Wednesday, June 26, 2024
साक्षरता आंदोलन के नारे
16
खेती करो चाहे मजदूरी
पढ़ाई लिखाई सबसे जरूरी
17
पढ़ो लिखो खुद को पहचानो
जाग उठो मजदूर किसानो
18
पढ़ने में कोई शर्म नहीं
पढ़ने की कोई उम्र नहीं
19
बच्चा बुढ़ा और जवान
पढ़ा लिखा हो हर इंसान
20
भूख गरीबी नहीं मिटेगी
जब तक जनता नहीं पढेगी
21
खुशहाली खात्तर लड़ां लड़ाई
अनपढ़ सारे करां पढ़ाई
22
गांम-गांम मैं समिति आई
पढ़ ल्यो चाची पढ़ ल्यो ताई
23
ज्ञान विज्ञान में आना होगा
बिना पढ़े पछताना होगा
24
नर नारी की ये आवाज
पढ़ा लिखा हो आज समाज
25
व्यापार नौकरी लिया करो दुकान
सबसे पहले अक्षर ज्ञान
26
आओ मिलकर पढ़े पढ़ाएं
अपने ज्ञान को और बढ़ाएं
27
आधी बाजी जीत चुके
अब बाकी बाजी जीतेंगे
25
मिटे गरीबी और अज्ञान
पढ़ा लिखा हो हर इंसान
29
जरा सी पढ़ाई
ढेर सी भलाई
30
जगह देश की क्या पहचान
पढ़ा लिखा मजदूर किसान
Tuesday, June 25, 2024
203 से 226
226
राज दरबारी क्या कहते सुनते हैं यारो
पेट की खात्तर बेचारे झूठ गाते हैं
सच कहना गर बगावत तो हम बागी हैं
दिल दुखता जब नाकारे लूट मचाते हैं
अमीर गरीब की बढ़ा खाई समता लाएंगे
झूठ के एक दिन ये शिकारे डूब जाते हैं
********
225
छक्का
हिंदुस्तान जलन लागरया बूझा लियो मिल करकै रै
आंख मींच कै क्यूँ बैठे थाम बजर का दिल करकै रै
आजादी रूपी फूल मुर्झाग्या जो आया था खिल करकै रै
देश का किसान फांसी तोड़या किसनै मुश्किल करकै रै
साम्प्रदायिकता चढ़ती आवै नफरत के या बिल करकै रै
अडानी और अम्बानी नै धरया देश आज छिल करकै रै
***********
224
पेट मैं छाला
गुड़ का राला
खर्च कुढ़ाला
दुख देज्या
आंख मैं जाला
भीत मैं आला
दिल मैं काला
दुख देज्या
पोह का पाला
खेत रिहाला
कपटी रूखाला
दुख देज्या
*********
223
मेरा कसूर
हमने दोनो ने मिलकर सोचा
जिन्दगी का सफ़र तय करेंगे
बहुत सुन्दर सपने संजोये थे
प्रेम का पता नहीं ये हरयाणा
क्यों पुश्तैनी दुश्मन बन गया
यह सब मालूम था हमको पर
प्यार की राहों पर बढ़ते गए
मेरे परिवार वाले खुश नहीं थे
क्यों मुझे पता नहीं चला है
न तो मैंने एक गोत्र में की है
न ही एक गाँव में शादी मेरी
न ही दूसरी जात में की मैंने
तो भी सब के मुंह आज तक
फुले हुए हैं हम दोनों से देखो
प्यार किया समझा फिर शादी
ससुराल वाले भी खुश नहीं हैं
शायद मन पसंद गुलाम नहीं
मिल सकी जो रोजाना उनके
पैर छूती पैर की जूती बनकर
सुघड़ सी बहु का ख़िताब लेती
दहेज़ ढेर सारा लाकर देती ना
प्यार का खुमार काम हुआ अब
जनाब की मांगें एकतरफा बढ़ी
मैं सोचती हूँ नितांत अकेली अब
क्या हमारा समाज दो प्रेमियों के
रहने के लायक बन पाया यहाँ
चाहे कुछ हो हम लोड उठाएंगे
मगर घुटने नहीं टिकाएंगे यारो
वो सुबह कभी तो आयेगी की
इंतजार में ये संघर्ष जारी रखेंगे
झेलेंगे इस बर्बर समाज के सभी
नुकीले जहरीले तीर छाती पर ही
जिद हमारी शायद यही है कसूर
*********
222
हमारी बर्बादी
हमें बर्बाद करके उनको पता नहीं क्या मिल गया
ईमानदारी का दामन थामा हमारा निवाला छिन गया
आदमी से आदमी की मोहब्बत कहाँ काफूर हो गयी
मेहनत हमने की मगर पता नहीं कहाँ ये खो गयी
दर्द हद से गुजर गया है सीना हमारा तो छिल गया
मोहब्बत के गीत गाएँ कैसे चिंता हमें बीमारी की
यकीं कौन करेगा इस पर मोहब्ब्त गरीब भिखारी की
देख के उनके ढंग निराले मुंह हमारा है सिल गया
मरने वाले हथियार लिए बैठे साधा निशाना हम पर
मार न पाना मजबूरी उनकी टिका जमाना हम पर
हमारे वजूद का तस्सवुर कीचड में गुलाब खिल गया
तूफ़ान जो उठा समुन्द्र में अब नहीं टाला जायेगा
पड़ाव अब ये हमारा मंजिल पर ही डाला जायेगा
भगवन का आसरा किया पर भरोसा सारा हिल गया
आर पार की जंग शुरू करना होगा स्वीकार हमें
फूंक फूंक के चलना है रहना होगा होशियार हमें
देख देख जुल्म उनके कलेजा हमारा छिल गया
मानवता का औढ़ा मुखोटा लिया धर्म का सहारा है
जात पात का जहर फैलाया निचौड़ा खून हमारा है
रणबीर आज रो उठा हो छलनी उसका दिल गया
**********
221
आंधी चल रही ये नहीं थमीं यारो
रात की गर्द मेरे चेहरे पे जमीं यारो
कुछ ठूंठ खड़े हैं कहीं कहीं मेरे जैसे
कुछ उखड़े पड़े हैं कहीं तुम्हारे जैसे
हम सब बचें हैं इसके थपेड़े खाकर
तुम बैठ गये अपने महलों में जाकर
यह आंधी आज किसे साल रही देखो
झोंपड़ी इधर उधर उछाल रही देखो
धर्म की आँधी चलने ही वाली यारो
क्या गुल खिलेंगे उजड़ेगा माली यारो
********
220
Please React
इस बेवफा सिस्टम से वफ़ा मांग रहे हैं |
हमें क्या मालूम है हम खता मांग रहे हैं |
ये क़िस्मत का खेल रचाया है इसी ने तो---
इसी से हम क़िस्मत क़ि दुआ मांग रहे हैं|
पूरा सच छिपा ये आधा सच बताते हमको --
जहर घोला उसीसे साफ हवा मांग रहे है|
रोजाना जो खेलता हमारे जज्बात के साथ--
सुख क़ि राही का उससे पाता मांग रहे हैं |--
सुरग क़ि कामना में छिपी हुयी रणबीर--
अपने खुद क़ि ही हम चिता मांग रहे हैं |
*********
219
SUN JARA AUR KAH JARA
किसी पर भी तूं एतबार न कर|
भावुकता में बर्बाद घरबार न कर|
बात हैं बात का भरोसा क्या है
--
जाँ किसी पर निस्सार न कर|
अमीर क़ि नजरें जाँ लेलेंगी--
इनसे कभी कोई करार न कर|
बेवफा से वफ़ा नहीं होती है
--
जाने दे दिल को बेक़रार न कर
|
अमीर गरीब क़ि दुनिया है यह
--
झूठे वायदे हैं स्वीकार न कर
|
रणबीर एक दिन टूट जायेगा--
ख्वाब है ख्वाब से प्यार न कर |
*********
218
पूजा
पूजा अपने आप में खोयी
लेकिन बिल्कुल सुलझी हुई
शक्शियत !
