Saturday, May 2, 2015

तम्बाकू दिवस 2015

तम्बाकू की हानियां 

कोलकाता: ऐसा माना जाता है की ध्रूमपान आत्महत्या का एक माध्यम है। एक आकलन के अनुसार हर 6 सेकण्ड में एक व्यक्ति की मौत तम्बाकू सेवन से होती है। और ये भी माना जाता है कि जो व्यक्ति तम्बाकू सेवन करते है उनमें से आधे लोग तम्बाकू से होने वाली बीमारी से मर जायेंगे। तम्बाकू उत्पादों जैसे कि सिगरेट पर दिखने वाली चेतावनी महज औपचारिकता रह गई है। और ये लोगों को तम्बाकू सेवन से रोकने में नाकाफी है। आर जी स्टोन यूरोलाजी एण्ड लैप्रोस्कोपी हास्पिटल कोलकाता के चीफ यूरोलॉजिस्‍ट डा. अमितावा मुर्खजी के अनुसार तम्बाकू सेवन लोगों के लिये सबसे बड़ा अभिषाप है। तम्बाकू सेवन दुनिया भर में तकरीबन 6 मिलियन लोगों को मौत के घाट उतार देता है जिसमें 5 मिलियन लोग तम्बाकू के सेवन से व 6 लाख लोग गौण रूप से तम्बाकू के सेवन करने का कारण मौत को गले लगा लेते है। सिगार, सिगरेट, बीड़ी या हुक्का वाले तम्बाकू के धूम्रपान से हानिकारक रसायन मूत्राशय में एकत्र होते है जिससे मूत्राशय के कैंसर की संभावना होती है। धूम्रपान के दौरान हमारा शरीर इन हानिकारक रसायनों को साथ क्रिया करके इन्हें मूत्राशय में जमा कर लेता है जो कि मूत्राशय की नली को नुकसान पहुंचाते हैं और कैंसर की संभावना बढ़ा देते हैं। डा. अमितावा मुर्खजी ने बताया कि मूत्राशय के कैंसर की संभावना उम्र के साथ बढ़ जाती है। ये 40 से कम उम्र के लोगों में आम तौर पर नहीं पाया जाता है। ये तुलनात्मक रूप से पुरूषों में अधिक पाया जाता है। अतिरिक्त कारण जिनकी वजह से मूत्राशय कैंसर के होने की संभावना बढ़ती है वे हैं हानिकारक रसायन जोकि किडनियों से छन कर मूत्राशय तक पहुंच जाते हैं जिनमें कैंसर   बढ़ाने वाली  साइटोक्सान और विकिरण उपचार मुख्य है।
गुर्दे का कैंसर डा. अमितावा मुर्खजी के अनुसार धूम्रपान से धीरे धीरे गुर्दे का कैंसर होने का खतरा बढ़ जाता है। उन्होनें कहा कि धूम्रपान करने से धमनी के अस्तर में बदलाव आ जाता है जिससे जलन के कारण धमनीकलाकाठिन्य की बीमारी हो जाती है और मरीज के खून की आपूर्ति गुर्दों तक ठीक से नहीं हो पाती। 

दिल्ली एवं मुंबई से अधिक युवा मरीज पहले गुर्दें के कैंसर व अन्य गुर्दे की बीमारियों से केवल वृद्ध लोग ग्रसित होते थे लेकिन अब युवा भी इसकी चपेट में आ रहा है। एक अध्ययन के अनुसार दिल्ली में 2.5 प्रतिषत से अधिक एवं मुंबई के 2.3 से अधिक युवा मरीज इन मरीज इन बीमारियों से ग्रस्त हैं। गुर्दे का कैंसर पुरूषों में स्त्रियों की तुलना अधिक पाया जाता है।

युवाओं में बढ़ता स्‍मोकिंग का क्रेज युवाओं में धूमपान के बढ़ते क्रेज को समझते हुये डा. अमितावा मुर्खजी ने पाया कि धूम्रपान करने वालों में कमर हार्निया की बीमारी हो जाती है जिससे उनके पाचन क्रिया पर असर पड़ता है। हार्निया एक ऐसी अवस्था है जिसमें पेट की मांसपेषिया छाती को ओर बढ़ने लगती है।

