Wednesday, June 12, 2024

100 से 109

109 सोच सोच कर सोच सोच कर घबरा जाता हूँ मैं सोच सोच कर सोच सोच कर घबरा जाता हूँ मैं अपने आप को अकेला पाता हूँ मैं एक नयी दुनिया का सपना मेरा है यहाँ क्या मेरा है और क्या तेरा है इंसानियत पैदा की है समाज ने हैवानियत पैदा की है दगा बाज ने हैवानियत ख़त्म हो है यही सपना इंसानियत बढे यही लक्ष्य अपना मनकी शान्ति की खोज में धर्मात्मा खोजते खोजते खोज लिया परमात्मा अपनी शान्ति पाई हमारी लूट पर हमारी शांति भगवन की छूट पर भगवान भी इंसान की खोज कहते हम तो भुगतें वो करते मौज रहते जिस दिन ये चालबाजी भगवान की समझ आयेगी तो मुक्ति इन्सान की सोचता हूँ जितना उतना ही भगवान नजर आता है मुझको तो बस शैतान मेरे लिए तो मेहन त इमानदारी उनको लूट की दी उसने थानेदारी सबसे पहले होगी बगावत मेरी सामने लायेगी उसकी हेरा फेरी जग नहीं है सोता उसकी हाँ के बिना घोटाला कैसे होता उसकी हाँ के बिना मंदिरों में हजारों टन सोना जमा है यहाँ भूख से मौतों का लगा मजमा है लोगो ने चढ़ावा चढ़ाया है मंदिरों में चढ़ावे तेन मौज उड़ाया है मंदिरों में महिला को दासी बनाया है मंदिरों में गरीबों को गया भरमाया है मंदिरों में मन की शांति नहीं मिली है मंदिरों में इंसानियत आज हिली है मन्दिरों में बुद्ध ने नया रास्ता खोजा मन शांति का भगवान को नाकारा दर तोडा भ्रान्ति का मार्क्स ने धर्म को अफीम बताया था गरीब किया आदि हमें समझाया था पूंजी का खेल सारा है पूंजीवाद में इसका जवाब तो है समाजवाद में सोचता समाजवाद कैसा हो आज का क्या रिश्ता होगा चिड़िया और बाज का कई सवाल हैं जिनके ढूँढने जवाब महात्मा ने नहीं हमें ढूँढने जनाब रंग भरने हैं समाजवादी समाज में सब की हिस्सेदारी के सही अंदाज में "रणबीर " ********** 108 dost ki yaad mein मैं पढ़ा अपने गांव थाने के स्कूल में तख्ती पर लिखते खेलते वहीं धूल में दसवीं पास की मैने अच्छे नम्बर पाये आगे कहां क्या करें पढ़ाई पर हुई चर्चा सभी के दिल में था कितना होगा खर्चा हिन्दू कालेज सोनीपत बाहरवीं पास की मिलेगा मेडीकल में प्रवेष मैंने आस की दाखिला मिल गया घर में थी खुषी छाई रोहतक पहुंचा कुछ माहौल बदला भाई तरह तरह के सवाल रैगिंग हुई मेरी थी सीनियर का डर बैठा देखी मेरा तेरी थी चीर फाड़ की षरीर की ज्ञान बढ़ाया था फिजियोलॉजी रटी तब पास हो पाया था पैथो और फारमा दोनों मुझे भा गये थे इम्तिहान में ये नम्बर अच्छे आ गये थे एसपी एम फोरैंसिक बांए हाथ का खेल इनकी पढ़ाई पाई छुक छुक करती रेल फाइनल मुष्किल होगा यही तो बताया मरीज देखने में पूरा समय मैने लगाया पास हुआ ठीक नम्बर चिनता थी छाई नौकरी या करुं मैं आगे की और पढ़ाई आखिर आगे पढ़ने का मन मैंने बनाया सर्जरी में फिर जैसे तैसे दाखिला पाया रुरल और अरबन का एक नजारा था दलित और स्वर्ण का देखा बंटवारा था फेल पास का संकट खुला सामने पाया सेवन्टी ऐट में यह सबके सामने आया जाट और नोन जाट का घमासान हुआ लड़ाई उपर की नीचे का नुकसान हुआ इसी बीच अनुपमा मेरे जीवन में आई धीरे धीरे दोस्ती रिस्ते का रुप ले पाई सवाल यही था अब आगे किधर जाउं सरकारी नौकरी या नर्सिंग होम बनाउं खरखोदा में किराए पर काम षुरु किया तन मन धन सब कुछ मैने झोंक दिया प्रैक्टिस अच्छी चली पैसा खूब कमाया कुछ साल में अपना नर्सिंग होम बनाया नन्ही बच्ची षादी के दो साल बाद आई फिर तीन साल बाद थी थाली गई बजाई दो साल बाद छोटा बेटा दुनिया में आया सब तो ठीक ठ्याक था कस्बा मुझे भाया तभी अनुपमा चली गई हमको छोड़ करके बीमार हुई चल बसी मुह वह मोड़ करके बस जिन्दगी में खालीपन छाता चला गया बच्चों पर ध्यान पूरा लगाता चला गया कई बार मेहर सिंह समिति वाले आये अपने विचार मुझसे सांझा थे कर पाये तभी दारु ने जिन्दगी में दखल बढ़ाया ज्यादा न पिया करो बच्चों ने समझाया धीमे से मिकदार बढ़ी फिर आदत बनी लगा ऐसा मानो षराब मेरी ताकत बनी ताकत नहीं कमजोरी बाद में समझ पाया फिर इस दारु ने था अपना रंग खिलाया नर्सिंग होम फिर दारुमय हो गया मेरा कर्मचारी भी पीते मरीज खो गया मेरा बहुत जगह इलाज किया न छुटी भाई जो षोहरत कमाई सारी तो लुटी भाई दुख और अफसोस कि कहां आ पहुंचा कभी सोचा न ये मुकाम वहां जा पहुंचा अस्पताल में दाखिल मैं जीना चाहता हूं वहां पर भी मंगवा कर पीना चाहता हूं कैसी विडम्बना मेरी दिल दिमाग पछताते आदत बलवान हुई पीछा नहीं छुड़ा पाते बेटी बेटे बहुत दुखी नहीं है पार बसाती देखी है बेटी बैठी सीट पे आंसूं बहाती छोटा बेटा सातवीं तक मेरा पढ़ पाया है क्या होगा इसका आगे मन भर आया है एक बड़ा दुष्मन दारु हरियाणे में हो रही कितने हैं परिवार जहां बोझा पत्नी षायद अब ज्यादा दिन नहीं मैं चल पाउंगा आदत जीती सतवीर हारा ये लिख जाउंगा रणबीर सिंह दहिया...... ******** 107 अन्दर और बाहर मैंने अपने अन्दर को ठीक करने का जतन किया बाहर ने हर बार ही तो मेरे अन्दर का पतन किया कहते हैं यदि हरेक इंसान अन्दर सुधार करले पूरा भारत चमक उठेगा नई फिर हूंकार भरले अन्दर के सुधार के बावजूद मेरा संकट जारी है बाहर से कैसे निपटूं यारो जिसका दबाव भारी है ******* 106 छोटे शहर बदल रहे रात के ढाई बज चुके हैं यारो पर मेरा शहर अब भी जाग रहा है मेरे युवा भारत की आँखों में नींद नहीं है कुछ नौजवान डी जे की धुन पर थिरक रहे हैं और मस्ती में मस्त हैं यह सीन किसी मैट्रो शहर का हो मगर ऐसा नहीं है यह सीन तो अब लखनऊ बनारस लुधियाना और रायपुर इंदौर भोपाल गुडगाँव जैसे शहरों में भी रात का शबाब