मानव मुक्ति का वैज्ञानिक दर्शन और विचारधारा देने वाले विश्व सर्वहारा के महान शिक्षक कार्ल मार्क्स की यह प्रसिद्ध जीवनी हिन्दी में प्रस्तुत करते हुए हमें बेहद ख़ुशी हो रही है।
*मार्क्स और उनके अभिन्न मित्र एंगेल्स ने सर्वहारा वर्ग के शोषण और पूँजीवादी उत्पादन प्रणाली में अन्तर्निहित अराजकता एवं अन्तरविरोधों को उजागर करते हुए यह दिखलाया कि किस तरह पूँजीपति द्वारा हड़पा जाने वाला अतिरिक्त मूल्य मज़दूरों के शोषण से आता है। उन्होंने राजनीति, साहित्य-कला-संस्कृति, सौन्दर्यशास्त्र, विधिशास्त्र, नीतिशास्त्र – सभी क्षेत्रों में चिन्तन एवं विश्लेषण की द्वन्द्वात्मक भौतिकवादी पद्धति को स्थापित करके वैज्ञानिक समाजवाद के विचार को समृद्ध किया।* मार्क्स और एंगेल्स ने अपने समय की पूँजीवादी क्रान्तियों, सर्वहारा संघर्षों और उपनिवेशों में जारी प्रतिरोध संघर्षों एवं राष्ट्रीय मुक्तियुद्धों का सार-संकलन किया, मज़दूर आन्दोलन को सिर्फ़ सुधारों तक सीमित रखकर मूल लक्ष्य से च्युत कर देने के अवसरवादियों के प्रयासों की धज्जियाँ उड़ा दीं, पूँजीवादी बुद्धिजीवियों और भितरघातियों की संयुक्त बौद्धिक शक्ति का मुक़ाबला करते हुए राज्य और क्रान्ति के बारे में मूल मार्क्सवादी स्थापनाओं को निरूपित किया और सर्वहारा वर्ग के दर्शन को समृद्ध करने के साथ ही उसे रणनीति एवं रणकौशलों की एक मंजूषा भी प्रदान की। उन्होंने सर्वहारा क्रान्ति के बुुनियादी नियमोें की मीमांसा प्रस्तुत की। ऐसा करते हुए मार्क्स-एंगेल्स ने सर्वहारा वर्ग को संगठित करने के प्रयास लगातार जारी रखे और पहले इण्टरनेशनल के गठन में नेतृत्वकारी भूमिका निभायी। सर्वहारा वर्ग द्वारा राज्यसत्ता पर क़ब्ज़ा करने के पहले महाकाव्यात्मक प्रयास का समाहार करते हुए मार्क्स ने पहली बार पूँजीवादी राज्य और उसके स्थान पर स्थापित होने वाले सर्वहारा अधिनायकत्व के आधारभूत सिद्धान्त विकसित किये। मार्क्स की मृत्यु के बाद एंगेल्स ने उनके अधूरे सैद्धान्तिक कामों को पूरा किया, सर्वहारा विचारधारा की हिफ़ाज़त की और मार्क्स के अवदानों का वस्तुपरक ऐतिहासिक मूल्यांकन करते हुए उन्होंने ही उसे मार्क्सवाद का नाम दिया।
*ज़ेल्डा कोट्स की लिखी मार्क्स की यह छोटी-सी जीवनी गागर में सागर भरने की तरह पाठक के सामने मार्क्स के जीवन की एक तस्वीर पेश करने के साथ ही उनकी प्रमुख कृतियों और शिक्षाओं से परिचय भी कराती चलती है। ज़ेल्डा कोट़स ने एंगेल्स की भी ऐसी ही शानदार जीवनी लिखी है जिसे हम पहले ही राहुल फाउण्डेशन से प्रकाशित कर चुके हैं।*