जो भी उससे मिलता
उसकी सादगी और
आत्मितीयत्ता से प्रभावित
हुए बिना न रहता |
हर किसी की मदद के
लिए हर समय तैयार
विचारों से परिपक्व
दिल से इमानदार और सच्ची
जिन्दगी भर समाज और
दुनिया को बदलने में लगी
एक अनोखी लड़की
पूजा !!
*********
217
आज का दौर *** एक कविता के माध्यम से **
दुनिया की क्या हालत हो गई बाजार चारों ओर छाया।।
भैंस बंधी है घर घर में पर दूध ढोलों के अंदर पाया।।
1
दूध बेच भैंसों का लोग गांव के करते हैं आज गुजारे
लुप्त हो गए घरों से आज घी के जो हुआ करते बारे
थोड़ा साँस आया करता आज घूटन मानते हैं सारे
महिलाओं के अनीमिया ने फिर से जोर के डंक मारे
बाजरे की खिचड़ी गौजी का आज जोड़ा तोड़ बगाया।।
2
पहले भाई चारा था छोरे बहू लेने आया करते
जिब रोटी जिम्मन बैठते खांड बूरा खाया करते
पड़ौसी दूध के बखौरे बटेऊ वास्ते ल्याया करते
दूजे का बटेऊ पड़ौसी आंखों पे बिठाया करते
बैठे रहते फूंक बुढ़िया सी अब अपना ही बटेऊ ना भाया।।
3
आबो हवा मैं जहर घुला कीटनाशक छागये हैं
युवा के नर्वस सिस्टम पे दोष गुस्से का लागये हैं
पेट को पकड़े घूम रहे डॉक्टर भी हाथ ठागये हैं
हमारी कष्ट कमाई को ये अमीर क्यों खागये हैं
टैस्ट क्यों नहीं होते मैडीकल मैं नहीं किसी ने कष्ट उठाया।।
4
किलो दूध मिले पचास का उसमें आधा पानी पावे
महंगाई के क्या कहने कोई क्या खाएं क्या नहीं खावे
कुपोषण बालकों में आज दिन दिन क्यों बढ़ता जावे
बाजार व्यवस्था दोषी है पर दोष क्यों कोई नहीं
लावे
राम की इच्छा कैहकर रणबीर हमारा क्यों मोर नचाया।।
**********
216
हमारा हरियाणा दो तरह से आज दुनिया में छाया है।।
आर्थिक उन्नति बहुत की पर लिंग अनुपात ने खाया है।।
1
छांट के मारते लड़की पेट में समाज के नर नारी
समाज अपने कसूर की मां के लगावे जिम्मेदारी जनता हुई है हत्यारी पुत्र लालसा ने ही राज जमाया है ।।
2
औरत औरत की दुश्मन है जुमला बहुत चलता आदमी आदमी का दुश्मन समाज को न खलता समाज ढांचा इसपे पलता यह हरियाणा बदनाम कराया है।।
3
वंश की पुरानी परंपरा पुत्र को चिराग बताते हैं लड़का जरूरी होना चाहिए लड़की को मराते हैं
जुल्म रोजाना बढ़ते जाते हैं सुनकर के कांपती काया है।।
4
अफरा तफरी फैली महिला कहीं महफूज नहीं
जो पेट से बच गई है उनकी समाज में बूझ नहीं आती हमको क्यों सूझ नहीं रणबीर सिंह बहुत घबराया है।।
**************/
215
दो हजार तेरा का आधा बरस बीत गया
सुधार कहाँ मंहगायी का दानव जीत गया
भारत की अर्थ व्यवस्था चली गयी खाई मैं
विकास दर बीते दस साल की नीची इकाई मैं
औद्योगिक विकास दर की क्या बात बताऊं
पिछ्ले बीस साल में सबसे नीचे गई दिखाऊँ
बजट घाटा हमारी आज की चुनौती बड़ी है
मोदी के बसकी नहीं आई सी यू में पड़ी है
राजनीति दिशाभ्रम इसका कारण हैं बताते
पूंजीवादी विकास दोषी ये बात क्यों छिपाते
*********
214
ढाई लाख किसान देश के पाछले दिनों मैं फांसी खागे
एफ डी आई तैं छोटे दुकानदारों के बुरे दिन आगे
आर्थिक सुधारों के ना पै कार्पोरेट सैकटर छाया
अंबानी अदाणी टाटा बिड़ला देश के चौखा चूना लाया
सरकार कारपोरेट की बांदी ये गरीब घने दुख पागे
नब्बे के दशक तैं देश मैं लागू ये सुधार हुए देखो
ये भूख बीमारी बधगी घने बेरोजगार हुए देखो
आवारा पूंजी उधम मचाया ये काले धन आले छागे |
विश्व बैंक ड्ब्ल्यू टी ओ आई एम एफ नकेल थामरे
तीसरी दुनिया के देशों के ये कसूती लगाम घालरे
ये म्हारी घी घी बांध रहे विकसित देश फयदा ठागे|
मन मोहन जी मोह लिए बिल्कुल नहीं समझ रहे
इन आर्थिक सुधारों मैं क्यों और भी घने उलझ रहे
ये आर्थिक सुधार तो सबकै चपत घनी कसूती लागे|
*********
213
अभी बहुत कुच्छ बाकी है इस तुम्हारी
खुश्क दुनिया में
हमारी मेहनत
हमारी सच्चाई
हमारी इंसानियत
हमारी कुर्बानी
हमारी मोहब्बत
हमारी शर्मो लिहाज
हमारी भूख मरी
--------------
--------------
लंबी फहरिश्त है
इस दुनिया को
तबाह नहीं होने देंगे
रणबीर
********
212
साइनिंग इंडिया सफरिंग इंडिया अंतर आज बढ़ता जाता है।।
कैसे पाटें इस अंतर को नहीं कोई हमको आज समझाता है।।
1
ये शाइनिंग इंडिया बहोत ज्यादा आगे जा लिया बताऊँ
गुड़गामा नया और पुराना देखलो नहीं मैं झूठ भकाऊं
नए और पुराने का अंतर क्यों ना जनता को उलझाता है।।
2
पुराने ढांचों से जन बहुत दुखी हो लिए हिंदुस्तान के
कई पुरानी सोच ये ओछी जूती काटें पैर मजदूर किसान के
नए ढांचे नहीं मिटा पा रहे ये भ्रष्टाचार घूमे दनदनाता है।।
3
इन हाल में नई इबारत जनता लिखनी चाहती जरूर
जात पात से ऊपर उठ चाहवे भ्रष्टाचार मिटाती जरूर
लड़ाई लम्बी संघर्ष मांगती समों जन को समझ आता है।।
4
सिस्टम एक रात में बदले एसा इतिहास ना टोहया पाए
सिर धड़ की कुर्बानी मांगे जब खून खरोंच इसको आए
जनता का दिल अंतर कम करने को पूरी तरह चाहता है।।
5
बहोत सी उपलब्धियां अब पूरे साल ये गिनाई
जाएंगी
पर नाकामियां इतनी ज्यादा हैं बिल्कुल न छिप पाएंगी
आने वाले समय में मुझे जो दिखे आम जन ना देख पाता है।।
6
फासिज्म नए ब्रांड का आज हमारे सिर पै आ खड़ा भाई
तरल पूंजी ने डिजाइन पूंजी से भर दिया है ये घड़ा भाई
रणबीर पड़े जूझणा कट्ठे होकर के ये सही छंद बनाता है।।
********
211
साइनिंग इंडिया सफरिंग इंडिया
ये महज शब्दों का खेल नहीं है
ये हैं दो दुनिया इसी जमीन पर
एक तरफ एयर कंडीशन्ड कोठी
उधर बरसात में टपकती झोंपड़ी
करोड़ों के को वह भी नहीं नसीब