अपने पूरे यौवन पर होता है नौजवान यहाँ के सो कर नहीं बिताते रातें बिताते है जाग जाग कर यहाँ कहते जिन्दगी बहुत हसीं हो जाती माईन्ड रिफरेशमेंट हम सब की हो पाती इन शहरों का भूगोल तो अब भी वैसा ही है मेरे ख्याल में मगर बदल गए युवाओं के मिजाज दिल्ली मुंबई कोलकता जैसे शहरों या फिर में यू के या यू एस ए में कुछ साल के बाद वापसी हुई है नौजवानों की तो अपने साथ उन शहरों के लाये हैं लाइफ़ स्टाइल और मस्ती के नुस्खे सौगात में जबर दस्त ललक है इस तरह से जीने की उनके दिल में आज इस बदले मिजाज को बाजार ने बहुत अच्छी तरह पहचान लिया है इसीलिये छोटे शहरों में भी इसके शो रूम ,इटिंग पॉइंट्स उभर रहे हैं और एक मॉल कल्चर विकसित हो रही है हमारे में से कुछ बुजुर्ग युवाओं की इस आजाद ख्याली को सभ्यता और संस्कृति की राह में बड़ी रूकावट मान रहे हैं वे इसको युवाओं की महत्वाकांक्षा और भोग विलास का नाम दे रहे हैं पर सामाजिक चिन्तक इस बदलाव का स्वागत करते नजर आये ******** 105 मेरा ना होना तुम बर्दास्त नहीं कर सकते मेरी ताकत का अहसास है तुम्हें इसीलिये बाँट दिया मुझे धर्म, जात , इलाके, भाषा के नाम पर मुझे अपनी कमजोरी का जिस दिन अहसास हो जायेगा उस दिन ये जमाना बदल जायेगा \\ ******* 104 नए और पुराने का हमेशा संघर्ष हुया बताया रै|| पुराने की नींव पर नया महल बनता आया रै || पुराने नै ढाह कै नै यो बता नया क्यूकर बनैगा पुराने की कमी छाँट कै ईमारत नई फेर चिनैगा रीत घनी पुरानी सै कई बै पुराना घबराया रै || जरूरी नहीं नया बी घणा बढ़िया हो सारे का सारा मनसां बीच खाई बढ़ावै वो नया ना साथी म्हारा जो सबका भला करै वोहे नया सही ठहराया रै || तर्क और विवेक ये परखन के औजार बताये नियम कुदरत के जाने बिना नए नै दुःख ठाए कुदरत की गेल्याँ तालमेल तै कमाल दिखाया रै || मेरे बीरा क्यों लड़ते हो इस नए और पुराने पै सोच समझ बढ़ो आगै रणबीर सिंह के गाने पै संघर्ष तै बनता नया दीखे पुराने की बी छाया रै || ******** 103 आज का दौर अपने स्वभाव के हिस्साब से ही साम्राज्यवादी आक्रामकता बढ़ी उसने ठीक उन्ही भीमकाय से वितीय खिलाडियों को जो इस मंदी के संकट को पैदा करने के सही सही जिम्मेदार हैं इनको बड़ी रकमों के बेल आउट पैकेज देने के माध्यम से संकट पे काबू पाने की कशिश की है | इसमें कोई शक नहीं है दोस्तों इन कम्पनीयों को तो फिर से जीवन हासिल करवा के मुनाफा बटोरने का फिर मौका दे दिया देशों की राज्य सरकारों पर कर्जों का भारी बोझ लाद दिया गया है कमाल की बात अबतो करदी यारो नैगम कम्पनीयों के दीवालों को अब संप्रभु शासनों के ही दीवालों में तब्दील कर दिया गया है जिसका असर योरोपीय संघ के अनेक देशों पर पड़ा और अमेरिका भी नहीं बच पाया बचेंगे हम जैसे भी नहीं | ******** 102 बात पते की सुबह होती है फिर श्याम होती है सुबह रोती है फिर श्याम रोती है अपनी इज्जत आबर एक महिला सुबह खोती है फिर श्याम खोती है दलित जीवन में अमीरीदुख के बीज सुबह बोती है फिर श्याम बोती है दबंग और पैसे की दुनिया रंगीन सुबह होती है फिर श्याम होती है लगते हैं जो धब्बे काली रातों में सुबह धोती है फिर श्याम धोती है सफरिंग दुनिय शाइनिंग दुनिया को सुबह ढ़ोती है फिर श्याम ढ़ोती है ******** 101 असल में जो नंगे हो गये वो अपना नंगा पन छिपाने को सबको नंगा कहते हैं ताकि हम झिझकें उंगली उठाने को ********* 100 मेहनत कर हमने ताज महल बनाया क्यों नहीं दिखाई देता ताज महल के साथ सब कोई नाम शाहजहाँ का ही क्यूँ लेता

119 से 110

119 अपना घर नै हरयाणा चारों कूट बदनाम किया || सी एम सिटी के भीतर घणा घटिया काम किया || शराफत का लबादा ओढ़ कै कितना ग़दर मचाया बच्चों की मजबूरी का फायदा अपना घर नै उठाया शर्म मैं नाड़ तले नै होगी कई का जीणा हराम किया || बड़े बड़े अफसरों तक मैडम का आना जाना बताया कुछ शामिल किये खेल मैं कुच्छ को हमराज बनाया परत उघडती जावैं सें रिकार्ड तलब तमाम किया || सफ़ेद पोश बण कै काला धंधा कई करते बताये ये ले दे कै रफा दफा करावें जमा नहीं काबू मैं आये ये मूल भूत बदल चाहिए अदल बदल देख तमाम लिया|| हरेक नागरिक आगे आवै बिना इसके ना बात बनै गुण दोष पै तोल करकै छाज महँ कै सबका नाज छनै साहमी ल्याना होगा सारा जो भी आज गुमनाम किया || दोषी जितने सब नै मिलै सजा रखना होगा ध्यान दखे भ्रष्ट अफसर पुलिस अर नेता साथ देवे भगवान दखे रणबीर नै छंद बनाया सबको आज यो पैगाम दिया || ******** 118 आग सीने की तुम कब तक दबाये रखोगे सीने में दर्द लब पे मुस्कान सजाये रखोगे कराहें उठ रही हर घर में आज देखो यारो जात गोत मजहब की बेड़ियां लगाये रखोगे आसान नहीं मानवता तक यूं पहुंच पाना हैवानियत को कब तक तुम उठाये रखोगे जाग जायेगा इंसान तो हक तो मांगेगा ही शातिर हो तुम सोये हुए को सुलाये रखोगे जुल्म की रात भी कट जायेगी एक दिन जो ए कामगारों आस अपनी जगाये रखोगे ******* 117 तर्ज --- सौ साल पहले मुझे तुमसे प्यार था टेक ---ठहर जाओ भय्या भागना बेकार है || देता दिखाई ये अँधेरा बेसुम्मार है || हम भागे जाते हैं पर रास्ता तो नहीं पाता है जिधर भी देखते हैं अँधेरा नजर आता है खाता है भय अपनों की मार है || यहाँ धोखेबाजी है हमें आज बहला करके हमारी कमाई बैठे हैं अपने घर में भरके डरके नहीं रहना करना पलटवार है || अँधेरी गली है रौशनी नहीं आती है लालच और पैसे की भूख नहीं मिट पाती है खाती है धोखा जिन्दगी कई बार है || रणबीर रोशनी की चाह दिल में बस्ती है अँधेरे में भी भी कहीं किरण हंसती