Wednesday, July 24, 2019

आखिर कब तक ?

आज के दौर में बुद्धिजीवियों कीहत्याउन्हें डराने-धमकाने   और प्रैस को पूरी तरह से पालतू पने  में तब्दील करने का
रावना संगठित सिलसिला तो शुरू पहले हो ही गया था  बीफ़ और गोरक्षा के नाम पर मुसलमानों को डराने का  लव जिहाद केनाम पर मुसलमानों से संपर्क रखने वाले तमाम लोगों को धमकाने का काम भी पुरज़ोर चलने लगा और चल ही रहा है आखिर कब तक ? 

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