एक तरफ एयर कंडीशन्ड कारें हैं
उधर कई कोश नँगे पांव चलना है
एयर कंडीशन्ड पांच सितारा होटल
उधर दो रुपये की चाय का ढाबा है
एयर कंडीशन्ड अपोलो फोर्टिस हैं
उधर बिना दवाई के सीएचसी हैं
एयर कंडीशन्ड मॉल सब मिलता
उधर खुदरा छोटी छोटी दुकानें हैं
एयर कंडीशन्ड स्कूल आलिसान
उधर बिना पंखे के कमरे के स्कूल
एक तरफ ऐयासी की दुनिया छाई
दूसरी तरफ मेहनत से फुरसत नहीं
दोरंगी दुनिया नजर नहीं आती हमें
इस अंधेपन को क्या कहूँ?शब्द नहीं
आपके पास हैं तो इंतजार इनबॉक्स में
रणबीर
15.03.08
********
210
बढ़ रहे मीलों के फासले हमारा प्यार नहीं कम होगा
लोंग डिस्टेंस रिलेशनशिप को निभाने का दम होगा
जरूरी पक्ष है इसका आपसे में बातचीत करते रहना
इसका मतलब यह नहीं चौबीस घंटे ही खपते रहना
समय-समय पर बात करना ही ये सही कदम होगा
बात करते समय भविष्य या रिश्तों की बात नहीं जरूरी
सकारात्मक मुद्दों पर बात कम करती है हमारी गरूरी
विवाद की बातचीत का फिर नहीं हमारा मन होगा
उनकी सुने अपनी सुनाऐं अनदेखी ठीक नहीं होती
अनदेखी खटास लाती है आपस का विश्वास खोती
इसलिए जीवनसाथी की बात पर जरूर चलन होगा
रिश्ते पासके या दूरके नींव आपस का भरोसा बताया
मिलने का प्रयास रहे जब भी मिलने का मौका पाया
प्यार और सम्मान रिश्ते में खूबसूरत ये चमन होगा
**********
209
राखी का त्यौहार मन में उल्टा सवाल उठाता यारो
ना बराबरी का मसला लगता कहीं ये छिपाता यारो
करवा चौथ रख कर महिला लम्बी उम्र मांगती है
रक्षा करवाने को आपकी कलाई पर राखी बांधती है
कितना इमोशनल ब्लैक मेल सवाल उठाते डरता हूँ
मन में उठे सवाल पूछने की न मैं हिम्मत रखता हूँ
महिला का शोषण है इस जगह से सोच कर देखो
पुरुष प्रधान व्यवस्था को यारो खोल कर तो देखो
*********
208
यही रफ़्तार रही ज़माने की ताऊ
तो इंसानों की जगह होंगे ये हाऊ
खुदगर्जी चुगलखोरी खुसामद की
मौज होगी हर चीज यहाँ बिकाऊ
अमेरिका और कोर्पोरेट छाया देखो
भारत बनाया इन्होंने बैल हिलाऊ
********
207
गरीब परिंदा उड़ान में है
तीर अमीर की कमान में है
है डराने को मारने को नहीं
मरा तो अमीर नुकसान में है
जिन्दा रख कर लहू चूसना
अमीरों के दीन ईमान में है
खौफ ही खौफ है जागते सोते
लूट हर खेत खलिहान में है
मरने न देंगे न जीने देंगे
साजिश पूंजी महान में है
********
206
आम जनता के लिए बेरोजगारी है
घरों से बेदखली है बड़े पैमाने पर
समाज कल्याण के प्रावधानों में
कटौतियां बखूबी से जारी यारो
सरकारी खजाने की कीमत पर
बैंकों और वितीय कम्पनियों को
फिर बड़ा मुनाफा बटोरने का ये
मौका मिल रहा है भारत देश में
मेहनतकश की कीमत पर ही तो
मग़र कब तक एक दिन हिस्साब
तो माँगा जायेगा पाई पाई का
*******
205
बड़ी मुश्किल से ये आंसू छिपाए हमने
हँसना चाहा झूठे ठहाके लगाये हमने
तुमको मालूम ये शायद हो के ना हो
तुम्हारे जाने के बाद आंसू बहाए हमने
प्यार किया हमने नहीं छुपाया कभी
दिल के तराने थे तुमको सुनाये हमने
तेरे साथ इन्कलाब के जो नारे लगाये
यारो अब तलक नहीं हैं भुलाये हमने
राह में साथ छोड़ गये अफ़सोस तो है
पल याद हैं वो जो संग बिताये हमने
जानते हैं आप हमें नहीं भूल सकेंगे
एक अनुभव बस बिंदु दिखाए हमने
हादसा नहीं एक सच्चाई है ये प्यार
अफ़सोस है क्यों ये रास्ते भुलाये तुमने
*************
204
किसानों मजदूर का संघर्ष तेज करने का समय आया।।
दूसरे कमेरे तबके साथ ले चाहिए देश में बिगुल बजाया ।।
इस पार्टी उस पार्टी का नहीं ये मामला कहते हैं कॉरपोरेट सांप्रदायिकता की मार हम सहते हैं सिस्टम का मालिक कॉरपोरेट यह लुटेरा असल बताया ।।
शिक्षा बेची स्वास्थ्य बेचा सब कुछ बेच रहे आज निजीकरण की लहर फैलाई झूठ को सच कहे आज
आमजन के जीवन पर संकट आज गहरा है छाया ।।
अमेरिका से दोस्ती देश की मीडिया पूरा उछाल रहा
असल मातहेती अमेरिका की छुपाने का कर कमाल रहा
बातों बातों में देश को आज आसमान पर देखो पहुंचाया।।
बहु विविधता देश हमारे की पूरी दुनिया करे बड़ाई
एक देश एक पहचान इस पर छेड़ी रणबीर क्यों लड़ाई
बहु विविधता हार नहीं मानेगी संघर्ष का बिगुल बजाया।।
*********
203
हरेक चीज आज देखो आनलाइन मिल जाती है बाजार की छोटी दुकानो को जम्हाई दिलाती है कूरियर की सेवा मध्यमवर्ग को आज भाती है
गरीब जनता ही अब छोटी दुकानो पे आती है सिले सिलाए कपड़ों की दुकान आज ये छाती है
खेती में ट्रैक्टर की कमाई किसान को खाती है बिहारी मजदूरों की लाइन चौराहों पर पाती है पार्कों में महिलाओं की टोली बैठी गीत गाती है घंटों टीवी देखने की चाहत बच्चों को भरमाती है
बदल रहा शहर और गांव कंपकंपी सी आती है
Thursday, June 20, 2024
189 से 202
202
कैसे जांचें
कैसे जांचें कि कौन अच्छा है क्या सिस्टम खस्ता है ॥
सबकी अपनी अपनी ढपली विकास का वही रस्ता है ॥
जनता के बल पर ऊँचाई पाने वाले हरेक बादल को
मौसम रूख बदले तो फिर पानी पानी होना पड़ता है ॥
जनता का विश्वास बार बार टूटता है यहाँ पर फिर से
कमाल की बात है कि यह बार बार से देखो उठता है ॥
आंधी आती है बड़े बड़े पेड़ उखड़ जाते हैं यहाँ पे यारो
कई बार पत्ता भी हिलता है तो दिल कांपने लगता है ॥
मेरे अंदर एक मुखालिफ था जो मुझसे भी लड़ता था
अब या तो वह चुप ही रहता है या हाँ में हाँ करता है ॥
जनता ने इतिहास रचे हैं वो ये जानते हैं बखूबी ये
इसीलिए हमको वो बरगलाने का प्रपंच रचता है ॥
************/
201