है बसती नई दुनिया परले पार है || ******** 116 जब नयी सुबह के सूरज को सदा दी जायेगी ।। सफ़ेद पोश हैवानों को फिर सजा दी जायेगी ।। आज के दौर में प्रेमियों की ऑंनर किलिंग होती नयी सुबह में इन्हें शहीदों की जगा दी जायेगी।। हमारी मेहनत लूटते हैं दगा देकर हमको यारो वो सुबह आएगी जब न कोई दगा दी जायेगी।। हमारे बच्चे मजदूरी करते रहते क्यों बिन पढ़ाई यकीं मानों ये सारी बातअब समझा दी जायेगी।। जात पात धर्म की लक्ष्मण रेखाएं सब टूटेंगी मानवता को सब जगह पर पन्हा दी जायेगी ।। ******* 115 दस जमा एक लाइनी बात आप लेफ्ट का फर्क समझ आवै इतनै घनी वार होज्यागी ओहले कहे तैं नहीं काम चलै इतनै घनी मार होज्यागी ईमानदारी के लबादे मैं लूट की या गाड्डी सवार होज्यागी सिस्टम बदले बिना क्यूकर भ्रष्टाचार की हार होज्यागी लेफ्ट बिना मजदूर किसान की कैसे नैय्या पार होज्यागी दस कै खिलाफ जिस दिन नब्बै की सेना तयार होज्यागी उस दिन पूरी दुनिया मैं भारत की हटकै पुकार होज्यागी नहीं तो लूट कार्पोरेट की इस ढालाँ या स्वीकार होज्यागी अम्बानी की जागां दूजे लुटेरयाँ की खड़ी या लार होज्यागी ईमानदार उदारवाद की फेर तेज घनी रफ़्तार होज्यागी जनता नहीं जागी तो लोगो मानवता शर्मशार होज्यागी ******* 114 आज पी जी आइ ऍम एस में सद्भावना दिवस मनाया गया हाजरी काबिले गौर थी | सद्भावना दिवस आज कालेज में गया मनाया थी सद्भावना या विद्वेष भावना समझ ना पाया एक तरफ हम सा धर्मों का गुणगान करते हैं दूजी तरफ पाकिस्तान काफ़िर उनको बताया सद्भावना का मतलब दुनिया में हो शांति देखो देशों के बार्डरों को ना जाये कताल्गाह बनाया कोई सैनिक जब मरता है इस पार या उस पार कोख खाली एक माँ की होती समझ में आया पाकिस्तान को सबक सिखाने को सब तैयार अपने ही दलित भाईयों को नहीं गले लगाया मंदिर मैं आज तक दलित बहन भाईयों को वही देश भगत क्यों आज तलक जगह नहीं दे पाया अंध राष्ट्रवाद झलका कई कविताओं में वहां पर तालियों की गडगडाहट ने मुझे पूरा ही दहलाया सोच रहा ठा वहीँ उठ कर कोसूं अंध देश भक्ति मग़र कमजोरी मेरी वहां उठके ना विरोध जताया ये कैसी देश भक्ति है जो सरहद पर मर कटती है यहाँ अनाज गोदामों में सडा ना गरीब को दिलवाया इंसान की परिभाषा जिस दिन समझ जायेंगे हम फिर ये अंधराष्ट्रवाद अंतर राष्ट्र वाद में बदले जताया सारी दुनिया का आदमी इंसान जब हो जायेगा तो बार्डरों का सिलसिला ढह जायेगा मुझे यही सुझाया ******* 113 इस पार या उस पार मां की कोख खाली होती है जब भी कोेई जंग इस जहां में होती है । ********** 112 परिवार में मुझको जितने भी पाठ पढ़ाये सारे ही उनके मुझको लूटने के काम आये कर्म कर फल की चिंता मत कर गीता सार मेरी लूट के गए हैं सही औजार बनाये ********** 111 इस नदी की धार में ठंडी हवा आती तो हैं, नाव जर्जर ही सही, लहरों से टकराती तो हैं. ********* 110 मेरे घर आकर तो देखो एक बार एक दूजे के पता लगे क्या परिवार ना आप हमें जाने ना हम आपको किया हम सब के बारे गलत प्रचार अफवाहें बे सिर पैर की बातें उनकी हमें लड़वा देती हैं देखो भाई हरबार सभी कौम सुख से रहती आई यहाँ मगर उनको पसंद नहीं ऐसा घरबार हिन्दू मुस्लिम सिख और ईसाई यहां सभी भाई भाई का करते है व्यवहार दुख सुख सभी मिलके झेलते खेलते किया संघर्ष सबने मिल कर बारंबार

120 से 129

129 रसातल बस कुछ मत पूछो रसातल में जा रहा है समाज पहले वाली कोई बात ही नहीं लड़के तो बिगड़ैल पहले से ही थे अब इन लड़कियां को आज डराया धमकाया बहकाया जा रहा है नकल करने को मजबूर आजकल एकल परिवार और एकल हो गया मां कहीं बाप कहीं खुद कहीं तो पत्नी कहीं इसे क्या कहें घर परिवार या महज एक व्यक्ति खाने में मिलावट, पानी साफ नहीं , हवा का प्रदूषण कोई भी माफ नहीं ग्लोबल फूड क्राइसिस वाटर क्राइसिस ग्लोबल वार्मिंग का बढ़ता यह खटका सिस्टम लगता है पूरा का पूरा भटका भर गया भर गया पाप का मटका यह तो सभी चाहते हैं कि समाज में सुधार की बहुत जरूरत है आज कई भगत सिंह पैदा हों फिर से मगर हों पड़ोसियों के यहां हमारे बच्चों को तो ट्यूशन से फुर्सत ही कहां है? 2/5/08 ********* 128 गुर्दे का गुर्दा किडनी लगवाने वाले विदेशी मूल के किडनी देने वाले सभी देसी फूल थे बीच में एजेंट हैं साथ में डॉक्टर उसूल के जिसके गुर्दे फेल हो गए मरने को है दूसरा जीवन देना हम सबका फर्ज है गरीबी के चलते किडनियां फेल न हों उनको भी बचाना मानवता के खाते दर्ज है जिसे गुर्दा चाहिए था उसे गुर्दा दिलवाया भूख के कारण दोनों गुर्दे मरने को थे उनमें से एक गुर्दा तो बचा ही दिया दानी गुर्दे से एक और मानव बच पाया काफी लोगों को रोजगार मुहैया करवाया एजेंटों का जाल बिछा कर चुपचाप पुण्य किया गुर्दा लेने और देने का कानून सख्त इतना इससे बचने का प्रयास करना पड़ता कितना जरा सोचो तो सही दिमाग पर जोर देकर विदेशी को अपने ही देश में अपने लिए महज एक गुर्दा भी क्यों नहीं मिला भारत देश महान का गुर्दा उसे क्यों भाया पैसे का खेल है यहां पर मेरे यारों इसी कारण बदेशी देशी गुर्दा खरीद पाया इसके लिए नेता अफसर पुलिस के बिक गए बस कीमत की बात थी यारो। ******* 127 क्या है यह विकास या विनाश फिर भी हमें तो यही है आस जिनका सम्मान छीन लिया गया जिनकी अस्मिता तार तार कर दी गई वह एक दिन इकट्ठे होकर पूरा हिसाब मांगेंगे और हिसाब करके हिसाब सरएक नई दुनिया बनाएंगे ******* 126 कीमत बढ़ेगी महिलाओं की संख्या कम होगी तो महिलाओं की कीमत बढ़ जाएगी यही मानते और सुनते आए थे मगर