Monday, June 22, 2020

बेटी की कविता

बेटी की कविता
सांसों से भी तेज दौड़ती है जिन्दगी
आज इन सांसों से ही हार गई जिन्दगी
कहते दूसरों; समाज द्ध के लिए जीना ही जीवन है
संघर्ष,मेहनत,ईमानदारी मूल्य है जीवन का
परन्तु मुस्कराना,गुनगुनाना,खुशियां मनाना सार है जीवन का

किसान का बेटा निकला था अपने गांव से
बदलने समीकरण समाज का
राह संघर्ष की वो चलते रहे
कहते कुछ भी मुश्किल नहीं दुनिया में
जरा हिम्मत तो करो
पाया हर वो मुकाम जो चाहा उनके मन ने

न डर किसी का न खौफ मौत का
मिश्रण सहनशक्ति,संयम,स्वाभिमान का
गजब हुनर था क्षमा दान का
अटूट विश्वास था रिश्तों के ताने बाने  में
बच्चों को दिए पंख आसमान में फैलाने को
कहते आन बान स्वाभिमान होते हैं बच्चे मां बाप के

उठते थे जो हाथ आर्शिवाद के लिए
चले गये छोड़ साथ हमारा
पर जज्बा उनका सदा साथ रहेगा हमारे
सांस लेने का नाम ही जिन्दगी नहीं
जिन्दा हैं वो हमारे साथ
क्योंकि उनका जोश और विश्वास जिन्दा है हम में

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