क्‍या बोलते हैं डा. भीमसेन बंसल आर जी स्टोन यूरोलाजी एण्ड लैप्रोस्कोपी हास्पिटल के चेयरमैन व मैनेजिंग डायरेक्टर डा. भीमसेन बंसल के अनुसार किसी प्रकार का भी तम्बाकू सेवन बीमारी को दावत देता है जिसमें दिल की बीमारी, फेफड़ों के कैंसर, अग्नाषय का कैंसर, किडनी के कैंसर, मूत्राशय के कैंसर की संभावना बढ़ जाती है।
30-70 वर्ष उम्र के पुरुषों की मौत कैंसर से एक विस्तृत अध्ययन की रिपोर्ट के मुताबिक  भारत में 30-70 वर्ष उम्र के पुरुषों में कैंसर से होने वाली 42 प्रतिषत से अधिक मौत तम्बाकू से संबंधित थी जबकि महिलाओं में कैंसर से होने वाली 15 प्रतिषत से अधिक मौत इससे संबंधित थी ।

भारत में तंबाकू का बाजार बढ़ रहा है भारत में तम्बाकू का बाजार विष्व स्तर पर सालाना 8.5 प्रतिषत की दर से बढ़ रहा है और संसद में पेष की गयी एक रिपोर्ट से पता चला है कि कई वर्ष में घरेलू सिगरेट की खपत में 4.5 प्रतिषत की वृद्धि हुई है।
तंबाकू छोड़ने के लिये कैंसर का इंतजार क्‍यों? तंबाकू छोड़ने के उल्लेखनीय परिणाम देखे गये हैं और इसे जल्द से जल्द छोड़ना बेहतर है। एक अध्ययन के अनुसार 50 की उम्र में धूम्रपान को रोकने पर समग्र कैंसर का खतरा आधा हो जाता है जबकि 30 की उम्र में धूम्रपान को रोकने पर इसके सभी खतरों से बचा जा सकता है। वह कहते हैं, ‘‘हमें यह पता है कि हर कोई तंबाकू छोड़ सकता है लेकिन सवाल यह है कि हम इसे छोड़ने के लिए कैंसर का इंतजार क्यों कर रहे हैं।''

अस्तु, तन, मन, धन के साथ बुध्दि का ह्रास करने वाली तम्बाकू को संकल्पपूर्वक त्यागकर मनुष्य को आत्मविश्वास, आत्मबल एवं मानसिक महानताओं की वृध्दि के साथ मधुर एवं मांगलिक जीवन का द्वार खोल लेना चाहिए।

