत्म हुए जा रहे
मोर भी जगह-जगह पर आज मरे हुए हैं पा रहे
कैंसर बढ़ते जा रहे आज हमें समझ ना आती है ।
जमीन हमारे खेतों की बांज होती जा रही आज
फसल सब कुछ करके भी नहीं बढ़ पा रही आज
बीमारी क्यों छा रही आज जमीन भी बिक जाती है। बाजारू विकास के तले टिकाऊ विकास खो गया
कैसा दोहन कुदरत का देखो चारों तरफ हो गया
बीज बिघन के बो गया धरती की हद छाती है।
सामाजिक सूचक हमारे बहुत हो गए खराब
आर्थिक सूचक से काम नहीं चलेगा जनाब
लिख रहे हैं ऐसी किताब जो सब भेद बताती है
Subscribe to:
Comments (Atom)