यह क्या है? मुर्रा भैंस की कीमत एक लाख बिहारी बहु मिले पांच हजार में हर रोज भारत में क्या होता है मालूम है आपको ? रोजाना चौबीस की चढ़ती है बलि दहेज की छियासी की लुटे है हर रोज आबरु चार सौ अस्सी से हो छेड़छाड़ पैंतालीस फीसद के पति करें पिटाई पचास प्रतिशत गर्भवती महिलाएं जिनपर हिंसा करके मर्द बनते हम हिंसा की शिकार सत्तर प्रतिशत आत्महत्या का प्रयास करती हैं मेरा देश महान है विश्व गुरु बनाने का आह्वान है। ******** 125 विश्व बैंक विश्व बैंक हितैसी बनकर आया रक्षक भक्षक कैसे बन जाता है इसने हमें समझाया गरीबी और बेकारी खत्म होने की आस बंधी 15 साल के भीतर जवान बेटे की लाश उठी बदेशी कंपनी आ गई हमने पूरे दरवाजे खोल दिए विदेशियों के साथ मिल गए देसी भी घी के दीए जल रहे उनके हमारे घर घुप अंधेरा है गुरबत की जंजीर जकड़ रही है हमें वहां सब कुछ शाइनिंग है ******** 124 ब्रह्मांड बेअंत ब्रह्मांड ऊपर कब धरती और ग्रह आए इसके बारे में दो विचार कदे कदीमी चलते आए एक विचार यों कहता पदार्थ से बनी जगत हमारी ज्ञान विज्ञान ने खोज की कैसे उपजी धरती प्यारी डार्विन की खोज भारी विकास सिद्धांत समझाए कैसे हुआ विकास हमारा मानव संसार जान रहा तर्क और विवेक के साथ कुदरत को पहचान रहा सच्चाई खोज विज्ञान रहा एक सैल के जीव बताए इस धरती पे संतुलन ये कहते कुदरती बैठता आया जीवन निर्जीव कैसे पनपे गया पूरा हिसाब लगाया हर बात पे सवाल उठाया सबके जवाब ढूंढना चाहे अपने पर विज्ञान आज सवाल दर सवाल उठाए समाज में क्या और क्यों हुआ जवाब ढूंढना चाहे रणबीर साथ कलम चलाए सोच करछंद बनाये ******** 123 पृथ्वी अपना संकट ये आज सबको सुनाती है चारों तरफ से हमला अस्तित्व बचाना चाहती है हरियाणा की धरती से गिद्ध खत्म हुए जा रहे मोर भी जगह-जगह पर आज मरे हुए हैं पा रहे कैंसर बढ़ते जा रहे आज हमें समझ ना आती है । जमीन हमारे खेतों की बांज होती जा रही आज फसल सब कुछ करके भी नहीं बढ़ पा रही आज बीमारी क्यों छा रही आज जमीन भी बिक जाती है। बाजारू विकास के तले टिकाऊ विकास खो गया कैसा दोहन कुदरत का देखो चारों तरफ हो गया बीज बिघन के बो गया धरती की हद छाती है। सामाजिक सूचक हमारे बहुत हो गए खराब आर्थिक सूचक से काम नहीं चलेगा जनाब लिख रहे हैं ऐसी किताब जो सब भेद बताती है ******* 122 विश्व बैंक विश्व बैंक हमारा रक्षक हमने रक्षक माना इसको। निकला यह पूरा ही भक्षक अनुभव से जाना इसको। गरीबी और बेकारी सबके खत्म होने की आस उठी मगर पन्दरा साल के भीतर जवान बेटे की लाश उठी विश्वबैंक के कान हों तो गरीब की व्यथा सुनाना इसको। शिक्षा जगत में गुणवत्ता का इसने ही प्रचार किया जैसी शिक्षा थी अपनी उस पर जमकर प्रहार किया महंगी शिक्षा गुणवत्ता नहीं इतना तो बताना इसको। स्वस्थ जगत का रंग बदला बड़े अस्पताल ले आए मेरे जैसे गरीब गुरबा तो इनके अंदर नहीं घुस पाए अपोलो फोर्टिस की कल्चर ये जरा समझाना इसको। बहुराष्ट्रीय कंपनियों का यह रक्षक असल में पाया मुखौटा हमारी मदद का रंग रंगीला इसने लगाया रणबीर का पैन खोसने का ना मिला बहाना इसको। ******* 121 दोहरापन दोहरापन जीवन का हमको अंदर से खा रहा । एक दिखे दयालू दूसरा राक्षस बनता जा रहा । चेहरों का खेल चारों तरफ दुनिया में फैल रहा , मुखोटे हैं कई तरह के कोई पहचान नहीं पा रहा। सफेद मुखौटा काला चेहरा काम इनके काले हैं बिना मुखोटे का तेरा चेहरा न किसी को भा रहा। कौन सा मुखौटा गुजरात में करतब दिखा रहा ये जनता को बहला धर्म पर कुर्सी को हथिया रहा । धार्मिक कट्टरता का चेहरा प्यारा लगता क्यों है मानव से मानव की हत्या रोजाना ही करवा रहा। कौन धर्म कहता हमको घृणा का मुखौटा पहनो खुद किस झोपड़ी में आग खुदा जाकर लगा रहा। राम भी कहता प्यार करो दोहरेपन को छोड़ दो अब रणबीर भी बात वही दूजे ढंग से है समझा रहा।।। ******* 120 दोस्त पास रहकर भी दूर रहना कोई सीखे तुमसे बिना कहे बहुत कुछ कहना कोई सीखे तुमसे लालच व भोग का बाजार जकड़े हुए हैं हमें बाजारी दुनिया से कहना कोई सीखे तुमसे हर ईंट के नीचे आज बैठा बिच्छु दिखाई देता है बिच्छूओं के दंश न सहना कोई सीखे तुमसे माया जाल फैला है यहां झूठ और मक्कारी का इस जाल की आग में न दहना कोई सीखे तुमसे सोने पर यह रांग का पानी चढ़ा कर बेचते देखो कैसे पहचाने असली गहना कोई सीखे तुमसे वैश्वीकरण के तूफान में सब कुछ वह चला है इस तेज तूफान में न बहना कोई सीखे तुमसे

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139 आसान है बहुत आसान है हमारी जिंदगी की सटीक समीक्षा करना बहुत आसान है हमारी जिंदगी की सुंदर सी तस्वीर बनाना बहुत आसान है हमारी जिंदगी की तरफदारी करते रहना बहुत आसान है हमारी जिंदगी की नुमाइश दिखाते रहना मगर बहुत मुश्किल है इस जिंदगी को हकीकत में जी सकना ******** 138 नैना देवी नैना देवी में हादसा हुआ डेढ़ सौ लोगों की मौत हो गई तीन सौ घायल हो गए कहते हैं पुलिस ने भांजी लाठियां मची भगदड़ तो फिर कोहराम मचा हर तरफ चीख पुकार थी मंदिर में खौफ पसर आया रास्ता बहुत ही संकरा सा था लोग भाग भी नहीं पाए और कुचले गए आठ दस करोड़ का चढ़ावा आता है सवाल उठ रहे हैं वह कहां जाता है सुविधाएं तो चाहिएं भक्तों को मगर कौन मांग करे और किससे? ******** 137 किसान ने अपनी मेहनत से जो गेहूं अपने खेत में उगाया उसका भाव भी उसे उसकी मेहनत के मुताबिक ना मिल पाया मंडी में आढती ने भी अपना पूरा करतब दिखलाया मंडी में जब वही गिहूं खुले में रखा गया और बरसात में भीग गया यह