Wednesday, April 29, 2015

मोदी सरकार का विघटनकारी एजेण्डा

Posted: 28 Apr 2015 06:36 AM PDT

इस साल मई में मोदी सरकार अपना एक साल पूरा कर लेगी। गुजरा सालए मुख्यतः, समाज में अलगाव और विघटन पैदा करने वाली राजनीति के नाम रहा। जहां मोदी का चुनाव अभियान विकास पर केंद्रित था वहीं उन्होंने सांप्रदायिक मुद्दे उठाने में भी कोई कोर.कसर बाकी नहीं रखी। बांग्लाभाषी मुसलमानों को बंगलादेशी बताया गया और 'पिंक रेवोल्यूशन'की चर्चा हुई। उद्देश्य था, अपरोक्ष रूप से मुसलमानों का दानवीकरण।
मोदी सरकार की नीतियों में हिंदू राष्ट्रवाद के भाजपाई एजेण्डे का खुलकर प्रकटीकरण हुआ। गणतंत्र दिवस 2015 के अवसर पर सरकार द्वारा जारी विज्ञापन में संविधान की उद्देशिका से 'धर्मनिरपेक्ष' व 'समाजवादी' शब्द गायब थे। केंद्रीय मंत्री सुषमा स्वराज ने हिंदू धर्मग्रंथ 'भगवत गीता'  को राष्ट्रीय पुस्तक का दर्जा देने की मांग की। एक अन्य केंद्रीय मंत्री साध्वी निरंजन ज्योति ने सभी मुसलमानों को हरामजादा बताया तो अल्पसंख्यक मामलों की मंत्री नज़मा हैपतुल्लाह ने फरमाया कि मुसलमान अल्पसंख्यक नहीं हैं क्योंकि देश में उनकी खासी आबादी है। पौराणिक कथाओं को ऐतिहासिक बताया जा रहा है और मुंबई में एक आधुनिक अस्पताल का उद्घाटन करते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि 'प्राचीन भारत में प्लास्टिक सर्जरी होती थी और यहां तक कि मानव शरीर पर जानवरों के सिर के प्रत्यारोपण की तकनीक भी उपलब्ध थी'। इस साल आयोजित इंडियन हिस्ट्री कांग्रेस में ऐसे कई 'शोध प्रबंध' प्रस्तुत किए गए जिनमें इतिहास को फंतासी बना दिया गया।
पिछली एनडीए सरकार के शासनकाल में स्कूली पाठ्यपुस्तकों को सांप्रदायिक रंग दिया गया। ऐसी पुस्तकें पढ़ाई जाने लगीं जिनमें ऐतिहासिक घटनाओं का प्रस्तुतिकरण केवल और केवल धार्मिक व सांप्रदायिक दृष्टिकोण से किया गया था। अब एक बार फिर, शिक्षा के भगवाकरण की बात कही जा रही है। देश की शीर्ष अनुसंधान संस्थाओं में आरएसएस.हिंदू राष्ट्रवाद की विचारधारा से जुड़े लोगों की नियुक्तियां हो रही हैं। भारतीय इतिहास अनुसंधान परिषद ;आईसीएचआर के अध्यक्ष पद पर प्रोफेसर सुदर्शन राव की नियुक्ति इसी का उदाहरण है। प्रोफेसर राव की अकादमिक क्षेत्र में कोई उपलब्धि नहीं है। उनका लेखन केवल कुछ ब्लागों तक सीमित है और वे जातिप्रथा को न्यायपूर्ण व उचित ठहराते हैं। उनका कहना है कि जातिप्रथा से किसी को कभी कोई शिकायत नहीं रही। वे पौराणिक कथाओं को इतिहास के रूप में प्रस्तुत करना चाहते हैं। जाहिर है कि यह वैज्ञानिक सोच और तार्किकता पर प्रहार होगा। हमारे संविधान में वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा देने की जिम्मेदारी सरकार को सौंपी गई है परंतु अनुसंधान व शिक्षण के क्षेत्रों में वैज्ञानिक सोच का मखौल बनाया जा रहा है और अंधविश्वासों व अंधश्रद्धा को बढ़ावा दिया जा रहा है।
विचारधारा के स्तर पर भाजपा नेता और सांसद इस तरह की बातें कह रहे हैं जो भारतीय राष्ट्रवाद के सिद्धांतों और मूल्यों के खिलाफ हैं। भाजपा सांसद साक्षी महाराज ने नाथूराम गोडसे को देशभक्त बताया और केरल के एक भाजपा नेता ने कहा कि गोडसे ने जो कुछ किया वह ठीक था परंतु उसे गांधीजी की बजाए नेहरू की हत्या करनी थी। हिंदू राष्ट्रवादी संगठनए गोडसे की मूर्तियां स्थापित करने का प्रयास कर रहे हैं। सोनिया गांधी के संबंध में गिरिराज सिंह की नस्लीय टिप्पणी निहायत कुत्सित व घिनौनी थी। इसके पहले किसी मंत्री ने यह कहा था कि जो लोग मोदी को वोट देना नहीं चाहते उन्हें पाकिस्तान चले जाना चाहिए।
धार्मिक अल्पसंख्यकों के खिलाफ घृणा फैलाने वाली बातें लगातार कही जा रही हैं। पुणे में बाल ठाकरे के कुछ कार्टूननुमा चित्र सोशल मीडिया पर अपलोड किए जाने के बाद, हिंदू जागरण सेना के कार्यकर्ताओं ने मोहसिन शेख नाम के एक युवक, जो किसी आईटी कंपनी में काम करता था,को सड़क पर पीट.पीटकर मार डाला। साध्वी प्राची और साक्षी महाराज हिंदू महिलाओं को यह सलाह दे रहे हैं कि वे ज्यादा से ज्यादा बच्चे पैदा करें। योगी आदित्यनाथ का कहना है कि धार्मिक अल्पसंख्यकों को हिंदुओं के पवित्र स्थलों पर नहीं जाना चाहिए। जब सानिया मिर्जा को आंध्रप्रदेश का ब्रांड एंबेसेडर नियुक्त किया गया तब कई भाजपा नेताओं ने इसका यह कहकर विरोध किया कि वे पाकिस्तान की बहू हैं। भाजपा के सुब्रमण्यम स्वामी ने कहा कि चर्चों और मस्जिदों को ढहाया जा सकता है। भाजपा से जुड़ी शिवसेना के संजय राऊत ने मांग की कि मुसलमानों को मताधिकार से वंचित किया जाना चाहिए।