आज के राज में महिलाओं के खिलाफ अपराध बढती जा रही
राष्ट्रीय अपराध रिपोर्ट ब्यूरो(एनसीआरबी) ये हमको बता रही
दो हजार चोदा में यह अपराध दर 52.5 प्रति लाख दिखा रही ।
2021 तक बढ़ कर 64.5 प्रति लाख पर यह दर जा रही ।
2021 तक, दैनिक बलात्कार की संख्या भी बताई देखो
यह संख्या प्रतिदिन 90 बलात्कार से ऊपर है दिखाई देखो
2017 में अपराध के 315215 से अधिक संख्य जताई देखो
2022 में यह बढ़कर 365300 से अधिक पहुंचाई देखो
************
200
ये कमरसियेलाइजेशन देखो तेज रफ़्तार से आया
पुराने की सड़ांध ने आज नई सड़ांध से हाथ मिलाया
पुराने कबीलाई रिश्ते नाते आज भी हम पे हावी देखो
नैतिकता को पढने बिठाया मद मस्त पीढ़ी भावी देखो
ऑनर किल्लिंग की चारों तरफ पड़ रही काली छाया ||
फ्री लौंस यौनिक सम्बन्ध आज इस समाज में छाये रहे
लीलो चमन के प्यार को ये अँधा प्यार बतलाये रहे
आज यहाँ तो काल वहां बस घुमंतू जीवन अपनाया ||
पैसा पैसा और साथ में बदनाम मुन्नी यहाँ मशहूर हुयी
दो दो पैसे को मोहताज भुखमरी यहाँ का दस्तूर हुयी
शीला को बीच बाजार में है अधनंगी करके नचवाया ||
दोनों सड़ांध के मेल से अधखबड़ा इन्सान बना दिया
सिविक समाज सभ्य समाज सपना कहके भका दिया
रणबीर देख के सड़ांध मानव बहुत ज्यादा घबराया ||
*********
199
कुछ नए बन रहे कुछ पुराने बने
हर कदम पर यहाँ कैदखाने बने
किस तरफ से चली गोलियां क्या पता
किन्तु हर बार हम ही निशाने बने
था क्या हमने सोचा ये क्या हो गया
हमें क्यों इस चमन से गिला हो गया
दिया जिसकी खातिर था हमने लहू
वही मौसमें गुल क्यों खफा हो गया
*******
198
मारें जाओ धोक पत्थरों की गरीबी दूर नहीं होवे
नाबराबरी और बढ़ेगी किसान जोर जोर से रोवे
शिक्षा और स्वास्थ्य का भार अपनी जेब से ढोवे
सरहद ऊपर जवान फौजी ज्यान यो अपनी खोवै
********
197
पता है सामने वाला बहुत अत्याचारी है
पूरी दुनिया में लूट की ये कमाई भारी है
अभी संकट के दिन और बढ़ेंगे दुनिया में
फिर भी संघर्ष की ये जंग जारी हमारी है
***********
196
हमारे शरीरों पर कपड़े
कम से कमतर होते जा रहे हैं
फिर चाहे कोई बिना कपड़े
नंगा घूम रहा है तो हमारी बला से
एटम बम है हमारे पास
मिसाइल है दूर मार की
अच्छी खासी फौज है हमारे पास
फिर चाहे सामाजिक असुरक्षा बढ़ती है तो
हमारी बला से
पांच सितारा अस्पताल हैं
सुहाने भारत देश में
मैडिकल टूरिज्म फल फूल रहा है
फिर चाहे लोग बिना इलाज के मरते हैं
तो मरें
प्लेग फैलता है तो फैले
एडस दनदनाता है तो दनदनाए
वेश्यावृत्ति बढ़ती है तो बड़े
हमारी बला से
आर्थिक स्तर पर गोवा के बाद है
हरियाणा
' सेक बिछाई जा रही है तेजी से
फिर चाहे लिंगानुपात में सबसे
नीचे है तो क्या
हमारी बला से
कुछ हथियार और हों
कुछ पैसा और हो
गौ रक्षा हमारा धर्म है
फिर शायद दलितों के घर जलाएं
जाते हैं तो क्या
मनुष्य मरते हैं तो मरते रहे
हमारी बला से हम
2020 तक दुनिया की
महाशक्ति बन सकते हैं
विकास की कीमत तो अदा
करनी ही पड़ेगी
ऑडियोलोजी का जमाना गया
क्वालिटी जीवन का जमाना आया है
हमने तरक्की की है किस कीमत पर
हमारी बला से
कुछ साल पहले की रचना
**********
195
आज बाजार व्यवस्था की
चारों तरफ गूंज बताते हैं
हीरो विलेन और विलेन ये
हीरो कैसे यह बन जाते हैं
एंटी हीरो एंग्री हीरो का
जमाना खत्म हुआ जताते हैं
अब तो हीरो विलेन बन गया
ऐसा फिल्मी सीरियल दिखाते हैं
कल तक जो राम थे यहां
रावण बनकर इतराते हैं
भीतर से रावण बन गए
मुखौटा राम का लगाते हैं
हम भी रावण की कर पूजा
दिवाली हर साल मनाते हैं।
********
194
अब सीख लिया तुमसे मैंने नया तराना सीख लिया
औरों के कन्धों पर रख के बन्दूक चलाना सीख लिया
सच को झूठ झूठ को सच तुरंत बनाना सीख लिया
अपनी ही तस्वीर से मैंने तो ऑंखें चुराना सीख लिया
अब सीख लिया तुमसे मैंने नया तराना सीख लिया ||
पैसे के दम पे दुनिया में अब इठलाना सीख लिया
धर्म के नाम पर जनता को खूब लड़ना सीख लिया
अब सीख लिया तुमसे मैंने नया तराना सीख लिया ||
भूल कर गाम अपना झूठे सपने सजाना सीख लिया
जीणा है तो भूलो अपने को नया फ़साना सीख लिया
अब सीख लिया तुमसे मैंने नया तराना सीख लिया ||
सब कुछ दांव पर लगाकर पैसा कमाना सीख लिया
जैसा मौसम हो मैंने वैसा बजा बजाना सीख लिया
अब सीख लिया तुमसे मैंने नया तराना सीख लिया ||
*********
193
शराब नहीं पीते तो क्यों इस संसार में आए तुम।।
तुमने छेड़छाड़ भी न की तो क्यों न पछताए तुम ।।
मारो खाओ हाथ ना आओ जीवन का दर्शन यही
इस दस्तूर को दोस्त मेरे क्यों ना निभा पाए तुम।।
चोरी जारी नहीं करना सीखा तो क्या खाक जवानी
जेल की सजा नहीं काटी ना शाहिद भी कहलाए तुम।।
दो-तीन लड़कियां नहीं भकाई रहे कोरे के कोरे क्यों
समय से पीछे क्यों रहे ना अखबारों में ही छाए तुम।।
एचआईवी एडस से क्यों वंचित रहे घूम रहे तुम
संवेदनशील मानव को फिरते गले लगाए तुम।।
*********
192
AGLA PICHHLA
अगला पिछला और वर्तमान
ना इस जन्म में झूठ बोला
ना कभी दुकान पे कम तोला
फिर भी भगवान नाराज हुए
हार्ट अटैक मुश्किल इलाज हुए
मैंने सोचा मुझे क्यों कष्ट मिला
मिला बताया पिछले का सिला
वर्तमान का कब होगा हिस्साब
अगले में मिलेगा इसका जवाब
पिछला ना कभी समझ आया
ना अगले बारे ही जान पाया
आज की बाबत नहीं बताते वो
अगले पिछले में फँसाते हैं वो
दम मारो दम मिट जाएँ गम
देवी देवता हमारे इनके हैं हम
सवाल उठाने वाले कौन हो तम ?