देख किसान का जी बहुत दुख पाया पूरे 6 महीने की मेहनत जब यूं खुले में बर्बाद हो तो गम तो होगा ही यह बात अलग है कि हम उस मेहनत की कीमत से वाकिफ ही नहीं हैं? ******* 136 क्वालिटी क्वालिटी का जमाना है कीमत का क्या मायना है फल विक्रेता की भी खूब चांदी हो रही है ग्राहक ज्यादा मूल भाव भी नहीं करते मगर देसी आम और तरबूज साथ में है खरबूजा इनका संगी ना बदेशी दूजा लीची भी है देसी अपनी सबसे बढ़िया देसी फलों का अपने ही बाजार में यूं पिटना सोचो तो सही क्या यह सही बात है? ******* 135 पता नहीं पता नहीं आज का जमाना किधर को जा रहा है सुबह कहीं शाम कहीं अगली सुबह कहीं पा रहा है नई तकनीक ने कब्जा जमाया पूरे इस इंसान पर आदमी आदमी को दिन दिहाड़े नोच नोच खा रहा है दूसरों के कंधों पर पैर रखकर आसमान छू रहे हैं गंदी फिल्मों का फैशन आज नई पीढ़ी पर छा रहा है दारू समाज के हर हिस्से में सत्यानाशी बनती जा रही अच्छा खासा हिस्सा आज दारु पी गाने गा रहा है लालच फरेब धोखाधड़ी का दौर चारों तरफ छाया नकली दो नम्बर का इंसान हम सबको भा रहा है बाजार व्यवस्था का मौसम है मुट्ठी भर हैं मस्त इसमें बड़ा हिस्सा दुनिया का आज नीचे को ही आ रहा है भाई भाई के सिर का बैरी कत्लोगारत बढ़ रही है पुलिस अफसर कोई बाएं दाएं से खूब पैसे बना रहा है पूरे के पूरे सिस्टम को दीमक खाती जा रही देखो आज भ्रष्टाचार चारों तरफ डंक अपना फैला रहा है एक तरफ मॉल खड़े हुए दूजी तरफ टूटी हुई सड़कें देती दिखाई तरक्की का यह मॉडल देखो दूरियां बहुत बढ़ा रहा है अपने बोझ तले एक दिन मुश्किल होगा सांस लेना तलछट की जनता जागेगी रणबीर उसे जगा रहा है ******** 134 विदेशी फल विदेशी फलों का स्वाद चखें अपने देसी शहर में ही दिल्ली मुंबई और कलकत्ता भागकर जाने की जरूरत नहीं हमारे शहर का बाजार भी विदेशी फलों से सजा हुआ है शहर की रेहड़ियों पर तरतीब से टिके हुए हैं विदेशी फल चाहे देसी से विदेशी की कीमत ज्यादा क्यों न हो कीमत की किसे चिंता है फल विदेशी हमारे घर में है यह बात दीगर है कि हमारे पिताजी देसी की लड़ाई लड़ते-लड़ते दम तोड़ गए थाईलैंड का अमरूद मिलता है ₹200 किलो कैलिफोर्निया का हरा सेब क्या कहने हैं सब के चाइनीज सेब भी आ टपक थोड़ा सस्ता है कैलिफोर्निया से ऑस्ट्रेलिया का बब्बू गोसा अमीर को क्या परवाह महंगे की मध्यम वर्ग भी देखा देखी भरने लगा अपने फ्रिजों को विदेशी फलों से स्वाद तो बेहतर है देसी में वह स्वाद कहां जो विदेशी में है। ********* 133 सुरक्षित कौन रोहतक में करोड़ों रुपए का व्यापार रोजाना होता 5 महीने में शहर में व्यापारियों की दो हत्याएं हो चुकी है चार व्यापारियों को लूटा जा चुका है एक पर जान लेवा हमला किया गया दिन दहाड़े यदि व्यापारी ही है सुरक्षित हैं तो सीएम सिटी में फिर कौन सुरक्षित है ? कई साल पहले की रचना ********** 132 दोगलापन दुनिया का बेजुबान पत्थर पर लदे हैं करोड़ों के गहने मन्दिरों में उसी दहलीज पे एक रूपये को नन्हें हाथों को तरसते देखा है सजे थे छप्पन भोग और साथ में मेवे मूरत के सामने यारो बाहर एक फकीर को भूख से तड़प कर मरते देखा है यारो ******* 131 साइनिंग इंडिया सफरिंग इंडिया ये महज शब्दों का खेल नहीं है ये हैं दो दुनिया इसी जमीन पर एक तरफ एयर कंडीशन्ड कोठी उधर बरसात में टपकती झोंपड़ी करोड़ों के को वह भी नहीं नसीब एक तरफ एयर कंडीशन्ड कारें हैं उधर कई कोश नँगे पांव चलना है एयर कंडीशन्ड पांच सितारा होटल उधर दो रुपये की चाय का ढाबा है एयर कंडीशन्ड अपोलो फोर्टिस हैं उधर बिना दवाई के सीएचसी हैं एयर कंडीशन्ड मॉल सब मिलता उधर खुदरा छोटी छोटी दुकानें हैं एयर कंडीशन्ड स्कूल आलिसान उधर बिना पंखे के कमरे के स्कूल एक तरफ ऐयासी की दुनिया छाई दूसरी तरफ मेहनत से फुरसत नहीं दोरंगी दुनिया नजर नहीं आती हमें इस अंधेपन को क्या कहूँ?शब्द नहीं आपके पास हैं तो इंतजार इनबॉक्स में रणबीर 15.03.08 ******* 130 पृथ्वी अपना संकट ये आज सबको सुनाती है चारों तरफ से हमला अस्तित्व बचाना चाहती है हरियाणा की धरती से गिद्ध खत्म हुए जा रहे मोर भी जगह-जगह पर आज मरे हुए हैं पा रहे कैंसर बढ़ते जा रहे आज हमें समझ ना आती है । जमीन हमारे खेतों की बांज होती जा रही आज फसल सब कुछ करके भी नहीं बढ़ पा रही आज बीमारी क्यों छा रही आज जमीन भी बिक जाती है। बाजारू विकास के तले टिकाऊ विकास खो गया कैसा दोहन कुदरत का देखो चारों तरफ हो गया बीज बिघन के बो गया धरती की हद छाती है। सामाजिक सूचक हमारे बहुत हो गए खराब आर्थिक सूचक से काम नहीं चलेगा जनाब लिख रहे हैं ऐसी किताब जो सब भेद बताती है

140 से 149

149 बैंकों पर पैसा लाक निजी चिकित्सक हड़ताल पर जन साधारण एक्सप्रेस में लूट छह को फांसी दो को उम्र कैद मुंबई दहलाने की साजिश नाकाम पांच आतंकी गिरफ्तार निजी डायनिंग रूम में मोहन को भोज देंगे बुश पानीपत में कांग्रेस की जवाब रैली कचरी की चटनी खाएंगे हमारे मेहमान ********* 148 आपात स्थिति से भी बदतर हालत बने फासीवाद से हर रोज मुलाकात बने और कोई चारा बचा नहीं लगता यारो संभलो इससे पहले कि दिन रात बने देखो फासीवाद से लड़ना आसान कहां पहले समझो इसको फिर कोई बात बने बोले विरोध में तो ई डी तत्काल ही आए घर पर फिर से संकट के ये हालत बने ******* 147 गधे की तरह काम करवाया हाथ में चालीस रूपया थमाया पूरा दिन और इतने कम पैसे मजदूर ने मालिक से फरमाया ठीक किया तुमने न्याय मांगा है मैनेजर ने तुरत मैनेजर बुलवाया पैसे वापिस लो इसी वक्त और ' इसे घास