हम सब को याद है कि दिल्ली में भाजपा की सरकार बनने से पहले भी भाजपा और उससे जुड़े संगठन लवजिहाद और घरवापसी जैसे मुद्दों को लेकर समाज में सांप्रदायिकता का जहर घोल रहे थे। ये मुद्दे गुजरे वर्ष भी छाये रहे। दिल्ली,मुंबई के पास पनवेल व हरियाणा सहित देशभर के कई स्थानों पर चर्चों पर हमले हुए और इन हमलों के दोषियों को पकड़ने के लिए सरकार व पुलिस ने समुचित कार्यवाही नहीं की।
पिछले वर्ष देशभर में सांप्रदायिक हिंसा की घटनाओं में भी तेजी से वृद्धि हुई। हां, एक फर्क जरूर था और वह यह कि हिंसा अब छोटे पैमाने पर की जाती है। कहीं एक दुकान जला दी जाती है तो कहीं किसी आराधना स्थल पर पत्थरबाजी होती है। इसके बाद हिंसा भड़कती है जिसके नतीजे में विभिन्न धार्मिक समुदायों के बीच अलगाव बढ़ता है। धार्मिक आधार पर समाज का विभाजन, असहनीय स्तर तक बढ़ चुका है। धार्मिक स्थलों पर हमले और अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसाए हमारे संविधान में निहित स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व के मूल्यों की नींव को कमजोर कर रहे हैं। अल्पसंख्यक समुदाय के कई प्रतिष्ठित व्यक्तियों ने अपने क्षोभ व दुःख को स्वर देते हुए कहा है कि उन्हें ऐसा लगने लगा है मानो वे इस देश के नागरिक ही नहीं हैं।
जब भी कोई गैर.जिम्मेदाराना व घृणा फैलाने वाली बात किसी व्यक्ति द्वारा कही जाती है तो भाजपा प्रवक्ता यह कहकर उससे पल्ला झाड़ लेते हैं कि जो कुछ भी कहा गया हैए वे संबंधित व्यक्ति के व्यक्तिगत विचार हैं। इसके अतिरिक्त, भाजपा यह दावा भी करती है कि विहिप,वनवासी कल्याण आश्रमए बजरंगदल आदि स्वतंत्र संगठन हैं जिनपर उसका कोई नियंत्रण नहीं है और ना ही उनके नेताओं द्वारा कही जाने वाली बातों के लिए वह जिम्मेदार है। जबकि सच यह है कि भाजपा और इन सभी संगठनों पर आरएसएस का पूर्ण नियंत्रण है और ये संघ परिवार के सदस्य हैं। ये सभी संगठन भाजपा के साथ मिलकर,हिंदू राष्ट्र के एजेण्डे को साकार करने के लिए सुनियोजित व समन्वित प्रयास कर रहे हैं। यह मात्र संयोग नहीं है कि ये सभी संगठन, जो तथाकथित रूप से 'स्वतंत्र'  हैं एक.सी बातें और एक.सी हरकतें कर रहे हैं। कई लोगों का यह कहना है कि ये संगठन कुछ अतिवादियों के समूह भर हैं। परंतु तथ्य यह है कि संघ परिवार ने सबको अलग.अलग जिम्मेदारी सौंपी हुई है और वे संघ के निर्देशन में ही काम कर रहे हैं। यह इस बात से भी जाहिर है कि भाजपा के सत्ता में आने के बाद से ये संगठन अत्यंत आक्रामक हो उठे हैं।
भाजपा, भारतीय राष्ट्रवादी विभूतियों, जिन्होंने साम्राज्यवाद.विरोधी संघर्ष में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और भारतीय राष्ट्र के विकास के लिए कार्य किया, को अपना बताने की कोशिश में जुटी हुई है। आरएसएस का कहना है कि महात्मा गांधी संघ से बहुत प्रभावित थे। संघ का यह दावा भी है कि अंबेडकर और आरएसएस के विचार एक से थे। ये झूठ सुनियोजित ढंग से व जानते.बूझते हुए मीडिया में 'प्लांट' किए जा रहे हैं क्योंकि आरएसएस के किसी नेता ने स्वाधीनता संग्राम में कभी कोई हिस्सेदारी नहीं की। यह प्रचार भारतीय राष्ट्र की मूल अवधारणा को कमजोर करने का प्रयास है। महात्मा गांधी को केवल स्वच्छता अभियान के प्रतीक के रूप में प्रचारित किया जा रहा है और हिंदू.मुस्लिम एकता के लिए उनके संघर्ष को नजरअंदाज किया जा रहा है। हम केवल आशा कर सकते हैं कि मोदी सरकार, हिंदू राष्ट्र के अपने एजेण्डे को त्याग कर,भारतीय संविधान में निहित मूल्यों को मजबूती देने का प्रयास करेगी। सत्ता पर काबिज लोगों को यह याद रखना चाहिए कि देश को बांटने के भयावह परिणाम हो सकते हैं।
-राम पुनियानी
 