********
191
मेरा कस्सूर
मेरा कसूर
हमने दोनो ने मिलकर सोचा
जिन्दगी का सफ़र तय करेंगे
बहुत सुन्दर सपने संजोये थे
प्रेम का पता नहीं ये हरयाणा
क्यों पुश्तैनी दुश्मन बन गया
यह सब मालूम था हमको पर
प्यार की राहों पर बढ़ते गए
मेरे परिवार वाले खुश नहीं थे
क्यों मुझे पता नहीं चला है
न तो मैंने एक गोत्र में की है
न ही एक गाँव में शादी मेरी
न ही दूसरी जात में की मैंने
तो भी सब के मुंह आज तक
फुले हुए हैं हम दोनों से देखो
प्यार किया समझा फिर शादी
ससुराल वाले भी खुश नहीं हैं
शायद मन पसंद गुलाम नहीं
मिल सकी जो रोजाना उनके
पैर छूती पैर की जूती बनकर
सुघड़ सी बहु का ख़िताब लेती
दहेज़ ढेर सारा लाकर देती ना
प्यार का खुमार काम हुआ अब
जनाब की मांगें एकतरफा बढ़ी
मैं सोचती हूँ नितांत अकेली अब
क्या हमारा समाज दो प्रेमियों के
रहने के लायक बन पाया यहाँ \
चाहे कुछ हो हम लोड उठाएंगे
मगर घुटने नहीं टिकाएंगे यारो
वो सुबह कभी तो आयेगी की
इंतजार में ये संघर्ष जारी रखेंगे
झेलेंगे इस बर्बर समाज के सभी
नुकीले जहरीले तीर छाती पर ही
जिद हमारी शायद यही है कसूर
*********
190
जिंदगी से महज मशीन बनी देखी जा सकती है औरत
घर के अंदर और बाहर भी दबती देखी जा सकती है औरत
विज्ञान ने बहुत कुछ दिया खुले हाथ है जमाने को भारत में हर रोज ही मरती देखी जा सकती है औरत
गाड़ी के दो पहिए कहते औरत और मर्द दुनिया के दोनों को ही ढोती रहती देखी जा सकती है औरत दोनों ही सजाते हैं महल मगर जब ढह जाता है
तब निशाना सिर्फ ये बनती देखी जा सकती है औरत
कोई बदलाव नहीं मुमकिन एक पहिया की गाड़ी से
चीख चीख कर क्यों कहती देखी जा सकती है औरत
जमाना भी बहरा हो गया कभी सुनता ही नहीं है सुनाते सुनाते ही बस थकती देखी जा सकती है औरत
जब भी समाज बदला है वह औरत की बदौलत ही पता नहीं क्यों पीछे रहती देखी जा सकती है औरत
मर्द का करिश्मा देखो औरत है औरत की दुश्मन सास बहू में ये बंटती देखी जा सकती है औरत
भाग्य कभी तो बदलेगा इसी उम्मीद पर जीती है ता उमर भगवान को पूकती देखी जा सकती है औरत
********
189
कैसे जांचें
कैसे जांचें कि कौन अच्छा है क्या सिस्टम खस्ता है ॥
सबकी अपनी अपनी ढपली विकास का वही रस्ता है ॥
जनता के बल पर ऊँचाई पाने वाले हरेक बादल को
मौसम रूख बदले तो फिर पानी पानी होना पड़ता है ॥
जनता का विश्वास बार बार टूटता है यहाँ पर फिर से
कमाल की बात है कि यह बार बार से देखो उठता है ॥
आंधी आती है बड़े बड़े पेड़ उखड़ जाते हैं यहाँ पे यारो
कई बार पत्ता भी हिलता है तो दिल कांपने लगता है ॥
मेरे अंदर एक मुखालिफ था जो मुझसे भी लड़ता था
अब या तो वह चुप ही रहता है या हाँ में हाँ करता है ॥
जनता ने इतिहास रचे हैं वो ये जानते हैं बखूबी ये
इसीलिए हमको वो बरगलाने का प्रपंच रचता है ॥
Friday, June 14, 2024
176 से 188
189
कैसे जांचें
कैसे जांचें कि कौन अच्छा है क्या सिस्टम खस्ता है ॥
सबकी अपनी अपनी ढपली विकास का वही रस्ता है ॥
जनता के बल पर ऊँचाई पाने वाले हरेक बादल को
मौसम रूख बदले तो फिर पानी पानी होना पड़ता है ॥
जनता का विश्वास बार बार टूटता है यहाँ पर फिर से
कमाल की बात है कि यह बार बार से देखो उठता है ॥
आंधी आती है बड़े बड़े पेड़ उखड़ जाते हैं यहाँ पे यारो
कई बार पत्ता भी हिलता है तो दिल कांपने लगता है ॥
मेरे अंदर एक मुखालिफ था जो मुझसे भी लड़ता था
अब या तो वह चुप ही रहता है या हाँ में हाँ करता है ॥
जनता ने इतिहास रचे हैं वो ये जानते हैं बखूबी ये
इसीलिए हमको वो बरगलाने का प्रपंच रचता है ॥
*********
188
एक घटना को दिमाग ने झकझोर दिया
गाँव के ही दो लूंगाडों ने मुझे अँधेरे में जब घेर लिया,
अपनी हवस मिटाकर मेरे जीवन में तो अंधेर किया।
किसको बताऊँ दुःख अपना कौन सुनेगा मेरी बात,
दबंग घरों के दीपक वे तो भला मेरी क्या औकात ।
गाँव के किसी पंचायती ने नहीं सुनी मेरी अरदास,
गुर्गे हैं दोनों ये लूँगाडे गाँव के पंचायतियों के ख़ास।
कहते घूमें मिट्टी डालो गाँव की इज़्ज़त उछल रही,
एक हाथ कहाँ ताली बजे लड़की भी फिसल रही।
वहशी छा गए चारों तरफ बचे आज इंसान कहाँ,
भोग की वस्तु मानी औरत अलग है पहचान कहाँ।
********
187
चोर जार नशेबाज जुआरी
चोर जार नशेबाज जुआरी बढ़ते जावैं समाज मैं ॥
इनकी लिखूं कहानी सुणो अपणे ही अंदाज मैं ॥
पहले बात करू चोर की हाथ सफाई दिखावैं ये
घने चोर तो ताला तोड़ लें दुष्ट कमाँ कै नहीं खावैं ये
घिटी मैं गूंठा देकै मारदें घर साफ़ कर ले ज्यावै ये
राह चलती महिला की चेन दो मिनट मैं झपटावें ये
चोर बी के करैं और कोए नौकरी ना इस राज मैं ॥
जार आदमी दुष्ट घना पर नारी पै नीत धरै सै रै
कुकर्म करता हाँडै वो उसका पेट नहीं भरै सै रै
पकड़या जा जब जूत लगैं जूतां तैं बस डरै सै रै
नालियां मैं मुंह मारता एक दिन बेमौत मरै सै रै
पहर धोले लत्ते यो घूमै दुनिया हवाई जहाज मैं ॥
नशे बाज का के कहना रोज नशा करना उसनै
तर तर तर जुबान चलै किसे तैं ना डरना उसनै
सुल्फा गान्झा भांग धतूरा पी डूब मरना उसनै
अगल बगल मैं झाँकै फेर पाप घड़ा भरना उसनै
नशा उतर ज्या तो कहै सुधरना चाहूँ कर इलाज मैं ॥
चोर जार नशेबाज जुआरी सब तैं मानस बताये
औढ़न पहरण नहान खान तैं ये बालक तरसाये
घाघरे टूम तक ना बक्शी चोरी कर नशे चढ़ाये
गाम मैं आतंक फैलाया सरीफ मानस घबराये
रणबीर समझाया चाहवै समाज सुधर की खाज मैं
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186
कार्बन से पैदा हुए और मर कर कार्बन बन जाना है ।
अंतहीन है यह कहानी जिसका कोई छोर नहीं है।
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185
एक लड़की ने साहस किया और आवाज उठाई
बदतमीज गुरु जी ने अपनी बदनीयत दिखाई
कुछ लडकीयों ने साहस किया और भीड़ गयी
गुरु जी की सरेआम की सबने मिल कर पिटाई
केस दर्ज होने जा रहा था उस गुरु के खिलाफ
लड़की के बाप ने बीच में आकर के खेल रचाई
पैसे लेकर केस बिगड़ दिया गुरु छुट गया साफ़
यह कहानी नही हकीकत है आप तक पहुंचाई
कहाँ जा रहे हैं हम समझ नहीं पा रहा दोस्तों
एक घटना नहीं है ऐसी घटनाओं की बाढ़ आयी
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184
बुड्ढाबुड्ढीकी कहानी
एक बुड्ढाआया
साथ में एक बुढिया लाया
होटल में जाकर वेटर को बुलाया
दोनों ने अपना अपना आर्डर मंगवाया
पहले बुड्ढ़े ने खाया
बुढिया ने बिल चुकाया
फिर बुढिया ने खाया
बुड्ढ़े ने बिल चुकाया
ये देख वेटर का सिर चकरायावो उनके पास आया और बोला
जब तुम दोनों में इतना प्यार है
तो खाना एक साथ क्यूँ नहीं खाया?
इस पर बुड्ढ़े ने फरमाया
"जानी तेरा सवाल तो नेक है
पर हमारे पास दांतों का सेट सिर्फ एक है !!!!