डालो' का फरमान सुनाया ******* 146 किसी के कान में कही गई बात हजारों मील दूर तक सुनाई पड़ती है धीरे धीरे बोल कोई सुन न ले गलत मत बोल कोई सुन न ले लेकिन फिर भी हर कोई सुन लेता है और वही राज की बात घूमती घूमती फिर आपके कानों में आ पड़ती है आप हैरान होते हैं कि यह कैसे हुआ इसे कहते हैं गपशप या चुगली जो आपसे गॉशिप करता है,वह आपके बारे में भी गॉशिप करेगा। ******* 145 जनून क्या कहूं तुम से कि ये क्या है जनून जान का रोग है यह बड़ी बला है जनून जनून ही जनून है दिलो दिमाग में सारे आलम में ही भर रहा है जनून जनून मेरा प्यार मेरा इश्क है यारो यानि अपना ही मुबतला है जनून गरीब की मेहनत मशकत में यारो लगता खुद से भी ज्यादा है जनून कौन मकसद को जनून बिन पहुंचा आरजू है जनून और मुद्दा है जनून तुमने आज तक नहीं समझा मतलब मगर एक तरह से जिया है जनून ******** 144 रात ग्यारा बजे चालकै दिल्ली एयरपोर्ट आये ।। दिल्ली तैं कुवैत के जहाज के टिकट कटाये ।। हवाई जहाज का सफर कई घण्टे का होग्या भाई ब्रेकफास्ट किया फेर लंच फेर फ़िल्म एक चलाई कुवैत पहोंच लंदन की मिलगी या जहाज हवाई लंदन की हवाई यात्रा घर आली नै खूब सराही लंदन पहोंचे सांझ ताहिं फेर सांस थोड़े ले पाये ।। दिल्ली तैं कुवैत के जहाज के टिकट कटाये ।। 2 विवेक भाई एयरपोर्ट पै देखै था वो बाट म्हारी सारा सामान लाद लिया फेर चली म्हारी सवारी सत्तर मील की दूरी साउथ एन्ड रहवै बेटी प्यारी दोहती अनन्या दोहता आदि सबकै खुशी छारी कुलदीप शीतल नै आंख्यां पै सारे बिठाये ।। दिल्ली तैं कुवैत के जहाज के टिकट कटाये ।। 3 रात का खाना खाकै या नींद गजब की आई सपने मैं घूमै रोहतक दे इंद्रप्रस्थ का पार्क दिखाई सबतें सम्पर्क टूट गया सिम कार्ड ना मिल पाई जी मैं जी आग्या मेरै जिब चलगी वाई फाई नमस्ते लंदन से के फूल सब धोरै पहोंचाये ।। दिल्ली तैं कुवैत के जहाज के टिकट कटाये ।। 4 स्वीमिंग पूल अर पार्क अगले दिन घूम कै आये लंदन आई जाकै दूजे दिन पूरा लंदन देख पाये विंडसर कैस्टल तीजे दिन उड़ै मजे खूब उड़ाए चौथे दिन बीच पै घूमे बालक झूले खूब झुलाये रणबीर दस तारीख नैं बेल्जियम के प्लान बनाये ।। दिल्ली तैं कुवैत के जहाज के टिकट कटाये ।। ****** 143 यादें बचपन में मोहल्ले के मैदानों में दोस्तों के साथ पम्परागत खेल, गिल्ली-डंडा, छुपा-छिपी, खो-खो, कबड्डी, कंचे जैसे खेल खेले हैं। कम या बल्ब की पीली रोशनी में होम वर्क किया है और नावेल पढ़े हैं। ******** 142 मैंने देखा है अपने माँ बाप को लड़ते हुए रोजाना इस या उस बात पर झगड़ते हुए माँ कहती पापा को क्यों पड़ौसिन को तकते माँ को पीटते हाथ कभी नहीं उनके थकते बच्चे बड़े हो रहे इसका उनको ख्याल नहीं क्या असर पड़ रहा इसका उनको मलाल नहीं बचपन था हमें ज्यादा चीजों का पता न था तरुनाई की उमर आई बच्चों का खाता न था पिता पड़ौसिन का छुप कर मिलना समझा अवैध संम्बंधों पर माँ का हिलना समझा सुरता कईबार मुझे बुलाकर प्यार में सहलाता बहुत खुश होती मैं दानवी रूप समझ न आता एक दिन वह रूप उसका सामने आ ही गया देख के उसकी हरकतें सिर चकरा ही गया ये आँखें बीस चालीस साठ साल की बताऊँ उमर कोई सीमा नहीं बीती उसका हाल सुनाऊँ आदर्श संस्कारों की उम्मीद कैसे विद्वान् करते हैं देखो कैसे बच्चियों के शराब पीके पर कतरते हैं ******* 141 नई दुनिया - प्यार की दुनिया नई दुनिया का सपना हम दोनों ही देख रहे हैं सोचा अपने अपने ढंग से कहते हुए झेंप रहे हैं झेंप मिटी साथ चले सोचा जीवन सफल हो गया अलग अलग जातें हमारी जिनका मतलब खो गया ब्यां नहीं कर सकते सब हम पर उंगली टेक रहे हैं।। प्रेम विवाह को समाज में देखा क्या दर्जा मिलता खूंखार हो जाता है समाज देख कर ही दिल हिलता बिना बात की बात में निकाल मीन मेख रहे हैं।। तुम्हारी जिद प्यार का विरोध तो जिद हमारी भी है प्यार को परवान चढ़ायेंगे इसमें इज्जत तुम्हारी भी है जात के तवे पर देखो ठेकेदार रोटी सेंक रहे हैं।। जातें अलग अलग हमारी मगर मानवता है भरपूर जाति की सीमा मालूम है इसके बन्धन नहीं मंजूर एक अपना सा घर बनाएं यही इरादे नेक रहे हैं।। ******** 140 कोई गाता बंगाली में देखो कोई गा रहा गीत तमिल में कोई पंजाबी में गिद्दा पा रहा कोई राजस्थानी में बतियाए देखो अपने अनुभव हर कोई सुना रहा नाटक रेलगाड़ी और सद्गति ये ना समझे उसे भी बहुत भा रहा रोक नहीं पाया यह देख नजारा मेरी आंखों में आंसू आ रहा कैसे बयां करूं दास्तान इनकी शब्दों में बयां नहीं कर पा रहा सुना झारखंड का हाल जब से क्यों है आदिवासी इस हालत में ख्याल तब से मुझे यही खा रहा दलित महिला बच्चे भोजन संकट पानी सवातावरण संकट भी बातचीत में चारों तरफ छा रहा एक नई दुनिया का सपना हमें आईपीएसएन दिखला रहा नई दुनिया का नक्शा कहीं और नहीं यहीं है वह नई दुनिया जो अंगड़ाई ले रही है और जरूर जवां होगी शायद हमको यकीन नहीं आ रहा नई दुनिया संभव है यहीं नारा इस बात का बस यकीं दिला रहा।। 2008

150 से 159

159 आंसूओं को पालकों पर लाया ना किजिए अपनी लूट की तहरीर सुनाया ना किजिए लोग मुट्ठी में नमक लिए फिरते हैं आज अपने जख्म लुटेरों को दिखाया ना किजिए ******** 
158 मजदूर और बारिश ए बारिश अभी जरा थम के बरस मेरा पेट भर जाए तो जम के बरस न बरसी तो भी बरसी तो भी मेरा निवाला तो खतरे में कैसे भी बरस फिर भी तमन्ना है कि बरस तो सही खेत खलिहान के लिए कैसे भी बरस *********** 
157 संकट था खूब घर लेकिन हम खोए नहीं दर्द बहुत था दिल में लेकिन हम रोए नहीं साहब को क्यों फिक्र हो हमारी भूख का उनको क्या पता तीन दिन से सोए नहीं ******* 
