आज के दौर में बुद्धिजी वियों कीहत्या, उन्हें डराने-धमकाने और प्रैस को पूरी तरह से पा लतू पने में तब्दील करने का
ड रावना संगठित सिलसिला तो शुरू पहले हो ही गया था । बीफ़ और गोरक्षा के नाम पर मुसलमानों को डराने का औ र लव जिहाद केनाम पर मुसलमानों से संपर्क रखने वाले तमाम लोगों को धमकाने का काम भी पुरज़ोर चलने लगा और चल ही रहा है आखिर कब तक ?
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