Monday, January 5, 2015

सच

आज क्या हो रहा बिलकुल समझ नहीं पा रहा
एक कुछ कहता दूसरा कुछ कहता हुआ आ रहा
सच का साथ देने को यहाँ पे सब कहते हैं यारो
सच क्या है इस पे  हरेक अपनी ढपली बजा रहा
कहानी को माइथोलॉजी को इतिहास बताने वालो 
इतिहास और वैज्ञानिक नजर से सच  ढूँढा जा रहा

Mahila

दुनिया की जनसंख्या में महिलाओं का 50 % के लगभग योगदान है और दुनिया का 60 % काम महिलाएं करती हैं मगर उनको इसका 10 % मिलता है (न्यू इंडियन एक्सप्रेस ,11 सितम्बर 2012 )

शीत लहर

शीत लहर चल रही नहीं थमीं यारो 
रात की ठंड  मेरे चेहरे पे जमीं यारो 
कुछ ठूंठ खड़े हैं कहीं कहीं मेरे जैसे 
कुछ उखड़े पड़े हैं कहीं तुम्हारे जैसे 
हम सब बेचें हैं इसके थपेड़े  खाकर 
तुम बैठ गये अपने महलों में जाकर  
यह ठण्ड आज किसे साल रही देखो  
झोंपड़ी इधर उधर उछाल रही देखो 