156 गरीबी का लंबा सफर कटता ही नहीं भूखे पेट कुछ भी अच्छा लगता ही नहीं कोई नहीं जो पूछे इस दर्दे दिल का हाल महज वादों से यह दिन चलता ही नहीं ********
 155 आज अपने हकों की खातिर लड़ती देखी जा सकती है औरत ।। घर से बाहर निकल कर बढ़ती देखी जा सकती है औरत ।। दबती पिसती रहती है फिर भी मासूमियत है बाक़ी उसकी अपने अपने घरों में आज पढ़ती देखी जा सकती है औरत।। नई जंजीरें और बेड़ियां आज क्यों उसको डाली जा रही हैं फिर से अंगड़ाई लेकर के उठती देखी जा सकती है औरत।। शैतान सभी चौकन्ने हो गए औरत की जरा सी हरकत पर उनकी छाती पर दिनों दिन चढ़ती देखी जा सकती है औरत।। औरत को खिलौना मत समझो वह भी आखिर एक इंसान है डुबो कलम खूने जिगर में लिखती देखी जा सकती है औरत ।। कितने रूप दिए औरत को असली इंसान का रूप छीनकर इंसानियत की खातिर अब लड़ती देखी जा सकती है औरत।। ******* 
154 प्रदूषण और हम उम्र कम दिल्ली 6 साल देश का दम तीन साल कम बिहार 5 साल कम प्रदूषण फल फूल रहा मौत का झूला झूम रहा ******* 
153 तरक्की हमने तरक्की की है किस कीमत हमारी बला से ऊंची ऊंची इमारतें फिर चाहे गरीबी बढे या पाश इलाकों में जहाँ 90 करोड़ के मकान 5 या 10 बरसात में टपकते रहें करोड़ लोग रहते हैं ******* 
152 वे बचपन के दिन जब कंचों का और खत्ता खुलिया का खेल ही जिंदगी थी। लाभ हानि के सवाल दूध में पानी का मिलाना फिर लाभ प्रतिशत बताना फ्रांस की क्रांति का तराना औरंगजेब के पतन का फसाना तोते की तरह रट लेना ही जिंदगी थी। रटने की प्रक्रिया ने सोचने की प्रक्रिया पर जादू किया सोचना शुरू ही नहीं हो पाया मैं खुश था मगर मेरे से ज्यादा वो खुश थे। स्कूल के बाद कॉलेज में पहुंच जाना मेरे सनम फिल्म की ट्रेचडी पर रोना रुलाना इसको हकीकत मानकर मातम मनाना और फिर इस बात का गिला उठाना इतना भी नहीं मालूम था धत तेरे की। और इस प्रकार अंधेरी में भटकता रहा भगवान पर भरोसा किया मैंने इस उम्मीद को जिया मैने कि कभी तो असली पड़ाव पर पहुंच जाऊंगा एक दिन। इसी बीच मैंने देखा कि हीर और रांझे के बीचों-बीच लीलो-चमन के दरमियान शशि पन्नू के आमने-सामने नफरत और दहशत की इतनी ऊंची दीवार खड़ी कर दी गई कि वे एक दूसरे को देखने भर को तरस गए वो सर सरसों के पीले खेत उनमें उमड़ता वह अनोखा प्यार आज दूर कहीं हैवानियत के खूनी पंजों में जकड़ा बार बार चीख रहा है है कोई माई का लाल जो फिर से काले पड़े खेतों में सरसों के पीले पीले फूल उगादे? लगता है आज उन खेतों में पीले फूल उगाना चमन का लीलो को बुलाना इतना आसान नहीं रह गया है क्योंकि आज इस सब की कीमत उन्माद से लबोलब बंदूक की गोली है मैं आसमान की ओर देखकर पुकार उठता हूं हे भगवान तू कहां है? 1993 ******** 
151 नई दुनिया - प्यार की दुनिया नई दुनिया का सपना हम दोनों ही देख रहे हैं।। सोचा अपने अपने ढंग से कहते हुए झेंप रहे हैं।। 1 झेंप मिटी साथ चले सोचा जीवन सफल हो गया अलग अलग जातें हमारी जिनका मतलब खो गया ब्यां नहीं कर सकते सब हम पर उंगली टेक रहे हैं।। 2 प्रेम विवाह को समाज में देखा क्या दर्जा मिलता खूंखार हो जाता है समाज देख कर ही दिल हिलता बिना बात की बात में निकाल मीन मेख रहे हैं।। 3 तुम्हारी जिद प्यार का विरोध तो जिद हमारी भी है प्यार को परवान चढ़ायेंगे इसमें इज्जत तुम्हारी भी है जात के तवे पर देखो ठेकेदार रोटी सेंक रहे हैं।। 4 जातें अलग अलग हमारी मगर मानवता है भरपूर जाति की सीमा मालूम है इसके बन्धन नहीं मंजूर एक अपना सा घर बनाएं यही इरादे नेक रहे हैं।। ******** 150 2008 स्कूल से आगे बढ़कर फिर कॉलेज में जाना होगा इसके सपने बहुत बार देखे थे मैंने कौन से कॉलेज में दाखिला हो कई बार सोचा था मैंने यह भी 1 साल पहले सोचना शुरू किया पहले दिन का पहनावा क्या होगा ?हेयर स्टाइल पर भी नजर डाली थी क्या साइकिल पर ही मुझे कॉलेज जाना होगा हर रोज ? या फिर स्कूटर का जुगाड़ करेंगे घर की हालत जुगाड़ की भी कहां इसी उधेड़बुन में गुजर जाता है पूरा का पूरा दिन मेरा जुगाड़ पर आखिर एक दिन पांच सात लोग आए आव भगत हुई मेरे से भी पूछा कौन सी क्लास पास की है बेटी दूसरा सवाल था कितने नंबर आए नंबर बताएं मैंने धीमे से ही सही नजरें मुझे घूरती सी महसूस हुई जैसे बकरे को घूरती हैं मारने से पहले हर कसाई की नजरें और फिर हलाल कर दिया जाता है बकरा मुझे क्या पता था कि मेरा भी हलाल होने का वक्त आ गया है और एक महीने बाद ही मेरी शादी कर दी गई एक और बेरोजगार के साथ 2 बेरोजगारों की दुनिया के सपने मैं नहीं देख पाई क्योंकि अंधेरे के सिवाय कुछ दिखाई नहीं दे रहा था भूखे घर की आ गई हम क्या करें ? यह दिन देखने के लिए क्या छोरे को जन्म दिया था? प्यार मोहब्बत बेहतर जिंदगी यह सब अतीत की बातें थी घर भी तंग सा दो ही कमरे साथ में भैंस व बछिया का भी सहवास रहता था 24 घंटे समझ सकता है कोई भी कि दो कमरों में 6 सदस्यों के परिवार का कैसे गुजारा होता है?फुर्सत ही नहीं है एक दूसरे के लिए ! चोरों की तरह मुलाकातें होती हैं अपने ही घर में बस जीवन के घिसट रहा है हमारा एक दिन सोचा इस नरक से कैसे छुटकारा मिले ? मगर उसे ताश खेलने से फुर्सत कहां ? घर खेत हाड़ तोड़ मेहनत और ताने! यही तो है जिंदगी हमारी हमारे जैसे करोड़ों युवक और युवतियां है भारत में कभी-कभी जीवन लीला को खत्म कर लेने का दिल करता है फिर ख्याल आता है इससे क्या होगा ? इससे आगे नहीं सोच पाती !!