********
183
पुराना दौर
तेरी कलम तो चली यही बहुत है मेरे लिए
तकरार अभी तो टली यही बहुत है मेरे लिए
तेरे अंदर का गुस्सा बरकरार है अभी भी
मेरी एक ना चली यही बहुत है मेरे लिए
मुझे मालूम है तेरा इंसां मर नहीं सकता
बात है कितनी भली यही बहुत है मेरे लिए
दो पल का साथ नहीं ये मालूम हम तुमको
सुबह हुई सांझ ढली यही बहुत है मेरे लिए
मेरी चाहत मेरी इबादत है यही चाहत तुमको
फिर भी तुमको खली यही बहुत है मेरे लिए
कमी लाख सही आखिर इंसां हैं खुदा तो नहीं
मुरझाये ना खिलती कली यही बहुत है मेरे लिए
हमें मुआफ़ करो या न करो अखितयार तुम्हारे है
तुम्हारी आँखों में नमी यही बहुत है मेरे लिए
कुछ तो है जो बांधे है हमको आज तलक भी
आबाद रहे तेरी गली यही बहुत है मेरे लिए
पत्थर दिल माँ से बना ये है मालूम मुझको
पिंघली मोम की डली यही बहुत है मेरे लिए
29-08-1992
*******
182
सहारे मत बना ए दिल सहारे रूठ जाते हैं
ना किस्मत पेभरोसा कर सितारे टूट जाते हैं
साहिल पर आके ना समझो कि पार आ गए
जरा सी लहर आयी तो किनारे छूट जाते हैं
राज दरबारों में न जाना वहां पे क्या रखा है
पेट की खातिर ही तो वे उनके झूठ गाते हैं
सच कहना अगर बगावत तो हम भी बागी
ज्यादा हवा भरने पर ये गुब्बारे फ़ूट जाते हैं
भगत सिंह के देश का फिर से देखा सपना
आखिरकार लूट के ये शिकारे डूब जाते हैं
अमीर गरीब की खाई बढ़ा विकास करेंगे वो
एक न एक दिन झूठे जनता के बूट खाते हैं।
********
181
बेचैनी जनता की बढ़ती जा रही
समझौता संघर्ष करती आ रही
डायलैक्टिस इसी को कहते हैं
आज बेचैनी दुनिया पर छा रही
डेमोक्रेसी ने आगे कदम बढाया है
जनता ने कुछ अधिकार पाया है
कितना ही भ्रष्टाचार बढ़ गया हो
इसके खिलाफ विरोध जताया है
उठती बैठती जीवण बिता रही है
कई बार घन घोर अँधेरा हटाया है
लूट के हथियार बदल लिए जाते हैं
जनता ने एकता हथियार बनाया है
********
180
डेमोक्रेसी ने आगे कदम बढाया है
जनता ने कुछ अधिकार पाया है
कितना ही भ्रष्टाचार बढ़ गया हो
इसके खिलाफ विरोध जताया है
उठती बैठती जेवण बिता रही है
कई बार घन घोर अँधेरा हटाया है
लूट के हथियार बादल लिए जाते
जनता ने एकता हथियार बनाया है
*********
179
मंदी के दौर में भी एक नया दौर लायेंगे
आतंक का अंधेरा ये मिलकर के मिटायेंगे
नंगेपन के नाम पर नंगापन छाता जा रहा है इंसानियत बाजार में हरेक खोता जा रहा है
परचम इंसानियत का हम फिर फैरायेंगे
भीमकाय बाजार फिर संरक्षण मांग रहा है
छिपा अपनी कमजोरी यह झूठ छांग रहा है
जनता करे कंट्रोल बाजार ऐसा संसार रचायेंगे
हाशिए पर फेंके गए जो उनका जमाना आएगा अपना हक पाने खातिर नागरिक समाज बनाएगा बड़े कदम नए साल में बस आगे बढ़ते जाएंगे नौजवानों का प्यार यहां फांसी चढ़ाया जाता है जात-पात गोतनात क्यों अपने रंग दिखाता है
नए साल की आशा से निराशा से लड़ पायेंगे
********
178
आर्थिक मंदी के दौर ने सताया हमको
जेब ढीली करदी इसने रुलाया हमको
बहुत सी जगह इसने करतब दिखाए
आ ई टी के कई योधा इसने मार गिराए
सरकारी कंट्रोल बता न था जिनको
उसी से भीख मंगनी पड़ रही उनको
पड़ सकता दिल पेय बुरा असर बताया
चिकत्सकों ने हाल मे ऐसा भी फ़रमाया
दिल के दौरे से आज कैसे बचा जाएगा
पूंजीवादी मंदी का दौर कहाँ पहोंचायेगा
********
177
1986 के दौर की रचना
अब मैंने रटना छोड़ दिया है
मैं कुछ कुछ सोचने लगा हूं
भगवान के भक्तों का असली चेहरा
थोड़ा पहचान में आने लगा है
मेरे दिमाग में
भगवान के वजूद पर भी एक
सवालिया निशान लग गया है;
वह होता तो सरसों के पीले फूल
उगाने की
एक सच्चे प्यार की कीमत
उन्मादी गोली या त्रिशूल का निशाना
न होती।
कुछ और सोचना और देखना शुरु किया
यूं लगा भगवान है इंसान का बनाया हुआ
तभी तो वह अपने मालिकों की जेल में
कैद है
आज तक वह जनता के दुख-दर्द
बढ़ाने तो बाहर निकला है
कभी कम करने नहीं
शायद यही कर सकता है 'वह'
आगे कुछ नजर दौड़ आता हूं तो
पाता हूं कि आज भी
कुछ बहादुर लोग सरसों के पीले फूल
उगाने की जी तोड़ कोशिशें कर रहे हैं
अपने खून से खेत को सींच रहे हैं
मुझे इंसान की इंसानियत पर
फिर भरोसा होने लगा है
और यह विश्वास बनता जा रहा है
सरसों के फूल भगवान नहीं लगा पाएगा
यह बहादुर इंसान ही फिर लगाएगा
और यकीं है वह दिन अवश्य आएगा
जब
सरसों के पीले फूल फिर से उगेंगे
शशि पुन्नू के बीच की दीवारें
176
आर्थिक मंदी के दौर ने सताया हमको
जेब ढीली करदी इसने रुलाया हमको
बहुत सी जगह इसने करतब दिखाए
आ ई टी के कई योधा इसने मार गिराए
सरकारी कंट्रोल बता न था जिनको
उसी से भीख मंगनी पड़ रही उनको
पड़ सकता दिल पेय बुरा असर बताया
चिकत्सकों ने हाल मे ऐसा भी फ़रमाया
दिल के दौरे से आज कैसे बचा जाएगा
पूंजीवादी मंदी का दौर कहाँ पहोंचायेगा
ढह जाएंगी
चारों तरफ सरसों के फूल लहलाने लगेंगे
Wednesday, June 12, 2024
169 से 175
175
सच के रास्ते पर चलना सीख लो
त्याग क़ि आग में जलना सीख लो
आगे बढ़ते रहो इस अंधी तूफान में
और अंगारों पर उतरना सीख लो
भगवान क़ि दया ने यहाँ पहुँचाया
गिर गए खुद ही संभालना सीख लो
रणबीर अनुभव चाहिए प्रकाश का
आज अँधेरे से गुजरना सीख लो
*******
174
पहले वाले गाँव नहीं बीरा पहले वाले बीर नहीं
रसायनिक हथियार आये पहले क़ि शमशीर नहीं
वक्त के साथ बदलती इस दुनिया का दस्तूर यही
कबीर रैदास सूफी संतों ने घुमा फिर ये बात कही
रोहतक जो छप्पन में था बची वाह तस्वीर नहीं
खाना पीना बादल गया अब ज्वर बाजरे बचे कहाँ
हरयाणा नंबर वन हुआ डिस्को डांस में फ़सा जहाँ
बथुआ राबड़ी खिचड़ी गौजी बची खाने में खीर नहीं
कडुआ सच है बदलाव का इसे समझना जरूरी देखो
देखनी होगी दिशा इसकी इसको परखना जरूरी देखो
बदलाव कई तरह के होते कुछ को माने जमीर नहीं
जनता हक़ में बदलाव के ये नारे बहोत उछाले हैं
जनता बहकावे में आई मुंह से ये दूर हुए निवाले हैं
पैनी नजर ये जनता क़ि बणी प्रहरी रणबीर नहीं
*******
173
हर एक कदम पर हादसा होना सोचो तो यारो
हमारे सिस्टम में क्यों है रोना सोचो तो यारो
जो कुछ कमाया हमने छीन लिया चालाकी से