*मार्क्स और उनके अभिन्न मित्र एंगेल्स ने सर्वहारा वर्ग के शोषण और पूँजीवादी उत्पादन प्रणाली में अन्तर्निहित अराजकता एवं अन्तरविरोधों को उजागर करते हुए यह दिखलाया कि किस तरह पूँजीपति द्वारा हड़पा जाने वाला अतिरिक्त मूल्य मज़दूरों के शोषण से आता है। उन्होंने राजनीति, साहित्य-कला-संस्कृति, सौन्दर्यशास्त्र, विधिशास्त्र, नीतिशास्त्र – सभी क्षेत्रों में चिन्तन एवं विश्लेषण की द्वन्द्वात्मक भौतिकवादी पद्धति को स्थापित करके वैज्ञानिक समाजवाद के विचार को समृद्ध किया।* मार्क्स और एंगेल्स ने अपने समय की पूँजीवादी क्रान्तियों, सर्वहारा संघर्षों और उपनिवेशों में जारी प्रतिरोध संघर्षों एवं राष्ट्रीय मुक्तियुद्धों का सार-संकलन किया, मज़दूर आन्दोलन को सिर्फ़ सुधारों तक सीमित रखकर मूल लक्ष्य से च्युत कर देने के अवसरवादियों के प्रयासों की धज्जियाँ उड़ा दीं, पूँजीवादी बुद्धिजीवियों और भितरघातियों की संयुक्त बौद्धिक शक्ति का मुक़ाबला करते हुए राज्य और क्रान्ति के बारे में मूल मार्क्सवादी स्थापनाओं को निरूपित किया और सर्वहारा वर्ग के दर्शन को समृद्ध करने के साथ ही उसे रणनीति एवं रणकौशलों की एक मंजूषा भी प्रदान की। उन्होंने सर्वहारा क्रान्ति के बुुनियादी नियमोें की मीमांसा प्रस्तुत की। ऐसा करते हुए मार्क्स-एंगेल्स ने सर्वहारा वर्ग को संगठित करने के प्रयास लगातार जारी रखे और पहले इण्टरनेशनल के गठन में नेतृत्वकारी भूमिका निभायी। सर्वहारा वर्ग द्वारा राज्यसत्ता पर क़ब्ज़ा करने के पहले महाकाव्यात्मक प्रयास का समाहार करते हुए मार्क्स ने पहली बार पूँजीवादी राज्य और उसके स्थान पर स्थापित होने वाले सर्वहारा अधिनायकत्व के आधारभूत सिद्धान्त विकसित किये। मार्क्स की मृत्यु के बाद एंगेल्स ने उनके अधूरे सैद्धान्तिक कामों को पूरा किया, सर्वहारा विचारधारा की हिफ़ाज़त की और मार्क्स के अवदानों का वस्तुपरक ऐतिहासिक मूल्यांकन करते हुए उन्होंने ही उसे मार्क्सवाद का नाम दिया।
*ज़ेल्डा कोट्स की लिखी मार्क्स की यह छोटी-सी जीवनी गागर में सागर भरने की तरह पाठक के सामने मार्क्स के जीवन की एक तस्वीर पेश करने के साथ ही उनकी प्रमुख कृतियों और शिक्षाओं से परिचय भी कराती चलती है। ज़ेल्डा कोट़स ने एंगेल्स की भी ऐसी ही शानदार जीवनी लिखी है जिसे हम पहले ही राहुल फाउण्डेशन से प्रकाशित कर चुके हैं।*
ज़ेल्डा काहन (1886-1969) एक ब्रिटिश कम्युनिस्ट थीं। उनका जन्म रूस में हुआ था लेकिन बचपन में ही उनका परिवार ब्रिटेन जाकर बस गया था। युवावस्था में ही वह एक सक्रिय समाजवादी बन गयी थीं और कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ़ ग्रेट ब्रिटेन की स्थापना में भूमिका निभायी। एक कम्युनिस्ट कार्यकर्त्ता विलियम पेयटन कोट्स से शादी के बाद उनका नाम ज़ेल्डा काहन-कोट्स हो गया। उन्होंने कम्युनिज्म को लोकप्रिय बनाने और सोवियत संघ के बारे में कई पुस्तकें लिखीं। हमें आशा है कि पाठकों को मार्क्स के जीवन और विचारों से परिचित कराने में यह बहुत उपयोगी सिद्ध होगी।
✍राहुल फ़ाउण्डेशन
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