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168 जिन्दगी का सफ़र स्कूल से आगे बढ़कर फिर कालेज में जाना होगा इसके सपने बहोत बार देखे थे मैंने कोनसे कालेज में दाखिला हो यह भी कई बार सोचा था मैंने एक साल पहले सोचना शुरू किया पहले दिन का पहनावा क्या होगा हेयर स्टायल पर भी नजर डाली थी क्या सायकिल पर ही कालेज जाना होगा या फिर स्कूटर का जुगाड़ करेंगे घर की हालत जुगाड़ की भी नहीं है इसी उधेड़ बुन में गुजर जाता है पूरा का पूरा दिन मेरा जुगाड़ पर आखिर एक दिन पाँच सात लोग आये आव भगत हुई मेरे से भी पूछा कोनसी क्लास पास की है बेटी दूसरा सवाल था कितने नंबर आये नंबर बताये मैंने धीमे से ही सही नजरें मुझे घूरती सी महसूस हुई जैसे बकरे को घूरती हैं मारने से पहले हर कसाई की नजरें और फिर हलाल कर दिया जाता है बेचारा बकरा मुझे क्या पता था कि मेरा भी हलाल होने का वक्त आ गया है हाँ एक महीने बाद ही मेरी शादी कर दी गयी एक बेरोजगार के साथ दो बेरोजगारों कि दुनिया के सपने मैं नहीं देख पाई क्योंकि अँधेरे के सिवाय कुछ दिखाई नहीं दी रहा था भूखे घर कि आ गयी हम क्या करेँ ? ये दिन देखने के लिए क्या छोरे को जन्म दिया था ? प्यार मोहबत बेहतर जिन्दगी ये सब अतीत कि बातें थी घर भी तंग सा दो ही कमरे साथ में भैंस व बछिया का भी सहवास रहता था चौबीस घंटे समझ सकता है कोई भी कि दो कमरों में छः सात सदस्यों के परिवार का कैसे गुजारा होता है ! फुर्सत ही नहीं होती एक दूसरे के लिए चोरों कि तरह मुलाकातें होती हैं हमारी बस जीवन घिसट रहा है हमारा एक दिन सोचा इस नरक से कैसे छुटकारा मिले ? मगर उसे ताश खेलने से फुर्सत कहाँ घर खेत हाड़ तोड़ मेहनत और तान्ने यही तो है जिन्दगी हमारी हमारे जैसे करोड़ों युवक युवतियां हैं कभी कभी जीवन लीला को ख़त्म कर लेने का मन बनता है फिर ख्याल आता है इससे क्या होगा दो चार दिन का रोना धोना फिर खत्म यह सिलसिला यूंही चलता रहेगा आगे इस अँधेरे को कैसे ख़त्म किया जाये ? कैसे रौशनी कि किरण हम तक भी पहुँच सके यही तो यक्ष प्रश्न है बहुत बार सोचा कई बार सोचा है मगर रास्ता नजर नहीं आता है हमें बस इसी कशमोकश में जीवन किसी तरह गुजर रहा है हमारा जीवन सरक रहा है हमारा ! पूजा पाठ बालाजी कि सेवा सब कर के देख लिया मगर सब मन की शांति की बात करते हैं कोई भी रोटी और रोजगार की बात नहीं करता आप ही बताओ क्या करेँ हम ? ********* 167 पिछले चार-पांच साल से मौसम का मिजाज बदलता जा रहा है इसका सबसे अधिक असर किसानों पर पड़ रहा है सूखे के लंबे दौर लगातार बाढ़ कम होती यह अनियमित वर्षा भयानक ओलावृष्टि होना टिड्डीयों का अचानक अमला किसानों की कमर तोड़ दी है हालांकि सामुदायिक प्रयास रास्ता दिखा सकते हैं मगर उनकी रक्षा के लिए सरकारी समर्थन और संरक्षण बहुत जरूरी है। इससे किसान बचेगा तो उद्योग बचेगा उद्योग बचेगा तो भारत महान बचेगा जय हिंद 2008 ******** 166 दोस्त पास रहकर भी दूर रहना कोई सीखे तुमसे बिना कहे बहुत कुछ कहना कोई सीखे तुमसे लालच व भोग का बाजार जकड़े हुए हैं हमें बाजारी दुनिया से कहना कोई सीखे तुमसे हर ईंट के नीचे आज बैठा बिच्छु दिखाई देता है बिच्छूओं के दंश न सहना कोई सीखे तुमसे माया जाल फैला है यहां झूठ और मक्कारी का इस जाल की आग में न दहना कोई सीखे तुमसे सोने पर यह रांग का पानी चढ़ा कर बेचते देखो कैसे पहचाने असली गहना कोई सीखे तुमसे वैश्वीकरण के तूफान में सब कुछ वह चला है इस तेज तूफान में न बहना कोई सीखे तुमसे ********** 165 रांची के रास्ते में काफी बातें हुई अलग-अलग ढंग से सांग पर भी बातचीत हुई गांव में काम करने की रणनीति क्या हो और कार्य नीति क्या हो? इस पर भी काफी बातचीत हुई पानीपत एक बार फिर चर्चा में आया Literacy के बाद जो मांस कांटेक्ट बने उन्हें कैसे कंसोलिडेट करें हम नहीं तय कर पाए अब आगे कैसे बढ़ें ? ********* 164 दूसरी दुनिया संभव है सड़कों पर मजदूर आए थे दूर-दूर से पूरे भारत देश के साथ ही बुद्धिजीवी आए थे कोई इंजीनियर कोई डॉक्टर कोई कोई समाजशास्त्री 'सब रंगों का समावेश, भारत देश हमारा देश' 'बिना महिला सहयोग के हमारा विकास अधूरा है' ' साक्षरता हम वंचितों का एक पैना सा हथियार है' इन सब नारों की गूंज सुनाई दी रांची शहर में एक नई दुनिया की बात कई तरह से की गई वहां जहां अमीर गरीब की जात गोत और नात की ना बराबरी लिंगानुपात की जहां उच्च और नीच की जहां ज्ञान के बंटवारे की जहां बीमारी के इलाज की असमानताएं खत्म हो जाए मानव मानव को न चूसे जिस दुनिया में वह दुनिया संभव है हम सब की एकता के दम इसे लड़कर हासिल किया जा सकता है । लगता बड़ा आसान है मगर उतना ही मुश्किल काम है यह- कैसे अमीर ने जाल फैलाया परंपरा का इज्जत का प्राचीन संस्कृति का इस या उस मजहब का और बांट कर रख दिया हमको और आपको इस चाल को जिस दिन हम समझ गए तो फिर दूसरी दुनिया का सपना हमारा जल्दी बहुत ही जल्दी पूरा होगा जरूर होगा। रांची 20.12.08 ********* 163 अमरीका के बारे में क्या जानते हो ? साफ़ सफाई है ऊंची इमारतें बिजली मजाल की गुल हो जाये काम करवाने का पैसा नहीं देना पड़ता है बहुत उन्नतिशील है पशूओं को गेहूं खिलाता है फिर पशुओं को खुद खाता है छोटी मछलियों को पालता है फिर बड़ी मछलियों को खिलाता है इससे भी जब काम नहीं चलता तो आतंक फैलाता है या फिर फैलवाता है युद्ध करता है युद्ध करवाता है हथियार दोनों को बेचता है अमरीका जैसे अब पाकिस्तान और हिंदुस्तान दोनों को बेच रहा है आतंक के बहाने रोटी नहीं अपने परोंठे सेक रहा है अब पाकिस्तान हिंदुस्तान लड़ें या न लड़ें उसने तो अपने हथियारों का सौदा कर ही लिया इन चालों को समझना है मुश्किल दिमाग हो तो समझें चाल हम इसे तो गिरवी रख दिया हमने अपने भगवान या खुदा के पास वही सोचते हैं हमारे लिए सोचना है तो अपने तौर पर सोचना ही होगा एक दिन उस दिन अमरीका के बारे बहुत कुछ जान चुके होंगे हम । 2008 ******** 162 अलग-अलग रंगों का ये हिंदुस्तान हमारा है हिंदू मुस्लिम सिख इसाई अनोखा भाईचारा है मजहबी लोग लड़ाते हमको भाईचारे को ललकारा है पिसता गरीब बेचारा है आतंक घृणा नहीं चाहिए बच्चा बच्चा पुकारा है लिंगभेद पर शरमाओ तो मानव बना हत्यारा है आदिवासी सब उजाड़ दिए कैसा विकास तुम्हारा है युवक-युवती भटका दिए हैं मुश्किल हुआ गुजारा है महिला का जीना मुश्किल बाजार में इसे उतारा है बच्चों की कुछ ना पूछो पूरा जीवन उधारा है कुपोषण ने मारा है एक तरफ शाइनिंग है दूसरी तरफ अंधियारा है दो दुनिया एक ही जगह कैसा अजब नजारा है। 20.12.2008 ********** 161 हमारे देश की सेहत की चर्चा पूरी दुनिया में हो रही है दूसरे देशों के लोग यहां पर इलाज करवाने आ रहे हैं अपोलो सपोले पांच सितारा अस्पतालों का बोलबाला है मेडिकल टूरिज्म का कमाल है जनता इलाज के लिए रो रही है विश्व बैंक का हरेक देशवासी पर तीस हजार सात सौ छिहत्तर का खर्च बताया जा रहा है आज प्रति व्यक्ति स्वास्थ्य पर खर्च भारत में बहुत कम किया जा रहा फिर भी सेहत वान होने का हर रोज हम भरते रहते दम कांगो जहां 10 साल से कोई सरकार नहीं बताई वहां से भी कम खर्च हमारा देश सरकार ढ़ो रहा है दूसरे विकसित देशों में भी सेहत पर 80% खर्च सरकार करती कहते हैं भारत देश में बस 20% खर्च करे है सरकार हमारी अमीर तो पैसा फैंक करवाएं जहां चाहे वहां से उपचार गरीब क्या करे कहां जाए जब हो जाए वह बीमार? 21.12.2008 ********* 160 याद कर जुलम तेरा आहें भरता है गरीब हर सांस के साथ संघर्ष करता है गरीब मौत एक ऐसी चीज है जिसे आना ही है काम की खिंचाई में रोज मारता है गरीब