किसी ने नहीं समझाया ये सब खेल बेबाकी से
कहते तुम्हारी क़िस्मत में खोना सोचो तो यारो
क़िस्मत का खेल मान कर हमने इसको ढ़ोया
अपने हाथों से खुद हमने बीज कीकर का बोया
क़िस्मत क़ि मार को क्यों ढ़ोना सोचो तो यारो
दिलो दिमाग पर मेरे तो यही सब तो छाया है
आज जो कुछ भी हूँ मैं मेरे नसीब ने बनाया है
औरों के खेलने का ये खिलौना सोचो तो यारो
बात समझ में आ गयी क़िस्मत का खेल नहीं
बिना इन्सां के चल सकती यह देखो रेल नहीं
*********
172
महम चौबीसी बदल रही देखो
नहीं पुराणी चौबीसी वही देखो
महम परंपरागत खेती में मशहूर
आज परंपरा छोड़ने को मजबूर
गेहूं जवार बाजरा उगाते रहे धान
गरीब अमीर सब यहाँ के किसान
फल व सब्जी की खेती आई देखो
अपार संभावनाएं गयी बताई देखो
परंपरागत खेती ख़तम होती जा रही
परासंगिकता अपनी है खोती जा रही
भूजल स्तर कहीं पर तो है बढ़ रहा
कहीं पर भूजल स्तर ये घट रहा
बेर के बाग़ महम में दिखाई ना देएँगे
किन्नू की खेती ये किस्सान भाई लेंगे
तीतरी गाँव टमाटर बहोत उगाता है
अमरुद के बाग़ विभाग लगवाता है
परंपरागत खेती क्यों छोड़ता किसा न
रूढ़िवादी सब कहाँ गए फरमान --
*********
171
कई बार सोचता हूँ तो बस
सोचता ही रह जाता हूँ मैं
सड़क पर रहने वाले बचों की
बेमिशाल हिम्मत संकट का दौर
फिर भी हंसी के पल चुरा लेना
इन बचों से ही सीखे कोई
उनका साहस उनकी जीवटता
देखकर अचरज होता है मुझे
कई बार सोचता हूँ तो बस
सोचता ही रह जाता हूँ मैं
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170
तुममें शिकश्त और जिल्लत का अहसास बाकी
पता हमें तुममें अभी नफरत का अहसास बाकी
कितना ही दिखावा करो अपनी सादगी का तुम
खूब तुममें देखा है हिमाकत का अहसास बाकी
मुहब्बत से कहते हैं दौलत का कोई वास्ता नहीं
तुम्हारे दिल में अपनी दौलत का अहसास बाकी
कितना ही अपमान करो तुम बार बार ये हमारा
रहेगा हममें फिर भी कयामत का अहसास बाकी
हमारी शराफत को करदो बिल्कुल तार तार तुम
रणबीर को रहेगा ही शराफत का अहसास बाकी
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169
हमारी बर्बादी
हमें बर्बाद करके उनको पता नहीं क्या मिल गया
ईमानदारी का दामन थामा हमारा निवाला छिन गया
आदमी से आदमी की मोहब्बत कहाँ काफूर हो गयी
मेहनत हमने की मगर पता नहीं कहाँ ये खो गयी
दर्द हद से गुजर गया है सीना हमारा तो छिल गया
मोहब्बत के गीत गाएँ कैसे चिंता हमें बीमारी की
यकीं कौन करेगा इस पर मोहब्ब्त गरीब भिखारी की
देख के उनके ढंग निराले मुंह हमारा है सिल गया
मरने वाले हथियार लिए बैठे साधा निशाना हम पर
मार न पाना मजबूरी उनकी टिका जमाना हम पर
हमारे वजूद का तस्सवुर कीचड में गुलाब खिल गया
तूफ़ान जो उठा समुन्द्र में अब नहीं टाला जायेगा
पड़ाव अब ये हमारा मंजिल पर ही डाला जायेगा
भगवन का आसरा किया पर भरोसा सारा हिल गया
आर पार की जंग शुरू करना होगा स्वीकार हमें
फूंक फूंक के चलना है रहना होगा होशियार हमें
देख देख जुल्म उनके कलेजा हमारा छिल गया
मानवता का औढ़ा मुखोटा लिया धर्म का सहारा है
जात पात का जहर फैलाया निचौड़ा खून हमारा है
रणबीर आज रो उठा हो छलनी उसका दिल गया
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9 से 1
9
था क्या हमने सोचा ये क्या हो गया
हमें क्यों इस चमन से गिला हो गया
दिया जिसकी खातिर था हमने लहू
वही मौसमें गुल क्यों खफा हो गया
*********
8
गुनाह उनका सजा हमें
उनके गुनाहों की हमको किसलिए सजा मिले
ऐसा इंसाफ क्यों हो किसलिए ऐसी क़ज़ा मिले
नाहक ही हम बेकसूरों की क्यों जान चली जाये
कैसे हम जैसों को जीने की यहाँ फिजा मिले
तुम्हारे सताने से हम रोये बहुत कई बार ही
मग़र अब ना रोयेंगे ताकि तुम्हें ना मजा मिले
तुम लूट कर हमें रहो सुख चैन से आबाद
बताओ तो कसूर क्यों उल्टा हमें खिजा मिले
हमारी मेहनत पर रणबीर वे ऐश करते हैं
न्याय देखो हमें सुखी रोटी उनको पिज्जा मिले
*********
7
जीने की मुश्किल अब मेरी राह बहुत है
जीता हूँ जीने की अब मुझे चाह बहुत है
गम बहुत से हैं हमारे और तुम्हारे देखो
उनपे मेरी टिकी अब निगाह बहुत है
तुम कहो या न कहो पर मुझे मालूम है
तुमको मेरी जीने की परवाह बहुत है
कत्ल होके भी हम अमीरों के गुनाहगार
झूठ नहीं शहर में हमारे गवाह बहुत है
मुझे अपने दोस्तों पर है पूरा एतबार
अहम् रणबीर उनकी सलाह बहुत है
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6
मेरा रास्ता समझो तो सही यही समझाता रहा
मकसद जीने का क्या हो इसपे बतियाता रहा
एक ही जीवन है यहाँ इतना तो मान लो दोस्त
दोस्त चुप चाप दूसरा रास्ता बस बनाता रहा
जाने वाले फिर नहीं आते मुडके अगले जीवन
इस हकीकत से दोस्त हमेशा ही कतराता रहा
दोस्ती आगे नहीं बढ़ पाई मुझ पर कामरेड का
देर सबेर लुके छिपे ठप्पा दोस्त वो लगाता रहा
*******
5
हुए किसी और के फिर भी अपने से लगते हो
बहुत प्यारे हसीन टूटे हुए सपने से लगते हो
कभी कभी यादों का एक हजूम सा आता है
अपनी बाँहों में मुझे तुम कसने से लगते हो
कभी अकेले में बैठ कर रोने को दिल करता है
मेरी हालत पे लगता है तुम हंसने से लगते हो
वो प्यार ही क्या जो करे पछतावा प्यार करके
प्यार किया हमने तुम मना करने से लगते हो
अब वो बात नहीं हमने रास्ता बदल लिया है
मग़र तुम जब मिलते हो तो डरने से लगते हो
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4
मेरा रास्ता समझो तो सही यही समझाता रहा
मकसद जीने का क्या हो इसपे बतियाता रहा
एक ही जीवन है यहाँ इतना तो मान लो दोस्त
दोस्त चुप चाप दूसरा रास्ता बस बनाता रहा
जाने वाले फिर नहीं आते मुडके अगले जीवन
इस हकीकत से दोस्त हमेशा ही कतराता रहा
दोस्ती आगे नहीं बढ़ पाई मुझ पर कामरेड का
देर सबेर लुके छिपे ठप्पा दोस्त वो लगाता रहा
********
3
गुनाह उनका सजा हमें
उनके गुनाहों की हमको किसलिए सजा मिले
ऐसा इंसाफ क्यों हो किसलिए ऐसी क़ज़ा मिले
नाहक ही हम बेकसूरों की क्यों जान चली जाये
कैसे हम जैसों को जीने की यहाँ फिजा मिले
तुम्हारे सताने से हम रोये बहुत कई बार ही