मुख्य मंत्री बणन का नुस्खा

मुख्य मंत्री बणन का नुस्खा 
एक  बै दो मंत्री चर्चा करण लागरे थे अक चीफ  मिनिस्टर क्यूकर बनया जा ? पहला बोल्या - इस बात का डां  ना ठा वै |भीतां कै भी कान होंसैं | जै मुख्य मंत्री नै बेरा लागग्या  तो या झंडी आली कार बी जांदी रेहगी | दूसरा बोल्या - मुख्य मंत्री नै क्यूकर बेरा लागैगा? पहला बोल्या -के बेरा इस साइंस का? जिब रिमोट कंट्रोल तैं माणस मारया जा सकै तो रिमोट कंट्रोल तैं म्हारी बात क्यूं नहीं सुनी जा सकदी ? दूसरा बोल्या - बात तो सही सै पर के सारे हरयाणा मैं रिमोट कंट्रोल फिट कर राखे होंगे ? अपां इन्द्री के रेस्ट हॉउस मैं चाल कै बात करांगे| पहला बोल्या --जै म्हारी कारों मैं ए  किमै फिट कर राख्या होगा तो के करांगे ? दूसरा बोल्या - सारा सरकारी स्टाफ छोड़ दयां सां अर कार बी छोड़ दयांगे फेर म्हारी बात क्यूकर लीक होज्यगी ? अर आपां लोटे नून गेरल्याँ सां अक इन बातां का किसे तीसरे माणस आ गै  जिकरा नहीं करांगे |
पहलया बोल्या - फेर सिक्योर्टी का मामला आ ज्यागा | दोनूं बहोतै घने लाचार हुए | पेट पा टटन   नै  होरया अर बात नहीं कर सकदे | आछे साके  होए  | करैं तो के करैं ? माहौल गरमा रया सै बेरा ना कद मांह कै कोए दा मार ज्यागा अर या चीफ मिनिस्टर शिप फेर कानों के धोरे कै लिकड़ ज्यागी | दोनों कोठी के बाहरले बगड़ मैं आगे | उसतैं पहलम अपने सारे लत्ते बी बदले | सोच्ची कदे लत्याँ मैं किमें ना धर राख्या हो | बगड़ मैं भी देख्या कोए ट्रांसमीटर तो फिट नहीं कर राख्या सै | पहला मंत्री बोल्या- एक बै मुख्य मंत्री रंगीले मूड मैं बैठ्या था| म नै बख्त बिचार कै बूझ लिया - साहब जी के कारण सै अक धरती चाहे न्यून तैं न्यून होज्या फेर मुख्य मंत्री आ पै बनो सो ? लोग नयों कह वें सें अक  इबकै थारा पत्ता कटन आला सै | म नै तो दो करोड़ की शर्त ला ली अक म्हारे मुख्य मंत्री जी का पत्ता कोनी कट सकदा | फेर के था साहब तो फ़ैल ग्या अर मेरे ताहीं सारे दां पेच  समझावन लाग्या| नयों बोल्या अक ये बाल घाम मैं ओंये थोड़े धोले कर राखे सें | एक खास नुस्खा त्यार करया सै जिसका पेटेंट बस मेरे धोरै सै  ज्याहें कर कै ह़िर फिर कै मैं ए चीफ मिनिस्टर बनूँ सूँ | हो सकै सै इस्ते   बढ़िया नुस्खे आला मेरै बी धोबी पिछाड मार सकै सै | झोंक झोंक मैं बताग्या पूरा नुस्खा | मैं तो अपने दिल पै लिखदा चाल्या गया | फेर उसकी समझ मैं आई अक हो तो गलती गयी अर मेरे पाँ पकड़ कै नयों बोल्या -- लाग दार  मेरे जीवतें जी इस नुस्खे नै अजमा कै मतना देखिये | म नै भी सैड दे सी राम की सूँ खाई अक आपके रैह्नते किस की मजाल जो मुख्य मंत्री बणन की सोच्चै| फेर भाई म नै इब यो नुस्खा अजमा कै जरूर देखना सै | पहला मंत्री एकै साँस मैं इतनी बात कह ग्या |