मग़र अब ना रोयेंगे ताकि तुम्हें ना मजा मिले
तुम लूट कर हमें रहो सुख चैन से आबाद
बताओ तो कसूर क्यों उल्टा हमें खिजा मिले
हमारी मेहनत पर रणबीर वे ऐश करते हैं
न्याय देखो हमें सुखी रोटी उनको पिज्जा मिले
********
2
होंश में आना होगा
अब नए संगठन को हमें अपनाना होगा ।।
जो भाई नहीं आएं उनको बुलाना होगा ।।
संगठन बनायें जो रजके रोटी खाना चाहते
अपने बच्चों को हम शिक्षा दिलाना चाहते
सब बराबर हों ऐसा समाज बनाना चाहते
अब हमें क्रांति के गीतों को गाना होगा ।।
जो भाई नहीं आएं उनको बुलाना होगा।।
वो क्यों अमीर हो गए इस पर विचार करें
हम क्यों गरीब ही रहे इस पर ध्यान धरें
अलग अलग बंटे हम एक दूजे से ही डरें
जात पात भूलके एक मंच पर आना होगा।।
जो भाई नहीं आये उनको बुलाना होगा ।।
हरियाणा बुरी तरह जलवाया देख लिया
जातों को आपस में भिड़वाया देख लिया
फूट डालो राज करो आजमाया देख लिया
मेहनतकश को मानवता को बचाना होगा।।
जो भाई नहीं आये उनको बुलाना होगा ।।
महंगाई बढ़ती जा रही देखो आज यहाँ
बेरोजगारी हमें खा रही देखो आज यहाँ
प्याज भाव नहिं पा रही देखो आज यहाँ
इन मुद्दों को मिलकर के उठाना होगा ।।
********
1
साथ तुम्हारा इन्कलाब नारा इस कदर भा गया
मकसद वीरान जिन्दगी का जैसे फिर से पा गया
मोम के घरों में बैठे लोग हमारे घर जलाने आये
जला दिए हमारे मग़र अपने भी ना बचा पाये
तबाह कर दिया जहान को मुनाफा हमें खा गया
रास्ता ही गल्त पकड़ा हमें भी उसी पर चलाया है
स्वर्ग नर्क के पचड़े में तुम्हीं ने हमको फंसाया है
भगवान और बाबाओं का खेल समझ में आ गया
आशा बाबू एक प्रवचन के कई लाख कमाते हैं
निर्मल बाबू नकली लोग पैसे दे कर के बुलाते हैं
भगवान की आड़ में मुनाफा दुनिया पर छा गया
19 से 10
19
*पानी आकाश से गिरे तो........बारिश,*
*आकाश की ओर उठे तो........भाप,*
*अगर जम कर गिरे तो...........ओले,*
*अगर गिर कर जमे तो...........बर्फ,*
*फूल पर हो तो....................ओस,*
*फूल से निकले तो................इत्र,*
*जमा हो जाए तो..................झील,*
*बहने लगे तो......................नदी,*
*सीमाओं में रहे तो................जीवन,*
*सीमाएं तोड़ दे तो................प्रलय,*
*आँख से निकले तो..............आँसू,*
*शरीर से निकले तो..............पसीना,*
*और*
*प्रभु के चरणों को छू कर निकले* *तो.........................चरणामृत*
*( आज विश्व जल दिवस पर समर्पित )*
*Save Water💧Save Life।* *💧💧पानी को जरूर बचाये💧💧*
******
दिन आ गए अच्छे
पा के खाखी निकर कच्छे
बंदियां उत्ते गऊंआ बच्छे
गां दा मूत पिलाऊंदे ने
मुर्ख खूब बनाऊंदे ने
सानु बढदे फिरन पतंदर
दसदे हनुमान है बंदर
वोटां वेले राम दा मंदर
मुडके राम भुलाऊंदे ने
मुर्ख खूब बनाऊंदे ने
जाट आरक्षण ल्याके
रक्खे सारे लोक लडाके
भाईचारे नु तुडवाके
आपस विच लडाऊंदे ने
मुर्ख खूब बनाऊंदे ने
युग विज्ञान दा आया
ऐहना तर्क नु आ दबाया
आके गीता विच्च उलझाया
गीता सार पढाऊदे ने
मुर्ख खूब बनाऊंदे ने
डॉ०फूल सिह
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18
पैसा छाया चारों तरफ आज के संसार में
रिश्ते नाते टूट रहे है आज के परिवार में
भाई का भाई दुश्मन जहाँ में बना हुआ है
आरक्षण खाप का मसला आज तना हुआ है
मानवता पीछे रह गई धर्म के प्रचार में ।
भाई चारा मेलजोल चीज विरली हो गई
सादगी सच्चाई जाणे कहाँ सब खो गई
सब कुछ बिक रहा आज इस बाजार में ।
सिस्टम हमारा ये बिलकुल खोखला हो रहा
अविश्वास के बीज हर जगह पर वो बो रहा
बहोत से भ्रष्ट नेता छाये राज दरबार में ।
विषमता के हर तरफ ये अम्बार लगे हैं
खाईयां बढ़ रही हैं ये रिश्ता बेकार लगे हैं
कितना अकेला हुआ मानव घर परिवार में।
किसान कर्ज में डूबा फांसी खाने को मजबूर
निठल्ला ऐश करे देखो सिस्टम का दस्तूर
अच्छे दिन आएंगे बीता समय इंतजार में ।
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17------------------------------------------
दुनिया को बदलने का बहाना तुम्हारा
अब समझ में आ गया हमको यारो
अपने वजूद के लिए ये जुमला अपनाया
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--16-----------------------------------------
दुःख होता है ये देख कर हमको यारो
हमें जिन्होंने मार्क्सवाद सिखाया था
वही उदारीकरण में उदार हो गये देखो
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15
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इंसानियत और मानवता का
सही और असली रूप ढूँढते
ढूँढते समाजवाद के दरवाजे
पर आ पहुंचे और बचा पाये
कुछ हिस्सा अपनी मानवता का
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14
यही रफ़्तार रही ज़माने की ताऊ
तो इंसानों की जगह होंगे ये हाऊ
खुदगर्जी चुगलखोरी खुसामद की
मौज होगी हर चीज यहाँ बिकाऊ
अमेरिका और कोर्पोरेट छाया देखो
भारत बनाया इन्होंने बैल हिलाऊ
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13
दो हजार बीस तक
गाँव कस्बों को ना देखिये
बड़े बड़े शहरों की फ़ैली गंदी
बस्तियों की तरफ ना देखिये
पाश इलाकों में बनी ऊंची
इमारतों को ही अब देखिये
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12
गरीब परिंदा उड़ान में है
तीर अमीर की कमान में है
है डराने को मारने को नहीं
मरा तो अमीर नुकसान में है
जिन्दा रख कर लहू चूसना
अमीरों के दीन ईमान में है
खौफ ही खौफ है जागते सोते
लूट हर खेत खलिहान में है
मरने न देंगे न जीने देंगे
sajish poonjee mahan में है
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11
अपमान सहें जाओ रै पर बोलियो मतना।।
नाश करण लागरे थारा मूंह खोलियो मतना ।।
अपने अपने में मग्न हो चुप चाप झेल रहे
गलत होंते देखें जाओ पर सोचियो मतना।।
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10
कुछ नए बन रहे कुछ पुराने बने
हर कदम पर यहाँ कैदखाने बने
किस तरफ से चली गोलियां क्या पता
किन्तु हर बार हम ही निशाने बने
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