दूसरा मंत्री बोल्या -- तों साठ तैं ऊपर जा लिया अर मेरी तो इ बै   चालीस बरस की ए उम्र सै | मैं तो इ बै  सबर कर ल्यूँगा फेर ओ  नुस्खा तो बता कितै कोए उक चूक होगी तो नुस्खा तेरी ए गेल्याँ दफ़न हो ज्यागा | मुख्य मंत्री तो तोंये बनिए फेर एक आध साथी भी तो चाहियेगा | पहला मंत्री बोल्या -- तनै बता कै मैं अपने पाहयाँ  पै कुलहाड़ी  क्यूं मारूं ? दूसरा बोल्या -- जै तेरै इब हार्ट अटैक होज्या तो गया ना नुस्खा तेरी गेल्याँ | तेरे बालकों नै धरती भिड़ी हो ज्यागी | मैं तो तेरा आगे का राह बांधूं  था | पहला मंत्री नुस्खा बता वन लाग्या ---दस तोले सही सही तोल कै चोर बाजारी के बीज होने चाहियें | पाँच तोले खुद  गरजी की जड़ हों |छः तोले रिश्वत खोरी के पत्ते हों | तीस तोले कोरी गप शप  हों | इन सब नै मोम जस्ते मैं गेर कै खूब बारीक करकै अर इसमें पाँच तोले दगा की भस्म मिला दी जा | इस  तरियां यो कुल छप्पन तोले माल बनगया| चार तोले की एक पुडिया बाना कै त्यार करली जा|  पाँच तोले बुजदिली , चार तोले  फूल खुसामद , तीन तोले मक्कारी , दो तोले बेकूफी  के पत्ते कूट कर कै , कपड छान कर कै  पार्टी बाज़ी के पानी मैं  तीन मिहने भिगोयी  जा वें अर फेर आछी ढाल  इसकी चटनी बनाई जा | या चटनी बानगी चौदा तोले | 
पन्दरा तोले अंधेर गर्दी की ख़ाल हो पर निखालिस हिन्दुस्तानी हो , ५० तोले छान कै , लूट के  पानी मैं काढ़ा ले कै पुडिया अर चटनी मिला कै  इनकी दो दो तोले की गोली बना ली जा वें | बस दवाई त्यार सै |
इसके सेवन का तरीका बी खास सै अर अपने ढंग का सै | यो बी याद राखना बहोत जरूरी सै | इन गोलियां का इस्तेमाल छब्बीस जनवरी , पन्दरा अगस्त नै तो करया ए करया जा | दूसरा बोल्या-- गोली गरम पानी गेल्याँ खानी अक सीले पानी की गेल्याँ ? पहला बोल्या - इतना अधीर क्यों हो सै | ठगी का पाईया शरबत ले कै अर सबकी आंख बचा कै दो गोली खानी  पड़ेंगी | दूसरा बोल्या - नुस्खा तो सै बढ़िया पर अष्टा बी बहोत लागे सै | पहला बोल्या - अष्टा क्यूकर ? ये सारी चीज तो थोक मैं मिलैं सें बस रोल्ला तो इनके अनुपात का सै | दूसरा बोल्या - इनके खाए तैं बेडा पार हो ज्यागा ? पहला बोल्या - अधम बीचालै मतना टोकै | सेवन विधि पूरी हो लेनदे | बीच मैं भूलगया तो नाश हो ज्यागा | दूसरा चुप हो कै पहले की बात और बी ध्यान तैं सुनन लाग ग्या |सेवन करण खातर राज घाट पै जाना होगा अर मौसम देख कै एक की समाधी पै माथा टेकना पडेगा | उस समाधी के सो चक्कर काट कै मन -मन मैं दिल्ली की कुर्सी पै बैठे माणस की जै सात बरियाँ बोलनी पडैगी | गोली खा कै प्रेम मैं सिर झुकाना पड़ेगा| दूसरा बोल्या - इब मेरै पक्की जन्चगी तों मुख्य मंत्री जरूर बनैगा |  कति मुंह जुबानी घोट रया सै नुस्खे नैं |मेरे तो आछी तरियां  याद बी कोन्या हुया | मनै लिखवा दे | पहला बोल्या - इबै  नहीं लिखवाऊँगा मुख्य मंत्री बने पाछै |